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Author name: Vinod Jha

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‘अपनी औकात में रहो’, हॉकी इंडिया महासचिव ने असुंता लकड़ा को धमकाया

पूर्व हिंदुस्तानीय स्त्री हॉकी टीम की कप्तान असुंता लकड़ा ने हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. लकड़ा ने दावा किया कि उन्हें एक यौन उत्पीड़न मामले में आवाज उठाने के कारण धमकाया गया और उनके हॉकी करियर को खत्म करने की चेतावनी दी गई. लकड़ा के अनुसार, 9 मई को शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच उन्हें भोलानाथ सिंह का फोन आया था. उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान महासचिव ने उनसे कहा, “असुंता, अपनी औकात में रहो. जितना बोलना चाहिए, उतना ही बोलो.” ‘मैं लड़कियों की सुरक्षा के लिए बोल रही हूं’ लकड़ा ने कहा कि बाद में वह अपने पति के साथ महासचिव के कार्यालय भी गई थीं. वहां उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी के निजी मामलों में दखल नहीं दे रही हैं, बल्कि युवा स्त्री खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रही हैं. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नाम कई लड़कियों के साथ जुड़ना गंभीर चिंता का विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. ‘करियर रुकवा दूंगा’ कहकर दी धमकी पूर्व कप्तान का आरोप है कि मुलाकात के दौरान भोलानाथ सिंह ने उन्हें सीधे तौर पर धमकाते हुए कहा, “मैं तुम्हारा हॉकी करियर रुकवा दूंगा.” लकड़ा ने सवाल उठाया कि क्या खिलाड़ियों को ऐसी धमकियां सहते हुए चुप रहना चाहिए, जबकि वे खिलाड़ियों की सुरक्षा और हितों की बात कर रहे हों. सुधीर गोला के खिलाफ भी लकड़ा का गंभीर आरोप चयनकर्ता असुंता लकड़ा ने पूर्व कोच सुधीर गोला पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. लकड़ा ने कहा कि सुधीर गोला के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हैं और स्त्री खिलाड़ी डरी हुई हैं, फिर भी उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है. उनका दावा है कि गोला लड़कियों के हॉस्टल में देर रात पहुंचे थे और खिलाड़ियों को लाइन में खड़ा होने के लिए कहा था, साथ ही कोर्ट जाने की धमकी भी दी थी. लकड़ा के मुताबिक, खिलाड़ियों ने लिखित बयान भी दिए हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायत उठाने वालों को ही धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत झारखंड के स्पोर्ट्स मंत्री और मुख्यमंत्री से भी की गई थी. लकड़ा ने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति पर आरोप हैं, वही जांच प्रक्रिया से जुड़ा दिखाई दे रहा है, जो निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. देश के लिए स्पोर्ट्सने का किया जिक्र असुंता लकड़ा ने कहा कि उन्होंने हिंदुस्तान के लिए स्पोर्ट्सा है, पदक जीते हैं और देश की सेवा की है. ऐसे में खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है. उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर बोलने वालों को ही धमकाया जाएगा, तो यह स्पोर्ट्स व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है. यौन उत्पीड़न मामले को लेकर बढ़ा विवाद लकड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे एक कोच को बचाने की कोशिश की जा रही है. उनके इन आरोपों के बाद हॉकी प्रशासन और स्पोर्ट्स जगत में नया विवाद खड़ा हो गया है. मामले पर हॉकी इंडिया की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है. ये भी पढ़ें: एशियन गेम्स के लिए स्त्री हॉकी टीम का चयन, चयनकर्ता असुंता को रखा गया अलग The post ‘अपनी औकात में रहो’, हॉकी इंडिया महासचिव ने असुंता लकड़ा को धमकाया appeared first on Naya Vichar.

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10वीं के बाद बनना है इंजीनियर? ये हैं बिहार के टॉप सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज

