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रेणु सिंह की पुण्यस्मृति में सजी काव्य संध्या, कविताओं के रंगों से सराबोर हुए श्रोता

नया विचार न्यूज़ सरायरंजन : प्रखंड के सीमावर्ती मालपुर स्थित रामचंद्र निवास में मंगलवार की संध्या दिवंगत रेणु सिंह की पुण्यस्मृति में एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्य, संवेदना और सृजन के इस अनुपम संगम में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रृंगार, हास्य, समाज, प्रकृति और जीवन-दर्शन के विविध रंग प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि चांद मुसाफिर ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है तथा ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

काव्य गोष्ठी का संचालन चर्चित गीतकार डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने किया। उन्होंने अपनी भावपूर्ण रचना “आशा नए दिवस की होगी सुबह नई, पूरब की लालिमा जाने कहां गई…” सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. प्रेम कुमार पांडे ने “कविगण हैं आए, हम सबको बुलाए…” के माध्यम से साहित्यिक वातावरण को और ऊर्जावान बनाया।

पर्यावरणविद् वशिष्ठ राय ‘वशिष्ठ’ ने “पर्यावरण जान है जीवन की, यह पहचान है मधुवन की…” प्रस्तुत कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। प्रसिद्ध शायर ज्वाला सांध्यपुष्प ने “नारी सुंदर गीत है, नारी स्वयं सितार…” सुनाकर नारी सम्मान और उसकी महिमा का भावपूर्ण चित्रण किया। वहीं दुखित महतो ‘भक्तराज’ की कृष्णभक्ति से ओतप्रोत रचना “बड़ा नटखट हई माखन चोर…” ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।चर्चित कवि एवं पत्रकार कुमोद प्रसाद गिरि ने अपनी स्मृतिपरक रचना “आज स्मृतियों के दीप पुनः जल उठे हैं, मन के आंगन में भावों के फूल खिल उठे हैं…” प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। स्मृति झा ने अपनी प्रभावशाली रचना “चौंकने का दौर है ये, चौंकना जारी रहेगा…” के माध्यम से समकालीन सामाजिक यथार्थ को स्वर दिया।अध्यक्ष चांद मुसाफिर ने अपनी चर्चित पंक्तियां “जुल्मी की उठती कोठी को देखा उम्र भर, लेकिन ऐशोआराम खातिर जुल्म करना नहीं सीखा…” सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। देर शाम तक रामचंद्र निवास तालियों की गड़गड़ाहट और साहित्यिक रसधारा से गुंजायमान रहा।गोष्ठी में गणेश दत्त झा, मनोज कुमार मिश्रा चंद्रशेखर चौधरी आजादविकास कुमार, बब्बन गिरि,रमा चौधरी, बेबी चौधरी, आर्या हिंदुस्तानी सहित अन्य कवियों ने भी अपनी समकालीन रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों और जीवन की सच्चाइयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।कार्यक्रम के अंत में मुख्य आयोजक अरुण कुमार सिंह ‘मालपुरी’ ने सभी अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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