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बिहार में 15000 कमाने वाले लोगों की बल्ले-बल्ले, अब मिलेगा इस योजना का लाभ; जानें

नया विचार पटना– बिहार के गरीब परिवारों के लिए खुशसमाचारी है। अब उन्हें पक्का घर मिलने का सपना जल्द ही पूरा हो सकता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत घर-घर सर्वेक्षण शुरू हो गया है। इस सर्वे का मकसद उन सभी योग्य परिवारों की पहचान करना है, जो अभी तक इस योजना का लाभ नहीं ले पाए हैं। यह सर्वेक्षण 31 मार्च तक चलेगा। इस दौरान अधिकारी घर-घर जाकर लोगों की जानकारी इकट्ठा करेंगे। योजना में किए गए बड़े बदलाव इस बार योजना में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं। पहले अगर आपके पास बाइक थी या आपकी आमदनी 10000 रुपये से ज्यादा थी, तो आपको इस योजना का लाभ नहीं मिलता था। लेकिन अब नियम बदल गए हैं। अगर आपके पास बाइक है और आप 15000 रुपये प्रतिमाह कमाते हैं, तब भी आप पीएम आवास योजना का लाभ ले सकते हैं। बनाए गए हैं खास नियम लाभार्थियों के चयन के लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं। सबसे पहले तो आपके पास प्रशासनी नौकरी नहीं होनी चाहिए। दूसरे आपके पास ट्रैक्टर या हार्वेस्टर जैसा कोई कृषि यंत्र नहीं होना चाहिए। और तीसरा, आपका नाम योजना की पुरानी सूची में नहीं होना चाहिए। इनके अलावा कुछ और भी नियम हैं। अगर आपके पास कार या कोई अन्य चार पहिया वाहन है, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सीमा 50000 रुपये या उससे ज्यादा है, आप इनकम टैक्स या व्यापार कर देते हैं, या आपके परिवार में किसी सदस्य की मासिक आय 15,000 रुपये या उससे ज्यादा है, तो आपको इस योजना से बाहर रखा जाएगा। योजना का लाभ लेने को चाहिए ये कार्ड पीएम आवास योजना का लाभ लेने के लिए आपके पास मनरेगा का जॉब कार्ड और आधार कार्ड होना जरूरी है। अगर आपके पास जॉब कार्ड नहीं है, तो आपको योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सर्वे के दौरान अधिकारी इन सभी बातों की जांच करेंगे। सर्वे पूरा होने के बाद योग्य लाभार्थियों के नाम आवास प्लस 2.0 ऐप में जोड़े जाएंगे।

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बिहार में स्टील, टीवी, सीमेंट कुछ नहीं बनता, सिर्फ नौजवान लड़कों को मजदूर बनाया जा रहा है : प्रशांत किशोर

नया विचार – जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने लालू-नीतीश के 35 साल के शासन का विश्लेषण करते हुए कहा कि बिहार में स्टील, टीवी, सीमेंट आदि नहीं बनता है। बिहार में सिर्फ एक चीज बन रही है, हमारे नौजवान लड़कों को मजदूर बनाया जा रहा है। हमारे राज्य में स्टील या सीमेंट की फैक्ट्री नहीं है, इसलिए हमारे युवाओं को दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करनी पड़ती है। हमारे राज्य के युवा दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू-नीतीश ने मिलकर पूरे समाज को अनपढ़ बना दिया है। इसका नतीजा यह है कि हमारे सारे शिशु मजदूर ही बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि लालू और नीतीश के राज में ज्यादा फर्क नहीं है। लालू जी के राज में अपराधी जनता को परेशान करते थे और नीतीश कुमार भाजपा के राज में अधिकारी जनता को परेशान करते हैं। नीतीश कुमार के अफसर राज का आलम यह है कि आम लोगों को चाहे जमीन संबंधी कोई काम करवाना हो या जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हो, अधिकारी बिना रिश्वत लिए काम नहीं करते।

