Bihar Expressway News: बिहार अब तेजी से बदल रहा है. जो राज्य कभी खराब सड़कों और लंबी यात्राओं के लिए चर्चा में रहता था, वही अब देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर हब में शामिल होने की तैयारी कर रहा है. राज्य में 15 बड़े एक्सप्रेसवे और फोरलेन परियोजनाओं पर करीब 2.11 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार में सफर आसान और तेज हो जाएगा.
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से बदलेगी नॉर्थ-ईस्ट की कनेक्टिविटी
गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है. यह हाई-स्पीड कॉरिडोर बिहार को सीधे नॉर्थ-ईस्ट से जोड़ देगा. इस सड़क पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेंगे. इसके बनने के बाद गोपालगंज से सिलीगुड़ी की दूरी सिर्फ 5 घंटे में पूरी होगी. इससे असम, मेघालय और सिक्किम जैसे राज्यों तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा.
राम जानकी मार्ग से जुड़ेगी आस्था और पर्यटन
अयोध्या-जनकपुर राम जानकी मार्ग बिहार के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देगा. यह वही ऐतिहासिक रास्ता माना जाता है, जहां से भगवान राम की बारात जनकपुर गई थी. चार लेन वाले इस हाईवे के बनने के बाद श्रद्धालु अयोध्या से सीतामढ़ी तक सिर्फ 5 घंटे में पहुंच सकेंगे. इससे बिहार में धार्मिक पर्यटन को बड़ा फायदा मिलेगा.
अब 90 मिनट में पहुंचेंगे गया
पटना-सिपारा से गया के डोभी तक तैयार हो रहा 4-लेन कॉरिडोर राजधानी को दक्षिण बिहार से तेजी से जोड़ेगा. इस सड़क के बनने के बाद पटना से गया की दूरी मात्र 90 मिनट में पूरी होगी. इस मार्ग पर बड़े रेल ओवरब्रिज, सर्विस रोड और बाइपास बनाए जा रहे हैं. इसे ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां फलदार पेड़ भी लगाए जाएंगे.
मोकामा-मुंगेर फोरलेन से बदलेगी टाल क्षेत्र की किस्मत
यह परियोजना बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर का हिस्सा है. इसके बनने से पटना से मुंगेर का सफर 4 घंटे से घटकर 3 घंटे से भी कम हो जाएगा. इससे लखीसराय और मुंगेर के टाल क्षेत्र में व्यापार और रोजगार को नई रफ्तार मिलेगी.
बिहटा एयरपोर्ट तक पहुंचना होगा आसान
दानापुर-बिहटा-कोईलवर एलिवेटेड कॉरिडोर राजधानी की ट्रैफिक समस्या कम करेगा. 25 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के बनने के बाद पटना से बिहटा एयरपोर्ट तक पहुंचने में सिर्फ 25 मिनट लगेंगे.
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा. इसके बनने के बाद गया से कोलकाता का सफर 9 घंटे के बजाय 5 घंटे से कम में पूरा होगा. इस परियोजना से उद्योग, व्यापार और माल ढुलाई को बड़ा फायदा मिलेगा.
रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर से बढ़ेगा निर्यात
यह एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार को सीधे हल्दिया बंदरगाह से जोड़ेगा. इससे मखाना, लीची और दूसरे कृषि उत्पादों का निर्यात आसान होगा. रक्सौल से हल्दिया की यात्रा 20 घंटे से घटकर 11 घंटे रह जाएगी.
सीमांचल और उत्तर बिहार को मिलेगी नई रफ्तार
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सीमांचल क्षेत्र के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है. इसके बनने के बाद पटना से पूर्णिया की दूरी सिर्फ 3 घंटे में पूरी होगी. वहीं आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे उत्तर और दक्षिण बिहार को सीधे जोड़ेगा. गया से दरभंगा तक की यात्रा 4 घंटे में पूरी हो सकेगी.
पटना रिंग रोड और मरीन ड्राइव से बदलेगी राजधानी
150 किलोमीटर लंबा पटना रिंग रोड शहर को ट्रैफिक जाम से राहत देगा. बाहरी वाहन शहर में घुसे बिना आगे निकल सकेंगे. इसके अलावा बिदुपुर-दिघवारा एक्सप्रेसवे के तहत गंगा किनारे मरीन ड्राइव तैयार किया जा रहा है, जिससे पर्यटन और बाढ़ नियंत्रण दोनों को फायदा होगा.
बिहार अब रफ्तार की नई राजधानी बनने की ओर
इन सभी परियोजनाओं से साफ है कि बिहार अब सिर्फ नेतृत्व का केंद्र नहीं, बल्कि हाई-स्पीड इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास का नया मॉडल बन रहा है. 2.11 लाख करोड़ रुपये की यह सड़क क्रांति आने वाले समय में रोजगार, पर्यटन, उद्योग और व्यापार को नई ऊंचाई दे सकती है.
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