Top Polytechnic College In Bihar: बिहार में पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है. BCECE ने अभी 8 जुलाई को ही पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी किया है. यानी जिन स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया था, उन्हें रैंक के हिसाब से कौन सा कॉलेज मिला है, इसकी पहली लिस्ट आ चुकी है. एडमिशन लेने से पहले सभी स्टूडेंट्स चाहते हैं कि उन्हें कोई प्रशासनी कॉलेज अलॉट हो, कम पैसे में कोर्स कर पूरा हो जाए.  ये हैं बिहार के टॉप पॉलिटेक्निक कॉलेज  बिहार के टॉप पॉलिटेक्निक कॉलेजों की बात करें, तो प्रशासनी पॉलिटेक्निक कॉलेज सबसे बेस्ट माने जाते हैं. यहां फीस बिल्कुल न के बराबर होती है. साथ ही साथ लैब्स और फैकल्टी बेहतरीन होते हैं. बिहार के वैसे स्टूडेंट्स जो कम पैसे में पॉलिटेक्निक करना चाहते है, वो 10वीं परीक्षा पास करने के बाद एडमिशन ले सकते है. पूरे बिहार में वैसे तो कुल 46 प्रशासनी पॉलिटेक्निक कॉलेज हैं, जिसे बेसिक स्ट्रक्चर, पढ़ाई का लेवल और प्लेसमेंट के मामले में बढ़िया माना जाता है. यहां हम उन्ही में से 4-5 कॉलेजों के बारे में बताते हैं. न्यू गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, पटना प्रशासनी पॉलिटेक्निक कॉलेज की लिस्ट में पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया स्थित न्यू गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज राज्य का नंबर 1 कॉलेज माना जाता है. यहां सिविल, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस जैसे ब्रांच में एडमिशन ले सकते हैं. इस कॉलेज का प्लेसमेंट रिकॉर्ड सबसे बेहतर माना जाता है. Bhagalpur Polytechnic College Fee Detail गवर्नमेंट वीमेन्स पॉलिटेक्निक कॉलेज, पटना पटना के फुलवारी शरीफ में विशेष रूप से छात्राओं के लिए भी एक प्रशासनी पॉलिटेक्निक कॉलेज है, जो लड़कियों को इंजीनियरिंग क्षेत्र में सुरक्षित और बेहतरीन पढ़ाई का सुविधा देता है. इस कॉलेज में खासकर सिविल, इलेक्ट्रीकल एंड कंप्यूटर साइंस जैसे ब्रांच में एडमिशन की सुविधा उपलब्ध हैं. ये रहे कुछ टॉप प्रशासनी कॉलेज जहां आप एडमिशन ले सकते हैं. इसके अलावे भी बिहार के अलग-अलग जिलों में बहुत सारे प्रशासनी कॉलेज हैं, जिसकी फीस बहुत कम रखी गई है. इसकी जानकारी संबंधित कॉलेज और BCECE Board के ऑफिशियल वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in से ले सकते हैं.  यह भी पढ़ें- हिंदी में कर सकते हैं AI की पढ़ाई, IIT Madras ने शुरू किया नया कोर्स The post 10वीं के बाद बनना है इंजीनियर? ये हैं बिहार के टॉप प्रशासनी पॉलिटेक्निक कॉलेज appeared first on Naya Vichar.

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सतलुज विवाद :127 कट्स,तीन बार बदला नाम,30 साल पहले लापता बैंक कर्मचारी की कहानी 48 घंटे में गायब

