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महाकुंभ- संगम तट पर भगदड़, 14 की मौत:प्रयागराज में श्रद्धालुओं की एंट्री रोकी; सभी 13 अखाड़ों का अमृत स्नान रद्द

नया विचार – प्रयागराज के संगम तट पर मंगलवार-बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे भगदड़ मच गई। हादसे में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वरूपरानी अस्पताल में मौजूद रिपोर्टर के मुताबिक, 14 शव पोस्टमॉर्टम के लिए लाए जा चुके हैं। हालांकि, प्रशासन ने मौत या घायलों की संख्या को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। मेला प्रशासन के अनुरोध पर सभी 13 अखाड़ों ने अमृत स्नान को रद्द कर दिया है। ग्राउंड जीरो पर मौजूद के रिपोर्टर्स के मुताबिक, अफवाह के चलते यह भगदड़ मची। कुछ स्त्रीएं जमीन पर गिर गईं और लोग उन्हें कुचलते हुए निकल गए। समाचार मिलते ही 50 से ज्यादा एंबुलेंस संगम तट पर पहुंच गई हैं। घायलों को अलग-अलग अस्पताल में भिजवाया जा रहा है। NSG कमांडो ने मोर्चा संभाल लिया है। संगम नोज इलाके को आम लोगों के लिए सील कर दिया गया है। यहां सिर्फ साधुओं को स्नान के लिए जाने की इजाजत है। मीडिया रिपोर्ट्स में अब मौके पर हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। एंबुलेंस को भी घटनास्थल से लौटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रयागराज में लोगों की एंट्री बंद कर दी गई है। सीमा वाले सभी जिलों में अधिकारियों को श्रद्धालुओं को रोकने के लिए मुस्तैद कर दिया गया है। महाकुंभ में आज मौनी अमावस्या का स्नान है, जिसके चलते करीब 5 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयागराज में मौजूद होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला अब भी जारी है। प्रशासन के मुताबिक, संगम समेत 44 घाटों पर देर रात तक 8 से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने की संभावना है। इससे ठीक, एक दिन पहले यानी मंगलवार को साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। सुरक्षा के लिए 60 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं।

ताजा ख़बर, बिहार

बिहार में स्टील, टीवी, सीमेंट कुछ नहीं बनता, सिर्फ नौजवान लड़कों को मजदूर बनाया जा रहा है : प्रशांत किशोर

नया विचार – जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने लालू-नीतीश के 35 साल के शासन का विश्लेषण करते हुए कहा कि बिहार में स्टील, टीवी, सीमेंट आदि नहीं बनता है। बिहार में सिर्फ एक चीज बन रही है, हमारे नौजवान लड़कों को मजदूर बनाया जा रहा है। हमारे राज्य में स्टील या सीमेंट की फैक्ट्री नहीं है, इसलिए हमारे युवाओं को दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करनी पड़ती है। हमारे राज्य के युवा दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू-नीतीश ने मिलकर पूरे समाज को अनपढ़ बना दिया है। इसका नतीजा यह है कि हमारे सारे शिशु मजदूर ही बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि लालू और नीतीश के राज में ज्यादा फर्क नहीं है। लालू जी के राज में अपराधी जनता को परेशान करते थे और नीतीश कुमार भाजपा के राज में अधिकारी जनता को परेशान करते हैं। नीतीश कुमार के अफसर राज का आलम यह है कि आम लोगों को चाहे जमीन संबंधी कोई काम करवाना हो या जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हो, अधिकारी बिना रिश्वत लिए काम नहीं करते।

ताजा ख़बर, बिहार

‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे और पसमांदा वाले अली अनवर ने छोड़ा नीतीश का साथ, बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस का दांव

