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बिहार के मजदूरों के लिए चलेगा बड़ा अभियान, गांव-गांव लगेगा कैंप, इन योजनाओं का मिलेगा लाभ

Bihar Migrant Workers Registration: (प्रह्लाद कुमार, पटना) बिहार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने शुक्रवार को सूचना भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विभाग की प्रमुख उपलब्धियों और नई योजनाओं की जानकारी दी. विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने कहा कि राज्यभर में विशेष कैंप लगाकर श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक मजदूर प्रशासनी योजनाओं का लाभ उठा सकें.

प्रवासी श्रमिकों के लिए लॉन्च हुआ नया ऐप

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि बिहार के प्रवासी श्रमिकों का डाटा तैयार करने के लिए “बिहार प्रवासी कामगार ऐप” शुरू किया गया है. इस ऐप के माध्यम से 10 जून से अब तक 6 लाख 84 हजार 708 प्रवासी श्रमिकों का निबंधन किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि यह ऐप राज्य के बाहर और विदेशों में काम करने वाले बिहार के मजदूरों तक प्रशासनी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद करेगा.

प्रवासी मजदूरों के लिए बढ़ी अनुदान राशि

प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है. अब किसी प्रवासी मजदूर की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है. इसके अलावा राज्य के बाहर या विदेश में कार्यरत किसी प्रवासी मजदूर की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके पार्थिव शरीर को घर तक लाने का पूरा खर्च भी प्रशासन वहन करेगी.

दुर्घटना अनुदान योजना से सैकड़ों परिवारों को मदद

विशेष सचिव-सह-बोर्ड सुनील कुमार यादव ने बताया कि बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 446 लाभुकों को 8 करोड़ 67 लाख 35 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई. वहीं वर्ष 2026-27 में अब तक 168 लाभुकों को 3 करोड़ 35 लाख 12 हजार 500 रुपये का अनुदान दिया जा चुका है.

बाल श्रम उन्मूलन पर भी फोकस

श्रमायुक्त बिहार राजेश हिंदुस्तानी ने बताया कि बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास के लिए राज्य प्रशासन लगातार काम कर रही है. पटना, गया और सीतामढ़ी में विशेष आवासीय प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. वर्ष 2025-26 में कुल 1054 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया.

126 बच्चों के लिए कराई गई एफडी

वर्ष 2026-27 में बाल एवं किशोर श्रमिकों के पुनर्वास के लिए 126 बच्चों के खातों में सावधि जमा (एफडी) के रूप में 31 लाख 50 हजार रुपये जमा किए गए हैं. इसके अलावा तत्काल सहायता के तौर पर 103 बाल श्रमिकों को 3 लाख 9 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई है. जिन बच्चों की एफडी अभी नहीं हो पाई है, उनकी प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जाएगी.

नौ प्रमंडलों में बन रहे श्रम सेवा सुविधा केंद्र

राज्य प्रशासन श्रमिकों को एक ही जगह पर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए श्रम सेवा सुविधा केंद्र भी स्थापित कर रही है. योजना के तहत नौ प्रमंडलों में 10 श्रम सेवा सुविधा केंद्र खोले जाने हैं. फिलहाल पटना, कैमूर, सारण, सहरसा और दरभंगा में ये केंद्र पूरी तरह संचालित हो रहे हैं. इन केंद्रों पर निर्माण श्रमिकों का निबंधन, नवीकरण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है.

श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर

विभाग का कहना है कि निबंधन अभियान, प्रवासी कामगार ऐप और श्रम सेवा सुविधा केंद्रों के जरिए अधिक से अधिक श्रमिकों को प्रशासनी योजनाओं से जोड़ा जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य राज्य और राज्य के बाहर काम करने वाले सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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