Mahashivratri 2026: देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव-पार्वती के दिव्य विवाह के उपलक्ष्य में यह उत्सव देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है. स साल का महाशिवरात्रि पर राज लक्ष्मी नारायण राजयोंग बना रहा है, जिस कारण से यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास होने वाली है.
लक्ष्मी-नारायण राजयोग
ज्योतिषविदों के अनुसार, इस साल महाशिवरात्रि पर कुंभ राशि में शुक्र और बुध की युति होने जा रही है, जिससे ‘लक्ष्मी-नारायण राजयोग’ का निर्माण होगा. यह दुर्लभ संयोग शिव भक्तों के लिए सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य के द्वार खोलने वाला माना जा रहा है.
किन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
- मिथुन राशि: लक्ष्मी-नारायण राजयोग मिथुन राशि वालों के लिए आय के नए मौके लेकर आएगा. हालांकि धन में वृद्धि के साथ-साथ खर्चों में भी बढ़ोतरी की संभावना है. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा.
- वृश्चिक राशि: यह विशेष योग वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है. नौकरी और व्यवसाय में उन्नति की संभावना है. पुराने अटके हुए कार्य पूरे होंगे. आय के नए अवसर प्राप्त होंगे. किसी नई जगह यात्रा की योजना बन सकती है.
- कुंभ राशि: कुंभ राशि वाले जातकों के लिए यह योग कई नई खुशियां लेकर आएगा. पारिवारिक संबंधों में तनाव कम होगा. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. पुराना अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है.
महाशिवरात्रि तिथि और शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव पूजा में मध्यरात्रि (निशीथ काल) का विशेष महत्व है.
- पर्व की तिथि: 15 फरवरी 2026 (रविवार)
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी, शाम 05:04 बजे से
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी, शाम 05:34 बजे तक
- व्रत पारण: 16 फरवरी, सूर्योदय के पश्चात
पूजा की विधि: कैसे प्रसन्न करें महादेव?
- स्नान: महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- व्रत संकल्प: भगवान शिव के सामने हाथों में थोड़ा जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
- जलाभिषेक: शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल चढ़ाएं.
- पंचामृत स्नान: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भोलेनाथ का अभिषेक करें.
- अर्पण: बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भस्म और सफेद चंदन अर्पित करें.
- मंत्र जप: इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें.
- जागरण: रात्रि के चारों प्रहर में शिव अर्चना और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है.
नंदी के कान में कहें अपनी मनोकामना
मंदिर में भगवान शिव की पूजा के बाद नंदी के बाएं कान में अपनी इच्छा बोलने की परंपरा है. नंदी के पैर स्पर्श कर उनके कान में अपनी बात कहने से पहले ‘ॐ’ बोलें, फिर अपनी मुराद कहें. बाद में नंदी महाराज को जल और पुष्प अर्पित करना न भूलें.
महाशिवरात्रि व्रत के आहार नियम
शिवरात्रि का व्रत आत्म-शुद्धि का पर्व है, इसलिए आहार का विशेष ध्यान रखें.
- क्या खाएं: महाशिवरात्रि के दिन केवल सात्विक फलाहार ग्रहण करें. आप सेब, केला, साबुदाना खिचड़ी, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें और सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं.
- क्या न खाएं: इस दिन अनाज, प्याज, लहसुन और साधारण नमक का सेवन न करें. इन्हें अशुभ माना जाता है.
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह शिव और शक्ति के मिलन की रात मानी जाती है. वहीं वैज्ञानिक रूप से इस रात्रि पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध इस तरह स्थित होता है कि मनुष्य के शरीर में ऊर्जा का प्रवाह प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर यानी रीढ़ की हड्डी के माध्यम से बढ़ता है. इसी कारण इस रात जागकर ध्यान करना स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए लाभकारी माना जाता है.
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