OnePlus Dismantled: स्मार्टफोन दुनिया में कभी फ्लैगशिप किलर कहलाने वाला वनप्लस आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसके अस्तित्व पर ही सवाल उठ रहे हैं. नयी रिपोर्ट्स कहती हैं कि ओप्पो धीरे-धीरे वनप्लस को समेट रही है. शिपमेंट घटे हैं, मार्केट शेयर गिरा है और कई प्रोडक्ट्स कैंसिल कर दिये गए हैं. लेकिन कंपनी का कहना है- सब कुछ नॉर्मल है. तो आखिर सच्चाई क्या है?
I wanted to address some misinformation that has been circulating about OnePlus India and its operations.
We’re operating as usual and will continue to do so.
Never Settle. pic.twitter.com/eAGA7iy3Xs— Robin Liu (@RobinLiuOnePlus) January 21, 2026
वनप्लस की फीकी होती चमक
2014 में वनप्लस वन के साथ शुरू हुई कहानी ने टेक दुनिया में तहलका मचा दिया था.”नेवरसेट्ल” का स्लोगन और फैन-बेस्ड मार्केटिंग ने इसे खास बनाया. लेकिन 2024 में कंपनी की ग्लोबल शिपमेंट्स 20% से ज्यादा गिर गईं. 17 मिलियन से घटकर सिर्फ 13-14 मिलियन यूनिट्स ही बिके.
इंडिया और चाइना में सबसे बड़ा झटका
हिंदुस्तान और चीन, जहां से वनप्लस की तीन-चौथाई बिक्री होती थी, वहीं सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. IDC के आंकड़े बताते हैं कि हिंदुस्तान में वनप्लस का मार्केट शेयर 32% से गिरकर सिर्फ 3.9% रह गया. 4,500 से ज्यादा स्टोर्स बंद हो गए और कई राज्यों ने वनप्लस बेचना ही छोड़ दिया. चीन में भी मार्केट शेयर 2% से घटकर 1.6% हो गया.
क्या ओप्पो की कंपनी है वनप्लस?
हां, वनप्लस ओप्पो इलेक्ट्रॉनिक्स की कंपनी है, जो खुद एक बड़ी चीनी कंपनी BBK इलेक्ट्रॉनिक्स की सब्सिडियरी है, जिससे वे वीवो और रियलमी के साथ सिस्टर ब्रांड बन जाते हैं. हालांकि वनप्लस अपनी अलग पहचान और फाउंडर्स (जो ओप्पो से आये थे) के साथ एक अलग ब्रांड के तौर पर काम करता है, लेकिन वे ओप्पो के साथ कई रिसोर्स, सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग शेयर करते हैं, और ओप्पो की वनप्लस में बड़ी हिस्सेदारी है. यही वजह है कि ओप्पो का वनप्लस पर बड़ा कंट्रोल है, जबकि बाहर से यह एक स्वतंत्र ब्रांड की तरह दिखता है.
ओप्पो का कंट्रोल और कैंसेल्ड प्रोडक्ट्स
रिपोर्ट्स कहती हैं कि अब फैसले रीजनल टीम्स नहीं लेतीं, सब कुछ सीधे चीन से तय होता है.वनप्लस ओपन 2 फोल्डेबल और वनप्लस 15s जैसे बड़े लॉन्च कैंसिल कर दिये गए. इससे साफ है कि कंपनी की प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी पर ब्रेक लग चुका है.
यूरोप और अमेरिका में कटौती
न सिर्फ एशिया, बल्कि यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में भी वनप्लस की मौजूदगी घटाई जा रही है. कई टीम्स को छोटा कर दिया गया है और ऑपरेशंस सीमित कर दिए गए हैं. रिपोर्ट्स इसे “ब्रांड ऑन द वर्ज ऑफ कोलैप्स” कह रही हैं.
वनप्लस यूजर्स का क्या होगा?
ओप्पो ने वादा किया है कि मौजूदा वनप्लस यूजर्स को सिक्योरिटी अपडेट्स और वारंटी सपोर्ट मिलता रहेगा. लेकिन सवाल ये है कि जब मौजूदा मॉडल्स का सपोर्ट खत्म होगा, तो क्या वनप्लस का नाम भी खत्म हो जाएगा?
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