नया विचार पटना- बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को कांग्रेस ने झटका दिया है। पूर्व राज्यसभा सदस्य अली अनवर अंसारी और ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भगीरथ मांझी ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इनके साथ कुछ अन्य नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने सभी का पार्टी में स्वागत किया। अली अनवर अंसारी जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं और वो अप्रैल 2006 से दिसंबर 2017 तक उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य भी रहे। उन्होंने कहा कि वो राहुल गांधी के विचारों से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। JDU वाले अली अनवर अब कांग्रेस में अली अनवर अंसारी ने कहा, ‘राहुल जी के विचारों से बिहार में भाजपा और जद (यू) में खलबली मच गई है। राहुल जी की बातों से राज्य में दलित, आदिवासी, अति पिछड़ों, अकलियतों और पसमांदा मुसलमानों में उत्साह का संचार हुआ है।’ ‘पसमांदा मुस्लिम महाज’ नामक संगठन के संस्थापक अली अनवर अंसारी ने कहा कि उनके प्रयासों का नतीजा है कि देश-दुनिया के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में ‘पसमांदा सियासत’ पर शोध हो रहा है। कांग्रेस जॉइन करने के बाद अली अनवर अंसारी ने कहा, ‘खरगे जी और राहुल गांधी जी के विचारों से पहले से ही प्रभावित था। जब ‘संविधान रक्षा सम्मेलन’ की श्रृंखला शुरू हुई, तब मुझे आमंत्रित किया गया, जिसके बाद हम लोगों ने मिलकर कई जगहों पर इस सम्मेलन का आयोजन किया। बिहार में राहुल गांधी जी के विचारों से दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक लोगों में उत्साह का संचार हुआ है। हम सभी कांग्रेस पार्टी के विचारों से सहमति रखते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।’ माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भी ‘हाथ’ के साथ वहीं, जून 2023 में ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भगीरथ मांझी ने जेडीयू की सदस्यता ली थी। बड़े ही तामझाम से पटना के जेडीयू ऑफिस में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने दशरथ मांझी और उनके दामाद मिथुन मांझी को मेंबर बनाया था। तब, उम्मीद की जा रही थी कि गया से भगीरथ मांझी या उनके दामाद मिथुन मांझी जेडीयू से चुनाव लड़ेंगे। मगर, लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने पल्टी मारी और बाजी पलट गया। गया लोकसभी सीट एनडीए के पार्टनर जीतन राम मांझी के खाते में चला गया। हाल ही में 18 जनवरी को पटना में संविधान सुरक्षा सम्मेलन में के दौरान भागीरथ मांझी की मुलाकात कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हुई थी। राहुल गांधी ने उन्हें सम्मानित किया था। बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अली अनवर अंसारी और भगीरथ मांझी के कांग्रेस जॉइन करने को लेकर एक बड़ा बदलाव कहा जा रहा है। इस कार्यक्रम में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश भी मौजूद थे। इसके अलावा नीतीश के गृह जिले नालंदा के रहने वाले फेमस हार्ट सर्जन डॉ. जगदीश प्रसाद ने भी राहुल गांधी पर भरोसा जताया। अब ये हस्तियां कांग्रेस के साथ इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज प्रजापति, आम आदमी पार्टी के नेता निशांत आनंद, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जगदीश प्रसाद, भाजपा की नेता रहीं निखत अब्बास, लेखक और पत्रकार फ्रैंक हुजूर भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं। कुल सात नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को जॉइन किया जिसमें बिहार से अली अनवर अंसारी और भगीरथ मांझी शामिल हैं। •अली अनवर अंसारी: पूर्व सांसद, प्रख्यात राजनेता, समाज सेवक और वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं। इनकी मुस्लिम दलित समुदाय के संघर्षों पर लिखी किताबें बहुत विख्यात हैं। •भगीरथ मांझी: ये ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी जी के सुपुत्र हैं और कांग्रेस और राहुल गांधी जी की विचारधारा से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए •डॉ. जगदीश प्रसाद: प्रसिद्ध हार्ट सर्जन और हिंदुस्तान प्रशासन में पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक रहे हैं। बिहार के नालंदा जिले से आते हैं। •मनोज प्रजापति: अखिल हिंदुस्तानीय प्रजापति कुंभकार संघ के राज्य अध्यक्ष हैं। ये सामाजिक और आर्थिक पहलुओं के द्वारा अपने समुदाय को ऊपर उठाने का काम करते आए हैं। •निशांत आनंद: AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं। 4 साल से AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करते आए हैं। •निखत अब्बास: BJP की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रही हैं, इन्होंने BJP के साथ बहुत काम किया है। •फ्रैंक हुजूर, प्रसिद्ध लेखक: राहुल गांधी जी के समर्थन में हमेशा योगदान देते रहे हैं। ये हिंदुस्तान की विविधता के हिमायती हैं।

