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मिडिल ईस्ट से हटेगा US का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर, ईरान के खिलाफ अब क्या है ट्रंप का प्लान?

US Aircraft Carrier Gerald R Ford: ईरान के साथ बातचीत ठप पड़ने के बीच एक अमेरिकी विमानवाहक पोत अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ आने वाले कुछ दिनों में पश्चिम एशिया क्षेत्र से हट सकता है. सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड मिडिल ईस्ट छोड़ने वाला है. यह इस क्षेत्र में तैनात अमेरिका के तीन विमानवाहक पोतों में से एक है.

अमेरिका-ईरान वार्ता में ठहराव के बीच इस विमानवाहक पोत की वापसी से वहां पिछले 10 महीनों से तैनात करीब 4,500 नौसैनिकों को राहत मिलेगी. वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, क्षेत्र में अन्य दो विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश और यूएसएस अब्राहम लिंकन हैं.

यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड लाल सागर में तैनात है, जबकि यूएसएस लिंकन और यूएसएस बुश अरब सागर में हैं. यहां वे ईरानी बंदरगाहों से तेल या सामान ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हुए अमेरिकी नाकाबंदी लागू कर रहे हैं. 

हालांकि, फोर्ड की वापसी से इस नाकाबंदी में अमेरिकी ताकत कुछ कम हो सकती है. लेकिन, यह विमानवाहक पोत 309 दिनों से तैनात है, जो किसी भी आधुनिक अमेरिकी पोत के लिए समुद्र में रहने की सबसे लंबी अवधि मानी जा रही है. इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर असर भी पड़ा है, जिसमें लॉन्ड्री रूम में आग लगने से कई नौसैनिक घायल हो गए थे और शौचालयों में भी समस्याएं सामने आई थीं. 

आम तौर पर विमानवाहक पोतों की तैनाती छह से सात महीने की होती है, ताकि उनके रखरखाव का समय निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल सके. वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, जहाज के मई के मध्य तक वर्जीनिया लौटने के बाद इसकी मरम्मत और रखरखाव किया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को हुई एक संसदीय सुनवाई के दौरान कई सांसदों ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस लंबे तैनाती काल को लेकर सवाल किए. इस पर हेगसेथ ने कहा, ‘काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया था और इसमें नौसेना से भी परामर्श किया गया था. 

अलग प्लान पर काम कर रही अमेरिकी सेना

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया है और ईरान के खिलाफ संभावित नए सैन्य कदमों पर विचार कर रहे हैं.

इससे पहले एक्सियोस की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संभावित नए सैन्य अभियानों को लेकर जानकारी देने वाले हैं. अमेरिकी सेना अब ईरान के खिलाफ नए ऑपरेशनों पर विचार कर रही है. संभावित नए सैन्य अभियान इस बात का संकेत देते हैं कि नाजुक संघर्षविराम के बीच अमेरिका ईरान पर अंतिम दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. 

एक्सियोस के मुताबिक, यह ब्रीफिंग सेंटकॉम द्वारा तैयार की गई एक योजना से संबंधित है, जिसमें ईरान पर ‘छोटे लेकिन प्रभावशाली’ हमलों की श्रृंखला शामिल हो सकती है. इन हमलों में बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है, ताकि गतिरोध की स्थिति को तोड़ा जा सके.

एक अन्य योजना के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर उसे वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने का प्रस्ताव है. इस योजना का तीसरा पहलू ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करने के लिए विशेष बलों का अभियान चलाना है. सूत्रों के अनुसार, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन भी गुरुवार की इस ब्रीफिंग में शामिल हो सकते हैं.

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होर्मुज ब्लॉकेड से ईरान को झुकाना चाहता है अमेरिका

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सहयोगियों को ईरान के खिलाफ लंबे समय तक नाकाबंदी जारी रखने की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, यह एक जोखिम भरा कदम है, जिसका उद्देश्य तेहरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर झुकने के लिए मजबूर करना है, जिसे वह लंबे समय से अस्वीकार करता रहा है. 

ईरान की वित्तीय स्थिति पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप ने उसके तेल निर्यात को बाधित करने का रास्ता चुना है. इसके तहत ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जा रहा है. ट्रंप का मानना है कि फिर से बमबारी शुरू करना या संघर्ष से पीछे हटना, नाकेबंदी वाली रणनीति की तुलना में अधिक जोखिम भरे हैं.

ANI के इनपुट के साथ.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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