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‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे और पसमांदा वाले अली अनवर ने छोड़ा नीतीश का साथ, बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस का दांव

नया विचार पटना- बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को कांग्रेस ने झटका दिया है। पूर्व राज्यसभा सदस्य अली अनवर अंसारी और ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भगीरथ मांझी ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इनके साथ कुछ अन्य नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने सभी का पार्टी में स्वागत किया। अली अनवर अंसारी जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं और वो अप्रैल 2006 से दिसंबर 2017 तक उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य भी रहे। उन्होंने कहा कि वो राहुल गांधी के विचारों से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। JDU वाले अली अनवर अब कांग्रेस में अली अनवर अंसारी ने कहा, ‘राहुल जी के विचारों से बिहार में भाजपा और जद (यू) में खलबली मच गई है। राहुल जी की बातों से राज्य में दलित, आदिवासी, अति पिछड़ों, अकलियतों और पसमांदा मुसलमानों में उत्साह का संचार हुआ है।’ ‘पसमांदा मुस्लिम महाज’ नामक संगठन के संस्थापक अली अनवर अंसारी ने कहा कि उनके प्रयासों का नतीजा है कि देश-दुनिया के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में ‘पसमांदा सियासत’ पर शोध हो रहा है। कांग्रेस जॉइन करने के बाद अली अनवर अंसारी ने कहा, ‘खरगे जी और राहुल गांधी जी के विचारों से पहले से ही प्रभावित था। जब ‘संविधान रक्षा सम्मेलन’ की श्रृंखला शुरू हुई, तब मुझे आमंत्रित किया गया, जिसके बाद हम लोगों ने मिलकर कई जगहों पर इस सम्मेलन का आयोजन किया। बिहार में राहुल गांधी जी के विचारों से दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक लोगों में उत्साह का संचार हुआ है। हम सभी कांग्रेस पार्टी के विचारों से सहमति रखते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।’ माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भी ‘हाथ’ के साथ वहीं, जून 2023 में ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भगीरथ मांझी ने जेडीयू की सदस्यता ली थी। बड़े ही तामझाम से पटना के जेडीयू ऑफिस में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने दशरथ मांझी और उनके दामाद मिथुन मांझी को मेंबर बनाया था। तब, उम्मीद की जा रही थी कि गया से भगीरथ मांझी या उनके दामाद मिथुन मांझी जेडीयू से चुनाव लड़ेंगे। मगर, लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने पल्टी मारी और बाजी पलट गया। गया लोकसभी सीट एनडीए के पार्टनर जीतन राम मांझी के खाते में चला गया। हाल ही में 18 जनवरी को पटना में संविधान सुरक्षा सम्मेलन में के दौरान भागीरथ मांझी की मुलाकात कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हुई थी। राहुल गांधी ने उन्हें सम्मानित किया था। बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अली अनवर अंसारी और भगीरथ मांझी के कांग्रेस जॉइन करने को लेकर एक बड़ा बदलाव कहा जा रहा है। इस कार्यक्रम में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश भी मौजूद थे। इसके अलावा नीतीश के गृह जिले नालंदा के रहने वाले फेमस हार्ट सर्जन डॉ. जगदीश प्रसाद ने भी राहुल गांधी पर भरोसा जताया। अब ये हस्तियां कांग्रेस के साथ इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज प्रजापति, आम आदमी पार्टी के नेता निशांत आनंद, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जगदीश प्रसाद, भाजपा की नेता रहीं निखत अब्बास, लेखक और पत्रकार फ्रैंक हुजूर भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं। कुल सात नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को जॉइन किया जिसमें बिहार से अली अनवर अंसारी और भगीरथ मांझी शामिल हैं। •अली अनवर अंसारी: पूर्व सांसद, प्रख्यात राजनेता, समाज सेवक और वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं। इनकी मुस्लिम दलित समुदाय के संघर्षों पर लिखी किताबें बहुत विख्यात हैं। •भगीरथ मांझी: ये ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी जी के सुपुत्र हैं और कांग्रेस और राहुल गांधी जी की विचारधारा से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए •डॉ. जगदीश प्रसाद: प्रसिद्ध हार्ट सर्जन और हिंदुस्तान प्रशासन में पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक रहे हैं। बिहार के नालंदा जिले से आते हैं। •मनोज प्रजापति: अखिल हिंदुस्तानीय प्रजापति कुंभकार संघ के राज्य अध्यक्ष हैं। ये सामाजिक और आर्थिक पहलुओं के द्वारा अपने समुदाय को ऊपर उठाने का काम करते आए हैं। •निशांत आनंद: AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं। 4 साल से AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करते आए हैं। •निखत अब्बास: BJP की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रही हैं, इन्होंने BJP के साथ बहुत काम किया है। •फ्रैंक हुजूर, प्रसिद्ध लेखक: राहुल गांधी जी के समर्थन में हमेशा योगदान देते रहे हैं। ये हिंदुस्तान की विविधता के हिमायती हैं।

