Chaibasa: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सोमवार को पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड के सेरेंगसिया घाटी पहुंचे, जहां उन्होंने वीर पोटो हो समेत कोल विद्रोह के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान उन्होंने राज्य प्रशासन पर जम कर निशाना साधा. वीर शहीदों को नमन करने के बाद पूर्व सीएम ने उनके बलिदान को याद करते हुए कहा कि जिस जल, जंगल, जमीन एवं परंपराओं की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ विद्रोह किया, वह आज भी संकट में है. झारखंड की गठबंधन प्रशासन को आदिवासी विरोधी बताते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रशासन ने कई दशकों से चली आ रही परंपरा को तोड़कर, सेरेंगसिया के ग्रामीणों द्वारा हर साल किए जाने वाले सांस्कृतिक एवं स्पोर्ट्स कूद के आयोजनों को जबरन रद्द करवा दिया. उनका कसूर सिर्फ यही था कि उन्होंने मुझे मुख्य अतिथि के तौर कर बुलाया था.
हेमंत प्रशासन को दे डाली चेतावनी
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि भोगनाडीह से लेकर सेरेंगसिया तक, शहीदों के परिवारों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों के निर्णयों को दरकिनार कर, पुलिस के दम पर प्रशासनी आदेशों को थोपने का जो प्रयास चल रहा है, उसे आदिवासी समाज बर्दास्त नहीं करेगा. पूर्व सीएम ने प्रशासन पर सारंडा में बसे लाखों आदिवासी परिवारों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां चल रही खनन कंपनियों को बचाने के लिए प्रशासन तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई, लेकिन सारंडा में हजारों वर्षों से बसे लाखों आदिवासियों के बारे में इनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला. हमारा विरोध वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से नहीं है, लेकिन इन लाखों आदिवासियों का क्या कसूर है? राज्य प्रशासन उन्हें उजाड़ने पर क्यों आमदा है?.
पेसा के मुद्दे पर आदिवासियों के साथ छल
चंपाई सोरेन ने पेसा के मुद्दे पर आदिवासियों को छलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसमें राज्य प्रशासन ने ग्राम सभा के अध्यक्ष की नियुक्ति के समय अन्य के नाम पर ‘पिछला दरवाजा’ खोल रखा है, जिसके द्वारा फर्जी लोगों की मदद से मनमानी की जायेगी. उन्होंने कहा कि जब शेड्यूल एरिया में राज्यपाल की भूमिका संरक्षक की रहती है तो फिर आप उनकी जगह उपायुक्त को मालिक कैसे बना सकते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट की जिस बैठक में राज्य प्रशासन ने पेसा अधिनियम को स्वीकृति दी, उसी बैठक में बिना किसी ग्राम सभा की अनुमति के नोवामुंडी में 850 एकड़ से अधिक जमीन हिंडाल्को को दी गई.
कोल ब्लॉक में भी बड़ी धांधली
चंपाई ने कहा जब उन्हें कोल ब्लॉक पलामू प्रमंडल में आवंटित किया गया है, तो वन क्षति की भरपाई कोल्हान के शेड्यूल एरिया में क्यों की जा रही है? उस भूमि पर आदिवासी हजारों वर्षों से खेती करते हैं, वहां देशाउली है, सरना स्थल है, लेकिन आदिवासी की जमीन है, तो दे दो… क्या फर्क पड़ता है? पूर्व सीएम ने कहा कि गठबंधन प्रशासन बांग्लादेशी घुसपैठियों एवं धर्मांतरण की दोतरफा मार झेल रहे आदिवासी समाज को खत्म करने की साजिश रच रही है. अगर इन्हें नहीं रोका गया तो आदिवासी सभ्यता को मिटाने का जो काम ब्रिटिश साम्राज्यवाद नहीं कर पाया था, वो यह प्रशासन कर देगी.
इससे पहले चाईबासा पहुंचने पर तांबो चौक समेत कई स्थानों पर आंदोलनकारियों एवं अन्य संगठनों से जुड़े हजारों आदिवासियों ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन का भव्य स्वागत किया. इसके बाद गीतीलता शहीद स्थल में शहीदों को नमन करने के बाद, समर्थकों के साथ वे सेरेंगसिया पहुंचे. इस दौरान सेरेंगसिया शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष महेन्द्र लागुरी और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे.
ये भी पढ़ें…
आधी रात दहल गया धनबाद, झरिया विधायक के आवास सिंह मेंशन पर बमबारी, इलाके में दहशत
झारखंड नगर निकाय चुनाव ड्यूटी के लिए बस, ट्रक और बाइक का डेली रेट फिक्स, जानें किस वाहन पर कितना मिलेगा?
The post Chaibasa: आदिवासियों के अधिकार छीन रही है हेमंत सोरेन प्रशासन, चंपाई सोरेन ने फिर बोला हमला appeared first on Naya Vichar.

