Budget 2026 Defence in Focus Shares to look for: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज रविवार (1 फरवरी) को अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी. यह बजट प्रस्तुति ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली होगी. ऐसे में हिंदुस्तान के बजट 2026 में डिफेंस के लिए एक अहम बदलाव देखने को मिल सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रक्षा बजट पूंजीगत व्यय को गति दे सकती हैं. अतिरिक्त धनराशि को घरेलू खरीद और आधुनिकीकरण केंद्रित कार्यक्रमों की ओर मोड़ा जा सकता है. हाल ही में फिक्की (FICCI) के एक मंच पर रक्षा सचिव ने संकेत दिया कि रक्षा मंत्रालय (MoD) FY27 के लिए पूंजी अधिग्रहण बजट में लगभग 20% बढ़ोतरी की मांग कर रहा है. इसे अब तक की सबसे बड़ी एक साल की छलांग बताया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से घरेलू खरीद को प्राथमिकता देने की बात कही गई.
रक्षा मंत्रालय ने घरेलू खरीद की दिशा में ठोस कदम भी उठाए हैं. चालू वर्ष में घरेलू खरीद का 65–70% से अधिक हिस्सा डीपीएसयू (DPSUs) और निजी कंपनियों से आ रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है. संसदीय समीक्षा में यह सामने आया कि कमिटेड देनदारी (पहले से साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स के भुगतान, जो हर साल पहले किए जाते हैं) और नई योजनाएं (वे प्रोजेक्ट जो उसी वर्ष स्वीकृत और अनुबंधित होने वाले हैं), दोनों का भुगतान कैपिटल एक्विजिशन (Modernisation) मद से ही होता है.
अगर कमिटेड देनदारियां अधिक हों, तो वे नई परियोजनाओं कम हो सकती हैं, भले ही बजट बढ़ रहा हो. लेकिन यदि पूंजीगत बजट में वास्तविक वृद्धि होती है, तो मंत्रालय एक साथ पुराने भुगतान भी कर सकता है और नई परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ा सकता है. पिछले 2-4 वर्षों में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या को देखते हुए यह संकेत मिलता है कि पूंजीगत व्यय बढ़ता रहेगा और यही आधुनिकीकरण का प्रमुख साधन बनेगा.
पिछले साल कितना बजट अलोकेट किया गया था?
रक्षा विशेषज्ञों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सीतारमण रक्षा बजट में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करेंगी. 2025-26 के बजट में रक्षा मंत्रालय को ₹6.81 लाख करोड़ आवंटित किए गए, जो 2024-25 के बजटीय अनुमान से 9.5% अधिक था. यह कुल केंद्रीय बजट का लगभग 13.5% था. यानी सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक. 1 जनवरी 2026 को प्रशासन ने बताया कि 2025-26 वित्त वर्ष में दिसंबर तक सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए ₹1.82 लाख करोड़ के पूंजीगत अनुबंध किए गए.
जीडीपी का केवल 1.9% ही डिफेंस को, खर्च कहां हुआ?
हालांकि 2025-26 में रक्षा के लिए रिकॉर्ड आवंटन किया गया, लेकिन यह जीडीपी का केवल 1.9% था. 2020-21 में यह 2.1% था. कई विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए हिंदुस्तान को रक्षा पर जीडीपी का 3-4% खर्च करना चाहिए. संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने भी 3% खर्च का सुझाव दिया है. वर्तमान में रक्षा बजट का 46% वेतन और संचालन पर, 24% पेंशन पर और केवल 26% आधुनिकीकरण पर खर्च होता है.
