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Vastu Tips: रसोईघर गलत दिशा में बना है तो बढ़ सकती हैं परेशानियां, जानें सही नियम

Vastu Tips: अक्सर लोग मकान तो बना लेते हैं, लेकिन मकान की किस दिशा में क्या बनाना चाहिए, इसकी सही जानकारी न होने के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वास्तु शास्त्र एक अत्यंत प्राचीन विद्या है, जिसमें घर के हर हिस्से के निर्माण से जुड़े नियम बताए गए हैं. प्राचीन काल में भी घरों का निर्माण वास्तु के नियमों को ध्यान में रखकर किया जाता था. आज हम जानेंगे कि वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार रसोईघर का निर्माण कैसे करना चाहिए, ताकि घर में सुख-शांति और आपसी एकता बनी रहे. रसोईघर से संबंधित वास्तु निर्देश घर बनाते समय रसोईघर अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में ही बनाना चाहिए. यदि अग्नि कोण में रसोईघर बनाना संभव न हो, तो पश्चिम दिशा रसोईघर के लिए अनुकूल मानी जाती है. रसोईघर की लंबाई और चौड़ाई के गुणनफल को 9 से गुणा कर 8 से भाग देने पर यदि शेषफल 2 आता है, तो इसे शुभ माना जाता है. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में चूल्हा नहीं रखना चाहिए. ऐसा करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है तथा वंशवृद्धि में बाधा आती है. खाना बनाते समय गृहिणी या खाना बनाने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. ऐसा करने से परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है. रसोईघर में पीने का पानी ईशान कोण अथवा उत्तर दिशा में रखना चाहिए. रसोईघर में भारी सामान और बर्तन आदि दक्षिण दीवार की ओर रखने चाहिए. रसोईघर में गैस बर्नर, चूल्हा, स्टोव या हीटर आदि दीवार से कम से कम 4 इंच की दूरी पर होने चाहिए. यदि रसोईघर में फ्रिज रखना हो, तो उसे अग्नि कोण, अर्थात दक्षिण या पश्चिम, अथवा उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है. नैऋत्य कोण में फ्रिज कभी न रखें, इससे मशीन खराब होने की संभावना रहती है. रसोईघर से पानी की निकासी दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य कोण की ओर होनी चाहिए. जन्मकुंडली, वास्तु तथा व्रत-त्योहार से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने हेतु दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्राज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ📞 8080426594 / 9545290847 The post Vastu Tips: रसोईघर गलत दिशा में बना है तो बढ़ सकती हैं परेशानियां, जानें सही नियम appeared first on Naya Vichar.

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Baby Boy Names on Lord Shiva: अपने सुपर हीरो के लिए चुनें भगवान शिव के ये सुंदर और गहरे अर्थों वाले नाम  

Baby Boy Names on Lord Shiva: भगवान शिव हिंदुओं के बहुत ही प्रिय देवता माने जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को खुश करना बहुत आसान है. शिव के कई रूपों की वजह से उनके की नाम हैं. उनकी आराधना भी कई नामों से की जाती है. बहुत सारे माता-पिता आज भी अपने को धार्मिक नाम देना चाहते हैं. इस संबंध में ऐसी मान्यता है कि धार्मिक नाम देने से शिशु को पुकारने पर ही भगवान के नाम की जाप हो जाती है, जिससे घर में खुशहाली का माहौल रहता है. क्या आप भी अपने सुपर हीरो के लिए भगवान शिव से प्रेरित नाम देना चाहते हैं. यहां हम आपके लिए शिव जी के कुछ लोकप्रिय नामों की लिस्ट लेकर आए हैं. इसमें से नाम का चयन करना आसान होगा. आइए इन नामों की लिस्ट देखते हैं. लड़कों के लिए अर्थ सहित शिव के नाम आशुतोष – जो हमेशा खुश और संतोष में रहता है। अमृत्यु – अमर अनिकेत  जिसका घर न हो अभय – जिसको किसी का डर न हो भवेश – पूरी दुनिया के देवता अभिदेव – सबसे बड़े भगवान जगदीश – सृष्टि के मालिक जतिन – उलझे बालों वाले, अनुशासित रुद्र – शिव का गुस्से वाला रूप सुप्रित – जिसे सब प्यार करते हों यह भी पढ़ें: Latest Baby Names in Hindi: इन लेटेस्ट नामों से अपने नन्हे मुन्ने को दें अलग पहचान, यहां देखें लिस्ट रूद्र – भगवान शिव का एक नाम भव – संसार या जगत नील – आसमान का रंग अभिराम – अच्छा लगने वाला एकाक्ष – भगवान शिव का एक नाम अनंत – असीम शिवांश – शिव का अंश अनिरुद्धम – स्वेछाचारी पुष्कर  – आकाश या स्वर्ग अगस्त्य – पहाड़ों को हिलाने वाला अकुल – परिवार रहित चंद्रेश – चंद्रमा के भगवान यह भी पढ़ें: Baby Names in Hindi: शिशु को देना है सुंदर नाम तो पहले देख लें ये लिस्ट, हर नाम आएगा पसंद यह भी पढ़ें: Baby Names: आपके शिशु के लिए खूब पसंद किए जाने वाले लेटेस्ट नामों की लिस्ट The post Baby Boy Names on Lord Shiva: अपने सुपर हीरो के लिए चुनें भगवान शिव के ये सुंदर और गहरे अर्थों वाले नाम   appeared first on Naya Vichar.