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कंधार हाईजैक के दो दशक बाद, पटना रचेगा इतिहास, ऐसा क्या होने जा रहा, जानिए

नया विचार पटना– बिहार की राजधानी पटना के एयरपोर्ट से 26 साल बाद मई में फिर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी। नए टर्मिनल का काम फरवरी तक पूरा होगा और अप्रैल में उद्घाटन होगा। सिंगापुर, बैंकॉक, काठमांडू और म्यांमार के लिए सीधी उड़ानें मिलेंगी। इससे बिहार के लोगों को दिल्ली या कोलकाता जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। समय और पैसे की बचत होगी। कार्गो सेवा से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। पटना से 26 साल बाद विदेश के लिए डायरेक्ट फ्लाइट JDU ने इसे बिहार के विकास में एक स्वर्णिम अध्याय बताया है। JDU ने कहा है कि ‘बिहार के विकास में एक और स्वर्णिम अध्याय! माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार का एयरपोर्ट अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए हो रहा तैयार। यह कदम न केवल राज्य की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।’ कंधार हाईजैक के बाद से बंद थी इंटरनेशनल फ्लाइट कंधार हाईजैक के बाद से ही पटना से इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद कर दी गई थीं। आपको बता दें कि अब फिर से पटना एयरपोर्ट से जल्द ही इंटरनेशनल फ्लाइट्स उड़ेंगीं। नए टर्मिनल का निर्माण तेजी से चल रहा है। फरवरी में निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। अप्रैल में नए टर्मिनल का उद्घाटन होगा। इसके बाद मई से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो सकती हैं। नए टर्मिनल के साथ इमिग्रेशन काउंटर पटना एयरपोर्ट पर नए टर्मिनल के बनने के बाद इमिग्रेशन काउंटर भी शुरू हो जाएंगे। इससे विदेश यात्रा और आसान होगी। 1999 से पटना से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद थीं। 26 साल बाद फिर से ये उड़ानें शुरू होंगी। मई से पटना से काठमांडू, म्यांमार, बैंकॉक और सिंगापुर के लिए सीधी उड़ानें शुरू हो सकती हैं। अभी तक बिहार के लोगों को इन देशों में जाने के लिए दिल्ली या कोलकाता जाना पड़ता था। सीधी उड़ानें शुरू होने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया प्लानिंग में जुटी AAI पटना एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार करने में जुटी है। कई विमानन कंपनियां पटना से उड़ानें शुरू करने में रुचि दिखा रही हैं। यात्रा मार्ग और यात्रियों की संख्या का सर्वे किया जा रहा है। पटना से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने से यात्रियों का समय और पैसा बचेगा। इसके अलावा, विदेशों में कार्गो भेजने की भी योजना है। इससे बिहार के व्यापारियों और उद्यमियों को अपने उत्पाद विदेशी बाजारों में भेजने में आसानी होगी। पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन नए टर्मिनल का उद्घाटन अप्रैल में होगा। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। 1999 में इंडियन एयरलाइंस के एक विमान के अपहरण के बाद पटना से नेपाल के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद कर दी गई थीं। तब से पटना एयरपोर्ट सिर्फ नाम का ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट रह गया था। अब 26 साल बाद फिर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने से बिहार के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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नीतीश की बीमारी कहीं NDA में राजनीतिक उठापटक की नींव न डाल दे, टूट चुकी है 19 साल की परम्परा!

