खास बातें
West Bengal Election 2026 Voter Turnout: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ने वोटिंग के मामले में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने नेतृत्वक विश्लेषकों और दिग्गजों को हैरान कर दिया है. चुनाव आयोग की ओर से जारी वोटर टर्नआउट रिपोर्ट के अनुसार, इस बार राज्य में रिकॉर्ड 92.95 फीसदी मतदान हुआ है.
2011 के मतदान का भी रिकॉर्ड हो गया ध्वस्त
यह आंकड़ा न केवल 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव (81.56 प्रतिशत) से कहीं ज्यादा है, बल्कि इसने 2011 के 84.33 फीसदी वोटिंग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वोटरों की कुल संख्या घटने के बावजूद पड़ने वाले वोटों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है.
कम वोटर, फिर भी बंपर वोटिंग
इस बार के चुनाव में आंकड़े कुछ ऐसी कहानी बता रहे हैं, जो पहले कभी नहीं देखी गयी. वर्ष 2021 में बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7,34,14,746 थी. वर्ष 2026 में यह घटकर 6,82,51,008 रह गयी. यानी लगभग 51.63 लाख मतदाता कम हुए. वोटर कम होने के बावजूद, 2021 की तुलना में इस बार ज्यादा वोटिंग हुई. 2021 में 5.98 करोड़ लोगों ने वोट दिया था, वर्ष 2026 में 6.34 करोड़ लोगों ने मतदान किया. यानी 36.65 लाख ज्यादा वोट पड़े हैं.
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2021 बनाम 2026 के आंकड़ों पर एक नजर
| चुनाव का वर्ष | कुल मतदाता | कुल मतदान | मतदान प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 2021 | 7,34,14,746 | 5,98,73,769 | 81.56 |
| 2026 | 6,82,51,008 | 6,34,39,312 | 92.95 |
West Bengal Election 2026 Voter Turnout: बंपर वोट पर सियासी घमासान, गुस्सा या नाराजगी?
इस भारी मतदान को लेकर टीएमसी और भाजपा के अपने-अपने दावे हैं. तृणमूल कांग्रेस इसे एसआईआर (SIR) के जरिये मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के खिलाफ जनता का गुस्सा बता रही है. उनका मानना है कि लोगों ने नाम कटने के डर और बदले की भावना से बढ़-चढ़कर वोट दिया है. भाजपा का मानना है कि यह वोटिंग सत्ता परिवर्तन की लहर है. भाजपा इसे मौजूदा प्रशासन के प्रति जनता की गहरी नाराजगी का इजहार मान रही है.
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जनता ने दिखायी ताकत : विश्लेषक
चुनाव विश्लेषक हरिशंकर चट्टोपाध्याय कहते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर मतदान लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि है. चुनाव में धांधली के आरोप न के बराबर हैं, जिसका मतलब है कि जनता ने स्वेच्छा से अपनी ताकत का अहसास कराया है. हालांकि, पहले चरण के मुकाबले दूसरे चरण में 0.5 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही, लेकिन ओवरऑल रिकॉर्ड ने सबको पीछे छोड़ दिया है. अब 4 मई को ही स्पष्ट होगा कि यह ‘मौन लहर’ किसे सत्ता के सिंहासन पर बैठाती है और किसे बाहर का रास्ता दिखाती है.
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