Satluj Film controversy : शुक्रवार की शाम अक्सर मैं और मेरा एक साथी किसी अच्छी फिल्म के साथ बिताते हैं. इस शुक्रवार हमने सतलुज देखने का प्लान किया. बाहर रिमझिम बारिश, सामने टीवी की स्क्रीन और मूड बिल्कुल फिल्मी. लेकिन इस बार कहानी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई. क्योंकि वो अब गायब कर दी गई थी. गूगल किया, तो बस इतना मालूम हुआ कि फिल्म हटा ली गई है. मगर क्यों? इसका कोई जवाब कहीं नहीं मिला. मालूम हुआ कि फिल्म 30 साल पहले लापता हुए एक व्यक्ति की कहानी पर आधारित है. अभी तक हमने तो हमेशा यही सुना था कि ‘गड़े मुर्दे नहीं उखाड़ते’, लेकिन यहां तो है इतिहास के उन मुर्दों को फिर से दफनाने की कोशिश हो रही है… नया विचार की स्पेशल स्टोरी सीरीज़ में आज हम उसी फैसले की पूरी तहकीकात करेंगे. जानेंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि 127 कट्स, तीन बार नाम बदलने और चार साल तक थिएटर में रिलीज का इंतज़ार करने के बाद भी दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ जब OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई, तो उसे महज 48 घंटे के भीतर ही वहां से हटाना पड़ गया. कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा? 1990 का दशक… पंजाब आतंकवाद, अलगाववाद और पुलिस अभियानों के बीच झुलस रहा था. गोलियों की आवाज और बम धमाकों से आम लोगों का जीवन अस्तव्यस्त था. हालात ऐसे की सैकड़ों परिवार दर-दर भटक रहे थे. इस बीच समाचारें आई कि पंजाब के कई इलाकों से बड़ी संख्या में युवा लापता हो रहे थे. दावा किया जा रहा था पुलिस उनका फर्जी मुठभेड़ कर रही है. एक बैंक कर्मचारी ने इन दावों और सवालों के जबाब तलाशने की जिम्मेवारी उठाई. जिसका नाम था जसवंत सिंह खालड़ा. 1952 में पंजाब के में जन्मे खालड़ा पेशे से बैंक कर्मचारी थे, लेकिन सामाजिक जीवन में वे शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार इकाई से भी जुड़े हुए थे. यही जुड़ाव उन्हें उन सावालों तक ले आया था. जब प्रशासनी रिकॉर्ड ने खड़े कर दिए सवाल खालड़ा ने लापता लोगों के मामलों की पड़ताल शुरू की. उनकी जांच उन्हें पंजाब के श्मशान घाटों और नगर निगम के रिकॉर्ड तक ले गई. महीनों तक दस्तावेज खंगालने के बाद उन्होंने दावा किया कि 1984 से 1994 के बीच हजारों लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया गया. उनका आरोप था कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जिन्हें कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से मारने के बाद उनकी पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी. 16 जनवरी 1995 को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इन दस्तावेजों को सार्वजनिक किया. यह दावा उस समय पंजाब पुलिस के लिए बड़ा आरोप था. हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन लोगों को लापता बताया जा रहा है, उनमें से कई फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश चले गए हैं और उनकी गुमशुदगी का ठीकरा पुलिस पर फोड़ा जा रहा है. लेकिन खालड़ा पीछे हटने को तैयार नहीं थे. उन्होंने पुलिस को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी. और फिर एक दिन… खालड़ा खुद लापता हो गए 6 सितंबर 1995 की सुबह, अमृतसर स्थित अपने घर के बाहर जसवंत सिंह खालड़ा कार धो रहे थे. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तभी एक सफेद वाहन वहां आकर रुका. कुछ हथियारबंद लोग उतरे और खालड़ा को अपने साथ ले गए. इसके बाद उन्हें फिर कभी जीवित नहीं देखा गया. शुरुआत में पंजाब पुलिस ने किसी भी तरह की गिरफ्तारी या अपहरण से इनकार किया. लेकिन खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपहरण का मामला दर्ज कराया और लगातार न्यायालय का दरवाजा खटखटाती रहीं. क्योंकि उसे अपने पति पर पूरा भरोसा था और पुलिस के इरादों से भी वो वाकिफ थी. वैसे भी जो व्यक्ति सिस्टम से लड़ रहा हो, सिस्टम उसको उसको लेकर कितना फ्रिकमंद रहता है. इसे कौन नहीं जानता… खैर कहानी में आगे बढ़ते हैं… CBI की जांच में क्या सामने आया? पुलिस की जांच बिरबल की खिचड़ी की तरह पक रही थी. पुलिस के इरादे से वाकिफ परमजीत कौर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और मामला पंजाब पुलिस से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया. CBI ने शुरू से जांच की और खालड़ा के पड़ोसी किरपाल सिंह रंधावा के बायन को आधार बनाया. किरपाल सिंह ने अपने बयान में दावा किया था कि खालड़ा के अपहरण में पंजाब पुलिस के अधिकारी शामिल थे. CBI को स्पेशल पुलिस ऑफिसर कुलदीप सिंह और अन्य गवाहों के बयान भी मिले. कुलदीप सिंह ने दावा किया कि खालड़ा को अवैध रूप से थाने में रखा गया, उनसे पूछताछ की गई और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उनके साथ मारपीट हुई. उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन गोली चलने की आवाज सुनने के बाद उन्होंने खालड़ा को खून से लथपथ देखा. CBI सारा स्पोर्ट्स समझ गई थी और उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि खालड़ा का अपहरण, अवैध हिरासत और हत्या पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों द्वारा की गई थी. जांच और अदालती सुनवाई के बाद इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया. खालड़ा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, एक सवाल बन गए जसवंत सिंह खालड़ा का शव कभी बरामद नहीं हुआ. लेकिन उनकी जांच ने उन हजारों कथित लावारिस शवों और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया. CBI ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में 2,097 ऐसे अंतिम संस्कारों का उल्लेख किया, जिनकी पहचान और मौत की परिस्थितियों पर खालड़ा ने सवाल उठाए थे. यही वजह है कि आज, तीन दशक बाद भी जसवंत सिंह खालड़ा का नाम केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि पंजाब के उस दौर के सबसे विवादित अध्यायों में से एक है. 127 कट्स… तीन नाम और 48 घंटे का सफर जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी सिर्फ अदालतों और जांच एजेंसियों तक सीमित नहीं रही. करीब तीन दशक बाद जब निर्देशक हनी त्रेहान ने इस कहानी को सिनेमा के पर्दे पर लाने की कोशिश की, तो विवाद एक बार फिर उसके साथ चल पड़ा. फिल्म का पहला नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था. पंजाब के इतिहास में यह शब्द सिखों के कथित नरसंहार के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है. बाद में

