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सूखे नशे के कारोबार को लेकर प्रशासन सख्त, दवा दुकानों पर छापेमारी जारी

– जनवरी में छह दवा दुकानों पर की गयी छापेमारी सुपौल. जिले में तेजी से फैलते सूखे नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कमर कस ली है. युवाओं और समाज को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के उद्देश्य से जिलाधिकारी के निर्देश पर औषधि नियंत्रण प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है. इस सख्ती का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है. जिले भर के दवा दुकानदारों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है. प्रशासन ने चेतावनी दे दी है कि नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पिछले कुछ वर्षों में जिले में सूखे नशे की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है. नशीली गोलियां, सिरप और अन्य प्रतिबंधित दवाओं का गलत इस्तेमाल खासकर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ा है. इसका सीधा असर न सिर्फ स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंच रहा है. बढ़ते अपराध, पारिवारिक कलह और मानसिक समस्याओं के पीछे नशे की भूमिका को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करने का निर्णय लिया है. प्रशासन का दो टूक संदेश नियमों से समझौता नहीं जिलाधिकारी के निर्देश पर चल रहे इस विशेष अभियान में औषधि नियंत्रण विभाग दवा दुकानों की जांच कर रही है. प्रशासन का साफ संदेश है कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने, बिना वैध पर्ची के नशीली दवाएं बेचने या संदिग्ध लेन-देन में शामिल दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. चाहे वह लाइसेंस निलंबन हो या कानूनी कार्रवाई, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. जिले में दवा दुकानों की स्थिति जिले में कुल 1969 दवा दुकानों को लाइसेंस निर्गत किए गए हैं. इनमें विभिन्न श्रेणियों की दुकानें शामिल हैं. 1097 होलसेल दवा दुकानें, 453 रिटेल दवा दुकानें, 384 प्रतिबंधित श्रेणी की दुकानें, 03 होलसेल एवं रिटेल संयुक्त दुकानें, 01 होम्योपैथिक होलसेल दुकान, 12 होम्योपैथिक रिटेल दुकानें, 19 होम्योपैथिक होलसेल एवं रिटेल दुकानें है. उन्होंने बताया कि सभी लाइसेंसधारी दुकानों को प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है. दवाओं की खरीद-बिक्री, स्टॉक रजिस्टर का संधारण, चिकित्सकीय पर्ची की अनिवार्यता और प्रतिबंधित दवाओं के भंडारण को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है. जनवरी माह में छापेमारी, अनियमितताओं का खुलासा एडिशनल ड्रग्स कंट्रोलर राजेश कुमार ने बताया कि जनवरी माह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 06 दवा दुकानों पर छापेमारी की गई. जांच के दौरान 05 दवा दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई. इन दुकानों में नियमों का उल्लंघन, दस्तावेजों की कमी और दवाओं के रख-रखाव में लापरवाही सामने आई. बताया कि सभी संबंधित दवा दुकानदारों से शो-कॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. अब तक एक दवा दुकानदार ने शो-कॉज का जवाब दिया है, लेकिन वह संतोषजनक नहीं पाया गया. इसके बाद उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. वहीं, शेष दुकानदारों का जवाब अभी आना बाकी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. कहा कि लाइसेंसधारी दवा दुकानों की नियमित जांच आगे भी जारी रहेगी. किसी भी दुकान पर बिना पर्ची के प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री, स्टॉक में गड़बड़ी या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर तत्काल सख्त कदम उठाए जाएंगे. जरूरत पड़ने पर दुकानों का लाइसेंस रद्द करने की भी कार्रवाई की जाएगी. सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील एडिशनल ड्रग्स कंट्रोलर राजेश कुमार ने दवा दुकानदारों से अपील की है कि वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझें और नियमों का पूरी तरह पालन करें. दवाएं जीवन बचाने के लिए होती है. उन्होंने कहा कि यदि कोई दुकानदार नशे से जुड़ी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने ने आम जनता से भी इस अभियान में सहयोग की अपील की है. यदि कहीं अवैध रूप से नशीली दवाओं की बिक्री या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या पुलिस को देने की बात कही. कहा कि जनता की सक्रिय भागीदारी से ही इस सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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