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Bihar Bhumi: बिहार सरकार ने जमीन की ई-मापी के लिए जारी की अहम सूचना, नहीं किया ये काम तो रद्द होगा आवेदन

Bihar Bhumi: बिहार में भूमि मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वालों के लिए बिहार प्रशासन के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने महत्वपूर्ण सूचना जारी की है. विभाग ने कहा है कि ई-मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले सभी आवेदकों को अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर रजिस्टर कराना अनिवार्य है. इससे आवेदकों को कार्रवाई से संबंधित सभी जानकारी उनके मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से मिलती रहेगी. 60 दिनों में राशि जमा नहीं करने पर रद्द होगा आवेदन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब आवेदक आवेदन करेगा तो उसे उसके रजिस्टर्ड नंबर पर एसएमएस के जरिए भूमि मापी के लिए जमा की जाने वाली राशि की जानकारी दी जाएगी. यदि 60 दिनों के भीतर मापी के लिए राशि जमा नहीं की जाती है तो आवेदन स्वतः ही रद्द माना जाएगा. यह व्यवस्था एक फरवरी 2025 से लागू होगी. ई-मापी ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन ई-मापी के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया बहुत सरल है. आप राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करते समय आपको अपनी जमीन से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी और अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा. Also Read : महाकुंभ के कारण कैमूर में 72 घंटों से महाजाम, आठ घंटे से हिला तक नहीं है गाड़ियों का पहिया ई-मापी के लिए कैसे करें आवेदन आवेदन के लिए सबसे पहले वेबसाइट https://emapi.bihar.gov.in/ खोलें यदि आप नए यूजर हैं, तो पोर्टल पर रजिस्टर करें, मौजूदा यूजर अपने मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त करके लॉगिन कर सकते हैं. लॉगिन करने के बाद अप्लाई फॉर मापी पर क्लिक करें. मापी के लिए आवेदन करने के लिए सबसे पहले अपनी जमीन की जमाबंदी से संबंधित दस्तावेज की पीडीएफ कॉपी बना लें, साथ ही लॉगिन के अंदर उपलब्ध ‘मापी के लिए शपथ पत्र’ की पीडीएफ तैयार कर लें. अब जिला, अंचल का चयन करें और आगे बढ़ें बटन पर क्लिक करें. इसके बाद हल्का, मौजा, चालू खंड संख्या (हिंदी में), पृष्ठ संख्या भरें और ‘रजिस्टर II विवरण प्राप्त करें’ बटन पर क्लिक करें. अब आपको अपनी जमाबंदी का विवरण दिखाई देगा और आपको मापी के लिए खाता, खेसरा और क्षेत्रफल भरने का विकल्प मिलेगा. आप ADD बटन पर क्लिक करके उस जमाबंदी के एक से अधिक प्लॉट जोड़ सकते हैं. खेसरा जोड़ने के बाद Proceed बटन पर क्लिक करें. अब स्क्रीन पर आवेदक का विवरण मांगा जाएगा. आवेदक द्वारा अपना विवरण दर्ज करने के बाद Save & Next बटन पर क्लिक करें. अब आपको मापी के लिए आवेदन किए गए खेसरा के सीमाधारक का विवरण (नाम, पता, मोबाइल, ईमेल) भरने का विकल्प मिलेगा. खेसरा के सभी सीमाधारकों का विवरण भरने के बाद Save & Next बटन पर क्लिक करें. अब यदि आप मापी से संबंधित जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को देना चाहते हैं, तो आपको संबंधित व्यक्ति का विवरण (नाम, पता, मोबाइल, ईमेल) भरने का विकल्प मिलेगा. सभी संबंधित व्यक्तियों का विवरण भरने के बाद Save & Next बटन पर क्लिक करें. अब आपको मापी से संबंधित कुछ घोषणा/प्रश्नावली मिलेगी. उन्हें भरने के बाद Save & Next बटन पर क्लिक करें. अंत में आपको जमाबंदी, रशीद, कोर्ट ऑर्डर एफिडेविट आदि साक्ष्य अपलोड करने होंगे तथा अंतिम घोषणा स्वीकार करने के बाद आपका आवेदन जमा हो जाएगा तथा आपको माप आवेदन संख्या प्राप्त होगी. आवेदन स्थिति मेन्यू के अंतर्गत आपको स्वीकृत आवेदन के लिए माप शुल्क जमा करने तथा मापी के लिए तिथि चुनने का विकल्प दिया गया है. The post Bihar Bhumi: बिहार प्रशासन ने जमीन की ई-मापी के लिए जारी की अहम सूचना, नहीं किया ये काम तो रद्द होगा आवेदन appeared first on Naya Vichar.