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वियतनाम के फु क्वोक आइलैंड के पास नाव पलटने से 15 भारतीय टूरिस्ट की मौत, बचाव कार्य जारी

वियतनाम के फु क्वोक आइलैंड के पास 32 हिंदुस्तानीय टूरिस्ट को ले जा रही एक नाव पलट गई है. वियतनाम में स्थित हिंदुस्तानीय दूतावास की ओर से यह जानकारी एक्स पर पोस्ट करके दी गई है. दूतावास के पोस्ट में कहा गया है कि एक दुखद घटना में, कुछ घंटे पहले वियतनाम में फु क्वोक आइलैंड के पास कई हिंदुस्तानीय टूरिस्ट को ले जा रही एक नाव पलट गई. घटना की सही जानकारी का पता लगाया जा रहा है और स्थानीय अधिकारियों द्वारा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. हिंदुस्तानीय दूतावास ने यह जानकारी भी दी है कि वे स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं. न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार इस बोट पर 32 लोग सवार थे जिनमें से 15 की मौत हो गई है, जबकि अन्य को बचा लिया गया है. दूतावास ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर हिंदुस्तानीय दूतावास की ओर से यह कहा गया है कि जानकारी और मदद देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी में हिंदुस्तान के कॉन्सुलेट जनरल और हनोई में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं. दूतावास ने पहले कंट्रोल रूम तक पहुंचने के लिए ये नंबर दिए हैं: 84362817930, 84915523714 और 84334520414. हनोई में दूसरे कंट्रोल रूम से 84913089165 पर संपर्क किया जा सकता है. समाचार अपडेट हो रही है… The post वियतनाम के फु क्वोक आइलैंड के पास नाव पलटने से 15 हिंदुस्तानीय टूरिस्ट की मौत, बचाव कार्य जारी appeared first on Naya Vichar.

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बदल रहा है ट्रेंड! साइंस स्ट्रीम में बढ़ी बेटियों की संख्या, सरकार ने जारी किए आंकड़े

STEM Education In India: हिंदुस्तान में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) शिक्षा के फील्ड में लगातार विकास हो रहा है. शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में STEM कोर्सेज में कुल रजिस्ट्रेशन बढ़कर 1.02 करोड़ (101.9 लाख) हो गया है. साथ ही, इन कोर्सेज में छात्राओं की भागीदारी भी बढ़कर 44% तक पहुंच गई है. एक दशक में बढ़ा STEM का नामांकन जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 में STEM कोर्सेज में 91.5 लाख छात्रों का रजिस्ट्रेशन था, जो 2023-24 में बढ़कर 101.9 लाख हो गया. इससे स्पष्ट है कि देश में STEM शिक्षा के प्रति स्टूडेंट्स का क्रेज बढ़ा है. छात्राओं की भागीदारी में भी इजाफा STEM शिक्षा में छात्राओं की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ी है. 2014-15 में जहां छात्राओं की भागीदारी 38% थी, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 44% हो गई. इसी अवधि में छात्रों की हिस्सेदारी 62% से घटकर 56% रह गई. ये आंकड़े दिखाते हैं कि STEM एजुकेशन में जेंडर इक्वालिटी आ रही है. क्या है STEM शिक्षा? STEM का मतलब Science (विज्ञान), Technology (प्रौद्योगिकी), Engineering (इंजीनियरिंग) और Mathematics (गणित) है. इन विषयों से जुड़े कोर्स छात्रों को इनोवेशन, रिसर्च, टेक्निकल विकास और फ्यूचर की नौकरियों के लिए तैयार करते हैं. क्या कहते हैं ये आंकड़े? STEM पाठ्यक्रमों में कुल नामांकन 91.5 लाख से बढ़कर 101.9 लाख हुआ. छात्राओं की भागीदारी 38% से बढ़कर 44% पहुंची. हिंदुस्तान का STEM इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है. साइंस और टेक्नोलॉजी शिक्षा में स्त्रीओं की बढ़ती भागीदारी भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. यह भी पढ़ें- 10 साल में 94 हजार प्रशासनी स्कूल घटे, NITI आयोग ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल The post बदल रहा है ट्रेंड! साइंस स्ट्रीम में बढ़ी बेटियों की संख्या, प्रशासन ने जारी किए आंकड़े appeared first on Naya Vichar.

