नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर। पूर्व मुखिया शशिनाथ झा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत मामले में दोषी ठहराए गए अभियुक्तों की सजा को निलंबित कर उन्हें जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अभियुक्तों को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले और उसमें दर्ज साक्ष्यों के विश्लेषण पर विचार किया। अदालत ने कहा कि केवल प्राथमिकी दर्ज होने में देरी जैसे आधार पर ट्रायल कोर्ट के विस्तृत फैसले को प्रथम दृष्टया गलत नहीं माना जा सकता। मामले में ट्रायल कोर्ट ने अर्जुन दास उर्फ कारिया, निलेंद्र गिरि, हिमांशु राय, सुनील कुमार और सुमित कुमार उर्फ फुचुकिया को शशिनाथ झा की हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने सभी को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। एक अभियुक्त को आर्म्स एक्ट के तहत भी आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अभियुक्तों ने पटना हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई लंबित रहने के दौरान हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2024 को अभियुक्तों की सजा को स्थगित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश को मृतक की पत्नी माधुरी देवी और बिहार प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के सजा स्थगन और जमानत संबंधी आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने सभी संबंधित सजायाफ्ता अभियुक्तों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है। हालांकि, उनकी आपराधिक अपीलें हाईकोर्ट में लंबित रहेंगी और अभियुक्त अपनी अपीलों की शीघ्र सुनवाई के लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। पंचायत में विवाद सुलझाने पहुंचे थे शशिनाथ झा घटना 6 अगस्त 2021 को मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग गांव में हुई थी। पूर्व मुखिया शशिनाथ झा गांव में पंचायत के माध्यम से एक विवाद सुलझाने के लिए पहुंचे थे। बताया गया कि पंचायत समाप्त होने के बाद जब वह अपने चारपहिया वाहन में बैठने जा रहे थे, तभी पहले से घात लगाए हमलावरों ने उन पर गोलीबारी कर दी। गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच की थी। बाद में मामला न्यायालय में पहुंचा और सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपितों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए अभियुक्तों को दो सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।