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पटना SSP की बड़ी कार्रवाई, इस लापरवाही पर महिला थानाध्यक्ष को किया सस्पेंड, जानें किसे मिला प्रभार

Patna News: पटना जिले के खुसरूपुर थानाध्यक्ष अंकिता कुमारी को लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है. यह कार्रवाई एसएसपी अवकाश कुमार के निर्देश पर की गई है. अंकिता कुमारी के स्थान पर 2018 बैच के सब इंस्पेक्टर मनजीत कुमार ठाकुर को नया प्रभारी नियुक्त किया गया है.यह कार्रवाई लोदीपुर गांव में सोमवार को हुई गोलीबारी की घटना के बाद की गई है, जिसमें उदय सिंह के पुत्र अनमोल कुमार की मौत हो गई थी. स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लगाया आरोप स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय रहते अगर प्रशासन एक्टिव रहती तो किसी की जान नहीं जाती. इस घटना के विरोध में मंगलवार को मृतक के परिजनों ने आरोपी पक्ष के घरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए खुसरूपुर, सालिमपुर और दनियावां पुलिस मौके पर पहुंची थी. Also Read: महाकुंभ में भगदड़ के बाद भी ट्रेनों में कम नहीं हो रही तीर्थयात्रियों की भीड़, AC कोच का जनरल सा हाल घटना के विरोध में परिजनों ने आरोपी के घरों में की थी तोड़फोड़ बता दें कि यह विवाद 2022 से चल रहा था. जिसमें उदय सिंह और राजेंद्र प्रसाद के परिवारों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि राजेंद्र प्रसाद के परिवार के दो सदस्य मंजू देवी और उनके पति अरुण सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना के विरोध में मंगलवार को मृतक के परिजनों ने आरोपी पक्ष के राजेंद्र प्रसाद, शैलेंद्र प्रसाद, राजू कुमार, कमलेश सिंह, राजकुमार और कुंदन कुमार के घरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए खुसरूपुर, सालिमपुर और दनियावां पुलिस मौके पर पहुंची थी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें The post पटना SSP की बड़ी कार्रवाई, इस लापरवाही पर स्त्री थानाध्यक्ष को किया सस्पेंड, जानें किसे मिला प्रभार appeared first on Naya Vichar.

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‘महाकुंभ में 8 से 10 करोड़ श्रद्धालु मौजूद, लेकिन स्थिति नियंत्रण में; सीएम योगी ने लोगों से की ये अपील

