बांकीपुर के सबक से बदला सियासी मिजाज, बिहार MLC चुनाव में सवर्णों पर मेहरबान हुए दल, महागठबंधन ने एनडीए को भी पछाड़ा
Bihar MLC Election: बिहार की नेतृत्व में जब भी वोटों के गणित की बात होती है, तो जातीय समीकरणों की चर्चा सबसे ऊपर रहती है. हाल ही में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सवर्ण मतदाताओं ने एनडीए के प्रति जो नाराजगी दिखाई थी, उसने सभी प्रमुख नेतृत्वक दलों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. उस चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज के मजबूत उभार ने एनडीए और महागठबंधन दोनों के पारंपरिक गणित को हिलाकर रख दिया था. इसी सबक को ध्यान में रखते हुए बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर हो रहे चुनाव में सवर्णों को अपने पाले में लाने की खुली होड़ मच गई है. महागठबंधन का चौकाने वाला दांव आमतौर पर सामाजिक न्याय और पिछड़े-दलित समीकरणों पर ध्यान देने वाले महागठबंधन ने इस बार एनडीए को भी पीछे छोड़ दिया है. एनडीए ने जहां 8 एमएलसी सीटों में से 5 पर सवर्ण चेहरों को मौका दिया है, वहीं महागठबंधन ने एक कदम आगे बढ़कर 6 सीटों पर सवर्ण उम्मीदवार उतार दिए हैं. इस नए दांव से बिहार का नेतृत्वक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है. पटना और दरभंगा में राजद ने स्पोर्ट्सा सवर्ण कार्ड राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पटना और दरभंगा सीट पर सवर्ण प्रत्याशियों को उतारकर सबको चौंका दिया है. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को टिकट दिया है. डॉ. संजीव कुमार पूर्व मंत्री आर एन सिंह के बेटे हैं और परबत्ता से विधायक रह चुके हैं. अक्टूबर 2025 में जदयू छोड़कर राजद में शामिल हुए डॉ. संजीव पेशे से चिकित्सक हैं. उन्होंने अगुआनी-सुल्तानगंज पुल निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का मुद्दा उठाकर अपनी ही तत्कालीन प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया था. दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राजद ने अनिल कुमार झा को अपना उम्मीदवार बनाया है. अनिल कुमार झा लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्होंने इस चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. तिरहुत में डॉ. रश्मि विनायक गौतम पर राजद का भरोसा तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राजद ने डॉ. रश्मि विनायक गौतम को मैदान में उतारकर लड़ाई को काफी कड़ा बना दिया है. वे मुजफ्फरपुर के कद्दावर नेता रहे दिवंगत रघुनाथ पांडेय के परिवार से ताल्लुक रखती हैं. पिछले उपचुनाव में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपविजेता रही थीं. इस बार राजद के चुनाव चिह्न पर उतरने से उन्हें पार्टी के पारंपरिक एमवाई (MY) वोट बैंक के साथ-साथ सवर्ण, विशेषकर भूमिहार समाज का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है. कांग्रेस ने भी पुराने दिग्गजों पर लगाया दांव महागठबंधन की सहयोगी कांग्रेस ने भी सवर्ण चेहरों पर ही भरोसा जताया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा एक बार फिर मैदान में हैं. मणिगाछी से पूर्व विधायक रहे मदन मोहन झा मई 2014 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं. वे दरभंगा शिक्षक सीट से तीसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इसके अलावा, कांग्रेस ने दरभंगा स्नातक सीट से बिहार प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष रजनीकांत पाठक को टिकट दिया है. रजनीकांत पाठक 2020 में इसी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं और संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. वामदल भी पीछे नहीं महागठबंधन के घटक दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. संजय कुमार सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है. संजय कुमार सिंह इस सीट से 2014 और 2020 में लगातार दो बार जीत हासिल कर चुके हैं. वे बिहार यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (BUTA) और FUSTAB के जनरल सेक्रेटरी भी रह चुके हैं, जिससे शिक्षकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. एनडीए की तरफ से बीजेपी और जदयू की रणनीति एनडीए की बात करें तो हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने अपने कोटे से 2 सवर्ण प्रत्याशियों को उतारा है. बीजेपी ने दरभंगा स्नातक सीट से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह पर दांव लगाया है. दूसरी तरफ, जनता दल यूनाइटेड ने अपने 4 में से 3 उम्मीदवार सवर्ण समाज से बनाए हैं. जदयू ने पटना स्नातक सीट से पूर्व मंत्री नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक सीट से अभिषेक झा और सारण शिक्षक सीट से आनंद पुष्कर को टिकट दिया है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें जदयू के अंदर सुगबुगाहट और आगे का नेतृत्वक समीकरण जदयू द्वारा 4 में से 3 सवर्णों को टिकट दिए जाने के बाद पार्टी के भीतर दबी जुबान से विरोध भी शुरू हो गया है. पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जदयू के पारंपरिक वोट बैंक यानी कुर्मी समाज से किसी को मौका नहीं मिला, जबकि विपक्षी दल राजद ने पटना स्नातक सीट से दिलीप कुमार उर्फ दिलीप पटेल को मैदान में उतार दिया है. कुल मिलाकर, इस बार का एमएलसी चुनाव केवल शिक्षकों या स्नातकों का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह सवर्ण मतदाताओं के विश्वास को जीतने की बड़ी नेतृत्वक परीक्षा बन चुका है. The post बांकीपुर के सबक से बदला सियासी मिजाज, बिहार MLC चुनाव में सवर्णों पर मेहरबान हुए दल, महागठबंधन ने एनडीए को भी पछाड़ा appeared first on Naya Vichar.

