Chaiti Chhath 2026: चैत्र छठ हिंदू धर्म के सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक है. हर साल दो बार छठ का पर्व मनाया जाता है. पहला चैत्र माह में और दूसरा कार्तिक मास में. यह पर्व 4 दिनों का होता है. व्रत के पहले दिन नहाय-खाय होता है, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ पूजा संपन्न होती है. आज पर्व के तीसरे दिन लोग दौरा सजा कर पवित्र नदियों और तालाबों के घाट पर पहुंचते है. व्रती बांस के सूप में ठेकुआ, ताजे फल, गन्ना, नारियल और कसार जैसी पूजन सामग्री सजाकर कमर तक पानी में उतरती हैं. इसके बाद वे सूर्य देव की पूजा कर सूर्य की अंतिम किरण के समय अर्घ्य अर्पित करती हैं.
अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त का समय
पंचांग के अनुसार आज सूर्यास्त का औसत समय शाम 06:34 बजे है, लेकिन अलग-अलग शहरों में यह समय थोड़ा भिन्न हो सकता है. आइए जानते हैं अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त का समय—
| शहर (City) | सूर्यास्त का समय (Sunset Time) |
| कोलकाता | शाम 05:49 |
| भागलपुर / देवघर | शाम 05:55 |
| जमशेदपुर | शाम 05:56 |
| बोकारो / बेगूसराय | शाम 05:58 |
| रांची / मुजफ्फरपुर | शाम 06:01 |
| पटना | शाम 06:02 |
| छपरा | शाम 06:04 |
| मऊ | शाम 06:09 |
| गोरखपुर | शाम 06:10 |
| वाराणसी | शाम 06:11 |
| प्रयागराज | शाम 06:15 |
| लखनऊ | शाम 06:19 |
| भोपाल | शाम 06:33 |
| गया / नोएडा | शाम 06:34 |
| दिल्ली | शाम 06:35 |
| पुणे | शाम 06:46 |
| मुंबई | शाम 06:51 |
क्यों खास है संघ्या अर्घ्य?
आमतौर पर हिंदू धर्म के हर त्योहार में उगते हुए सूर्य की पूजा की जाती है. लेकिन छठ एक इकलौता ऐसा पर्व है जहां न केवल उगते सूरज, बल्कि अस्त होते सूर्य की भी पूजा की जाती है. आज व्रती पूरे 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हुए पवित्र नदियों या जलाशयों में खड़े होकर ढलते सूर्य को अर्घ्य देंगे. यह पूजा परिवार की सुख-समृद्धि, बेहतर स्वास्थ्य और संतान की लंबी उम्र के लिए की जाती है.
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