नया विचार – महाकुंभ में हुई भगदड़ के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कुंभ मेला क्षेत्र में मौजूद आला अधिकारियों से अपडेट ले रहे हैं। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे जिस घाट के पास हैं वहीं स्नान करें और संगम नोज की ओर जाने से बचें। उन्होंने कहा कि स्नान के लिए कई घाट बनाए गए हैं जिनका उपयोग किया जा सकता है। सीएम योगी ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है। सीएम योगी ने कहा- महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। संगमनगरी में आज करीब 8 से 10 करोड़ श्रद्धालु मौजूद हैं। मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से एक दिन पूर्व 5.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रयागराज में महाकुंभ में श्रद्धालुओं के सकुशल स्नान करने के लिए, उनकी व्यवस्था के लिए पीएम मोदी सुबह से ही लगातार चार बार जानकारी ले चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी प्रातः से ही श्रद्धालुओं के बारे में लगातार जानकारी ले रहे हैं। उच्च स्तरीय मीटिंग जारी श्रद्धालुओं सुचारू रूप से स्नान कर सके, इसके लिए डीजीपी, प्रमुख सचिव समेत कई बड़े अधिकारियों के साथ हाई लेवेल की मीटिंग चल रही है। प्रयागराज में हालात वर्तमान में नियंत्रण में हैं लेकिन भीड़ का दबाव बहुत बना हुआ है। श्रद्धालुओं के बाद संत करेंगे स्नान मुख्यमंत्री ने अखाड़ा परिषद से जुड़े हुए पदाधिकारियों से बात की है। सीएम के निवेदन पर संतों ने कहा, पहले श्रद्धालु स्नान करके निकल जाएंगे उसके बाद ही हम स्नान के लिए संगम की तरफ करेंगे। सभी अखाड़े इसके लिए सहमत हैं। अफवाहों पर न दें ध्यान: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा, लगातार संगम, नागवासुकी और अखाड़ा मार्ग पर दबाव बना हुए है। लोगों से अपील है कि अफवाह पर ध्यान न दें। संयम से काम लें। ये आयोजन लोगों का है। प्रशासन उनकी सेवा के लिए लगा है। प्रशासन मजबूती के साथ हर प्रकार का सहयोग करने के लिए तत्पर है। आवश्यक नहीं है कि संगम नोज की तरफ ही आएं। 15-20 किलोमीटर के दायरे में अस्थायी घाट बनाए गए हैं, आप जहां पर हैं वहीं पर स्नान करें।”

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महाकुंभ में जब नेहरू के लिए 1954 में मची थी भगदड़, 1000 लोगों की हुई थी मौत

नया विचार – महाकुंभ 1954 संगम तट पर एक बार फिर से मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ मच गई. इसमें कई लोगों की मौत हो गई है. इसमें पहले वर्ष 1954 और 2013 में भी मौनी अमावस्या के दिन ही भगदड़ मचने से कई लोगों की मौत हो गई थी. कहा जाता है कि वर्ष 1954 के महाकुंभ मे मची भगदड़ से करीब एक हजार लोगों की मौत हो गई थी. इसी प्रकार 2013 में कुंभ स्नान कर वापस लौट रहे 36 लोगों की मौत प्रयागराज स्टेशन पर मची भगदड़ में हुई थी. कई लोगों को तो कफन तक नसीब नहीं हुआ था. 1954 में मची थी भगदड़ 1000 लोगों की हुई थी मौत वर्ष 1954 के 3 फरवरी को मौनी अमावस्या था. इसको लेकर लाखों लोग संगम स्नान के लिए पहुंचे थे. इसी बीच सुबह करीब 8-9 बजे मेले में समाचार फैली कि प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आ रहे हैं. इस समाचार के बाद संगम में स्नान करने आई भीड़ पंडित नेहरू को देखने के लिए उमड़ पड़ी. भीड़ उस ओर दौडी जस तरफ नागा साधु ठहरे हुए थे. भीड़ को अपनी तरफ भीड़ आती देख नागा साधुओं को लगा कि भीड़ उनपर हमले को आ रही है. इस कारण संन्यासी तलवार और त्रिशूल लेकर भीड़ पर हमला करने के लिए दौड़ पड़े. भगदड़ मच गई. जो एक बार गिरा, वो फिर उठ नहीं सका. जान बचाने के लिए लोग बिजली के खंभों से चढ़कर तारों पर लटक गए. कहा जाता है कि भगदड़ में एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. यूपी प्रशासन इस हादसे से इंकार करती रही. उसका कहन था कि इस हादसा में किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन एक फोटोग्राफर की तस्वीर ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया और नेतृत्वक हंगामा खड़ा हो गया. पंडति नेहरू को संसद में इसपर बयान तक देना पड़ा था. इस हादसे में करीब एक हजार लोगों की मौत हुई थी. प्रशासन की ओर से की गई कई व्यवस्था आजाद हिंदुस्तान में पहली बार वर्ष 1954 में पहला महाकुंभ लगा था. यह कुंभ भी इलाहाबाद यानी अब के प्रयागराज में लगा था. वर्ष 1954 में 3 फरवरी को मौनी अमावस्या था. मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने के लिए लाखों लोग संगम पहुंचे थे. लेकिन, सुबह से हो रही बारिश के कारण चारों तरफ कीचड़ और फिसलन थी. हालांकि आजाद हिंदुस्तान का पहला महकुंभ होने के कारण तब की प्रशासन की ओर से बड़ी तैयारी की गई थी. संगम के करीब ही अस्थाई रेलवे स्टेशन बनाया गया था. बड़ी संख्या में टूरिस्ट गाइड अपॉइंट किए गए थे. उबड़-खाबड़ जमीनों को समतल कर दिया गया था. इसके साथ ही सड़कों पर बिछी रेलवे लाइनों के ऊपर पुल बनाए गए थे. पहली बार कुंभ में बिजली के खंभे लगाए गए थे. इसके साथ ही महकुंभ को लेकर 9 अस्पताल खोले गए थे, ताकि कोई बीमार पड़े या फिर हादसे होने पर उसका फौरन इलाज हो सके.

