Railway: हिंदुस्तानीय रेलवे रिकॉर्ड लोकोमोटिव उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के बाद वैगन के उत्पादन में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 41929 वैगन का उत्पादन किया है, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में 37650 वैगन का उत्पादन हुआ था. यानी इस दौरान वैगन उत्पादन में 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी. वर्ष 2022-23 में 22790 वैगन का उत्पादन हुआ. पिछले तीन साल में एक लाख से अधिक वैगन का उत्पादन हुआ. वर्ष 2004-14 के दौरान देश में सालाना 13262 वैगन का उत्पादन हुआ, जबकि वर्ष 2014-24 के दौरान सालाना उत्पादन 15875 हो गया. इससे रेलवे की उत्पादन क्षमता का पता चलता है.
रेलवे माल ढुलाई की क्षमता में लगातार इजाफा कर रहा है. यह देश के औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण है. रेलवे की कोशिश घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और व्यापार को गति देना है. वैश्विक स्तर आर्थिक ताकत बनाने में रेलवे की अहम भूमिका है. वैगन के उत्पादन में वृद्धि से माल ढुलाई के समक्ष आने वाली चुनौतियों को दूर करने में मदद मिलेगी और कार्गो परिवहन आसान होगा.
आर्थिक विकास की गति होगी तेज
वैगन उत्पादन में वृद्धि का असर आर्थिक और पर्यावरण सुरक्षा पर पड़ना तय है.अधिक वैगन की उपलब्धता से परिवहन की चुनौतियां कम होगी और माल ढुलाई की गति तेज होगी. कोयला, सीमेंट, स्टील कंपनियों को इसका फायदा होगा. सड़क पर निर्भरता कम होने से ऊर्जा खपत में भी कमी आएगी और इससे गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी. माल ढुलाई की बेहतर व्यवस्था होने से परिवहन पर होने वाला खर्च कम होगा और इसका फायदा आम लोगों को भी होगा. इससे महंगाई कम करने में भी मदद मिलेगी.
गौरतलब है कि रेलवे अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार आधुनिक बनाने का काम कर रहा है. रेलवे नेटवर्क के विस्तार के अलावा सुरक्षा, यात्री सुविधा और माल ढुलाई को बेहतर करने का काम हो रहा है. देश के अधिकांश रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण हो चुका है. इससे रेलवे की ऊर्जा खपत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी. वैगन के अधिक उत्पादन से यात्री सुविधा के साथ माल ढुलाई भी अधिक होगी और इससे रेलवे का राजस्व बढ़ेगा.
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