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वेस्टइंडीज-ऑस्ट्रेलिया का वो ऐतिहासिक मुकाबला, जिसने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया; क्या आपको याद है?

WI vs AUS ODI: 25 अप्रैल 1999 को बारबाडोस के केनसिंगटन ओवल मैदान पर वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्पोर्ट्सा गया सातवां वनडे मैच आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है. यह मुकाबला सिर्फ चौके-छक्कों के लिए नहीं, बल्कि उस अभूतपूर्व घटना के लिए याद किया जाता है जिसने क्रिकेट के इतिहास में एक अनोखा अध्याय जोड़ दिया. उस दिन मैदान पर जो कुछ भी हुआ, उसने न सिर्फ मैच का रुख बदला बल्कि पूरी दुनिया के सामने स्पोर्ट्स भावना की एक बेमिसाल मिसाल पेश की.

स्थानीय खिलाड़ी के रन-आउट पर भड़के प्रशंसक

मामला तब बिगड़ा जब वेस्टइंडीज की पारी के 29वें ओवर में टीम का स्कोर 2 विकेट पर 138 रन था. स्थानीय स्टार बल्लेबाज शेरविन कैंपबेल 52 रन बनाकर स्पोर्ट्स रहे थे. इसी दौरान पिच के बीच में गेंदबाज ब्रैंडन जूलियन से उनकी टक्कर हो गई और वह पीठ के बल मैदान पर गिर पड़े. इस बीच माइकल बेवन ने गिल्लियां बिखेर दीं और अंपायर निकोल्स ने कैंपबेल को आउट करार दे दिया. अंपायर के इस फैसले से स्थानीय प्रशंसक आगबबूला हो गए. जैसे ही कैंपबेल मैदान से बाहर जाने लगे, स्टैंड्स से मैदान के अंदर बोतलों की बारिश शुरू हो गई. इनमें से एक बोतल ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ के सिर के बेहद करीब से गुजरी. इस हंगामे के कारण स्पोर्ट्स को 45 मिनट तक रोकना पड़ा.

कप्तान स्टीव वॉ का ऐतिहासिक फैसला

बारबाडोस के केनसिंगटन ओवल मैदान पर हालात बेकाबू थे और हिंसा भड़कने का खतरा मंडरा रहा था. इमरजेंसी मीटिंग में भी जब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था, तब कंगारू कप्तान स्टीव वॉ ने कमाल की सूझबूझ दिखाई. उन्होंने जीत-हार से ऊपर सुरक्षा और स्पोर्ट्स भावना को रखा और आउट हो चुके शेरविन कैंपबेल को वापस बुलाने का ऐतिहासिक फैसला किया. स्टीव वॉ ने कहा कि “माहौल को शांत करने का यही एकमात्र जरिया है कि हम अपनी अपील वापस लें और कैंपबेल को दोबारा स्पोर्ट्सने दें.” हालांकि, इस एक फैसले ने मैदान का तनाव तुरंत खत्म कर दिया और मैच अधिकारियों ने इस सूझबूझ की सराहना करते हुए इसे तुरंत लागू किया.

कैसे मैच हारकर भी जीत गई ऑस्ट्रेलिया

जैसे ही शेरविन कैंपबेल दोबारा क्रीज पर लौटे, जो दर्शक कुछ देर पहले गुस्से में बोतलें फेंक रहे थे, वे अब तालियां बजाकर स्पोर्ट्स भावना का जश्न मना रहे थे. बाद में, खराब रोशनी के कारण मैच का फैसला डकवर्थ-लुईस नियम से हुआ, जिसमें वेस्टइंडीज विजेता बना. भले ही ऑस्ट्रेलिया मुकाबला हार गया, लेकिन स्टीव वॉ और उनकी टीम ने दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया. हालांकि, यह घटना हमेशा याद दिलाएगी कि जीत-हार से कहीं बढ़कर स्पोर्ट्स की गरिमा और सुरक्षा होती है.

डकवर्थ-लुईस से मिला नया टारगेट

मैदान पर हुए भारी हंगामे और 45 मिनट के बवाल के बाद जब मैच दोबारा शुरू हुआ, तो अंपायरों ने स्पोर्ट्स से 10 ओवर कम करने का फैसला किया. इसके बाद डकवर्थ-लुईस नियम के तहत वेस्टइंडीज के सामने 40 ओवरों में 196 रनों का नया लक्ष्य रखा गया. समीकरण साफ था कि कैरेबियाई टीम को आखिरी 11 ओवरों में जीत के लिए 58 रन और बनाने थे.

एडम्स-चंद्रपॉल ने दिलाई जीत

ऑस्ट्रेलिया द्वारा रन-आउट की अपील वापस लेने के बाद शेरविन कैंपबेल दोबारा क्रीज पर आए. उन्होंने अपनी पारी में 10 रन और जोड़े, जिसके साथ ही इस सीरीज में उनका कुल स्कोर 312 रनों पर पहुंच गया. कैंपबेल के पवेलियन लौटने के बाद जिमी एडम्स और शिवनारायण चंद्रपॉल ने मोर्चा संभाला. दोनों ने बेहद सूझबूझ से बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया और 3 ओवर पहले ही वेस्टइंडीज को एक यादगार जीत दिला दी.

ऑस्ट्रेलिया की जोरदार वापसी

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही. एक समय टीम मात्र 119 रन पर अपने 6 महत्वपूर्ण विकेट खोकर गहरे संकट में नजर आ रही थी. ऐसा लग रहा था कि कंगारू टीम जल्द ही सिमट जाएगी, लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने पासा पलट दिया. टॉम मूडी की अगुवाई में निचले क्रम ने गजब का स्पोर्ट्स दिखाया और आखिरी के विकेटों के लिए बहुमूल्य 133 रन जोड़कर टीम को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा दिया.

कार्ल हूपर का चौंकाने वाला फैसला

इस मुकाबले की पहली गेंद फेंकने से पहले ही क्रिकेट जगत को एक बड़ा झटका लगा. वेस्टइंडीज के दिग्गज ऑलराउंडर कार्ल हूपर ने अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर सबको हैरान कर दिया, जिससे मैच शुरू होने से पहले ही कैरेबियाई खेमे में सनसनी फैल गई थी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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