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महाकुंभ में भीड़ बेकाबू, बैरिकेडिंग गिराकर घुसे:मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए प्रयागराज में हुजूम;

नया विचार – महाकुंभ में सोमवार को बहुत ज्यादा भीड़ रही। इसलिए पांटून पुल नंबर- 15 बंद कर दिया गया। इसको लेकर लोगों ने सेक्टर- 20 में प्रदर्शन किया। कुछ लोगों की पुलिस से बहस हो गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और मेले के अंदर चले गए। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस वाले भी लोगों को रोकने की हिम्मत नहीं दिखा सके। हालांकि, रात करीब 9 बजे अधिकारियों के आदेश पर पांटून पुल 13, 14 और 15 को खोल दिया गया। दरअसल, 29 जनवरी को मौनी अमावस्या का स्नान पर्व है। इस पर्व पर संगम में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु अभी से पहुंचने लगे हैं। इससे जबरदस्त भीड़ हो गई है। अमेरिकी रॉक बैंड कोल्डप्ले के को-फाउंडर और सिंगर क्रिस मार्टिन महाकुंभ पहुंचे। इस दौरान उनकी गर्लफ्रेंड और अमेरिकी एक्ट्रेस डकोटा जॉनसन भी नजर आईं। क्रिस और डकोटा को एक कार में बैठे देखा गया। दोनों भगवा रंग की ड्रेस पहने थे। वहीं, गंगा स्नान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मध्य प्रदेश के महू में भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- गंगा में स्नान करने से गरीबी दूर नहीं होगी। भाजपा नेता गंगा स्नान जैसी गतिविधियों के जरिए जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे कि बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याएं। महाकुंभ में सोमवार को 1.55 करोड़, मंगलवार को लगभग 5 करोड़ लोगों ने डुबकी लगाई व रात तक 8-10 करोड़ लोगों के पहुंचने का अनुमान है। 13 जनवरी से लेकर अब तक कुल 19.76 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं।

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महाकुंभ- संगम तट पर भगदड़, 14 की मौत:प्रयागराज में श्रद्धालुओं की एंट्री रोकी; सभी 13 अखाड़ों का अमृत स्नान रद्द