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CM Nitish Kumar: बुलेट प्रूफ रेंज रोवर से सफर करेंगे सीएम नीतीश, एक या दो नहीं काफिले में 4 नई गाड़ियां होंगी शामिल

CM Nitish Kumar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही हाईटेक, लग्जरी और बुलेट प्रूफ गाड़ी से चलेंगे. सीएम नीतीश कुमार के लिए रेंज रोवर खरीदा जाएगा, जिसकी कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपए है. जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले में एक या दो नहीं बल्कि 4 गाड़ियां शामिल होने वाली हैं. गाड़ियों की खरीद के लिए प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. अब तक किस गाड़ी से सफर करते रहे हैं सीएम? सीएम नीतीश कुमार फिलहाल पटना में सफर करने के लिए हुंडई की आयोनिक 5 गाड़ी से चलते हैं. लेकिन पटना से बाहर अगर सफर करना होता है तो वे टाटा सफारी का इस्तेमाल करते हैं, जो कि एक बुलेट प्रूफ गाड़ी है. सीएम नीतीश कुमार की कड़ी सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए अब रेंज रोवर खरीदा जा रहा है. सीएम नीतीश के लिए क्यों खरीदा जा रहा रेंज रोवर? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब तक सामान्य गाड़ियों से ही सफर करते दिखे हैं. ऐसा पहली बार होगा जब वे रेंज रोवर जैसी लग्जरी और हाई-एंड एसयूवी से चलेंगे, ऐसे में यह बेहद खास माना जा रहा है. साथ ही इसकी खूब चर्चा भी हो रही है. लेकिन प्रशासन की तरफ से सिर्फ यह बताया गया है कि सीएम नीतीश की सुरक्षा को और भी मजबूत करने के उद्देश्य से रेंज रोवर खरीदा जा रहा है. अत्याधुनिक तकनीक से लैस है रेंज रोवर अधिकारियों की माने तो, रेंज रोवर दुनिया की सबसे सुरक्षित और अत्याधुनिक तकनीक से लैस गाड़ियों की लिस्ट में शामिल है. बुलेट प्रूफ बॉडी होने के साथ-साथ इसमें कई एडवांस फीचर होते हैं. इसी कारण देश के बड़े-बड़े नेता इस गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं. सूत्रों की माने तो, सीएम नीतीश के लिए गाड़ी खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. जल्द ही वे नई गाड़ी से सफर करते हुए नजर आयेंगे. Also Read: Patna University: 28 फरवरी को होगा छात्रसंघ का चुनाव, दीवारों पर प्रचार करने वाले हो जाएं सावधान The post CM Nitish Kumar: बुलेट प्रूफ रेंज रोवर से सफर करेंगे सीएम नीतीश, एक या दो नहीं काफिले में 4 नई गाड़ियां होंगी शामिल appeared first on Naya Vichar.

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Bihar News : बिहार में जनगणना का काउंटडाउन शुरू, अप्रैल 2026 से पहला चरण, 33 सवालों के देने होंगे जवाब