बजट 2026: फोकस में रक्षा शेयर
अगर हिंदुस्तान प्रशासन डिफेंस स्पेंडिंग बढ़ाती है, तो डिफेंस क्षेत्र के शेयरों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है. इसमें कई कंपनियां हैं, जिन पर आप नजर बनाए रख सकते हैं. आज संडे है, फिर भी शेयर मार्केट खुला रहेगा. हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसा केवल दूसरी बार हो रहा है, जब रविवार को बजट के लिए मार्केट ओपन रहेगा. पिछली बार 1999 में, यशवंत सिन्हा के बजट पेश करने के दौरान ऐसा हुआ था.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, Solar Industries India Ltd निजी रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है. यह नागास्त्र (loitering munition) जैसे उत्पादों के लिए MoD के साथ आपातकालीन खरीद अनुबंध करती है. इसके पास रक्षा ऑर्डर बुक 175 अरब रूपये से अधिक हैं. वहीं 14 अरब रूपये के के निर्यात अनुबंध भी इस कंपनी के पास हैं. बजट में घरेलू खरीद को आगे बढ़ाने से गोला-बारूद, गाइडेड रॉकेट, प्रिसिजन म्यूनिशन और लोटरिंग सिस्टम पर बढ़ता खर्च कंपनी के लिए बड़ा अवसर पैदा करेगा.
इसके साथ ही हिंदुस्तानीय प्रशासन का उपक्रम Bharat Electronics Limited (BEL) भी हाई डिमांड में रह सकता है. इसकी रडार, टैक्टिकल कम्युनिकेशन, काउंटर-ड्रोन, C4ISR में मजबूत उपस्थिति है. यह रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता बढ़ा रही है. इसका प्रभाव C4ISR, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सुरक्षित संचार में होता है. ऐसे में यह बजट वृद्धि से सबसे बड़े लाभार्थियों में रहेगा.
हिंदुस्तान की एक और प्रशासनी कंपनी Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के शेयर भी ऊंचे जा सकते हैं. इसके लड़ाकू विमान सपोर्ट, अपग्रेड और हेलिकॉप्टर इंडक्शन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं. LCA, इंजन अपग्रेड और पुराने बेड़ों के रखरखाव से लंबे ऑर्डर मिलने की संभावना है.
सबसे अंतिम में Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) भी खास फायदे में रह सकता है. यह पनडुब्बी निर्माण (P-75I) में अहम भूमिका निभा रहा है. नौसेना के दीर्घकालिक जहाज निर्माण कार्यक्रमों से स्टेबल वर्क फ्लो इसकी खासियत रही है. ऐसे में सबसे बड़ा फायदा इसे भी हो सकता है.
इसके अलावा गार्डन रीच शिपबिल्डर्स, बीईएमएल, डेटा पैटर्न्स, कोचीन शिपयार्ड, अपोलो माइक्रोसिस्टम्स और हिंदुस्तान डायनेमिक्स जैसे रक्षा शेयरों में तेजी देखी गई है. आज इनमें भी निवेशक दांव लगा सकते हैं. रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना को ध्यान में रखते हुए खरीदारी बढ़ाई जा सकती है.
सबसे अधिक आवंटन किसे मिल सकता है?
पिछले वर्षों की तरह, इस बार भी हिंदुस्तानीय वायु सेना (IAF) को सबसे अधिक आवंटन मिलने की संभावना है. इसके बाद हिंदुस्तानीय नौसेना (IN) का नंबर आएगा. अगर “पूंजी-प्रधान + घरेलू प्राथमिकता” की नीति जारी रहती है, तो ठेकों का दायरा कई क्षेत्रों में फैलेगा. इनमें लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर बेड़े, मिसाइल, रॉकेट और गोला-बारूद, C4ISR / इलेक्ट्रॉनिक युद्ध / अंतरिक्ष आधारित निगरानी, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम, ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ हिंदुस्तान के सामने तात्कालिक जरूरत भी है और घरेलू उद्योग भी मजबूत हो रहा है.
एविएशन सेक्टर
लड़ाकू विमानों की खरीद और अपग्रेड से जुड़े सपोर्ट पैकेज, एलसीए (LCA) से जुड़े स्पेयर पार्ट्स और सपोर्ट, इंजन अपग्रेड, थलसेना, वायुसेना और नौसेना के लिए हेलिकॉप्टर खरीद के संभावित ठेके शामिल हो सकते हैं. तत्काल जरूरतों को देखते हुए, 114 राफेल लड़ाकू विमानों के ऑर्डर को भी FY27 की नई योजनाओं में शामिल किया जा सकता है.
