त्रिशूली और नारायणी नदी के पुल पर मौजूद नया विचार के रिपोर्टर चंदन ने एक प्रत्यक्षदर्शी से बात की, जिसने बाढ़ का ऐसा खौफनाक मंजर देखा, जिसे याद कर आज भी उसकी रूह कांप उठती है. उसने बताया कि तेज बहाव में सब कुछ बहता जा रहा था. तभी उसकी नजर पानी में तैरती दो लाशों पर पड़ी. एक शव की हड्डियां तक बाहर निकली हुई थीं, जबकि दूसरा शव बुरी तरह क्षत-विक्षत होकर फुटबॉल की तरह गोल नजर आ रहा था. उसकी लगभग सारी हड्डियां टूट चुकी थीं. आंखों के सामने मौत का यह वीभत्स मंजर देखकर वह भीतर तक टूट गया.
नेपाल में बाढ़ की तबाही का खौफनाक मंजर देखने वाला यह प्रत्यक्षदर्शी झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला है. उसने बताया कि इस भयावह स्थिति के बीच घर से लगातार फोन आ रहे हैं. परिवार और रिश्तेदार बार-बार उसे वापस लौटने के लिए कह रहे हैं. सैकड़ों फोन उसके पास आ चुके हैं. हर कोई उसकी सलामती को लेकर चिंतित है. वह परिवार को समझाता है कि जहां है, सुरक्षित है. लेकिन इन फोन कॉल्स के बीच उसकी आवाज में भी अपनों की चिंता साफ झलकती है. उसने कहा, “हम यहां कमाने आए हैं, इसलिए लौटना आसान नहीं है.”
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लग रहा था कि देखते ही देखते सारे पुल बह जाएंगे
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बाढ़ का मंजर इतना भयावह था कि ऐसा लग रहा था मानो आसमान टूटकर जमीन पर आ जाएगा और देखते ही देखते सारे पुल बह जाएंगे. नदियों का पानी पूरी तरह काला पड़ चुका था. तेज धार के साथ मलबे और शव बहते हुए आ रहे थे. हालात इतने खौफनाक थे कि बड़ी-बड़ी मछलियां भी पानी से निकलकर तड़प रही थीं. पानी इतना गंदा और जहरीला हो चुका था कि वे खुद को बचाने के लिए छटपटा रही थीं. प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, कई मछलियां 10 से 15 किलो तक की थीं. चारों तरफ तबाही, चीख-पुकार और मौत का सन्नाटा पसरा था.
हजारीबाग निवासी नारायण महतो इन दिनों नेपाल के देवघाट के पास स्थित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं.
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