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मेजर ध्यानचंद से रचिन रवींद्र तक, PM मोदी ने बताया भारत-न्यूजीलैंड का खास खेल कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने न्यूजीलैंड दौरे के दौरान शुक्रवार को ऑकलैंड में हिंदुस्तानीय समुदाय को संबोधित करते हुए हिंदुस्तान-न्यूजीलैंड संबंधों और स्पोर्ट्स सहयोग पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ऐसा देश है, जहां प्रतिभा का सम्मान किया जाता है और लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम में स्पोर्ट्स रहे हिंदुस्तानीय मूल के खिलाड़ियों रचिन रवींद्र, ईश सोढ़ी और एजाज पटेल का विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और स्पोर्ट्स संबंधों की मजबूत कड़ी हैं. मेजर ध्यानचंद को किया याद प्रधानमंत्री ने हिंदुस्तान और न्यूजीलैंड के बीच लंबे स्पोर्ट्स संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 100 साल पहले हिंदुस्तानीय हॉकी टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर गई थी. उस दौरे में मेजर ध्यानचंद के शानदार प्रदर्शन ने न्यूजीलैंड के लोगों का दिल जीत लिया था और उनकी हॉकी की हर तरफ चर्चा हुई थी. रग्बी में सहयोग बढ़ाने की वकालत पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच स्पोर्ट्स साझेदारी की अपार संभावनाएं बताते हुए कहा कि हिंदुस्तान रग्बी जैसे स्पोर्ट्सों में न्यूजीलैंड के अनुभव से सीखना चाहता है. उन्होंने हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित न्यूजीलैंड रग्बी और हिंदुस्तान रग्बी के संयुक्त कोचिंग कार्यक्रम को सकारात्मक शुरुआत बताया. स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी में भी साझेदारी की संभावना उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय रग्बी टीम ऑल ब्लैक्स की हालिया सफलता प्रेरणादायक है और हिंदुस्तान को रग्बी में आगे बढ़ने के लिए विशेषज्ञों तथा कोचों की जरूरत है. इसके अलावा पीएम मोदी ने स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप कार्यक्रम में उन्हें कई नवाचार और नए विचार देखने को मिले, जिन पर दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: MCG में दिखी हिंदुस्तान-ऑस्ट्रेलिया दोस्ती की झलक, PM मोदी ने स्टीव वॉ को दिया खास तोहफा The post मेजर ध्यानचंद से रचिन रवींद्र तक, PM मोदी ने बताया हिंदुस्तान-न्यूजीलैंड का खास स्पोर्ट्स कनेक्शन appeared first on Naya Vichar.

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सोना, जमीन और करोड़ों की दौलत, जानिए किस मंदिर के पास है कितना खजाना