नया विचार – प्रयागराज के संगम तट पर मंगलवार-बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे भगदड़ मच गई। हादसे में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वरूपरानी अस्पताल में मौजूद रिपोर्टर के मुताबिक, 14 शव पोस्टमॉर्टम के लिए लाए जा चुके हैं। हालांकि, प्रशासन ने मौत या घायलों की संख्या को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। मेला प्रशासन के अनुरोध पर सभी 13 अखाड़ों ने अमृत स्नान को रद्द कर दिया है। ग्राउंड जीरो पर मौजूद के रिपोर्टर्स के मुताबिक, अफवाह के चलते यह भगदड़ मची। कुछ स्त्रीएं जमीन पर गिर गईं और लोग उन्हें कुचलते हुए निकल गए। समाचार मिलते ही 50 से ज्यादा एंबुलेंस संगम तट पर पहुंच गई हैं। घायलों को अलग-अलग अस्पताल में भिजवाया जा रहा है। NSG कमांडो ने मोर्चा संभाल लिया है। संगम नोज इलाके को आम लोगों के लिए सील कर दिया गया है। यहां सिर्फ साधुओं को स्नान के लिए जाने की इजाजत है। मीडिया रिपोर्ट्स में अब मौके पर हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। एंबुलेंस को भी घटनास्थल से लौटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रयागराज में लोगों की एंट्री बंद कर दी गई है। सीमा वाले सभी जिलों में अधिकारियों को श्रद्धालुओं को रोकने के लिए मुस्तैद कर दिया गया है। महाकुंभ में आज मौनी अमावस्या का स्नान है, जिसके चलते करीब 5 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयागराज में मौजूद होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला अब भी जारी है। प्रशासन के मुताबिक, संगम समेत 44 घाटों पर देर रात तक 8 से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने की संभावना है। इससे ठीक, एक दिन पहले यानी मंगलवार को साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। सुरक्षा के लिए 60 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं।

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बिहार में स्टील, टीवी, सीमेंट कुछ नहीं बनता, सिर्फ नौजवान लड़कों को मजदूर बनाया जा रहा है : प्रशांत किशोर

नया विचार – जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने लालू-नीतीश के 35 साल के शासन का विश्लेषण करते हुए कहा कि बिहार में स्टील, टीवी, सीमेंट आदि नहीं बनता है। बिहार में सिर्फ एक चीज बन रही है, हमारे नौजवान लड़कों को मजदूर बनाया जा रहा है। हमारे राज्य में स्टील या सीमेंट की फैक्ट्री नहीं है, इसलिए हमारे युवाओं को दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करनी पड़ती है। हमारे राज्य के युवा दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू-नीतीश ने मिलकर पूरे समाज को अनपढ़ बना दिया है। इसका नतीजा यह है कि हमारे सारे शिशु मजदूर ही बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि लालू और नीतीश के राज में ज्यादा फर्क नहीं है। लालू जी के राज में अपराधी जनता को परेशान करते थे और नीतीश कुमार भाजपा के राज में अधिकारी जनता को परेशान करते हैं। नीतीश कुमार के अफसर राज का आलम यह है कि आम लोगों को चाहे जमीन संबंधी कोई काम करवाना हो या जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हो, अधिकारी बिना रिश्वत लिए काम नहीं करते।

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‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे और पसमांदा वाले अली अनवर ने छोड़ा नीतीश का साथ, बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस का दांव