नया विचार पटना– बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीमार क्या हुए, राज्य में नई नेतृत्वक उठापटक की कहानी शुरू हो गई। कुछ हो न हो, पर नीतीश कुमार कुछ इसी तरह से बीमार रहे तो एनडीए की नेतृत्व किंतु-परंतु के घेरे में तो चली ही जाएगी। इसके साथ ही एनडीए के छोटे दल जो बड़ा चेहरा दिखाने लगे हैं, उनकी टकराहट की गूंज कुछ बढ़ भी सकती है। सबसे ज्यादा चिंता की बात भाजपा के लिए ही हो जाएगी, क्योंकि बिहार में ‘कुर्सी की नेतृत्व’ में नीतीश कुमार उनके लिए तो तुरुप का इक्का ही हैं। दिलचस्प तो यह है कि बीमारी के कारण नीतीश कुमार जिन महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए, विपक्ष इसे एनडीए में खटपट के रूप में देखने लगा है। आइए जानते हैं कि विपक्ष को बोलने का मौका कब-कब नीतीश कुमार ने दिया… …और तोड़ दी 19 साल की परम्परा अपने नेतृत्वक करियर में नीतीश कुमार के चिंतन में सबसे ज्यादा दलित पीड़ित ही रही है। लेकिन, इस बार नीतीश कुमार के जीवन का नकारात्मक ही सही पर एक रिकॉर्ड बन गया। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गणतंत्र दिवस के मौके पर दलित टोला जाते रहे हैं। लेकिन खुद के रचे इतिहास को खुद नीतीश कुमार ने ही इस बार बदल दिया। दरअसल होता यह था कि गणतंत्र दिवस पर नीतीश कुमार गांधी मैदान आते थे, और यहां से किसी दलित टोले में उनकी उपस्थिति में झंडोत्तोलन होता था। इस गणतंत्र दिवस पर भी दलित टोला में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जाने का कार्यक्रम तय था। मुख्यमंत्री को फुलवारी शरीफ प्रखंड के महुली गांव के महादलित टोले में जाना था। प्रशासनिक तैयारी की जा रही थी। बड़ा मंच बना। सजावट की सारी व्यवस्था की गई। नीतीश कुमार पटना के गांधी मैदान भी गए, पर सीएम झंडोत्तोलन के बाद सीधे अपने आवास चले गये। सीएम नीतीश कुमार के बदले मंत्री विजय चौधरी महुली गांव में पहुंचे। विजय चौधरी की मौजूदगी में महादलित टोले के बुजुर्ग सुभाष रविदास ने झंडोत्तोलन किया।इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के नहीं जाने से नेतृत्वक गलियारा अफवाहों से भर गया था। पीठासीन पदाधिकारियों की बैठक में भी नहीं पहुंचे सीएम गत माह जनवरी को पटना में देश भर के पीठासीन पदाधिकारियों का सम्मेलन हुआ था। इसमें लोकसभा के अध्यक्ष समेत सारे राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष मौजूद थे। कार्यक्रम में नीतीश कुमार को आना था और संबोधन भी करना था। लेकिन नीतीश कुमार कार्यक्रम में नहीं गए। कर्पूरी ठाकुर की जयंती कार्यक्रम में नहीं आए नीतीश ज्ञात हो कि 24 जनवरी को कर्पूरी जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पटना और समस्तीपुर के दौरे पर आये थे। प्रोटोकॉल तो यही कहता है के नीतीश कुमार को पटना एयरपोर्ट पर ही उप-राष्ट्रपति का स्वागत करना चाहिए था, लेकिन वे वहां नहीं गए। तय यह हुआ था कि स्व. कर्पूरी ठाकुर के गांव में आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे। लेकिन नीतीश कुमार मुख्य समारोह में शामिल नहीं हुए। बीमार हुए नीतीश तो NDA में बिखराव? वरिष्ट पत्रकार का मानना है कि नीतीश कुमार का ही वह चेहरा है, जो भाजपा को सत्ता के करीब लाता है। और यह बीमारी जिसके कारण महत्वपूर्ण कार्यक्रम तक छूट जा रहे हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार से भी अगर नीतीश कुमार दूर रह गए तो एनडीए में दरार तो पड़ेगी ही, जदयू भी विभाजित हो सकती है। सेकंड लाइनर नहीं होने के कारण पार्टी बिखर भी सकती है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही एनडीए में शामिल छोटे दलों ने पहले से ही डिमांड का पहाड़ खड़ा कर रखा है। तब ये सौ फीसदी स्ट्राइक रेट वाली पार्टियां हिस्सेदारी की सीमा हर हाल में पाना चाहेंगी। और ये स्थितियां महागठबंधन की लड़ाई को अतिरिक्त ताकत दे जाएगा। एनडीए में नीतीश कुमार के विकल्प को ले कर कोई चेहरा भी नहीं है। यह एक यक्ष प्रश्न तो खड़ा हो जाएगा।

