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सोने की ‘इम्पोर्ट’ पर लगेगी लगाम! मंदिरों के 1,000 टन सोने को बाजार में लाने की तैयारी, IBJA का सरकार को बड़ा प्रस्ताव

Temple Gold Monetisation : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आम जनता से सोने की खरीद कम करने की अपील के बाद, हिंदुस्तानीय सर्राफा बाजार ने देशहित में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने प्रशासन के प्रयासों का समर्थन करते हुए देश के विभिन्न मंदिर ट्रस्टों के पास जमा लगभग 1,000 टन सोने को ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ के तहत मुख्य वित्तीय स्थिति में लाने का सुझाव दिया है. इस योजना का मकसद विदेशों से होने वाले सोने के आयात (Import) को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को सुरक्षित रखना है.

आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

हिंदुस्तान में कच्चा तेल खरीदने के बाद विदेशों में सबसे ज्यादा पैसा सोना (Gold) मंगाने में खर्च होता है.

  • भारी-भरकम आयात: IBJA के गुजरात राज्य अध्यक्ष नैनेश पचचीगर के मुताबिक, हिंदुस्तान हर साल विदेशों से लगभग 800 टन सोना आयात करता है. इससे देश का बहुत बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार बाहर चला जाता है.
  • टैक्स में भारी बढ़त: इसी विदेशी मुद्रा के नुकसान को रोकने के लिए प्रशासन ने हाल ही में सोने पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया है.

क्या है मंदिरों के सोने वाली योजना?

IBJA का कहना है कि देश के बड़े-बड़े मंदिर ट्रस्टों के पास लगभग 1,000 टन ऐसा सोना है जो लॉकरों में सिर्फ रखा हुआ है (Idle Gold). एसोसिएशन ने साफ किया है कि वे इस सोने का मालिकाना हक प्रशासन को ट्रांसफर करने की बात नहीं कर रहे हैं. बल्कि एक ऐसा सिस्टम (Monetisation Mechanism) बनाने का प्रस्ताव है जिससे इस सोने को पिघलाकर या बॉन्ड के रूप में बाजार के सर्कुलेशन में लाया जा सके, ताकि बाहर से नया सोना न खरीदना पड़े.

ज्वेलर्स से अपील: “5 ग्राम से ज्यादा का बिस्किट/सिक्का न बेचें”

सट्टेबाजी और निवेश के लिए खरीदे जाने वाले सोने (Speculative Demand) पर रोक लगाने के लिए IBJA ने अपने सदस्यों और ज्वेलर्स के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है कि ज्वेलर्स से अपील की गई है कि वे ग्राहकों को सीधे तौर पर बुलियन (सोने के बिस्किट या ईंट) की ट्रेडिंग या बिक्री न करें.

अगर बहुत जरूरी हो, तो किसी भी ग्राहक को 5 ग्राम से ऊपर का बुलियन न बेचा जाए. शादी-ब्याह या जरूरी रस्मों के लिए गहनों (Jewellery) की बिक्री जारी रहेगी, लेकिन गैर-जरूरी निवेश के लिए सोने की खरीद को कम करना होगा.

छोटे कारीगरों और मजदूरों की नौकरियां बचाना मकसद

एक्साइज ड्यूटी बढ़ने और सोने के दाम आसमान छूने से छोटे सर्राफा व्यापारियों और आभूषण बनाने वाले स्थानीय कारीगरों (Artisans) के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. नैनेश पचचीगर ने कहा, “हमारा सबसे बड़ा सरोकार उन छोटे मजदूरों के रोजगार को बचाना है जिनकी जिंदगी ज्वेलरी इंडस्ट्री पर टिकी है.” अगर मंदिर के सोने को बाजार में लाने की योजना को मंजूरी मिलती है, तो घरेलू स्तर पर सोने की सप्लाई बनी रहेगी, जिससे छोटे कारोबार बंद होने से बच जाएंगे और नौकरियां सुरक्षित रहेंगी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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