Richest Temple in India: शायद ज्यादातर लोगों का जवाब ना में ही होगा. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हिंदुस्तान के कुछ मंदिरों के पास इतनी दौलत है, जितनी कई बड़ी कंपनियों और राज्यों के सालाना बजट के बराबर मानी जाती है. इनमें सोना, चांदी, करोड़ों रुपये की नकदी, हजारों एकड़ जमीन और बड़े निवेश शामिल हैं. आइए जानते हैं हिंदुस्तान के सबसे अमीर मंदिरों के बारे में और समझते हैं कि किस मंदिर के पास कितनी संपत्ति है. कौन-सा मंदिर है सबसे अमीर? सबसे पहले नाम आता है आंध्र प्रदेश के तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर का. TTD व्हाइट पेपर के मुताबिक इस मंदिर ट्रस्ट की कुल संपत्ति करीब ₹2.26 लाख करोड़ है. इसमें सोने की जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट, जमीन और निवेश शामिल हैं. मंदिर की सालाना आय ₹5,100 करोड़ से ज्यादा है, जबकि हर साल करीब ₹1,500 करोड़ का दान मिलता है. यहां 3 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (PC: Social Media) बाकी बड़े मंदिरों की कमाई कितनी है? देश के अन्य बड़े मंदिर भी संपत्ति और आय के मामले में काफी आगे हैं. शिरडी साईं बाबा मंदिर (महाराष्ट्र) की अनुमानित संपत्ति ₹2,500 से ₹3,000 करोड़ है. इसकी सालाना आय ₹400 से ₹700 करोड़ के बीच रहती है. ट्रस्ट अस्पताल, स्कूल और कई सामाजिक कल्याण योजनाएं भी चलाता है. गुरुवायूर मंदिर (PC: Wikipedia) श्री माता वैष्णो देवी श्राइन (जम्मू-कश्मीर) की संपत्ति ₹2,000 करोड़ से ज्यादा है. वित्त वर्ष 2023-24 में इसकी कुल आय ₹683 करोड़ रही, जबकि सिर्फ चढ़ावे और दान से ₹255 करोड़ मिले. यहां की आय का बड़ा हिस्सा यात्रा, ठहरने और हेलीकॉप्टर सेवा से भी आता है. सिद्धिविनायक मंदिर (PC: Official Website) इस सूची में और कौन-कौन से मंदिर शामिल हैं? इनके अलावा स्वर्ण मंदिर (अमृतसर), काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), जगन्नाथ मंदिर (पुरी), सोमनाथ मंदिर (गुजरात), अयोध्या राम मंदिर, मीनाक्षी अम्मन मंदिर (मदुरै), सबरीमाला अयप्पा मंदिर (केरल) और महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन) भी देश के सबसे संपन्न मंदिरों में गिने जाते हैं. हालांकि इन मंदिरों की कुल संपत्ति का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन इनके पास हजारों एकड़ जमीन, कीमती आभूषण और करोड़ों रुपये की संपत्ति है. अयोध्या राम मंदिर को उद्घाटन के बाद से ₹3,500 करोड़ से ज्यादा का दान मिल चुका है. सबरीमाला अयप्पा मंदिर तीर्थ सीजन के दौरान हर साल ₹300 करोड़ से ज्यादा का संग्रह करता है. वहीं स्वर्ण मंदिर को हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का दान मिलता है, काशी विश्वनाथ मंदिर की अनुमानित संपत्ति ₹500 करोड़ से अधिक बताई जाती है, जगन्नाथ मंदिर के पास हजारों एकड़ जमीन और बहुमूल्य आभूषण हैं, सोमनाथ मंदिर की संपत्ति भी सैकड़ों करोड़ रुपये आंकी जाती है, जबकि महाकालेश्वर मंदिर को हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा मिलता है. आखिर मंदिरों के पास इतनी संपत्ति कैसे आई? इन मंदिरों की संपत्ति सिर्फ आज के दान की वजह से नहीं है. सदियों से श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे, सोना-चांदी, जमीन, निवेश और ट्रस्ट की वित्तीय योजनाओं ने इनकी संपत्ति को लगातार बढ़ाया है. यही वजह है कि आज ये मंदिर सिर्फ आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि देश के सबसे संपन्न धार्मिक संस्थानों में भी शामिल हैं. ये भी पढ़ें: एक प्लेन क्रैश के बाद बदल गई खिड़कियों की डिजाइन, जानिए क्यों The post सोना, जमीन और करोड़ों की दौलत, जानिए किस मंदिर के पास है कितना खजाना appeared first on Naya Vichar.

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दार्जिलिंग में भूस्खलन के बाद NH 55 बंद, 250 लोग राहत शिविरों में, टॉय ट्रेन की सेवा ठप

उत्तर बंगाल में लगातार 3 दिन से हो रही वर्षा के कारण दार्जिलिंग की पहाड़ियों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. तिनधरिया और मिरिक क्षेत्र में भूस्खलन की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 55 (NH 55) बंद हो गयी है. तिनधरिया में मलबा गिरने से एक घर, एक ट्रक और 2 बाइक मलबे में दब गये. सुरक्षा कारणों से दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे यानी टॉय ट्रेन सेवा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. मिरिक-सुखिया पोखरी मार्ग पर जगह सड़कें धंसीं मिरिक-सुखिया पोखरी मार्ग पर भी कई जगह सड़कें धंस गयी हैं. दुधिया का पुराना ब्रिज भी वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है, ऐसी सूचना आ रही है. एनडीआरएफ की टीम राहत और बचाव कार्य में लगीं जिला प्रशासन और NDRF की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं. मिरिक और नागराकाटा इलाके से अब तक 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालकर मिरिक, कलिम्पोंग में बनाये गये 3 राहत शिविरों में रखा गया है. ये भी पढ़ें: बंगाल पर ‘मॉन्स्टर मानसून’ का खतरा, 72 घंटे में कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल में मूसलाधार वर्षा का अलर्ट मलबा हटाने में जुटे पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी पश्चिम बंगाल प्रशासन के आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि प्रभावित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता और अस्थायी आवास दिया जायेगा. सड़कों से मलबा हटाने के लिए PWD और स्थानीय एजेंसियां युद्धस्तर पर काम कर रही हैं. मौसम विभाग का अलर्ट IMD ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इसका मतलब यह है कि इन जिलों में अत्यधिक बारिश होने की संभावना है. विभाग के अनुसार, अगले 24-48 घंटे में भारी बारिश जारी रह सकती है, जिससे और भू-स्खलन होने की आशंका है. ये भी पढ़ें: बंगाल की खाड़ी में गहराया निम्न दबाव, समुद्र में उठीं ऊंची लहरें, 9 जुलाई तक वर्षा का अलर्ट पुलिस ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर दार्जिलिंग पुलिस ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर +91 91478 89078 जारी किया है. प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के पास न जाने और जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है. अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लगातार वर्षा को देखते हुए प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है. The post दार्जिलिंग में भूस्खलन के बाद NH 55 बंद, 250 लोग राहत शिविरों में, टॉय ट्रेन की सेवा ठप appeared first on Naya Vichar.