ताजा ख़बर, बिहार, मौसम

बिहार के इन 8 जिलों में आज फिर बिगड़ेगा मौसम, पछुआ हवाएं बढ़ाएगी ठिठुरन

नया विचार पटना– बिहार के मौसम में लगातार बदलाव जारी है. प्रदेश में घने कोहरे और ठंड से फिलहाल लोगों को राहत मिलने की संभावना नहीं है. क्योंकि पछुआ हवा लगातार बिहार में ठंड बढ़ा रही है. हालांकि आज सुबह के समय घना कोहरा और दिन में धूप खिलेगी. आज राज्य के अधिकांश इलाके में अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 06 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेश का मौसम ऐसा ही बने रहने का अनुमान है. IMD ने बिहार के 7 जिलों में 29 जनवरी तक घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है. सर्द पछुआ हवाएं बढ़ाएगी ठिठुरन प्रदेश में सर्द पछुआ हवाएं चलने के कारण रात के समय ठिठुरन महसूस हो रही है. मौसम विभाग केंद्र का कहना है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है. हालांकि इसके बाद बिहार के न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. बिहार में अगले कुछ दिनों तक कोहरे और ठंड का असर बना रहेगा. दिन के समय धूप निकलने से लोगों को थोड़ी बहुत राहत मिलेगी. इन जिलों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना बिहार में अगले 24 घंटे में हल्के से मध्यम गति की पछुआ हवा चलने की स्थिति जारी रहने का पूर्वानुमान है. राज्य के अधिकांश भागों के न्यूनतम तापमान में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन की संभावना नहीं है. राज्य के उत्तरी भाग में मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की स्थिति जारी रहने की संभावना है. प्रदेश के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, शिवहर और किशनगंज में मंगलवार की सुबह घना कोहरा छाए रहेगा. वहीं पिछले 24 घंटों में प्रदेश में गया जिला के डुमरिया सबसे ठंडा रहा. डुमरिया का न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं सोमवार को मुंगेर जिला के बरियारपुर प्रखंड सबसे ज्यादा गर्म रहा. यहां का अधिकतम तापमान 27.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

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वक्फ कानून में संशोधन के सभी 14 प्रस्ताव पास, विपक्ष के सभी 44 सुझाव संसदीय समिति से खारिज