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पर्यटकों से गुलजार हुआ बिहार का डल झील, अब तक पहुंची 41 प्रजातियों की विदेशी पक्षियां

नया विचार बेगूसराय– बिहार के बेगूसराय जिले स्थिति कावर झील आजकल पर्यटकों से गुलजार है. एशिया का यह दूसरा सबसे बड़ा पक्षी अभयारण्य है. यह अभयारण्य प्रकृति के सौंदर्य और पक्षी संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है. इस पक्षी अभयारण्य में इस साल 107 प्रजाति के देसी और करीब 40 प्रजाति के विदेशी पक्षी प्रवास करने आये हैं. इस कारण यह जगह पक्षी प्रेमियों के लिए खास बन गया है. यहां लोगों को कई प्रवासी पक्षी और देसी पक्षी की प्रजाति देखने को मिल रही है. इन पक्षियों को कावर का स्वच्छ जल, कम ठंड एवं धान के अवशेष के रूप में चारा की पर्याप्त उपलब्धता के कारण रुकने में आसानी होती है. सात समंदर पार से आती हैं प्रवासी पक्षियां ठंड बढ़ते ही कावर झील पक्षी विहार में प्रवासी मेहमान पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है. सात समंदर पार से मीलों दूर सफर तय कर रंग-बिरंगे पक्षियों का झील में उतरना शुरू हो गया है. पक्षियों की चहचहाहट व कलरव से लोगों का मन प्रफुल्लित हो रहा है. वहीं झील की रमणीयता बढ़ गई है. रंग-बिरंगे पक्षियों की कलरव से झील की सुंदरता में चार चांद लग गया है. प्रत्येक वर्ष दर्जनों प्रजाति के पक्षी यहां आते हैं. आनेवाले पक्षियों की संख्या सैकड़ों में नहीं बल्कि कई हजारों में होती है. इस झील में पांच माह के प्रवास के बाद गर्मी शुरू होते ही अपने वतन को लौट जाते हैं. यहां दिखती हैं 40 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां इस जगह को 20 जनवरी 1989 को कावर पक्षी बिहार घोषित किया गया. दो जनवरी 1989 को वन मंत्रालय ने कावर को देशभर के 10 रामसर साइट में शामिल किया. इस झील में मुख्य रूप से लालसर, दीघौंच, कसुरार, डुमर, निलसर, डार्टर, ब्लैक नेकेड स्टाक, कूट, किगफिशर, मूर हेन, ग्रै हेरान, कामन इगरेट, लार्ज इगरेट, स्नालर इगरेट, लिटिस इगरेट, नाइट हेरान, लिटिल