नया विचार पटना- बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को कांग्रेस ने झटका दिया है। पूर्व राज्यसभा सदस्य अली अनवर अंसारी और ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भगीरथ मांझी ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इनके साथ कुछ अन्य नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने सभी का पार्टी में स्वागत किया। अली अनवर अंसारी जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं और वो अप्रैल 2006 से दिसंबर 2017 तक उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य भी रहे। उन्होंने कहा कि वो राहुल गांधी के विचारों से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। JDU वाले अली अनवर अब कांग्रेस में अली अनवर अंसारी ने कहा, ‘राहुल जी के विचारों से बिहार में भाजपा और जद (यू) में खलबली मच गई है। राहुल जी की बातों से राज्य में दलित, आदिवासी, अति पिछड़ों, अकलियतों और पसमांदा मुसलमानों में उत्साह का संचार हुआ है।’ ‘पसमांदा मुस्लिम महाज’ नामक संगठन के संस्थापक अली अनवर अंसारी ने कहा कि उनके प्रयासों का नतीजा है कि देश-दुनिया के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में ‘पसमांदा सियासत’ पर शोध हो रहा है। कांग्रेस जॉइन करने के बाद अली अनवर अंसारी ने कहा, ‘खरगे जी और राहुल गांधी जी के विचारों से पहले से ही प्रभावित था। जब ‘संविधान रक्षा सम्मेलन’ की श्रृंखला शुरू हुई, तब मुझे आमंत्रित किया गया, जिसके बाद हम लोगों ने मिलकर कई जगहों पर इस सम्मेलन का आयोजन किया। बिहार में राहुल गांधी जी के विचारों से दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक लोगों में उत्साह का संचार हुआ है। हम सभी कांग्रेस पार्टी के विचारों से सहमति रखते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।’ माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भी ‘हाथ’ के साथ वहीं, जून 2023 में ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भगीरथ मांझी ने जेडीयू की सदस्यता ली थी। बड़े ही तामझाम से पटना के जेडीयू ऑफिस में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने दशरथ मांझी और उनके दामाद मिथुन मांझी को मेंबर बनाया था। तब, उम्मीद की जा रही थी कि गया से भगीरथ मांझी या उनके दामाद मिथुन मांझी जेडीयू से चुनाव लड़ेंगे। मगर, लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने पल्टी मारी और बाजी पलट गया। गया लोकसभी सीट एनडीए के पार्टनर जीतन राम मांझी के खाते में चला गया। हाल ही में 18 जनवरी को पटना में संविधान सुरक्षा सम्मेलन में के दौरान भागीरथ मांझी की मुलाकात कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हुई थी। राहुल गांधी ने उन्हें सम्मानित किया था। बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अली अनवर अंसारी और भगीरथ मांझी के कांग्रेस जॉइन करने को लेकर एक बड़ा बदलाव कहा जा रहा है। इस कार्यक्रम में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश भी मौजूद थे। इसके अलावा नीतीश के गृह जिले नालंदा के रहने वाले फेमस हार्ट सर्जन डॉ. जगदीश प्रसाद ने भी राहुल गांधी पर भरोसा जताया। अब ये हस्तियां कांग्रेस के साथ इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज प्रजापति, आम आदमी पार्टी के नेता निशांत आनंद, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जगदीश प्रसाद, भाजपा की नेता रहीं निखत अब्बास, लेखक और पत्रकार फ्रैंक हुजूर भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं। कुल सात नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को जॉइन किया जिसमें बिहार से अली अनवर अंसारी और भगीरथ मांझी शामिल हैं। •अली अनवर अंसारी: पूर्व सांसद, प्रख्यात राजनेता, समाज सेवक और वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं। इनकी मुस्लिम दलित समुदाय के संघर्षों पर लिखी किताबें बहुत विख्यात हैं। •भगीरथ मांझी: ये ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी जी के सुपुत्र हैं और कांग्रेस और राहुल गांधी जी की विचारधारा से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए •डॉ. जगदीश प्रसाद: प्रसिद्ध हार्ट सर्जन और हिंदुस्तान प्रशासन में पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक रहे हैं। बिहार के नालंदा जिले से आते हैं। •मनोज प्रजापति: अखिल हिंदुस्तानीय प्रजापति कुंभकार संघ के राज्य अध्यक्ष हैं। ये सामाजिक और आर्थिक पहलुओं के द्वारा अपने समुदाय को ऊपर उठाने का काम करते आए हैं। •निशांत आनंद: AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं। 4 साल से AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करते आए हैं। •निखत अब्बास: BJP की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रही हैं, इन्होंने BJP के साथ बहुत काम किया है। •फ्रैंक हुजूर, प्रसिद्ध लेखक: राहुल गांधी जी के समर्थन में हमेशा योगदान देते रहे हैं। ये हिंदुस्तान की विविधता के हिमायती हैं।

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कंधार हाईजैक के दो दशक बाद, पटना रचेगा इतिहास, ऐसा क्या होने जा रहा, जानिए

