Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड में लगातार गंभीर होते ईंधन और ऊर्जा संकट को देखते हुए हाईकोर्ट ने न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक बेहद बड़ा कदम उठाया है. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) एमएस सोनक के सख्त निर्देशानुसार, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल सत्य प्रकाश सिन्हा ने शनिवार को राज्य के सभी जिलों के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीशों (PDJs) को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. इस आदेश के तहत अब राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों में मुकदमों की सुनवाई ‘हाइब्रिड मोड’ में की जाएगी.
सिविल कोर्टों में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार, ऑनलाइन सुनवाई को बढ़ावा
रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य के सभी सिविल कोर्टों में ऑनलाइन सुनवाई के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना (Infrastructure) पहले से ही पूरी तरह उपलब्ध है. ऐसे में मुकदमों की सुनवाई को पूरी तरह फिजिकल रखने के बजाय हाइब्रिड मोड में संचालित किया जाए. कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऑनलाइन और वर्चुअल सुनवाई को सुगम बनाने के लिए अदालती कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और मुवक्किलों को विशेष रूप से मोटिवेट (प्रोत्साहित) किया जाए, ताकि इस नई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की तकनीकी या व्यावहारिक बाधा न आ सके.
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जजों और अदालती कर्मियों के लिए कार-पूलिंग अनिवार्य
ईंधन की भारी किल्लत और मौजूदा संकट से निपटने के लिए हाईकोर्ट ने केवल वकीलों या मुवक्किलों को ही नहीं, बल्कि स्वयं न्यायिक अधिकारियों को भी किफायत बरतने को कहा है. आदेश के मुताबिक, सभी न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय के कर्मचारियों को कोर्ट परिसरों तक अपने दैनिक आवागमन के लिए कार-पुलिंग (Car-Pooling) और वाहन-साझाकरण (Vehicle Sharing) व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है.
गवाहों और पक्षकारों को भी वर्चुअल एंट्री, SOP का पालन जरूरी
जारी आधिकारिक पत्र में आगे कहा गया है कि न्याय व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से जारी रखने के लिए सभी अदालतों को हाइब्रिड मोड में सक्रिय रूप से कार्य करना होगा. अदालतों को निर्देश दिया गया है कि वे अधिवक्ताओं, स्वयं उपस्थित होने वाले पक्षकारों और गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से वर्चुअल रूप से उपस्थित होने और अपने मामलों की पैरवी करने के लिए प्रेरित करें. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि इस पूरी वर्चुअल कार्यवाही के दौरान झारखंड हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित सभी मौजूदा नियमों, दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा.
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