मिसाइल और गोला-बारूद
गाइडेड रॉकेट, लंबी दूरी के रॉकेट, एयर डिफेंस मिसाइल, प्रिसिजन म्यूनिशन, लोटरिंग म्यूनिशन, आर्टिलरी गोला-बारूद पर बजट का फोकस रह सकता है. ये सिस्टम तेजी से कॉन्ट्रैक्ट हो सकते हैं, तुरंत युद्ध क्षमता बढ़ाते हैं और स्वदेशीकरण नीति से मेल खाते हैं.
हिंदुस्तानीय नौसेना का दृष्टिकोण
जहाज निर्माण कार्यक्रम लंबे समय वाले होते हैं और इनमें कमिटेड देनदारियां ज्यादा रहती हैं. फिर भी पूंजीगत वृद्धि से P-75(I) पनडुब्बी प्रोजेक्ट, प्लेटफॉर्म अपग्रेड, सेंसर और हथियार फिटमेंट इन क्षेत्रों में स्टेबल ऑर्डर मिल सकते हैं.
C4ISR और नेटवर्क आधारित युद्ध- बजट से ऑर्डर तक की कड़ी
सीमाओं पर तनाव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और तेज युद्ध-श्रृंखला (kill chain) की जरूरत के कारण हिंदुस्तान इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे सकता है. इसमें सैटकॉम (Satcom), निगरानी उपग्रह, AEW&C / ISTAR सिस्टम, टैक्टिकल कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सुरक्षित डेटा लिंक, ये सभी फोर्स मल्टीप्लायर हैं और हिंदुस्तान की घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए बड़े अवसर हैं.
इस बार के रक्षा बजट में कम से कम 15% पूंजीगत वृद्धि संभव है. कमिटेड देनदारियां मल्टी इयर पेमेंट साइकल बनाए रखेंगी. सबसे तेज लाभार्थी क्षेत्र- मिसाइल और गोला-बारूद, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स (C4ISR / EW), ड्रोन और काउंटर-यूएएस, चुनिंदा विमान और हेलिकॉप्टर खरीद और जहाज निर्माण हो सकता है.
हिंदुस्तान के बजट में बढ़ोतरी क्यों होनी चाहिए?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ हुए इस संक्षिप्त लेकिन तीव्र संघर्ष, पाकिस्तान को चीन के समर्थन और बांग्लादेश में बढ़ती हिंदुस्तान-विरोधी भावनाओं को देखते हुए सवाल उठता है कि क्या आगामी बजट में रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाएगा? जब शत्रुतापूर्ण पड़ोसी देशों की संख्या बढ़ रही है, तो क्या नरेंद्र मोदी प्रशासन देश की सेनाओं के आधुनिकीकरण को टाल सकती है?
कई सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए. उदाहरण के तौर पर, हिंदुस्तान के पास ‘आकाशतीर’ एयर डिफेंस सिस्टम की केवल 107 यूनिट हैं, जबकि 500 यूनिट होनी चाहिए. ‘आकाशतीर’ पूरी तरह स्वदेशी और एआई-आधारित एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग सिस्टम है, जो ड्रोन, मिसाइल और विमानों जैसे हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में सक्षम है. इसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रात में पाकिस्तानी हवाई हमलों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी.
निर्मला सीतारमण 2019 में हिंदुस्तान द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किए गए बालाकोट एयरस्ट्राइक के समय रक्षा मंत्री थीं. यह कार्रवाई पुलवामा में अर्धसैनिक बलों पर हुए आतंकवादी हमले (जिसमें कम से कम 40 जवान शहीद हुए) के बाद की गई थी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह हिंदुस्तान की वित्त मंत्री रहीं. ऐसे में वह हिंदुस्तान की महत्ता समझती हैं. चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों के बीच सैन्य और अन्य सहयोग बढ़ने की समाचारों के बीच यह और अहम हो जाता है.
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