Bihar News : हिंदुस्तान की आगामी जनगणना-2027 को लेकर बिहार में तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है. इसे लेकर राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की दूसरी अहम बैठक पटना स्थित पुराने सचिवालय में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की. बैठक में सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और जनगणना से जुड़ी प्रशासनिक, तकनीकी और समन्वय संबंधी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक में स्पष्ट किया गया कि जनगणना-2027 दो चरणों में आयोजित होगी. पहला चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना से जुड़ा होगा, जिसे अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चयनित 30 दिनों में पूरा किया जाएगा. इस चरण के बाद संबंधित अधिसूचना राज्य राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी. सीमा स्थिरीकरण से बदलेगा प्रशासनिक स्पोर्ट्स बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि हिंदुस्तान प्रशासन की सीमा स्थिरीकरण अधिसूचना के तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी भी ग्रामीण या शहरी प्रशासनिक इकाई की सीमा अथवा क्षेत्राधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. वर्तमान में बिहार में 534 ग्रामीण और 265 शहरी प्रशासनिक इकाइयां, जिनमें एक छावनी परिषद भी शामिल है, अधिसूचित हैं और इन्हीं के आधार पर जनगणना का कार्य किया जाएगा. 33 सवालों पर टिकी होगी पहली गणना पहले चरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका संबंध मकानों की स्थिति, उनके उपयोग, उपलब्ध सुविधाओं, परिसंपत्तियों और मुख्य अनाज के उपभोग से होगा. ये सभी प्रश्न केंद्र प्रशासन द्वारा 23 जनवरी 2026 को विधिवत जारी किए जा चुके हैं. इस चरण की नोडल जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को सौंपी गई है. जियो-स्पैशियल तकनीक बनेगी जनगणना की रीढ़ जनगणना की योजना के शुरुआती चरण से ही जियो-स्पैशियल डेटा और एनालिटिक्स के इस्तेमाल को अनिवार्य किया गया है. इसी क्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) के महानिदेशक टीपी सिंह के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. इसमें प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल के तहत बिहार में जियो-स्पैशियल तकनीक के प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई. मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क, रेल, बिजली और सिंचाई जैसी बड़ी परियोजनाओं में शुरुआती स्तर पर बेहतर डेटा से कई समस्याओं से बचा जा सकता है. इसी दौरान मुख्य सचिव ने नेशनल डिफेंस कॉलेज के अध्ययन दल को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 15–20 वर्षों में बिहार ने तमाम चुनौतियों के बावजूद आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. उन्होंने इसे सुशासन और विकास का परिणाम बताया. Also Read: बिहार में बनेंगे 5 नए एक्सप्रेसवे, सभी सिंगल लेन सड़कें होंगी डबल लेन, जानिए नीतीश प्रशासन का मास्टरप्लान The post Bihar News : बिहार में जनगणना का काउंटडाउन शुरू, अप्रैल 2026 से पहला चरण, 33 सवालों के देने होंगे जवाब appeared first on Naya Vichar.

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पूर्व तानाशाह गद्दाफी का बेटा सैफ अल-इस्लाम मारा गया, घर के गार्डन में घुसकर हमलावरों ने गोलियों से भूना