ग्रीब, शावलर, शिकरा, इजिप्शियन वल्चर, बार हेडेड गीज, पर्पल हेरान, टिल, पर्पल हेरान आदि प्रजाति के मेहमान पक्षी ठंडे इलाके वाले देश साइबेरिया, स्विट्जरलैंड, इंडो तिब्बत, वर्मा, थाईलैंड, जापान, रूस, अफगानिस्तान, मंगोलिया, इंडोनेशिया आदि देशों से यहां पहुंचते हैं. पर्यटकों को भा रही है प्रकृति की सुंदरता पर्यटकों के लिए प्रशासनी स्तर पर कोई खास व्यवस्था नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों ने निजी स्तर पर नाव के साथ-साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की है. कावर झील में पक्षी देखने आयी चंदा सिंह कहती हैं कि पक्षी अभयारण्य एक ऐसी जगह है, जहां आप सुंदर पक्षियों के साथ प्रकृति के मनोरम दृश्य का भी आनंद उठा सकते हैं. यहां मौजूद प्रवासी पक्षियां अपनी ओर आकर्षित करती है. सुविधाओं की कमी के बावजूद उनका कहना है कि यह जगह दोस्तों और परिवार के साथ घूमने के लिए शानदार पर्यटन स्थल है. नेचर फोटोग्राफी के शौकीन अभिनव सिन्हा कहते हैं कि रंग-बिरंगे पक्षियों की खूबसूरती और प्रकृति की सुंदरता को अपनी नजरों में कैद करना हमें यहां अच्छा लगता है. कैसे आएं कावर झील पक्षी अभयारण्य बेगूसराय में स्थित कावर झील पक्षी अभ्यारण एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल है. यहां आने के लिए आप रेल, सड़क और हवाई मार्ग का उपयोग कर सकते हैं. रेल मार्ग – इस पक्षी अभ्यारण तक आने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बेगूसराय स्टेशन है, जिसकी दूरी कावर झील से मात्र 30 किलोमीटर है. वायु मार्ग – कावर झील पक्षी अभयारण्य का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पटना एयरपोर्ट है. इस एयरपोर्ट से पक्षी अभयारण्य तक की दूरी केवल 160 किलोमीटर है. पटना एयरपोर्ट तक पहुंच कर आप बेगूसराय के लिए बस या कैब लेकर कावर झील पक्षी अभयारण्य तक आ सकते हैं. सड़क मार्ग – पटना को बेगूसराय से जोड़ने वाली सड़क हिंदुस्तान के प्रमुख शहरों से जुड़ी हुई है. इसलिए आप सड़क मार्ग से भी कावर झील पक्षी अभयारण्य तक आ सकते हैं.

