Delhi Riots 2020: इससे पहले, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
आरोपियों ने दी थी मौलिक अधिकारों की दलील
अदालत के समक्ष दायर अपनी नई जमानत याचिकाओं में उमर खालिद और शरजील इमाम ने तर्क दिया था कि मुकदमे की सुनवाई शुरू हुए बिना उन्हें लगातार जेल में रखना उनकी स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है. खालिद की ओर से याचिका में कहा गया था कि भले ही पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, लेकिन उसके बाद आए कुछ न्यायिक घटनाक्रमों से परिस्थितियों में बदलाव आया है.
Court denies bail to student activists Umar Khalid and Sharjeel Imam in 2020 Delhi riots larger-conspiracy case pic.twitter.com/sUFKf57NnH
— Press Trust of India (@PTI_News) July 4, 2026
उमर खालिद ने जमानत के लिए UAPA का दिया हवाला
उमर खालिद ने इसी साल मई महीने में एक अन्य मामले में अदालत द्वारा की गई उस टिप्पणी का विशेष रूप से उल्लेख किया था, जिसमें कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) जैसी सख्त धाराओं के तहत भी जमानत एक नियम है और जेल अपवाद.
क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2020 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी. इस दंगे में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य लोगों पर इस हिंसा के पीछे एक व्यापक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए आतंकवाद-रोधी कानून (UAPA) और हिंदुस्तानीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
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