Saif al-Islam Gaddafi: पूर्व तानाशाह गद्दाफी के वारिस सैफ अल-इस्लाम को मार दिया गया है. चार हमलावर जिंटान में उनके घर में घुस गए और उन्हें गोली मार दी. 2011 की क्रांति के बाद से वह अपने विरोधियों के निशाने पर थे. क्या सैफ की मौत से लीबिया में नया गृह युद्ध शुरू होगा? गद्दाफी के बेटे के उदय और पतन की पूरी कहानी जानें. लीबिया के पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफी के सबसे चर्चित बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की हत्या कर दी गई है. सऊदी अरब के पब्लिकेशन ‘अल अरबिया’ के मुताबिक, चार हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया. 53 साल के सैफ अल-इस्लाम पर यह हमला राजधानी त्रिपोली से करीब 136 किलोमीटर दूर ‘जिंटान’ शहर में हुआ. गार्डन में मारी गोली गद्दाफी परिवार के एक करीबी सूत्र ने ‘अल अरबिया’ को बताया कि हमलावरों ने मंगलवार शाम सैफ अल-इस्लाम को उनके घर के गार्डन में निशाना बनाया. हमलावर उन्हें गोली मारकर मौके से फरार हो गए. यह घटना स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 2:30 बजे की है. हालांकि अभी तक इस मर्डर की पूरी डिटेल्स सामने नहीं आई हैं, लेकिन सैफ के करीबियों ने इसे एक सोची-समझी ‘साजिश’ या ‘एसेसिनेशन’ करार दिया है. करीबियों ने सोशल मीडिया पर की पुष्टि सैफ अल-इस्लाम के नेतृत्वक सलाहकार और उनकी टीम के सदस्य रहे अब्दुल्ला उस्मान ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए इस समाचार की पुष्टि की है. उन्होंने लिखा कि हम खुदा के हैं और उन्हीं के पास लौट जाना है. मुजाहिद सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अब खुदा की पनाह में हैं. वहीं, बीबीसी और एएफपी जैसी न्यूज एजेंसियों ने भी उनकी मौत की समाचार दी है. एएफपी के मुताबिक, सैफ के वकील ने बताया कि चार हथियारबंद लोग उनके घर में घुसे थे. हालांकि, उनकी बहन ने लीबियाई टीवी पर एक अलग बात कही है कि उनकी मौत लीबिया-अल्जीरिया बॉर्डर के पास हुई है. अब गद्दाफी की पॉलिटिकल टीम इस पूरे मामले की इंटरनेशनल जांच की मांग कर रही है. कैसा रहा सैफ अल-इस्लाम का सफर: कभी था ‘किंग’ बनने का दावेदार सैफ अल-इस्लाम का जन्म 1972 में हुआ था. वह अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी के बाद लीबिया के सबसे पावरफुल इंसान माने जाते थे. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई करने वाले सैफ फर्राटेदार इंग्लिश बोलते थे और उन्हें गद्दाफी शासन का ‘पढ़ा-लिखा और मॉडर्न चेहरा’ माना जाता था. वेस्टर्न देशों से दोस्ती: उन्होंने ही लीबिया के खराब रिश्तों को पश्चिमी देशों के साथ सुधारा था. उन्होंने लीबिया के खतरनाक हथियारों को छोड़ने और 1988 के लॉकरबी बम धमाके के पीड़ितों को मुआवजा दिलवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. रिफॉर्मर की इमेज: वह खुद को एक सुधारक के रूप में पेश करते थे और मानवाधिकारों की बातें करते थे. 2011 की क्रांति और पतन की कहानी जब 2011 में नाटो के समर्थन से गद्दाफी के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ, तो सैफ ने अपनी ‘सुधारक’ वाली छवि छोड़ दी. वह अपने पिता और कबीले के साथ खड़े हो गए. उन्होंने विद्रोहियों को ‘चूहा’ तक कह डाला था और उन पर हुई हिंसक कार्रवाई के मास्टरमाइंड बने. उन्होंने रॉयटर्स से कहा था कि हम लीबिया में ही लड़ेंगे और यहीं मरेंगे. जब गद्दाफी की सत्ता गिर गई, तो सैफ भेस बदलकर पड़ोसी देश नाइजर भागने की कोशिश कर रहे थे. तभी ‘अबू बक्र सादिक ब्रिगेड’ ने उन्हें रेगिस्तान के रास्ते में पकड़ लिया. यह उनके पिता की मौत के ठीक एक महीने बाद की बात है. 6 साल कैद और मौत की सजा सैफ ने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा (करीब 6 साल) ज़िंटान की जेल में बिताया. जो इंसान कभी पालतू शेर रखता था और लंदन की हाई सोसाइटी में घूमता था, उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया. ह्यूमन राइट्स वॉच ने जब उनसे मुलाकात की थी, तो उनका एक दांत टूटा हुआ था और वह दुनिया से बिल्कुल कट चुके थे. 2015: त्रिपोली की एक अदालत ने उन्हें युद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई थी. 2017: एक माफी कानून के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया, जिसके बाद वह जान बचाने के लिए ज़िंटान में ही छिपकर रहने लगे. चुनाव लड़ने की कोशिश और विवाद 2021 में सैफ अल-इस्लाम अचानक दुनिया के सामने आए. उन्होंने लीबिया के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए पर्चा भरा. वह लोगों के बीच उस दौर की यादें ताजा करना चाहते थे जब उनके पिता के समय देश में शांति (स्टेबिलिटी) थी. लेकिन उनका चुनाव लड़ना भारी विवादों में घिर गया. हथियारबंद गुटों ने उनका विरोध किया. 2015 की सजा की वजह से उन्हें चुनाव के लिए अयोग्य (Disqualify) करार दिया गया. जब उन्होंने इसके खिलाफ अपील की, तो लड़ाकों ने कोर्ट का रास्ता ही रोक दिया. इस खींचतान की वजह से लीबिया में चुनाव टल गए और देश में फिर से नेतृत्वक अस्थिरता फैल गई. अब उनकी मौत के बाद लीबिया की नेतृत्व में एक नया मोड़ आ सकता है. ये भी पढ़ें: रूस से तेल खरीदेगा या नहीं हिंदुस्तान? ट्रंप के ‘सीक्रेट’ समझौते वाले दावे पर पुतिन के ऑफिस से आया जवाब ये भी पढ़ें : समुद्र में छिड़ा महायुद्ध? अमेरिकी जंगी जहाज पर हमले के लिए बढ़ा ईरानी ड्रोन; नेवी ने आसमान में ही उड़ाया The post पूर्व तानाशाह गद्दाफी का बेटा सैफ अल-इस्लाम मारा गया, घर के गार्डन में घुसकर हमलावरों ने गोलियों से भूना appeared first on Naya Vichar.

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Sweet Corn Chaat: घर पर आसानी से बनाएं ये टेस्टी और चटपटा स्वीट कॉर्न चाट, स्वाद चखते ही चेहरे पर आ जाएगी मुस्कान

