मुख्य बातें
Bengal Elections: कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानभा के लिए हुए चुनाव में न तो किसी की हत्या हुई न ही कोई बूथ लूटा गया. यहां तक की किसी बूथ पर बम भी बरामद नहीं हुए. चुनावी हिंसा के लिए बदनाम बंगाल ने इस चुनाव में अपनी छवि बदल ली है. यह कहना मुश्किल है कि पश्चिम बंगाल में आखिरी बार इतने स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कब हुए थे. हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बार बार इस बात का उल्लेख कर रहे थे कि उनका पहला लक्ष्य शांतिपूर्ण चुनाव कराना है. मुख्य चुनाव आयुक्त का यह दावा सच साबित हुआ. बेशक शांतिपूर्ण मतदान कराना चुनाव आयोग के लिए एक चुनौती थी. आयोग ने इसके लिए अभूतपूर्व इंतेजाम भी कर रखे थे. मतदाताओं के मन से डर लगभग खत्म कर दिया था. लोगों में विश्वास का ही सबूत है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. यह आयोग के लिए एक बड़ी सफलता है, इसमें कोई संदेह नहीं है.
शांतिपूर्ण मतदान था आयोग का पहला लक्ष्य
आयोग का कहना है कि एक समय ऐसा वर्ग था, जो मतदान से परहेज करता था. हालांकि, स्वतंत्र और निडर मतदान को बढ़ावा देने के कारण, उन्होंने भी मतदान किया. बंगाल में मतदान केंद्रों से मतदान एजेंटों, विशेषकर विपक्षी दल के एजेंटों को बाहर निकालने की घटना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ. एक भी घटना ऐसी नहीं हुई जिसमें किसी मतदान अधिकारी को बाहर निकाला गया हो. चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में कुल मतदान प्रतिशत 92.56 रहा. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दावा है कि आजादी के बाद से बंगाल में डाले गए वोटों की यह सबसे बड़ी संख्या है, लेकिन पांच साल पहले स्थिति ऐसी नहीं थी.
कोई मौत नहीं हुई, बरामद नहीं हुआ एक भी बम
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फर्जी मतदान की शिकायतें ज्यादा आई हैं, लेकिन हिंसा कम हुई है. सबसे खास बात यह है कि मतदान के दोनों चरणों में कोई मौत नहीं हुई. हालांकि, पांच साल पहले स्थिति अलग थी. बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों में 24 लोगों की जान चली गई. पांच साल पहले, 2016 में, चुनाव हिंसा में सात लोग पीड़ित हुए थे, लेकिन इस बार यह संख्या शून्य है. 2021 में मतदान के दौरान कुल 69 बम बरामद किए गए थे, लेकिन इस बार, एक भी बम बरामद होने की कोई समाचार नहीं है. आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस चुनाव में पांच लाख कार्यकर्ताओं ने काम किया.
पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई का दिखा असर
चुनाव में गड़बड़ी पैदा कर सकने वाले 687 लोगों को एहतियातन गिरफ्तार किया गया. उन पर बैक टेप (सेलो टेप, परफ्यूम आदि) रखने का आरोप है. कुल 77 बूथों पर मतदान हो चुका है. फाल्टा में 32 बूथों, मगराहट में 13 बूथों, डायमंड हार्बर में 29 बूथों और बाजबाज में 3 बूथों पर पुन: चुनाव होंगे. सीईओ मनोज अग्रवाल ने कहा- पश्चिम बंगाल ने दिखाया है कि सात-आठ चरणों के मुकाबले दोनों चरणों में मतदान शांतिपूर्ण रहा. कोई मृत्यु नहीं हुई. कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं हुई. छोटी-मोटी घटनाएं हर जगह होती रहती हैं, लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल ने इसे साबित कर दिखाया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा- पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से दोनों चरणों में सबसे अधिक मतदान हुआ.
Also Read: स्त्रीएं ही तय करेंगी बंगाल की सत्ता, दूसरे फेज में 39 सीटों पर पुरुष वोटरों की संख्या कम
The post बंगाल की नयी छवि, बिना हिंसा के हुए रिकार्ड मतदान, सच साबित हुआ ज्ञानेश कुमार का दावा appeared first on Naya Vichar.