नया विचार पटना– बिहार की राजधानी पटना के एयरपोर्ट से 26 साल बाद मई में फिर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी। नए टर्मिनल का काम फरवरी तक पूरा होगा और अप्रैल में उद्घाटन होगा। सिंगापुर, बैंकॉक, काठमांडू और म्यांमार के लिए सीधी उड़ानें मिलेंगी। इससे बिहार के लोगों को दिल्ली या कोलकाता जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। समय और पैसे की बचत होगी। कार्गो सेवा से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। पटना से 26 साल बाद विदेश के लिए डायरेक्ट फ्लाइट JDU ने इसे बिहार के विकास में एक स्वर्णिम अध्याय बताया है। JDU ने कहा है कि ‘बिहार के विकास में एक और स्वर्णिम अध्याय! माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार का एयरपोर्ट अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए हो रहा तैयार। यह कदम न केवल राज्य की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।’ कंधार हाईजैक के बाद से बंद थी इंटरनेशनल फ्लाइट कंधार हाईजैक के बाद से ही पटना से इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद कर दी गई थीं। आपको बता दें कि अब फिर से पटना एयरपोर्ट से जल्द ही इंटरनेशनल फ्लाइट्स उड़ेंगीं। नए टर्मिनल का निर्माण तेजी से चल रहा है। फरवरी में निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। अप्रैल में नए टर्मिनल का उद्घाटन होगा। इसके बाद मई से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो सकती हैं। नए टर्मिनल के साथ इमिग्रेशन काउंटर पटना एयरपोर्ट पर नए टर्मिनल के बनने के बाद इमिग्रेशन काउंटर भी शुरू हो जाएंगे। इससे विदेश यात्रा और आसान होगी। 1999 से पटना से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद थीं। 26 साल बाद फिर से ये उड़ानें शुरू होंगी। मई से पटना से काठमांडू, म्यांमार, बैंकॉक और सिंगापुर के लिए सीधी उड़ानें शुरू हो सकती हैं। अभी तक बिहार के लोगों को इन देशों में जाने के लिए दिल्ली या कोलकाता जाना पड़ता था। सीधी उड़ानें शुरू होने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया प्लानिंग में जुटी AAI पटना एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार करने में जुटी है। कई विमानन कंपनियां पटना से उड़ानें शुरू करने में रुचि दिखा रही हैं। यात्रा मार्ग और यात्रियों की संख्या का सर्वे किया जा रहा है। पटना से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने से यात्रियों का समय और पैसा बचेगा। इसके अलावा, विदेशों में कार्गो भेजने की भी योजना है। इससे बिहार के व्यापारियों और उद्यमियों को अपने उत्पाद विदेशी बाजारों में भेजने में आसानी होगी। पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन नए टर्मिनल का उद्घाटन अप्रैल में होगा। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। 1999 में इंडियन एयरलाइंस के एक विमान के अपहरण के बाद पटना से नेपाल के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद कर दी गई थीं। तब से पटना एयरपोर्ट सिर्फ नाम का ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट रह गया था। अब 26 साल बाद फिर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने से बिहार के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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नीतीश की बीमारी कहीं NDA में राजनीतिक उठापटक की नींव न डाल दे, टूट चुकी है 19 साल की परम्परा!