Sweet Corn Chaat: अगर आपको झटपट बनने वाला और स्वाद से भरपूर चाट पसंद है तो स्वीट कॉर्न चाट एक अच्छा ऑप्शन है. मीठे कॉर्न के दाने और मसालों का मेल इस चाट को खास बना देता है. इसे बनाने में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती है. घर पर अचानक मेहमान आ जाएं और आपको समझ न आए कि क्या बनाएं, तब स्वीट कॉर्न चाट को आप जल्दी से तैयार करके सर्व कर सकते हैं. इसका मजेदार स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आएगा. स्वीट कॉर्न चाट बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए? स्वीट कॉर्न- 1 कप प्याज- 1बारीक कटा हुआ टमाटर- 1 बारीक कटा हुआ हरी मिर्च- 1 (बारीक कटी हुई) धनिया पत्ती- 2 चम्मच बारीक कटी हुई काली मिर्च पाउडर- आधा छोटा चम्मच नींबू का रस- 1 चम्मच अमचूर पाउडर- आधा चम्मच भुना जीरा पाउडर- 1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर- आधा छोटा चम्मच काला नमक- स्वादानुसार नमक- स्वादानुसार सेव- जरूरत के अनुसार स्वीट कॉर्न चाट को कैसे तैयार करें? स्वीट कॉर्न चाट बनाने के लिए सबसे पहले आप स्वीट कॉर्न को उबाल लें. अब एक बड़े बाउल में उबले हुए स्वीट कॉर्न को डाल दें. इसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर और हरी मिर्च डालकर अच्छी तरह से मिला लें. इसके बाद अमचूर पाउडर, भुना जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और काली मिर्च का पाउडर डाल दें. अब स्वादनुसार काला नमक और नमक डालकर अच्छे से मिक्स करें.  ऊपर से नींबू का रस और बारीक कटी धनिया पत्ती डालकर सभी चीजों को मिला लें. अगर आप और ज्यादा स्वाद चाहते हैं तो ऊपर से थोड़ा सा मक्खन डाल सकते हैं.  प्लेट में निकालकर चाट को सर्व करें. ऊपर से सेव डाल दें. इस तरह से आप स्वीट कॉर्न चाट को बना सकते हैं.  यह भी पढ़ें: Lauki Dal Recipe: लंच में ऐसे बनाएं लौकी का ट्विस्ट देकर दाल, खाने के बाद सब्जी भी लगेगा फीका  यह भी पढ़ें: Winter Special Masala Khichdi: सर्दियों में लंच का झंझट खत्म, मिनटों में बनाएं विंटर स्पेशल मसाला खिचड़ी  The post Sweet Corn Chaat: घर पर आसानी से बनाएं ये टेस्टी और चटपटा स्वीट कॉर्न चाट, स्वाद चखते ही चेहरे पर आ जाएगी मुस्कान appeared first on Naya Vichar.

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गुरुजी का विजन और बढ़ता जनाधार झामुमो की असली ताकत, 1973 में मनाया गया था पहला स्थापना दिवस

