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हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने हिमालयी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें एक बार फिर सामने ला दी है.

हालांकि इस घटना ने कई सवाल भी छोड़े हैं कि फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़ इतनी खतरनाक क्यों होती है? क्या भूकंप से भी बाढ़ आ सकती है? और नेपाल की पहाड़ी जमीन इस खतरे को क्यों बढ़ा देती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

फ्लैश फ्लड क्या होती है?

  • फ्लैश फ्लड का मतलब होता है बहुत कम समय में अचानक से आने वाली तेज बाढ़. इसमें नदी या नाले का पानी अचानक इतना बढ़ जाता है कि लोगों को संभलने या सुरक्षित जगह जाने का ज्यादा समय नहीं मिलता.

फ्लैश फ्लड यानी बहुत कम समय में अचानक और तेज रफ्तार से आने वाली बाढ़

  • पहाड़ों में इसका खतरा और ज्यादा होता है. यहां जमीन पर ढलान ज्यादा होती है. इसलिए ऊपर से आने वाला पानी तेजी से नीचे की तरफ जाता है.
  • इस दौरान पानी अपने साथ मिट्टी, पत्थर, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर लाता है. इस वजह से फ्लैश फ्लड सिर्फ पानी की बाढ़ नहीं रहती, बल्कि एक खतरनाक धारा बन जाती है.

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भूकंप से बाढ़ कैसे आती है?

  • भूकंप सीधे तौर पर बाढ़ नहीं लाता. लेकिन वह ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकता है, जो बाद में अचानक बाढ़ की वजह बन जाएं.
  • हिमालय के ऊंचे पहाड़ों पर बड़ी मात्रा में बर्फ, ग्लेशियर और चट्टान मौजूद हैं. इनमें से कुछ हिस्से काफी अस्थिर होते हैं. जब भूकंप के तेज झटके आते हैं तो पहाड़ की ये अस्थिर चट्टानें और बर्फ खिसक सकती हैं.
  • अगर बड़ी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मिट्टी अचानक नीचे गिरने लगे तो इसे हिमस्खलन या चट्टानी मलबे का बहाव कहा जाता है.

और अगर यह मलबा किसी नदी या झील में गिर जाए तो इसके बाद एक और खतरनाक स्थिति बन सकती है.

नदी में मलबा गिरने के बाद क्या होता है?

  • पहाड़ से आया भारी मलबा नदी और झील के दबाव को बढ़ाने का काम करता है और कभी कभी यह उसके पानी के बहाव को भी रोक देता है.
  • रास्ता रूक जाने पर पानी उसके पीछे जमा होने लगता है. इससे वहां कुछ समय के लिए एक छोटी झील जैसी स्थिति बन सकती है.
  • लेकिन यह कोई पक्का बांध नहीं होता. यह मिट्टी, पत्थर और बर्फ से बना अस्थायी बांध होता है. पानी लगातार जमा होने से उस पर दबाव बढ़ता रहता है.
  • और जब यह अवरोध टूटता है तो पीछे जमा पानी अचानक बहुत तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहता है. पानी के साथ पहले से जमा पत्थर और मलबा भी बहने लगता है. यह स्थिति फ्लैश फ्लड को बेहद खतरनाक बना सकती है.

हालांकि किसी खास घटना में वास्तव में यही हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद की जाती है.

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नेपाल में बाढ़ का खतरा ज्यादा क्यों है?

  • नेपाल की भौगोलिक स्थिति इस खतरे को बढ़ाती है. नेपाल का बड़ा हिस्सा पहाड़ों और हिमालयी क्षेत्र में है. यहां ऊंचे पहाड़ों के बीच कई जगह नदियां बहुत संकरी और गहरी घाटियों से होकर गुजरती हैं.
  • जब अचानक बहुत ज्यादा पानी आता है तो उसे फैलने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिलती और पानी संकरी घाटी में तेजी से आगे बढ़ता है.
  • इसके अलावा पहाड़ों की ढलान भी काफी तेज होती है. ऊंचाई से नीचे आते समय पानी की रफ्तार बढ़ती जाती है.

पहाड़ों के बाढ़ में सिर्फ पानी का ही खतरा नहीं रहता

  • पहाड़ों में बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा खतरा सिर्फ पानी नहीं होता. तेज बहाव नदी के किनारे की मिट्टी और चट्टानों को भी काट देता है.
  • इसके कारण पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आने लगता है. यही मलबा सड़कें बंद कर सकता है, पुलों को नुकसान पहुंचा सकता है और बिजली तथा संचार व्यवस्था को तोड़ सकता है.
  • बचाव दलों के लिए भी ऐसी स्थिति काफी मुश्किल होती है. सड़कें बंद होने पर राहत सामग्री और बचावकर्मी प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाते. खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों में हेलीकॉप्टर उतारने की मुश्किल भी चुनौती बढ़ा देती है.

ग्लेशियर झील भी बन सकती है खतरे की वजह

  • हिमालय में अचानक बाढ़ का एक और कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, यानी ग्लेशियर झील का अचानक टूटना हो सकता है.
  • ग्लेशियर के पास बर्फ और पत्थरों के बीच पानी जमा होकर झील बना सकता है. अगर इस झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट जाए तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है.
  • ऐसी बाढ़ काफी दूर तक असर डाल सकती है और रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है.

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नेपाल की बाढ़ का असर हिंदुस्तान तक क्यों पहुंचता है?

  • नेपाल की कई बड़ी नदियां आगे चलकर हिंदुस्तान में प्रवेश करती हैं. इसलिए नेपाल के पहाड़ी इलाकों में आई बड़ी बाढ़ का असर हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों में भी पड़ सकता है.
  • बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इन नदियों का पानी पहुंचता है. अगर ऊपर पहाड़ों में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ता है तो नीचे के इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
  • यही वजह है कि हिमालय में होने वाली ऐसी घटनाओं पर सिर्फ नेपाल में ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान के निचले इलाकों में भी नजर रखी जाती है.

हालांकि हिमालय में आने वाली फ्लैश फ्लड की हर घटना की वजह भूकंप और उसके बाद होने वाली प्रक्रिया हो, यह जरूरी नहीं है. फ्लैश फ्लड की वजह कभी-कभी भारी बारिश, बादल फटने, ग्लेशियल झील टूटने या दूसरे कारण भी हो सकती है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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