नया विचार पटना– बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीमार क्या हुए, राज्य में नई नेतृत्वक उठापटक की कहानी शुरू हो गई। कुछ हो न हो, पर नीतीश कुमार कुछ इसी तरह से बीमार रहे तो एनडीए की नेतृत्व किंतु-परंतु के घेरे में तो चली ही जाएगी। इसके साथ ही एनडीए के छोटे दल जो बड़ा चेहरा दिखाने लगे हैं, उनकी टकराहट की गूंज कुछ बढ़ भी सकती है। सबसे ज्यादा चिंता की बात भाजपा के लिए ही हो जाएगी, क्योंकि बिहार में ‘कुर्सी की नेतृत्व’ में नीतीश कुमार उनके लिए तो तुरुप का इक्का ही हैं। दिलचस्प तो यह है कि बीमारी के कारण नीतीश कुमार जिन महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए, विपक्ष इसे एनडीए में खटपट के रूप में देखने लगा है। आइए जानते हैं कि विपक्ष को बोलने का मौका कब-कब नीतीश कुमार ने दिया… …और तोड़ दी 19 साल की परम्परा अपने नेतृत्वक करियर में नीतीश कुमार के चिंतन में सबसे ज्यादा दलित पीड़ित ही रही है। लेकिन, इस बार नीतीश कुमार के जीवन का नकारात्मक ही सही पर एक रिकॉर्ड बन गया। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गणतंत्र दिवस के मौके पर दलित टोला जाते रहे हैं। लेकिन खुद के रचे इतिहास को खुद नीतीश कुमार ने ही इस बार बदल दिया। दरअसल होता यह था कि गणतंत्र दिवस पर नीतीश कुमार गांधी मैदान आते थे, और यहां से किसी दलित टोले में उनकी उपस्थिति में झंडोत्तोलन होता था। इस गणतंत्र दिवस पर भी दलित टोला में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जाने का कार्यक्रम तय था। मुख्यमंत्री को फुलवारी शरीफ प्रखंड के महुली गांव के महादलित टोले में जाना था। प्रशासनिक तैयारी की जा रही थी। बड़ा मंच बना। सजावट की सारी व्यवस्था की गई। नीतीश कुमार पटना के गांधी मैदान भी गए, पर सीएम झंडोत्तोलन के बाद सीधे अपने आवास चले गये। सीएम नीतीश कुमार के बदले मंत्री विजय चौधरी महुली गांव में पहुंचे। विजय चौधरी की मौजूदगी में महादलित टोले के बुजुर्ग सुभाष रविदास ने झंडोत्तोलन किया।इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के नहीं जाने से नेतृत्वक गलियारा अफवाहों से भर गया था। पीठासीन पदाधिकारियों की बैठक में भी नहीं पहुंचे सीएम गत माह जनवरी को पटना में देश भर के पीठासीन पदाधिकारियों का सम्मेलन हुआ था। इसमें लोकसभा के अध्यक्ष समेत सारे राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष मौजूद थे। कार्यक्रम में नीतीश कुमार को आना था और संबोधन भी करना था। लेकिन नीतीश कुमार कार्यक्रम में नहीं गए। कर्पूरी ठाकुर की जयंती कार्यक्रम में नहीं आए नीतीश ज्ञात हो कि 24 जनवरी को कर्पूरी जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पटना और समस्तीपुर के दौरे पर आये थे। प्रोटोकॉल तो यही कहता है के नीतीश कुमार को पटना एयरपोर्ट पर ही उप-राष्ट्रपति का स्वागत करना चाहिए था, लेकिन वे वहां नहीं गए। तय यह हुआ था कि स्व. कर्पूरी ठाकुर के गांव में आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे। लेकिन नीतीश कुमार मुख्य समारोह में शामिल नहीं हुए। बीमार हुए नीतीश तो NDA में बिखराव? वरिष्ट पत्रकार का मानना है कि नीतीश कुमार का ही वह चेहरा है, जो भाजपा को सत्ता के करीब लाता है। और यह बीमारी जिसके कारण महत्वपूर्ण कार्यक्रम तक छूट जा रहे हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार से भी अगर नीतीश कुमार दूर रह गए तो एनडीए में दरार तो पड़ेगी ही, जदयू भी विभाजित हो सकती है। सेकंड लाइनर नहीं होने के कारण पार्टी बिखर भी सकती है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही एनडीए में शामिल छोटे दलों ने पहले से ही डिमांड का पहाड़ खड़ा कर रखा है। तब ये सौ फीसदी स्ट्राइक रेट वाली पार्टियां हिस्सेदारी की सीमा हर हाल में पाना चाहेंगी। और ये स्थितियां महागठबंधन की लड़ाई को अतिरिक्त ताकत दे जाएगा। एनडीए में नीतीश कुमार के विकल्प को ले कर कोई चेहरा भी नहीं है। यह एक यक्ष प्रश्न तो खड़ा हो जाएगा।

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