रांची से अनुज सिन्हा की रिपोर्ट JMM Foundation Day: चार फरवरी को जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) अपने 53वें स्थापना दिवस पर बड़ी सभा करेगा, तो मंच पर एक कमी सबको महसूस होगी. दिशोम गुरु शिबू सोरेन शारीरिक रूप से मौजूद नहीं होंगे. उनकी तस्वीर होगी और उनके सम्मान में एक खाली कुर्सी रखी जाएगी, जो गुरुजी की मौजूदगी और उनके योगदान का एहसास कराएगी. यह पहली बार होगा, जब झामुमो का स्थापना दिवस समारोह गुरुजी के बिना आयोजित होगा. यह दिन इसलिए भी खास है, क्योंकि चार फरवरी 1973 को धनबाद में ही झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपना पहला स्थापना दिवस मनाया था. 53 वर्षों के लंबे सफर में यह एक भावनात्मक और ऐतिहासिक मोड़ है. गुरुजी का सपना आज भी पार्टी की आत्मा गुरुजी भले मंच पर न हों, लेकिन उनका सपना, उनका विजन और उनका संघर्ष हर भाषण, हर नारे और हर फैसले में दिखेगा. जल, जंगल और जमीन का मुद्दा आज भी झामुमो की नेतृत्व का केंद्र है. हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पार्टी आज भी उसी रास्ते पर चल रही है, जिसे शिबू सोरेन ने तय किया था. नीतियां नहीं बदली हैं, लेकिन समय के साथ काम करने का तरीका बदला है. यही बदलाव आज की नेतृत्व की सबसे बड़ी जरूरत भी थी. इसी ताकत के बल पर झामुमो आज राष्ट्रीय दलों को सीधी टक्कर दे रही है. संघर्ष, शहादत और जेल झामुमो की असली ताकत 53 साल के इस सफर में झारखंड मुक्ति मोर्चा के सैकड़ों कार्यकर्ता और नेता शहीद हुए. कईयों ने पुलिस की मार खाई, जेल गए, लेकिन संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा. जुनूनी और संघर्षशील कार्यकर्ता ही झामुमो की असली ताकत रहे हैं. शिबू सोरेन ने अपने साथियों के साथ संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाया. एक ऐसा संगठन खड़ा किया, जो धीरे-धीरे जन आंदोलन से सत्ता तक पहुंचा. आज झामुमो सत्ता में है, लेकिन उसकी जड़ें अब भी गांव और आंदोलन से जुड़ी हैं. आज सबसे ज्यादा विधायक एक दौर ऐसा भी था, जब झामुमो को एक-एक विधायक और सांसद के लिए तरसना पड़ता था. संसाधनों की भारी कमी थी. शुरुआती दिनों में डंडे में पत्ता बांधकर या हाथ से लिखे परचे बांटकर सभा और जुलूस की सूचना दी जाती थी. कोई लिखित दस्तावेज नहीं होता था, मौखिक आदेश और फैसले चलते थे. आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास सबसे ज्यादा विधायक हैं. पार्टी संगठनात्मक और नेतृत्वक रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है. तकनीक से लैस नया झामुमो समय बदला और उसके साथ झामुमो ने भी खुद को बदला. आज पार्टी तकनीकी रूप से समृद्ध है. अपनी मीडिया, सोशल मीडिया, जनसंपर्क और प्रबंधन की अलग-अलग टीमें हैं, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं. अधिकांश कार्यालय कंप्यूटर से जुड़े हैं और उनके पास पर्याप्त डाटा मौजूद है. पार्टी कार्यक्रमों की जानकारी मिनटों में व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स के जरिए कार्यकर्ताओं और नेताओं तक पहुंच जाती है. वीडियो और रील भी तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं. यह साफ संकेत है कि आधुनिक नेतृत्व के लिए जिन संसाधनों और रणनीतियों की जरूरत होती है, उनमें झामुमो कहीं से पीछे नहीं है. हेमंत सोरेन का नेतृत्व और चुनावी सफलता करीब एक साल पहले हेमंत सोरेन ने पार्टी का आधिकारिक नेतृत्व संभाला है. हालांकि, पिछले दो चुनावों की रणनीति उन्होंने अपनी टीम के साथ पहले ही तैयार की थी. आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित रणनीति का इस्तेमाल कर झामुमो ने बड़ी सफलता हासिल की. आज झामुमो सिर्फ झारखंड आंदोलन की पार्टी नहीं रह गई है. वह जानती है कि किस समय कौन-सा निर्णय लेना है, अपने जनाधार को कैसे मजबूत करना है और दूसरे राज्यों में पार्टी का विस्तार कैसे करना है. कल्पना सोरेन की भूमिका और नई नेतृत्वक ऊर्जा एक समय ऐसा था, जब पार्टी के पास ऐसे चेहरे कम थे, जो राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से झामुमो की बात रख सकें. हाल के वर्षों में कल्पना सोरेन ने इस कमी को काफी हद तक पूरा किया है. कल्पना सोरेन के नेतृत्व में सक्रिय होने से न सिर्फ हेमंत सोरेन, बल्कि पूरी पार्टी की ताकत बढ़ी है. देश-दुनिया की घटनाओं पर झामुमो की प्रतिक्रिया अब मिनटों में सामने आती है. झारखंड से बाहर विस्तार की तैयारी. आज झामुमो की नजर सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है. ओडिशा, बंगाल, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों में आदिवासी आबादी अच्छी-खासी है. यह क्षेत्र भविष्य में झामुमो के विस्तार के लिए अहम माने जा रहे हैं. पार्टी नेतृत्व को यह एहसास है कि क्षेत्रीय नेतृत्व में मजबूत पकड़ के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होगी. गठन से राज्य निर्माण तक का ऐतिहासिक सफर आज से 53 साल पहले शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो और एके राय ने मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया था. सबसे बड़ा लक्ष्य था अलग झारखंड राज्य का निर्माण. इस दौरान कई बड़े नेता पार्टी से जुड़े और कुछ अलग भी हुए, लेकिन झामुमो अपनी जगह कायम रही. निर्मल महतो जैसे साथी मिले, जिनकी 1987 में हत्या के बाद गुरुजी ने केंद्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. संघर्ष जारी रहा और आखिरकार वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का सपना साकार हुआ. इसे भी पढ़ें: झारखंड में बढ़ी चुनावी सरगर्मी, रांची से रोशनी खलखो और धनबाद से भाजपा के मेयर प्रत्याशी स्थापना दिवस पर गुरुजी की कमी. इस स्थापना दिवस पर सबसे ज्यादा जो चीज खलेगी, वह है गुरुजी की अनुपस्थिति. लेकिन उनका संघर्ष, उनका विजन और उनकी विरासत झामुमो की हर सांस में मौजूद है. यही विरासत आने वाले वर्षों में पार्टी की दिशा और दशा तय करती रहेगी. इसे भी पढ़ें: दुमका में मोदी प्रशासन पर बरसे हेमंत सोरेन, बोले – झारखंड में देश का 42% खनिज और बजट में नाम तक नहीं The post गुरुजी का विजन और बढ़ता जनाधार झामुमो की असली ताकत, 1973 में मनाया गया था पहला स्थापना दिवस appeared first on Naya Vichar.