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नीतीश की बीमारी कहीं NDA में राजनीतिक उठापटक की नींव न डाल दे, टूट चुकी है 19 साल की परम्परा!

नया विचार पटना– बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीमार क्या हुए, राज्य में नई नेतृत्वक उठापटक की कहानी शुरू हो गई। कुछ हो न हो, पर नीतीश कुमार कुछ इसी तरह से बीमार रहे तो एनडीए की नेतृत्व किंतु-परंतु के घेरे में तो चली ही जाएगी। इसके साथ ही एनडीए के छोटे दल जो बड़ा चेहरा दिखाने लगे हैं, उनकी टकराहट की गूंज कुछ बढ़ भी सकती है। सबसे ज्यादा चिंता की बात भाजपा के लिए ही हो जाएगी, क्योंकि बिहार में ‘कुर्सी की नेतृत्व’ में नीतीश कुमार उनके लिए तो तुरुप का इक्का ही हैं। दिलचस्प तो यह है कि बीमारी के कारण नीतीश कुमार जिन महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए, विपक्ष इसे एनडीए में खटपट के रूप में देखने लगा है। आइए जानते हैं कि विपक्ष को बोलने का मौका कब-कब नीतीश कुमार ने दिया… …और तोड़ दी 19 साल की परम्परा अपने नेतृत्वक करियर में नीतीश कुमार के चिंतन में सबसे ज्यादा दलित पीड़ित ही रही है। लेकिन, इस बार नीतीश कुमार के जीवन का नकारात्मक ही सही पर एक रिकॉर्ड बन गया। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गणतंत्र दिवस के मौके पर दलित टोला जाते रहे हैं। लेकिन खुद के रचे इतिहास को खुद नीतीश कुमार ने ही इस बार बदल दिया। दरअसल होता यह था कि गणतंत्र दिवस पर नीतीश कुमार गांधी मैदान आते थे, और यहां से किसी दलित टोले में उनकी उपस्थिति में झंडोत्तोलन होता था। इस गणतंत्र दिवस पर भी दलित टोला में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जाने का कार्यक्रम तय था। मुख्यमंत्री को फुलवारी शरीफ प्रखंड के महुली गांव के महादलित टोले में जाना था। प्रशासनिक तैयारी की जा रही थी। बड़ा मंच बना। सजावट की सारी व्यवस्था की गई। नीतीश कुमार पटना के गांधी मैदान भी गए, पर सीएम झंडोत्तोलन के बाद सीधे अपने आवास चले गये। सीएम नीतीश कुमार के बदले मंत्री विजय चौधरी महुली गांव में पहुंचे। विजय चौधरी की मौजूदगी में महादलित टोले के बुजुर्ग सुभाष रविदास ने झंडोत्तोलन किया।इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के नहीं जाने से नेतृत्वक गलियारा अफवाहों से भर गया था। पीठासीन पदाधिकारियों की बैठक में भी नहीं पहुंचे सीएम गत माह जनवरी को पटना में देश भर के पीठासीन पदाधिकारियों का सम्मेलन हुआ था। इसमें लोकसभा के अध्यक्ष समेत सारे राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष मौजूद थे। कार्यक्रम में नीतीश कुमार को आना था और संबोधन भी करना था। लेकिन नीतीश कुमार कार्यक्रम में नहीं गए। कर्पूरी ठाकुर की जयंती कार्यक्रम में नहीं आए नीतीश ज्ञात हो कि 24 जनवरी को कर्पूरी जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पटना और समस्तीपुर के दौरे पर आये थे। प्रोटोकॉल तो यही कहता है के नीतीश कुमार को पटना एयरपोर्ट पर ही उप-राष्ट्रपति का स्वागत करना चाहिए था, लेकिन वे वहां नहीं गए। तय यह हुआ था कि स्व. कर्पूरी ठाकुर के गांव में आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे। लेकिन नीतीश कुमार मुख्य समारोह में शामिल नहीं हुए। बीमार हुए नीतीश तो NDA में बिखराव? वरिष्ट पत्रकार का मानना है कि नीतीश कुमार का ही वह चेहरा है, जो भाजपा को सत्ता के करीब लाता है। और यह बीमारी जिसके कारण महत्वपूर्ण कार्यक्रम तक छूट जा रहे हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार से भी अगर नीतीश कुमार दूर रह गए तो एनडीए में दरार तो पड़ेगी ही, जदयू भी विभाजित हो सकती है। सेकंड लाइनर नहीं होने के कारण पार्टी बिखर भी सकती है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही एनडीए में शामिल छोटे दलों ने पहले से ही डिमांड का पहाड़ खड़ा कर रखा है। तब ये सौ फीसदी स्ट्राइक रेट वाली पार्टियां हिस्सेदारी की सीमा हर हाल में पाना चाहेंगी। और ये स्थितियां महागठबंधन की लड़ाई को अतिरिक्त ताकत दे जाएगा। एनडीए में नीतीश कुमार के विकल्प को ले कर कोई चेहरा भी नहीं है। यह एक यक्ष प्रश्न तो खड़ा हो जाएगा।

