7 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी ने INDIA गठबंधन से अलग अपना विरोध प्रदर्शन किया. CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR में कथित गड़बड़ियों के विरोध में AAP ने दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. इसी दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अचानक जंतर-मंतर पर INDIA गठबंधन के प्रदर्शन का ऐलान कर दिया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम सांसदों और गठबंधन के सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया.कांग्रेस के प्रदर्शन के कारण AAP का आंदोलन मीडिया की सुर्खियों में उतनी जगह नहीं बना पाया, जितनी उसे उम्मीद थी.
ऐसे में सवाल है कि चुनाव आयोग के खिलाफ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अलग-अलग प्रदर्शन क्यों कर रही है?
कैसे अलग हैं AAP और कांग्रेस के रास्ते
- AAP और कांग्रेस की नेतृत्वक प्रतिद्वंद्विता इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए महत्वपूर्ण है. AAP और कांग्रेस के बीच दिल्ली की नेतृत्व में लंबे समय से सीधा मुकाबला रहा है.
- पंजाब में भी दोनों दल आमने-सामने हैं और वहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले हरियाणा में दोनों पार्टियों के बीच नेतृत्वक दूरी देखने को मिली थी.
- इसलिए AAP के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले किसी बड़े नेतृत्वक कार्यक्रम में शामिल होना नेतृत्वक तौर पर विरोधाभास वाला स्थिति है.
विपक्ष ने इस मुद्दे को संसद तक सीमित रखने की बजाय सड़क पर आंदोलन का रास्ता चुना है. 6 अक्टूबर को राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के कई सांसद चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने निकले, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया. इसके बाद राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने आकाशवाणी भवन के पास धरना दिया. बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. 7 अक्टूबर को भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन, पुलिस ने फिर से उन्हें हिरासत में ले लिया.
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