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ट्रेड डील के बाद एक्शन मोड में भारत-अमेरिका, जयशंकर पहुंचे अमेरिका, मार्को रुबियो से की मुलाकात

India US Trade Deal : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को अमेरिका दौरे की शुरुआत की. उन्होंने ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से लगातार बैठकें कीं. इन बैठकों में हिंदुस्तान-अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, अहम खनिजों और तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने पर ठोस बात की. विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने तीन दिवसीय अमेरिका दौरे के दौरान वॉशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मिले. यह मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद हिंदुस्तान-अमेरिका बड़े व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद हुई. इस समझौते के तहत हिंदुस्तानीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जो लागू हो चुका है. हिंदुस्तान-अमेरिका के बीच अच्छी बातचीत हुई जयशंकर ने अपनी यात्रा की शुरुआत अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात करके की. अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुए नए आर्थिक समझौते को जमीन पर उतारने के लिहाज से ये बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है. बैठक के बाद एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए जयशंकर ने कहा कि हिंदुस्तान-अमेरिका के बीच आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर ‘उपयोगी बातचीत’ हुई. यह भी पढ़ें : India US Trade Deal : क्या मोदी ने ट्रंप को अपनी कूटनीति से झुका दिया, क्या है टैरिफ वार के सुखद अंत का राज? Delighted to meet US @SecRubio this afternoon. A wide ranging conversation that covered our bilateral cooperation agenda, regional and global issues. Facets of India – US Strategic Partnership discussed included trade, energy, nuclear, defence, critical minerals and… pic.twitter.com/1rbXJHgEQY — Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 3, 2026 एक तस्वीर पोस्ट करते हुए जयशंकर ने लिखा– अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलकर खुशी हुई. बातचीत में हिंदुस्तान-अमेरिका के द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई. रणनीतिक साझेदारी के तहत व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, रक्षा, अहम खनिज और तकनीक जैसे विषयों पर बात हुई. साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न तंत्रों की जल्द बैठकें करने पर सहमति बनी. यह भी पढ़ें : India US Trade Deal: हिंदुस्तान ने मारी बाजी! बोले पीयूष गोयल- समझौते पर हर हिंदुस्तानीय को होगा गर्व The post ट्रेड डील के बाद एक्शन मोड में हिंदुस्तान-अमेरिका, जयशंकर पहुंचे अमेरिका, मार्को रुबियो से की मुलाकात appeared first on Naya Vichar.

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रूस से तेल खरीदेगा या नहीं भारत? ट्रंप के ‘सीक्रेट’ समझौते वाले दावे पर पुतिन के ऑफिस से आया जवाब

India Russia Oil Trump Claim: रूस ने मंगलवार को साफ कर दिया है कि उसे हिंदुस्तान की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस चौंकाने वाले दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदुस्तान अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा. क्रेमलिन का जवाब: ‘हमें दिल्ली से कोई मैसेज नहीं मिला’ रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मॉस्को को अब तक हिंदुस्तान प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई औपचारिक संदेश नहीं मिला है. पेसकोव ने जोर देकर कहा कि फिलहाल, रूसी तेल खरीद को रोकने के बारे में हमारे पास हिंदुस्तान की ओर से कोई जानकारी नहीं है. हमारे लिए हिंदुस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण है और हम इसे और मजबूत करना चाहते हैं. रूस ने यह भी साफ किया कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं हैं. हिंदुस्तान और रूस के बीच दशकों पुराना रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग है, जिसे रूस हर दबाव के बावजूद बनाए रखना चाहता है. ट्रंप ने क्या दावा किया था? सोमवार को हिंदुस्तान और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड डील की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप के अनुसार: हिंदुस्तान अब रूस की जगह अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा. इसके बदले में अमेरिका ने हिंदुस्तानीय सामानों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 50% से घटाकर 18% कर दिया है. ट्रंप का मानना है कि इस कदम से यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में मदद मिलेगी क्योंकि इससे रूस की कमाई कम हो जाएगी. हिंदुस्तान प्रशासन की चुप्पी  भले ही ट्रंप ने अपनी ओर से बड़ी बातें कह दी हों, लेकिन हिंदुस्तान प्रशासन ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है. हिंदुस्तानीय विदेश मंत्रालय या तेल मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है कि रूस से तेल पूरी तरह बंद होगा. विशेषज्ञों का कहना है: हिंदुस्तान हमेशा अपनी एनर्जी पॉलिसी (ऊर्जा नीति) में संतुलन बनाकर चलता है. रूस से मिलने वाला सस्ता तेल हिंदुस्तान की वित्तीय स्थिति और आम जनता के लिए बहुत जरूरी रहा है. हिंदुस्तान वर्तमान में रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है, जो हर रोज लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है. हिंदुस्तान-अमेरिका ट्रेड डील की बड़ी बातें 3 फरवरी 2026 को साइन हुई इस डील के कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: टैरिफ में कटौती: अमेरिका ने हिंदुस्तानीय प्रोडक्ट्स (जैसे टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान) पर टैक्स 50% से घटाकर 18% कर दिया है. हिंदुस्तान का वादा: ट्रंप के मुताबिक हिंदुस्तान भी अमेरिकी सामानों पर लगने वाली बाधाओं और टैक्स को धीरे-धीरे जीरो (0) कर देगा. बड़ा निवेश: ट्रंप ने दावा किया कि हिंदुस्तान अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक और खेती के क्षेत्र में 500 बिलियन डॉलर से ज्यादा की खरीदारी करेगा. ये भी पढ़ें : समुद्र में छिड़ा महायुद्ध? अमेरिकी जंगी जहाज पर हमले के लिए बढ़ा ईरानी ड्रोन; नेवी ने आसमान में ही उड़ाया ये भी पढ़ें: एपस्टीन के पास कैसे पहुंचा काबा का ‘किसवा’? लीक ईमेल से खुला अमीराती बिजनेसवुमन और इजरायली जासूसी का कनेक्शन The post रूस से तेल खरीदेगा या नहीं हिंदुस्तान? ट्रंप के ‘सीक्रेट’ समझौते वाले दावे पर पुतिन के ऑफिस से आया जवाब appeared first on Naya Vichar.

