धनबाद से शोभित रंजन की रिपोर्ट
Dhanbad News: झारखंड की कोयलानगरी धनबाद में लेबर सेस का बड़ा बकाया सामने आया है. श्रम विभाग के अनुसार, बीसीसीएल समेत कुल 13 कंपनियों पर 6 करोड़ 5 लाख 51 हजार 853 रुपये का लेबर सेस अब तक जमा नहीं किया गया है. इस बकाया की वजह से भवन और दूसरे निर्माण कार्यों में शामिल मजदूरों के लिए चलाई जा रही कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. इन कंपनियों में रियल एस्टेट, निर्माण और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं. श्रम विभाग का कहना है कि समय पर सेस की वसूली नहीं होने से मजदूरों को मिलने वाली प्रशासनी सहायता में लगातार देरी हो रही है.
कानून के मुताबिक निर्माण लागत का 1% है लेबर सेस
श्रम विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी कंपनी या व्यक्ति द्वारा कराए गए निर्माण कार्य की कुल लागत का एक प्रतिशत लेबर सेस के रूप में जमा करना अनिवार्य है. यदि संबंधित कंपनी समय पर यह राशि जमा नहीं करती है, तो उसके खिलाफ नीलाम पत्र वाद दायर किया जाता है. इसके बाद बकाया राशि पर दो प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज जोड़कर वसूली की जाती है. बावजूद इसके कई कंपनियां लंबे समय से सेस का भुगतान नहीं कर रही हैं.
मजदूर कल्याण की योजनाओं पर सीधा असर
लेबर सेस की राशि से भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों के लिए स्वास्थ्य सहायता, छात्रवृत्ति, विवाह सहायता, मातृत्व लाभ, औजार अनुदान और पेंशन जैसी योजनाएं संचालित की जाती हैं. सेस की वसूली नहीं होने से इन योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर परेशानी आ रही है. पात्र मजदूरों को समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है.
इन कंपनियों पर है लेबर सेस का बकाया
श्रम विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार बीसीसीएल और दो अन्य कंपनियों पर सबसे अधिक 4 करोड़ 52 लाख 36 हजार 199 रुपये का बकाया है. इसके अलावा कई निजी और शैक्षणिक संस्थानों पर भी बड़ी रकम बकाया है. प्रभातम मॉल पर 29 लाख 82 हजार रुपये, अनिमेष ऑटोशॉपट पर 2 लाख 75 हजार 552 रुपये और लिजा होंडा (गोविंदपुर) पर 10 लाख रुपये बकाया हैं. राधा स्वामी डेवलपर पर 19 लाख 12 हजार 702 रुपये और प्रमिला व्यापार पर 3 लाख 63 हजार रुपये का सेस लंबित है.
रियल एस्टेट और शैक्षणिक संस्थान भी सूची में शामिल
मां वैष्णवी इंफ्रा पर 9 लाख 24 हजार रुपये, गहलौत डेवलपर पर 2 लाख 88 हजार रुपये और दून पब्लिक स्कूल पर 5 लाख रुपये का बकाया दर्ज है. वहीं माउंट लिटरा स्कूल पर भी 5 लाख रुपये का सेस जमा नहीं किया गया है. इसके अलावा, पाम इन पर 10 लाख रुपये, यशोवन टावर पर 15 लाख रुपये और आस्था लिविन टावर पर 30 लाख रुपये बकाया हैं. पारा मेडिकल कॉलेज पर भी 66 हजार 404 रुपये का सेस लंबित है.
कड़ी कार्रवाई के संकेत
श्रम विभाग का कहना है कि यदि तय समय में बकाया राशि जमा नहीं की गई, तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. नीलामी प्रक्रिया तेज की जाएगी और ब्याज सहित राशि वसूली जाएगी.
मजदूरों को राहत दिलाना प्राथमिकता
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लेबर सेस की वसूली मजदूरों के हक से जुड़ा मामला है. इसका सीधा असर मजदूर कल्याण योजनाओं पर पड़ता है. ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता है कि जल्द से जल्द बकाया सेस की वसूली कर पात्र मजदूरों को उनका हक दिलाया जाए.
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क्या कहते सहायक श्रमायुक्त
- प्रश्न: सेस जमा नहीं करने वाली कंपनियों पर क्या कार्रवाई हो रही है?
- उत्तर: सभी बकायेदार कंपनियों को नोटिस जारी किया गया था. जिन कंपनियों ने अब तक राशि जमा नहीं की है, उनके खिलाफ सर्टिफिकेट केस दायर किए गए हैं.
- प्रश्न: समय पर सेस नहीं देने पर क्या प्रावधान है?
- उत्तर: श्रम सेस अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर ब्याज, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. पहले नीलाम पत्र वाद दायर किया जाता है और उसके बाद दो प्रतिशत प्रति माह ब्याज के साथ राशि वसूली जाती है.
- प्रश्न: लेबर सेस क्यों लिया जाता है?
- उत्तर: यह सेस निर्माण क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए खर्च किया जाता है, ताकि उन्हें प्रशासन की योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके.
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