ताजा ख़बर, बिहार, मौसम

बिहार के इन 8 जिलों में आज फिर बिगड़ेगा मौसम, पछुआ हवाएं बढ़ाएगी ठिठुरन

नया विचार पटना– बिहार के मौसम में लगातार बदलाव जारी है. प्रदेश में घने कोहरे और ठंड से फिलहाल लोगों को राहत मिलने की संभावना नहीं है. क्योंकि पछुआ हवा लगातार बिहार में ठंड बढ़ा रही है. हालांकि आज सुबह के समय घना कोहरा और दिन में धूप खिलेगी. आज राज्य के अधिकांश इलाके में अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 06 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेश का मौसम ऐसा ही बने रहने का अनुमान है. IMD ने बिहार के 7 जिलों में 29 जनवरी तक घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है. सर्द पछुआ हवाएं बढ़ाएगी ठिठुरन प्रदेश में सर्द पछुआ हवाएं चलने के कारण रात के समय ठिठुरन महसूस हो रही है. मौसम विभाग केंद्र का कहना है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है. हालांकि इसके बाद बिहार के न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. बिहार में अगले कुछ दिनों तक कोहरे और ठंड का असर बना रहेगा. दिन के समय धूप निकलने से लोगों को थोड़ी बहुत राहत मिलेगी. इन जिलों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना बिहार में अगले 24 घंटे में हल्के से मध्यम गति की पछुआ हवा चलने की स्थिति जारी रहने का पूर्वानुमान है. राज्य के अधिकांश भागों के न्यूनतम तापमान में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन की संभावना नहीं है. राज्य के उत्तरी भाग में मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की स्थिति जारी रहने की संभावना है. प्रदेश के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, शिवहर और किशनगंज में मंगलवार की सुबह घना कोहरा छाए रहेगा. वहीं पिछले 24 घंटों में प्रदेश में गया जिला के डुमरिया सबसे ठंडा रहा. डुमरिया का न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं सोमवार को मुंगेर जिला के बरियारपुर प्रखंड सबसे ज्यादा गर्म रहा. यहां का अधिकतम तापमान 27.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

आपदा, बिहार

स्कूल जा रही BPSC शिक्षिका की पेड़ गिरने से मौत

नया विचार – बिहार के मुजफ्फरपुर में सुबह-सुबह दर्दनाक हादसा हुआ. स्कूल जा रहे प्रिंसिपल और शिक्षिका के ऊपर अचानक पेड़ का डाल टूट कर गिर गया. जिस कारण स्त्री शिक्षिका की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं प्रधानाध्यापक गंभीर रूप से जख्मी हो गए. नाजुक स्थिति में उनका इलाज चल रहा है. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई है. यह मामला जिले के मीनापुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है. घटना का लाइव CCTV फूटेज भी आया है.  देखें वीडियो https://youtube.com/shorts/1w8o4ullIvU?si=Q1Gikoa5n0-jph8x उत्तर प्रदेश की रहने वाली थी शिक्षिका मृत शिक्षिका की पहचान विशाखा के रूप में की गई है. जो उत्तरप्रदेश की रहने वाली हैं. वे अपने स्कूल के प्रिंसिपल फूलबाबू राय के साथ स्कूल जा रही थी. दोनो मीनापुर प्रखंड के तालीमपुर मध्य विद्यालय में पोस्टेड थे. स्कूल जाने के क्रम में जैसे ही दोनों बाइक से गंगा सागर पुल के समीप देवी स्थान के पास पहुंचे, की अचानक पेड़ का डाल टूट कर उनके ऊपर गिर गया. दोनो गंभीर रूप से जख्मी हो गए. वही बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई. हादसा के बाद दोनो दर्द से चीखने चिल्लाने लगे. जिसके बाद मौके पर स्थानीय लोगो कि भीड़ लग गई. दो साल पहले हुई थी पोस्टिंग उसके बाद दोनो को अस्पताल ले जाने की कवायद शुरू की गई. इसी बीच स्त्री शिक्षिका विशाखा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. वही प्रिंसिपल फूलबाबू राय दर्द से कराहते रहे. मामले की जानकारी मीनापुर थाना की पुलिस को दी गई. सूचना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. बता दें कि दो वर्ष पूर्व ही विशाखा की इस विद्यालय में पोस्टिंग हुई थी.

