Onion Price : प्रशासन ने प्याज किसानों को बेहतर दाम दिलाने और बफर स्टॉक के लिए खरीद बढ़ाने के उद्देश्य से फैसला लिया है. अब प्रशासन प्याज की खरीद 2125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी, जो पहले 1875 रुपये प्रति क्विंटल थी.
नई कीमत 4 जुलाई 2026 से लागू हो गई है. हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन लगातार खरीद कीमत बढ़ा रही है, तब भी खरीद की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है. क्या इससे किसानों को वास्तव में फायदा मिलेगा. क्या आने वाले महीनों में बाजार में प्याज महंगा हो सकता है. आइए पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं.
प्रशासन ने प्याज खरीद कीमत क्यों बढ़ाई?
प्रशासन हर साल कीमत स्थिरीकरण कोष के तहत बफर स्टॉक तैयार करती है. इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर बाजार में प्याज उपलब्ध कराकर कीमतों को नियंत्रित करना होता है. इस बार शुरुआती खरीद उम्मीद से काफी कम रही. ऐसे में किसानों को आकर्षित करने और प्रशासनी खरीद बढ़ाने के लिए कीमत में लगातार पांचवीं बार बढ़ोतरी की गई. अब नई खरीद कीमत 2125 रुपये प्रति क्विंटल यानी 21.25 रुपये प्रति किलो हो गई है.
बार-बार कीमत बढ़ाने के बावजूद खरीद क्यों नहीं बढ़ी?
प्रशासन की कोशिशों के बावजूद 1 जून से अब तक केवल लगभग 2000 टन प्याज की ही खरीद हो सकी है. इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं.
- किसान निजी व्यापारियों को बेच रहे हैं : कई क्षेत्रों में किसानों को निजी व्यापारियों से बेहतर भुगतान और तुरंत पैसा मिल रहा है. ऐसे में प्रशासनी खरीद उनके लिए पहली पसंद नहीं बन पा रही.
- गुणवत्ता की शर्तें : प्रशासनी खरीद में गुणवत्ता के निश्चित मानक होते हैं. कई किसानों का प्याज इन मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता.
- खरीद केंद्रों की सीमित उपलब्धता : कुछ इलाकों में प्रशासनी खरीद केंद्र पर्याप्त संख्या में नहीं हैं. इससे किसानों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.
क्या देश में प्याज की कमी है?
फिलहाल ऐसा नहीं है. प्रशासन के अनुसार देश में प्याज की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है.
- अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन.
- पिछले वर्ष उत्पादन 307.67 लाख टन.
- दोनों वर्षों का उत्पादन लगभग समान.
- महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में पर्याप्त भंडारण.
- रोजाना 50000 टन से अधिक प्याज मंडियों में पहुंच रहा है.
- अकेले महाराष्ट्र से प्रतिदिन 30000 टन से ज्यादा आवक.
इसका मतलब फिलहाल आपूर्ति मजबूत बनी हुई है.
फिर कीमतें बढ़ने की आशंका क्यों है? हालांकि आपूर्ति सामान्य है, लेकिन कुछ ऐसे कारण हैं जो आने वाले महीनों में कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं.
- मानसून में देरी : नासिक सहित कई इलाकों में खरीफ बुवाई लगभग 15 दिन देर से शुरू हुई है.
- कम बारिश : कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जिससे नई फसल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
- सट्टेबाजी : कुछ व्यापारियों ने भविष्य में संभावित कमी की आशंका को देखते हुए बड़ी मात्रा में खरीद शुरू कर दी है.
- अच्छी गुणवत्ता का स्टॉक अभी रोका जा रहा : बेहतर गुणवत्ता वाला प्याज अभी गोदामों में रखा जा रहा है. इसे बाद में कम आपूर्ति वाले समय में बाजार में लाया जा सकता है.
किसानों को कितना फायदा होगा?
नई खरीद कीमत किसानों के लिए राहत लेकर आई है.
- प्रशासनी खरीद में बेहतर दाम.
- बाजार में न्यूनतम कीमतों को सहारा.
- निजी व्यापारी भी प्रतिस्पर्धा में बेहतर दाम दे सकते हैं.
- भविष्य में आय में कुछ सुधार की संभावना.
हालांकि वास्तविक लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो प्रशासनी खरीद प्रक्रिया तक पहुंच बना सकेंगे.
उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
अभी खुदरा स्तर पर प्याज की औसत कीमत लगभग 31 रुपये प्रति किलो है.
यदि मानसून सामान्य रहता है और नई फसल समय पर आती है, तो कीमतों में बहुत बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम रहेगी. लेकिन यदि बारिश कमजोर रहती है. बुवाई और देर से होती है और सट्टेबाजी बढ़ती है. तो आने वाले महीनों में प्याज महंगा हो सकता है.
निर्यात का क्या असर पड़ सकता है?
जून महीने में लगभग 1.50 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ, जो सामान्य स्तर पर रहा. हालांकि आगे हिंदुस्तानीय प्याज को पाकिस्तान और चीन की सस्ती नई फसल से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है. खासकर खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व के बाजारों में. यदि निर्यात घटता है, तो घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है.
आगे क्या हो सकता है?
अगले कुछ सप्ताह प्याज बाजार के लिए काफी अहम रहेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार प्रशासन इन बातों पर नजर रखेगी.
- मानसून की स्थिति.
- खरीफ बुवाई की प्रगति.
- प्रशासनी खरीद की रफ्तार.
- मंडियों में आवक.
- खुदरा कीमतों में बदलाव.
- सट्टेबाजी की गतिविधियां.
जरूरत पड़ने पर प्रशासन बफर स्टॉक का इस्तेमाल करके बाजार में अतिरिक्त प्याज भी उतार सकती है.
आम लोगों के लिए क्या मतलब है?
यदि आप किसान हैं, तो प्रशासनी खरीद केंद्रों और नई दरों की जानकारी जरूर लें. यदि आप उपभोक्ता हैं, तो फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है. यदि आप व्यापारी हैं, तो मानसून और खरीफ फसल की प्रगति आने वाले महीनों में कीमतों की दिशा तय करेगी.
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