नया विचार – संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने वक्फ अधिनियम में संशोधनों पर विपक्षी सांसदों के सभी प्रस्ताव खारिज कर दिए। इसके साथ ही, जेपीसी ने सोमवार दोपहर वक्फ संशोधन विधेयक को 14 बदलावों के साथ मंजूरी दे दी। यह विधेयक पिछले साल अगस्त में सदन में पेश किया गया था। समिति में सत्तारूढ़ हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (BJP) के जगदम्बिका पाल के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने 44 संशोधनों का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सभी को अस्वीकार कर दिया गया। न्यूज वेबसाइट NDTV ने सूत्रों के हवाले से समाचार दी है कि 14 प्रस्तावित बदलावों पर 29 जनवरी को मतदान होगा और अंतिम रिपोर्ट 31 जनवरी तक जमा की जाएगी। समिति को मूल रूप से 29 नवंबर तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था, लेकिन इस समय सीमा को बजट सत्र के अंतिम दिन 13 फरवरी तक बढ़ा दिया गया। बैठकें खत्म, जोरदार हंगामा संशोधनों का अध्ययन करने के लिए गठित समिति की कई बैठकें हुईं, लेकिन कई बैठकें हंगामे के बीच खत्म हो गईं। विपक्षी सांसदों ने अध्यक्ष पर सत्ताधारी पार्टी के प्रति पक्षपात का आरोप लगाया। पिछले हफ्ते विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जगदंबिका पाल 5 फरवरी के दिल्ली चुनाव को ध्यान में रखते हुए वक्फ संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष का जोरदार विरोध यह अपील 10 विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद आई। उनकी और उनके सहयोगियों की शिकायत थी कि उन्हें सुझाए गए बदलावों का अध्ययन करने का समय नहीं दिया जा रहा है। निलंबित सांसदों में तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शामिल थे। दोनों ही वक्फ संशोधन विधेयक के कट्टर आलोचक हैं। उदाहरण के लिए, अक्टूबर में बनर्जी का रौद्र रूप देखने को मिला, जब उन्होंने मेज पर एक कांच की बोतल तोड़ दी और उसे पाल पर फेंक दिया। बाद में उन्होंने अपने कृत्य के बारे में बताया कि एक अन्य बीजेपी सांसद, कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने उनके परिवार के बारे में अपशब्द कहे और इसी से उन्हें इतना गुस्सा आया।

अपराध, ताजा ख़बर, पटना

पटना के मनेर में फायरिंग, मोकामा के FCI कर्मी की गोली मार कर हत्या

नया विचार पटना- बिहार की राजधानी पटना में सनसनीखेज मर्डर की वारदात को अंजाम दिया गया है. पटना सेसटे दानापुर में अपराधियों ने एफसीआई कर्मी को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया है. मनेर थाना क्षेत्र के छितनांवा बधार में रविवार को देर रात एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या की गई है. हत्या के पीछे कारण का पता नहीं मृतक शाहपुर के दाउदपुर बगीचा निवासी बुधन राय के 47 वर्ष रामदेव राय हैं. रामदेव राय के बारे में बताया जा रहा है कि मोकामा में एफसीआई कर्मी और जमीन कारोबारी थे. रामदेव राय को क्यों गोली मारी गई और किसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है. अभी इसके बारे में पता नहीं चल सका है. घटना के बाद पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है.

अपराध, ताजा ख़बर, बिहार

नवादा में व्यवसायी से करीब 19 लाख की लूट:नवादा में गोलीबारी करते भागे बदमाश, घटनास्थल से एक कारतूस और 8 खोखे बरामद

नया विचार – नवादा के शाहपुर थाना क्षेत्र में पशु व्यवसायी पर अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर करीब 19 लाख रुपए की लूट की वारदात को अंजाम दिया। घटना में व्यवसायी को भी गोली लगी है, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें पावापुरी स्थित मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ित की पहचान सरवर मास्टर के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी। करीब 19 लाख रुपए की हुई लूट घटना की सूचना पर डीएसपी महेश चौधरी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि मौके से एक जिंदा कारतूस और आठ खोखे बरामद किए गए हैं। हालांकि, लूट की गई राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अपराधी लगभग 19 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। अपराधियों की धमक से इलाके में दहशत का माहौल है। गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग भी वहां से भाग गए। पुलिस ने अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष टीम गठित की है और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।  

