मधुपुर. शहर के बावनबीघा स्थित रिसोर्ट परिसर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर गांधी की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. मौके पर डॉ. योगेंद्र ने कहा कि महात्मा गांधी को जिस दिन गोली मारी गयी. उससे पहले छह बार उनकी हत्या की कोशिश हो चुकी थी. वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1948 के बाद 2026 में गोडसे के दिमाग में जो नशा था, वह नशा आज चढ़ गया है. कहा कि आज के दौर में गांधी ज्यादा प्रासंगिक है. समाजसेवी घनश्याम ने कहा कि दुनिया की आबादी आठ अरब है. एआइ व रॉबर्ट के माध्यम से सुनियोजित साजिश कर इंसानियत को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है. श्रम के बिना मानव का कोई अस्तित्व नही. गांधी पर आदिवासियों की अमिट छाप रही है. स्त्री, नौजवानों को गांधी के बताये रास्ते पर चलकर मानवता को बचाना होगा. डॉ. मनोज मिता ने कहा कि गांधी ने दो चीजों दी थीं. चरखा और बुनियादी शिक्षा. दोनों को ध्वस्त कर दिया. आज गांधी के विचार को लेकर चलेंगे तो हम कभी फेल नहीं होंगे. ज्योत्सना तिर्की ने कहा कि गांधी को पढ़ना और जीना अलग-अलग बात है. हर व्यक्ति में गांधी है. ऐनी टुडू ने कहा झारखंड के लोग गांधी विचार को जीते है. भागलपुर से आये उदय कुमार ने कहा कि आज पर्यावरण संकट और नफरत दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही. वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा गांधी की हस्ती कभी नहीं मिट सकती. मजबूरी नहीं मजबूती का नाम गांधी है. युवाओं व स्त्रीओं को लोक अभियान से जोड़ने की जरूरत है. डॉ. मनोज ने कहा गांधी विचार और कर्म दोनों ही जरूरी है. तर्कपूर्ण संवाद की स्थिति समाप्त हो रही है. कहा कि बौद्धिक स्तर पर अपनी लड़ाई को तेज करना होगा. मौके पर डॉ. कैलाश, आनंद मरांडी ने भी अपने विचार रखे. मौके पर दर्जनों स्त्री, पुरुष उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन साल्गे मार्डी ने किया.
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