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गर्म तेल के छींटों से हर बार जल जाता है हाथ? जानिए बचाव का आसान तरीका

Kitchen Tips: हिंदुस्तानीय रसोई में तड़का सिर्फ स्वाद बढ़ाने का तरीका नहीं, बल्कि कई व्यंजनों की पहचान भी है. दाल, सब्जी, कढ़ी या चटनी, तड़के के बिना इनका स्वाद अधूरा लगता है. हालांकि तड़का लगाते समय सबसे बड़ी परेशानी तब होती है, जब गर्म तेल अचानक उछलने लगता है. इससे हाथ या चेहरे पर तेल के छींटे पड़ सकते हैं और गैस स्टोव व किचन भी गंदा हो जाता है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान रहते हैं, तो कुछ आसान किचन टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं. आखिर तेल क्यों उछलता है? गर्म तेल में जब पानी या नमी वाली कोई चीज पहुंचती है, तो वह तुरंत भाप में बदल जाती है. इसी प्रक्रिया के कारण तेल तेजी से उछलने लगता है. कई बार कढ़ाई में बची हल्की नमी, गीला चम्मच या हरी मिर्च, करी पत्ता, प्याज और लहसुन जैसी सामग्री में मौजूद पानी इसकी वजह बनता है. नमक की आसान ट्रिक रसोई से जुड़े कई लोगों का मानना है कि तेल अच्छी तरह गर्म होने के बाद उसमें एक छोटी चुटकी नमक डालने से छींटे कुछ हद तक कम हो सकते हैं. माना जाता है कि नमक अतिरिक्त नमी को कम करने में मदद करता है, जिससे तेल का उछाल घट सकता है. हालांकि नमक की मात्रा बहुत कम रखें, क्योंकि ज्यादा नमक खाने के स्वाद को भी प्रभावित कर सकता है. इन बातों का भी रखें ध्यान तड़का लगाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि कढ़ाई पूरी तरह सूखी हो. धोने के बाद उसे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें और कुछ सेकंड खाली गर्म कर लें. इसके अलावा हमेशा सूखे चम्मच और कलछी का ही इस्तेमाल करें. अगर तड़के में हरी मिर्च, करी पत्ता या लहसुन डालना है, तो उन्हें पहले अच्छी तरह सुखा लें, ताकि अतिरिक्त नमी तेल में न जाए. तेल को जरूरत से ज्यादा गर्म न करें बहुत अधिक गर्म तेल में छींटे पड़ने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए तेल को केवल उतना ही गर्म करें, जितना मसालों को चटकाने के लिए जरूरी हो. अगर तेल से धुआं निकलने लगे, तो आंच तुरंत कम कर दें. सुरक्षित तरीके से लगाएं तड़का तड़का लगाते समय कढ़ाई से थोड़ा दूरी बनाकर खड़े रहें और एक साथ बहुत ज्यादा सामग्री तेल में न डालें. जरूरत पड़ने पर ढक्कन को हल्के से सामने रखकर छींटों से बचाव किया जा सकता है. इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर आप न सिर्फ सुरक्षित तरीके से खाना बना सकते हैं, बल्कि अपनी रसोई को भी साफ-सुथरा रख सकते हैं. यह भी पढ़ें: Kitchen Tips: फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करके खाते हैं? पहले जान लें इससे होने वाले नुकसान The post गर्म तेल के छींटों से हर बार जल जाता है हाथ? जानिए बचाव का आसान तरीका appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड हाईकोर्ट से चार सब-रजिस्ट्रार को राहत, विभागीय कार्यवाही और चार्ज मेमो रद्द