अपराध, ताजा ख़बर, बिहार

नवादा में व्यवसायी से करीब 19 लाख की लूट:नवादा में गोलीबारी करते भागे बदमाश, घटनास्थल से एक कारतूस और 8 खोखे बरामद

नया विचार – नवादा के शाहपुर थाना क्षेत्र में पशु व्यवसायी पर अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर करीब 19 लाख रुपए की लूट की वारदात को अंजाम दिया। घटना में व्यवसायी को भी गोली लगी है, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें पावापुरी स्थित मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ित की पहचान सरवर मास्टर के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी। करीब 19 लाख रुपए की हुई लूट घटना की सूचना पर डीएसपी महेश चौधरी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि मौके से एक जिंदा कारतूस और आठ खोखे बरामद किए गए हैं। हालांकि, लूट की गई राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अपराधी लगभग 19 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। अपराधियों की धमक से इलाके में दहशत का माहौल है। गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग भी वहां से भाग गए। पुलिस ने अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष टीम गठित की है और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।  

बिहार, राजनीति

नीतीश के बेटे निशांत की पॉलिटिकल एंट्री को लेकर बेचैनी क्यों? होली बाद की दी जा रही तारीख, जानें

नया विचार पटना– बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही नेतृत्व में कदम रख सकते हैं। समाचार है कि होली के बाद वो जेडीयू में शामिल हो सकते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से लगातार निशांत के नेतृत्व में आने की मांग हो रही है। बस अब नीतीश कुमार की हरी झंडी का इंतजार है। हालांकि, जेडीयू ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी नेता मीडिया रिपोर्ट में इस बात के संकेत दे रहे हैं। निशांत हाल ही में अपने पिता के साथ एक कार्यक्रम में नजर आए थे, जहां उन्होंने लोगों से नीतीश कुमार को वोट देने की अपील की थी। इसके बाद से ही उनके नेतृत्व में आने की चर्चा और जोर पकड़ ली। नीतीश के बेटे की पॉलिटिकल एंट्री की अटकलें मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पिछले साल से ही जेडीयू में निशांत के नाम की चर्चा चल रही है। पार्टी के कई कार्यकर्ता चाहते हैं कि निशांत पार्टी में शामिल हों और सक्रिय नेतृत्व में आएं। लेकिन पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस मामले में अभी सावधानी बरत रहे हैं। वे इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से भी बच रहे हैं। इस वजह से मामला थोड़ा उलझा हुआ है। लेकिन पार्टी के अंदरूनी हलकों में निशांत के नाम पर लगातार चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि जदयू कार्यकर्ता काफी समय से निशांत को पार्टी में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन वरिष्ठ नेताओं की तरफ से इस बारे में कोई खास उत्साह नहीं दिखाया जा रहा है। वे इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। निशांत का नाम समय-समय पर चर्चा में आता रहता है, लेकिन पार्टी के बड़े नेता इस बारे में कुछ भी कहने से बचते नजर आते हैं। ऐसा लगता है कि वे इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते। निशांत ने पिता नीतीश के लिए की थी वोट अपील हाल ही में निशांत अपने पिता नीतीश कुमार के साथ बख्तियारपुर में एक कार्यक्रम में गए थे। वहां स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों का अनावरण किया गया था। इस मौके पर निशांत ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि पिता जी ने अच्छा काम किया है, उन्हें जरूर वोट दें और दोबारा मुख्यमंत्री बनाएं। यह अपील बिहार की जनता के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी थी। इससे पहले निशांत को 2015 में नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था। निशांत के इस बयान के बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिए कि निशांत नेतृत्व में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम उनके (निशांत के) बयान का स्वागत करते हैं। उन्हें मौजूदा प्रशासन की अच्छी समझ है। निशांत के नेतृत्व में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसे प्रगतिशील विचारों वाले युवाओं का नेतृत्व में स्वागत है, सही समय पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि, जेडीयू ने आधिकारिक रूप से इस पर कोई बयान नहीं दिया है। जेडीयू के बड़े नेताओं ने अब तक साधी चुप्पी लेकिन पार्टी के एक नेता ने मीडिय से कहा कि अभी भी देर नहीं हुई है। हमें भविष्य के लिए निशांत कुमार को जेडीयू में लाने की जरूरत है। इस बयान के बाद निशांत के जेडीयू में शामिल होने की अटकलें और तेज हो गई हैं। अब देखना होगा कि नीतीश कुमार कब इस पर अपनी मुहर लगाते हैं और निशांत औपचारिक रूप से नेतृत्व में एंट्री लेते हैं। यह बिहार की नेतृत्व के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

