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क्या रेल का सफर होगा और भी ‘स्मूथ’? निर्मला सीतारमण बढ़ा सकती हैं रेलवे का बजट!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना 9वां बजट पेश करने जा रही हैं. सुबह 11 बजे जब वे अपनी स्पीच शुरू करेंगी, तो पूरे देश की नजरें हिंदुस्तानीय रेलवे पर टिकी होंगी. माना जा रहा है कि इस बार रेलवे की तस्वीर बदलने के लिए प्रशासन अपना खजाना खोलने वाली है. ब्लूमबर्ग के 29 इकोनॉमिस्ट्स के सर्वे के मुताबिक, प्रशासन इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट्स और खासकर रेलवे पर भारी निवेश कर सकती है.

बजट में 10% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद 

मिंट की एक रिपोर्ट बताती है कि इस साल रेलवे के खर्च (Capex) में 8% से 10% का इजाफा हो सकता है. आसान भाषा में कहें तो नई पटरियां बिछाने और नई ट्रेनें चलाने के लिए पिछले साल (2.52 लाख करोड़) के मुकाबले इस बार करीब 2.75 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं. इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को होगा जो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं.

सीनियर सिटीजन की ‘टिकट छूट’ पर सस्पेंस

रेलवे यात्रियों की सबसे बड़ी डिमांड सीनियर सिटीजन को मिलने वाली छूट को वापस शुरू करना है. कोविड के समय इसे बंद कर दिया गया था. पहले 60 साल से ऊपर के पुरुषों को 40% और 58 साल से ऊपर की स्त्रीओं को 50% की छूट मिलती थी. ट्रेनें अब फुल कैपेसिटी में चल रही हैं, इसलिए उम्मीद है कि इस बार बुजुर्गों को ये खुशसमाचारी मिल सकती है.

हादसों को रोकने के लिए ‘कवच 4.0’ पर जोर

पिछले कुछ समय में हुए रेल हादसों को देखते हुए सुरक्षा पर सबसे ज्यादा फोकस रहने वाला है. बजाज ब्रोकिंग के एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट में रेलवे सेफ्टी के लिए 1.3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड दिया जा सकता है.

  • क्या है कवच 4.0? यह हिंदुस्तान का अपना ऑटोमैटिक सिस्टम है. अगर लोको पायलट ब्रेक नहीं लगा पाता, तो यह सिस्टम खुद ही ट्रेन रोक देता है.
  • प्लान: प्रशासन का लक्ष्य 18,000 किमी ट्रैक पर इसे जल्द से जल्द लगाने का है. 30 जनवरी को ही इसके नए वर्जन का सफल ट्रायल हुआ है.

वंदे हिंदुस्तान स्लीपर और पुराने स्टेशनों का कायाकल्प

वंदे हिंदुस्तान के शौकीनों के लिए समाचार है कि अब 24 कोच वाली ‘वंदे हिंदुस्तान स्लीपर’ ट्रेनों का प्रोडक्शन तेज होगा. ये ट्रेनें राजधानी एक्सप्रेस की जगह लेंगी और लंबी दूरी के सफर को आरामदायक बनाएंगी. इसका प्रोटोटाइप 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है. साथ ही, पुराने स्टेशनों को मॉडर्न बनाने और रुके हुए प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने का भी बड़ा ऐलान हो सकता है.

आम आदमी के लिए 17,000 नए जनरल कोच

भीड़ कम करने के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले ही बताया था कि ट्रेनों में 70% कोच नॉन-एसी (जनरल और स्लीपर) हैं. इस बजट में अगले 5 सालों में 17,000 नए नॉन-एसी कोच बनाने के प्लान को ऑफिशियल किया जा सकता है, ताकि कम पैसों में सफर करने वालों को दिक्कत न हो.

सस्ता होगा सामान, बढ़ेंगे रोजगार 

डीपी वर्ल्ड के एमडी रिजवान सूमर के मुताबिक, अगर प्रशासन मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर (Freight Corridors) और लॉजिस्टिक्स हब पर पैसा खर्च करती है, तो सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाना सस्ता हो जाएगा. इससे चीजों के दाम कम होंगे, नए जॉब्स मिलेंगे और देश की जीडीपी (इकॉनमी) को भी बूस्ट मिलेगा.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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