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Jio Recharge Plans: डेटा-कॉलिंग या OTT, बजट और जरूरत के हिसाब से चुनें 84 दिनों वाला बेस्ट प्लान

अगर आप बार-बार रिचार्ज कराने की झंझट से बचना चाहते हैं, तो Jio के 84 दिनों की वैलिडिटी वाले रिचार्ज प्लान्स आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकते हैं. ये प्लान्स खासतौर पर उन यूजर्स के लिए हैं, जो लंबी वैलिडिटी के साथ ज्यादा डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और OTT बेनिफिट्स चाहते हैं. ऐसे में आज हम आपके लिए जियो के 84 दिनों की वैलिडिटी वाले प्लान्स की लिस्ट लेकर आए हैं, जिससे आप अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान रिचार्ज कर सकें. 448 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 448 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगSMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: JioTV और 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज नोट: यह सिर्फ कॉलिंग प्लान है. इसमें डेटा बेनिफिट्स नहीं मिलते हैं. 448 रुपये वाला प्लान 799 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 799 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 1.5GB डेटाSMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: JioTV और 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज 799 रुपये वाला प्लान 859 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 859 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 2GB डेटा (5G यूजर्स के लिए अनलिमिटेड)SMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: JioTV, 3 महीने के लिए JioHotstar, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और 18 महीनों के लिए Google Gemini AI Pro 859 रुपये वाला प्लान 889 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 889 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 1.5GB डेटाSMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: JioTV, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और JioSaavn Pro 889 रुपये वाला प्लान 949 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 949 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 2GB डेटा (5G यूजर्स के लिए अनलिमिटेड)SMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: JioTV, 3 महीने के लिए JioHotstar, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और 18 महीनों के लिए Google Gemini AI Pro 949 रुपये वाला प्लान 1028 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 1028 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 2GB डेटा (5G यूजर्स के लिए अनलिमिटेड)SMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: 3 महीने के लिए Swiggy One Lite सब्सक्रिप्शन, JioTV, 3 महीने के लिए JioHotstar, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और 18 महीनों के लिए Google Gemini AI Pro 1028 रुपये वाला प्लान 1029 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 1029 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 2GB डेटा (5G यूजर्स के लिए अनलिमिटेड)SMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: Amazon Prime Lite सब्सक्रिप्शन, JioTV, 3 महीने के लिए JioHotstar, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और 18 महीनों के लिए Google Gemini AI Pro 1029 रुपये वाला प्लान 1199 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 1199 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 3GB डेटा (5G यूजर्स के लिए अनलिमिटेड)SMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: JioTV, 3 महीने के लिए JioHotstar, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और 18 महीनों के लिए Google Gemini AI Pro 1199 रुपये वाला प्लान 1299 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 1299 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 2GB डेटा (5G यूजर्स के लिए अनलिमिटेड)SMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: Netflix(Mobile) सब्सक्रिप्शन, JioTV, 3 महीने के लिए JioHotstar, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और 18 महीनों के लिए Google Gemini AI Pro 1299 रुपये वाला प्लान 1799 रुपये वाला प्लान | Jio Rs 1799 Plan वैलिडिटी: 84 दिनकॉलिंग: किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंगडेटा: हर दिन 3GB डेटा (5G यूजर्स के लिए अनलिमिटेड)SMS: हर दिन फ्री 100 SMSअन्य बेनिफिट्स: Netflix(Basic) सब्सक्रिप्शन, JioTV, 3 महीने के लिए JioHotstar, 50GB फ्री JioAICloud स्टोरेज और 18 महीनों के लिए Google Gemini AI Pro 1799 रुपये वाला प्लान यह भी पढ़ें: 449 रुपये में एक्टिव रहेंगे 4 सिम, Jio के फैमिली पोस्टपेड प्लान में मिलेगा कॉलिंग-डेटा और भी कई बेनिफिट्स The post Jio Recharge Plans: डेटा-कॉलिंग या OTT, बजट और जरूरत के हिसाब से चुनें 84 दिनों वाला बेस्ट प्लान appeared first on Naya Vichar.

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