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बिहार के सरकारी दफ्तर होंगे पेपरलेस, ई-ऑफिस सिस्टम लागू से बढ़ेगी पारदर्शिता; खत्म होगा भ्रष्टाचार

नया विचार पटना– बिहार प्रशासन एक बड़ा बदलाव लाने जा रही है। 1 फरवरी 2025 से सभी प्रशासनी दफ्तरों में कागज़ों का काम ख़त्म होगा। इसके बदले ई-ऑफिस सिस्टम शुरू होगा। इससे फाइलों का काम जल्दी होगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। शिवहर ज़िले के सभी प्रशासनी दफ्तरों में, समाहरणालय से लेकर अंचल तक, यह नया सिस्टम लागू होगा। कर्मचारियों को इसके लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है। कामकाज में तेजी और पारदर्शी व्यवस्था के लिए ई-ऑफिस सिस्टम राज्य प्रशासन ने प्रशासनी कामकाज को तेज़ और पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने का फ़ैसला किया है। इससे अब फाइलें कंप्यूटर पर चलेंगी, कागज़ों की ज़रूरत नहीं होगी। इस बदलाव से समय की बचत होगी और काम जल्दी निपटेगा। साथ ही, काम में पारदर्शिता भी आएगी। इसके लिए सभी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि उन्हें नए सिस्टम में काम करने में कोई दिक्कत न हो। शिवहर ज़िले में भी तीन दिन की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। शिवहर जिले के सभी कर्मचारियों को मिला यूजर आईडी शिवहर के सभी प्रशासनी दफ्तरों, जैसे समाहरणालय, अनुमंडल कार्यालय, प्रखंड और अंचल, में यह नया सिस्टम लागू होगा। सभी कर्मचारियों को यूजर आईडी भी दे दी गई है। पटना से आये विशेषज्ञ आनंद प्रकाश मिश्रा मंजय और आशुतोष कुमार भास्कर ने कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी। यह ट्रेनिंग तीन चरणों में पूरी हुई। ट्रेनिंग समाहरणालय सभागार और डायट में हुई। इसमें सभी दफ्तरों के प्रभारी अधिकारी और उनके नीचे काम करने वाले कर्मचारी शामिल हुए। फाइलें अब इधर-उधर नहीं घूमेंगी, काम जल्दी होगा बताया गया है कि इस नए सिस्टम से प्रशासनी कामकाज में बड़ा बदलाव आएगा और लोगों को इसका फ़ायदा मिलेगा। अब फाइलें इधर-उधर नहीं घूमेंगी और काम जल्दी होगा। इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। लोगों को प्रशासनी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। यह सिस्टम पूरी तरह डिजिटल होगा। इससे कागज़ की बचत होगी और पर्यावरण को भी फ़ायदा होगा। प्रशासन का यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह प्रशासन को और भी बेहतर और कुशल बनाएगा। आने वाले समय में इसके और भी अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे। यह व्यवस्था सभी प्रशासनी विभागों में लागू होगी।

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