Bokaro: सीसीएल पिपरवार क्षेत्र के राजधर साइडिंग में गुरुवार रात अज्ञात अपराधियों ने हमला कर एक पेलोडर मशीन व उसके ऑपरेटर जितेंद्र कुमार को निशाना बनाने की कोशिश की. अपराधियों ने ऑपरेटर को लक्ष्य कर सात फायर किये और पेट्रोल छिड़क कर पेलोडर मशीन में आग लगाने की कोशिश की. हालांकि, पोस्ट पर तैनात सीआईएसएफ के जवानों की जवाबी फायरिंग से अपराधी भाग गये. अपराधियों की गोली से ऑपरेटर बाल-बाल बच गया. लोगों ने पेलोडर मशीन में लगी आग पर तुरंत काबू पा लिया. रात्रि 10:15 बजे हुई घटना की सूचना सीआईएसएफ के कंपनी कमांडर जयराम सिंह ने पिपरवार पुलिस को दी.
सूचना मिलते ही टंडवा एसडीपीओ प्रभात रंजन बरवार, थाना प्रभारी अभय कुमार भारी बल के साथ साइडिंग पहुंचे. पुलिस ने अपराधियों की धर पकड़ को लेकर काफी देर तक राजधर व बहेरा गांव के आसपास के जंगलों में सर्च अभियान चलाया. पुलिस ने घटनास्थल से छह खोखे बरामद किये हैं.
10-15 संदिग्धों से पूछताछ
टंडवा के एसडीपीओ प्रभात रंजन ने कहा कि पुलिस ने बड़े पैमाने पर सर्च अभियान चलाया है. अब तक अपराधियों की पहचान नहीं हो पायी है. पुलिस 10-15 संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर उनकी पहचान करने की कोशिश कर रही है. घटना में उग्रवादियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है. लेकिन पेटी क्रिमिनल्स पर शक ज्यादा है.
केबिन में बैठ कर ऑपरेटर ने बचायी जान
राजधर साइडिंग में फायरिंग मामले में ऑपरेटर ने बताया कि वह साइडिंग में रैक लोड कर रहा था. इसी दौरान मंकी टोपी पहने कुछ लोग मेरी मशीन के पास पहुंच कर मुझ पर छह-सात फायर कर दिये. मैंने किसी तरह नीचे बैठ कर अपनी जान बचायी. बाद में उन्होंने मुझे केबिन से उतार कर पेट्रोल छिड़क कर पेलोडर में आग लगा दी. इसी दौरान सामने से एक डंपर आ गया. तभी सामने पोस्ट से सीआइएसएफ के जवान भी फायरिंग करने लगे. अपराधियों का ध्यान बंटते ही वह वहां से किसी तरह भागने में सफल रहा.
राजधर गांव की पगडंडियों से आये अपराधी
सीआइएसफ के जवानों ने बताया कि साइडिंग में बाउंड्री नहीं होने की वजह से अपराधियों ने लाभ उठाया. वे तालाब होते हुए सीधे साइडिंग पहुंचे. साइडिंग में अंधेरा होने की वजह से पोस्ट से जवानों की अपराधियों पर नजर नहीं पड़ी. बताया कि पोस्ट पर तैनात जवान ने समय रहते जवाबी फायरिंग की. जिससे साइडिंग में बड़ा हादसा टल गया. अपराधियों के भागते ही पेलोडर में लगी आग को तुरंत बुझा लिया. जवानों ने कहा कि साइडिंग की सुरक्षा के लिए पर्याप्त रोशनी व बाउंड्री की जरूरत है.
साइडिंग में हमले की यह दूसरी घटना
राजधर साइडिंग का निर्माण 2017 में हुआ था. तभी से अपराधियों की नजर साइडिंग पर है. सात-आठ वर्ष पूर्व भी एक उग्रवादी संगठन ने साइडिंग में हमला कर दो मशीनों को जला दिया था. अपराधियों की फायरिंग ने एक बार पुन: कोयला व्यवसायियों और ठेका कार्य से जुड़े लोगों में दहशत व्याप्त है.
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