ताजा ख़बर, शिक्षा

अब सॉफ्टवेयर से ही सभी शिक्षकों का तबादला, कोई भी ट्रांसफर नहीं होगा मैनुअल

नया विचार पटना– बिहार प्रशासन ने शिक्षकों के तबादले का तरीका बदल दिया है। अब सब कुछ ऑनलाइन होगा। यह बदलाव पारदर्शिता लाने और काम जल्दी करने के लिए किया गया है। 30 जनवरी तक पहली लिस्ट आने की उम्मीद है। मैट्रिक और इंटर की परीक्षा के बाद ही शिक्षकों की नई जगहों पर पोस्टिंग होगी। इसका मतलब ये हुआ कि अब शिक्षकों का तबादला पूरी तरह डिजिटल हो गया है। इससे तबादले में होने वाली गड़बड़ी और देरी से छुटकारा मिलेगा। शिक्षा विभाग ने कहा है कि अब कोई मैनुअल तबादला नहीं होगा। सॉफ्टवेयर के जरिए तबादले से पारदर्शिता आएगी और काम तेजी से होगा। इससे शिक्षकों को उनकी योग्यता के हिसाब से जगह मिलेगी। बिहार में मैनुअल नहीं होगा टीचर ट्रांसफर बिहार शिक्षा विभाग 30 जनवरी तक पहले चरण के तबादलों की सूची जारी करेगा। सभी जिलों से ऑनलाइन रिक्त पदों की जानकारी इकट्ठा की जा रही है। ट्रांसफर का पूरा कार्यक्रम जल्द ही जारी होगा। पूरी प्रक्रिया चार चरणों में होगी। पहला चरण जनवरी में पूरा होगा। बाकी तीन चरण फरवरी में पूरे होंगे। हर चरण की नई तारीखों का ऐलान बाद में होगा। शिक्षकों को उनके नए स्कूल की जानकारी सॉफ्टवेयर के माध्यम से दी जाएगी। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के बाद ही शिक्षकों की पोस्टिंग होगी। इस बारे में शिक्षा विभाग में एक अहम बैठक हुई। इसमें सॉफ्टवेयर में डेटा डालने और खाली पदों की जानकारी अपडेट करने पर बात हुई। बैठक के बाद नई तारीखों का ऐलान किया जाएगा। कैंसर पीड़ित 35 शिक्षकों का तबादला अभी तक 35 कैंसर पीड़ित शिक्षकों का तबादला किया जा चुका है। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम तबादले में होने वाले भ्रष्टाचार और पक्षपात को रोकने के लिए उठाया गया है। सॉफ्टवेयर से सभी शिक्षकों को उनकी योग्यता और खाली पदों के हिसाब से सही जगह पर पोस्टिंग मिलेगी। फरवरी में शिक्षकों को उनके नए स्कूल के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए एक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया है कि नई प्रणाली से देरी और गड़बड़ी नहीं होगी। इससे पहले तबादले में बहुत समय लगता था और कई बार धांधली की शिकायतें भी आती थीं। नई व्यवस्था से इन समस्याओं का समाधान होगा। इससे शिक्षकों को भी राहत मिलेगी और वे अपने काम पर ध्यान दे सकेंगे। इस नए सिस्टम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। अब साहब की चक्कर लगाने की जरूरत नहीं इस डिजिटल बदलाव से शिक्षा विभाग के कामकाज में भी तेजी आएगी। अधिकारी अब कागजी कार्रवाई में कम समय लगाएंगे और ज्यादा ध्यान नीतिगत मामलों पर दे पाएंगे। यह बदलाव शिक्षा विभाग के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। प्रशासन का मानना है कि यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति लाएगा। इस नए सिस्टम से शिक्षकों को भी फायदा होगा। उन्हें अब तबादले के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सारी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इससे उनकी समय और ऊर्जा की बचत होगी। वे अपना पूरा ध्यान बच्चों की पढ़ाई पर लगा सकेंगे। यह व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगी।  

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