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद और गोविंदपुर में डिस्ट्रिक्ट सब-रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत रहे चार अधिकारियों को राहत दी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने संतोष कुमार, सुजीत कुमार, मिहिर कुमार और श्वेता कुमारी के खिलाफ शुरू की गयी विभागीय कार्यवाही और जारी चार्ज मेमो को रद्द कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि निबंधन अधिकारी का काम जमीन के विक्रेता के मालिकाना हक यानी टाइटल की जांच करना नहीं है. ऐसे में जमीन के पुराने और नये सर्वे खाता-प्लॉट नंबर में अंतर को लेकर अधिकारियों के खिलाफ कदाचार का मामला नहीं बनता. हाईकोर्ट ने चारों अधिकारियों की रिट याचिकाएं स्वीकार कर लीं. जमीन निबंधन में गड़बड़ी पर शुरू हुई थी जांच मामले की शुरुआत सात अगस्त 2020 को हुई एक शिकायत से हुई थी. रमेश कुमार राही नामक व्यक्ति ने धनबाद जिला अवर निबंधक कार्यालय और विभिन्न अंचल कार्यालयों में जमीन के निबंधन और म्यूटेशन में अनियमितता की शिकायत की थी. इसके बाद राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव ने धनबाद के उपायुक्त को जांच का निर्देश दिया. जांच समिति ने रिपोर्ट सौंपी और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया. आरोप था कि वर्ष 2017 से 2020 के बीच निबंधित कई दस्तावेजों में पुराने सर्वे खाता और प्लॉट नंबर का नये सर्वे खाता-प्लॉट नंबर से मिलान नहीं था. साथ ही आरोप लगाया गया कि निबंधन दस्तावेजों के साथ संलग्न कागजात का संबंधित अंचल कार्यालय से सत्यापन नहीं कराया गया. अधिकारियों ने कहा, टाइटल की जांच हमारा काम नहीं चारों अधिकारियों ने विभाग को दिये जवाब में कहा था कि जमीन के टाइटल और खतियान या रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की जांच निबंधन अधिकारी के अधिकार और कर्तव्य के दायरे में नहीं आती है. इसके बावजूद वर्ष 2023 और 2025 में चार्ज मेमो जारी किये गये और झारखंड प्रशासनी सेवक नियमावली, 2016 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गयी. इसके खिलाफ चारों अधिकारी झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे. सभी याचिकाओं में समान कानूनी सवाल होने के कारण अदालत ने मामलों की एक साथ सुनवाई की और साझा आदेश पारित किया. रजिस्ट्रार को टाइटल तय करने का अधिकार नहीं हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के के. गोपी बनाम सब-रजिस्ट्रार मामले के फैसले का उल्लेख किया. अदालत ने कहा कि निबंधन अधिकारी को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि दस्तावेज निष्पादित करने वाले व्यक्ति के पास संबंधित संपत्ति का मालिकाना हक है या नहीं. यदि सभी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी हैं और निर्धारित स्टांप शुल्क व निबंधन शुल्क जमा किया गया है, तो निबंधन अधिकारी केवल टाइटल के सवाल पर दस्तावेज का निबंधन करने से इनकार नहीं कर सकता. रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 21 में भी निबंधन अधिकारी पर खाता और प्लॉट नंबर की स्वतंत्र रूप से सत्यता जांचने का दायित्व नहीं डाला गया है. तीन से पांच साल की देरी पर भी कोर्ट ने उठाया सवाल अदालत ने विभागीय कार्यवाही शुरू करने में हुई लंबी देरी को भी गंभीरता से लिया. हाईकोर्ट ने पाया कि मूल शिकायत वर्ष 2020 में हुई और उसी वर्ष जांच रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने अपना जवाब भी दे दिया था. इसके बावजूद चार्ज मेमो तीन से पांच साल बाद जारी किया गया. अदालत ने कहा कि विभाग की ओर से इस लंबी और असामान्य देरी का संतोषजनक कारण नहीं दिया गया. ऐसी देरी से संबंधित अधिकारियों को गंभीर नुकसान और पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है. इसे भी पढ़ें: श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की सेहत पर रहेगी नजर, देवघर और जसीडीह स्टेशन पर 24 घंटे तैनात रहेंगे दो डॉक्टर भ्रष्टाचार, मिलीभगत या आर्थिक लाभ का आरोप नहीं हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चारों अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही, अनुचित लाभ पहुंचाने, भ्रष्ट उद्देश्य, मिलीभगत या निजी आर्थिक लाभ का कोई आरोप नहीं है. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के अमरेश श्रीवास्तव मामले के फैसले का भी हवाला दिया. सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने चारों अधिकारियों के खिलाफ जारी विभागीय कार्यवाही की अधिसूचनाओं और चार्ज मेमो को रद्द कर दिया. अदालत ने सभी रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए लंबित अंतरिम आवेदनों को भी बंद कर दिया. फैसला 10 जुलाई 2026 को सुनाया गया. इसे भी पढ़ें: खाद की कालाबाजारी करने वालों की खैर नहीं, डीसी ने दिया नियमित छापेमारी का निर्देश The post झारखंड हाईकोर्ट से चार सब-रजिस्ट्रार को राहत, विभागीय कार्यवाही और चार्ज मेमो रद्द appeared first on Naya Vichar.

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