अंतरिक्ष की दुनिया अब सिर्फ चांद तक पहुंचने की होड़ तक सीमित नहीं है. अब सवाल यह है कि इंसान चांद से आगे कितना दूर जा सकता है और वहां लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रह सकता है. इसी भविष्य को लेकर NASA की पूर्व अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने बड़ी बात कही है.
Williams ने कहा कि जैसे-जैसे इंसान चांद से आगे और ज्यादा दूर अंतरिक्ष में जाएगा, इंसान, रोबोट, AI और दूसरी तकनीकों को मिलकर काम करना होगा. उनके मुताबिक रोबोट किसी नए ग्रह या चांद पर पहले जाकर वहां की स्थिति को समझने में मदद कर सकते हैं, लेकिन आखिरकार वहां इंसान की मौजूदगी जरूरी होगी.
Sunita Williams ने इंसान और रोबोट को लेकर क्या कहा?
Sunita Williams ने अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए बताया कि भविष्य में रोबोट अंतरिक्ष की खोज में इंसानों की मदद करेंगे. वे चांद या मंगल पर जाकर वहां की परिस्थितियों को पहले समझ सकते हैं. लेकिन रोबोट उतना ही कर पाएंगे जितना उन्हें पहले से प्रोग्राम किया गया है.
उन्होंने कहा कि जब इंसान खुद वहां पहुंचेगा तो उसे ऐसी कई चीजें मिल सकती हैं, जिनके बारे में अभी जानकारी नहीं है. ऐसे में इंसान मौके के हिसाब से फैसला ले सकता है कि आगे क्या करना है.
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Williams ने इंसान, रोबोट और तकनीक के बीच इस सहयोग को एक तरह की “symbiosis” यानी साथ मिलकर काम करने वाली व्यवस्था बताया. उनके मुताबिक AI इंसानों की मदद करेगा, लेकिन किसी जगह पर जाकर स्थिति को समझने और अगला फैसला लेने के लिए इंसान की भूमिका जरूरी रहेगी.
यह बात उन्होंने अपने अंतरिक्ष अनुभव से जोड़कर भी समझाई. उन्होंने कहा कि धरती पर अगर हमारे मन में कोई सवाल आता है तो हम फोन निकालकर तुरंत जानकारी खोज सकते हैं. लेकिन International Space Station पर यह इतना आसान नहीं है. वहां अंतरिक्ष यात्रियों को कई मामलों में धरती पर मौजूद टीमों से संपर्क करना पड़ता है.
भविष्य में जब इंसान धरती से और दूर जाएगा, तब हर छोटी समस्या के लिए धरती की टीम से मदद लेना मुश्किल हो सकता है. इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने वाली तकनीक जरूरी होगी.
Deep Space Mission में सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
धरती की निचली कक्षा में कुछ समय बिताना और Deep Space में लंबे समय तक रहना बिल्कुल अलग चुनौती है. दूरी बढ़ने के साथ संचार में समय लग सकता है और किसी आपात स्थिति में धरती से तुरंत मदद पहुंचाना संभव नहीं होगा.
ऐसे मिशनों में ऑक्सीजन, पानी, भोजन, तापमान, रेडिएशन से सुरक्षा, मेडिकल सहायता और ऊर्जा जैसी व्यवस्थाओं को लंबे समय तक बनाए रखना होगा. इसके साथ अंतरिक्ष यात्रियों को ऐसी तकनीक भी चाहिए होगी जो उन्हें खुद समस्या समझने और समाधान निकालने में मदद करे.
यही वजह है कि भविष्य की Space Station और Deep Space Missions में AI, Robotics, Autonomous Systems और बेहतर onboard information systems की भूमिका बढ़ने वाली है.
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चांद से आगे की असली चुनौती
मानव अंतरिक्ष उड़ान का अगला दौर सिर्फ यह साबित करने का नहीं होगा कि इंसान कितनी दूर जा सकता है. असली चुनौती यह होगी कि वह वहां सुरक्षित, आत्मनिर्भर और लंबे समय तक कैसे रह सकता है.
सुनीता विलियम्स के मुताबिक इसका जवाब इंसान और तकनीक के साथ मिलकर काम करने में है. रोबोट और AI रास्ता आसान कर सकते हैं, नई जगहों की जानकारी जुटा सकते हैं और इंसानों की मदद कर सकते हैं. लेकिन जब सामने ऐसी स्थिति आएगी जिसका जवाब पहले से किसी मशीन को नहीं पता, तब इंसान का फैसला सबसे महत्वपूर्ण होगा.
Sunita Williams ने यह बात 9 सितंबर 2026 को Bengaluru Space Expo (BSX) 2026 में कही. उन्होंने Bangalore International Exhibition Centre (BIEC), Bengaluru में आयोजित “The Next Chapter of Space: A Conversation on Exploration, Science and Innovation” सत्र में अंतरिक्ष के भविष्य पर चर्चा की. इस सत्र में उनके साथ Group Captain Angad Pratap और Tom Shelley भी मौजूद थे.
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