हिंदुस्तान में जब भी मिडिल क्लास के सपनों और सफर की बात होती है, तो एक नाम जेहन में सबसे पहले आता है-Bajaj. यह सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों के लिए भरोसे का दूसरा नाम है. कभी “बुलंद हिंदुस्तान की बुलंद तस्वीर” के साथ हर घर तक पहुंचने वाली यह कंपनी आज सिर्फ हिंदुस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि 100 से ज्यादा देशों में अपनी धाक जमा चुकी है.
आखिर कैसे स्कूटर के लिए वर्षों की वेटिंग लिस्ट लगवाने वाली कंपनी ने रातों-रात स्कूटर बनाना बंद कर दिया? कैसे Pulsar ने युवाओं को स्पीड का नया चस्का लगाया? और कैसे यह ब्रांड आज इलेक्ट्रिक (EV) और CNG की क्रांति का नेतृत्व कर रहा है? आइए, Bajaj Auto के इस शानदार सफर को विस्तार से समझते हैं.
1940 के दशक में शुरू हुई कहानी
Bajaj Auto ने शुरुआती दौर में हिंदुस्तान में दोपहिया और तीन-पहिया वाहनों के कारोबार पर ध्यान दिया. 1948 में कंपनी ने हिंदुस्तान में इंपोर्ट की हुई टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स की बिक्री शुरू की.
1959 में उसे देश में टू और थ्री-व्हीलर्स बनाने का लाइसेंस मिला. इसके अगले साल Akurdi में पहला प्लांट स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा और कंपनी ने Piaggio के लाइसेंस के तहत Vespa 150 का उत्पादन शुरू किया.
यह वह समय था जब हिंदुस्तान में निजी वाहन हर परिवार की पहुंच में नहीं थे. कार महंगी थी और सार्वजनिक परिवहन हर जगह उपलब्ध नहीं था. ऐसे में स्कूटर मिडिल क्लास फैमिली के लिए एक प्रैक्टिकल सॉल्यूशन बनकर उभरा. Bajaj ने इसी जरूरत को पहचाना. और फिर आया वह नाम जिसने कंपनी को घर-घर पहुंचा दिया.
1990 के दशक में बदलने लगा बाजार, Bajaj के सामने बड़ी चुनौती
समय के साथ हिंदुस्तानीय ग्राहक की पसंद बदलने लगी. युवा आबादी बढ़ रही थी. मोटरसाइकिल को सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि स्टाइल और परफॉर्मेंस से जोड़कर देखा जाने लगा. दूसरी कंपनियां मोटरसाइकिल सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ रही थीं. Bajaj के लिए यह बड़ा सवाल था- क्या कंपनी हमेशा स्कूटर के भरोसे आगे बढ़ सकती है? जवाब था- नहीं.
यही वह दौर था जब Bajaj ने मोटरसाइकिल सेगमेंट को गंभीरता से लेना शुरू किया. कंपनी ने Kawasaki के साथ पार्टनरशिप की और मोटरसाइकिल पर अपना फोकस बढ़ाया. लेकिन Bajaj को ऐसी बाइक चाहिए थी जो सिर्फ एक और कम्यूटर मोटरसाइकिल न हो. उसे ऐसी बाइक चाहिए थी जो ब्रांड की पूरी पहचान बदल सके. और फिर आया साल 2001.
Bajaj ने सिर्फ Pulsar पर दांव नहीं लगाया
Pulsar की सफलता के बाद कंपनी ने समझ लिया था कि हर ग्राहक की जरूरत अलग है. इसलिए पोर्टफोलियो को भी अलग-अलग सेगमेंट में फैलाया गया. Platina और CT जैसे मॉडल्स को ज्यादा अफोर्डेबल कम्यूटर कस्टमर के लिए रखा गया.
Discover ने कम्यूटर सेगमेंट में अलग पहचान बनाने की कोशिश की. Avenger के जरिए Bajaj ने क्रूजर मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम मजबूत किया. वहीं Dominar के साथ कंपनी ने प्रीमियम और टूरिंग-फोकस्ड मोटरसाइकिल सेगमेंट को टार्गेट किया.
इसका मतलब साफ था- Bajaj सिर्फ एक मोटरसाइकिल कंपनी नहीं बनना चाहती थी; वह अलग-अलग प्राइस और कस्टमर सेगमेंट में अपनी जगह बनाना चाहती थी. लेकिन अगला बड़ा कदम हिंदुस्तान के बाहर था.
Triumph के साथ आया एक और Premium Chapter
अगर KTM ने Bajaj को परफॉर्मेंस मोटरसाइकिल की दुनिया में मजबूत किया, तो Triumph ने प्रीमियम modern-classic सेगमेंट का रास्ता खोला.
Bajaj Auto और Triumph मोटरसाइकिल ने 2020 में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की थी. इसके तहत मिड-कैपेसिटी मोटरसाइकिल के लिए नई प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी पर काम किया गया.
हिंदुस्तान में Triumph के 400cc मोटरसाइकिल का प्रोडक्शन Bajaj के चाकन प्लांट में होता है. FY2026 में KTM-Triumph बिजनेस ने करीब 2.25 लाख राइडर्स तक पहुंच बनाई और ग्लोबल रेवेन्यू लगभग ₹5,000 करोड़ रही.
इस पार्टनरशिप के तहत Speed 400, Scrambler 400 X और बाद में Thruxton 400 जैसे प्रोडक्ट्स ने हिंदुस्तानीय प्रीमियम मोटरसाइकिल मार्केट में Triumph की पहुंच बढ़ाई.
Bajaj सिर्फ बाइक और स्कूटर नहीं बनाती, तीन-पहिया कारोबार भी बड़ी ताकत
Bajaj Auto की कहानी में एक हिस्सा ऐसा है जिसकी चर्चा Pulsar और Chetak की तुलना में कम होती है- थ्री–व्हीलर. हिंदुस्तान में ऑटो-रिक्शा और कमर्शियल थ्री–व्हीलर की दुनिया में Bajaj की मजबूत पकड़ रही है.
कंपनी ने पैसेंजर कैरियर्स के साथ गुड्स कैरियर्स में भी बड़ा बिजनेस बनाया. FY2026 में Bajaj Auto का घरेलू थ्री-व्हीलर बिजनेस पहली बार 5 लाख यूनिट से ऊपर पहुंचा. यानी Bajaj का EV ट्रांजिशन सिर्फ Chetak तक सीमित नहीं है.
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