मुंबई की रात थी. एक पार्टी थी. फिल्म इंडस्ट्री के कुछ जाने-पहचाने चेहरे वहां मौजूद थे. फिर एक कहानी निकली. कहा गया कि सुशांत सिंह राजपूत का अभिनेता सूरज पंचोली से किसी पार्टी में झगड़ा हुआ. बात इतनी बढ़ी कि यह समाचार सलमान खान तक पहुंची. सलमान, जो सूरज पंचोली के mentor रहे हैं, कथित तौर पर नाराज हुए और उन्होंने सुशांत को फोन कर फटकार लगा दी.
कहा गया कि सुशांत ने माफी मांगी
और फिर इस कहानी में एक और लाइन जोड़ दी गई – सलमान खान से पंगा लेना सुशांत के लिए भारी पड़ गया. साल 2017 में यह कहानी मनोरंजन मीडिया में तेजी से चली थी. लेकिन कहानी का दूसरा हिस्सा? वह कहीं ज्यादा दिलचस्प है. क्योंकि जिन दो लोगों के बीच कथित झगड़े की बात कही गई थी, उन्हीं में से एक ने इस पूरी कहानी को खारिज कर दिया था. और यही वह जगह है जहां से सुशांत केस की एक बेहद जरूरी पड़ताल शुरू होती है.
कहानी की शुरुआत कहां से हुई?
दिसंबर 2017 में रिपोर्ट्स सामने आईं कि सुशांत सिंह राजपूत ने एक पार्टी में सूरज पंचोली के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की. सूरज पंचोली उस समय सलमान खान के protege के तौर पर जाने जाते थे. सलमान ने उन्हें 2015 की फिल्म ‘Hero’ से लॉन्च किया था. इसी वजह से अगली कड़ी अपने आप बन गई. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जब सलमान को इस कथित घटना के बारे में पता चला तो वह नाराज हुए और उन्होंने सुशांत को फोन किया. India Today की उस समय की रिपोर्ट में यही दावा किया गया था कि सलमान ने सुशांत को फोन कर फटकार लगाई और सूरज से दूर रहने को कहा. रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि सुशांत ने माफी मांगी. बस. यहीं से कहानी में सलमान का नाम सुशांत के साथ जुड़ गया. लेकिन…
क्या यह कहानी सच थी?
फिर सामने आए सूरज पंचोली. इस कथित विवाद की सबसे अहम कड़ी खुद सूरज पंचोली थे. अगर सच में पार्टी में सुशांत से उनका झगड़ा हुआ था, तो उनकी तरफ से इसकी पुष्टि इस कहानी को मजबूत कर सकती थी. लेकिन सूरज ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने इस समाचार को खारिज कर दिया. Hindustan Times ने दिसंबर 2017 में सूरज के हवाले से रिपोर्ट किया कि उन्होंने इन समाचारों को “baseless” और “ridiculous” बताया था. सूरज ने कहा था कि सुशांत और वह भाई जैसे थे और वे हाल में भी साथ मिले थे. Indian Express की रिपोर्ट में भी यही सामने आया कि दोनों एक्टर्स ने कथित झगड़े की समाचारों को खारिज किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के करीबी एक सूत्र ने भी इस कहानी को गलत बताया था. यानी एक तरफ समाचार थी – सुशांत ने सूरज से बदसलूकी की. दूसरी तरफ सूरज खुद कह रहे थे – ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. और यहीं पहली बड़ी दरार दिखाई देती है. फिर आया 2020… और पुरानी कहानी फिर जिंदा हो गई
14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई
सोशल मीडिया पर अचानक उनकी जिंदगी और बॉलीवुड में उनके रिश्तों को लेकर पुरानी समाचारें दोबारा खंगाली जाने लगीं. 2017 की वही कहानी भी फिर सामने आई. इस बार फर्क सिर्फ इतना था कि सुशांत अब इस कहानी का जवाब देने के लिए मौजूद नहीं थे. पुरानी रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट शेयर होने लगे. सलमान का नाम फिर आया. सूरज पंचोली का नाम फिर आया. और उस कथित फोन कॉल की कहानी भी फिर चर्चा में आ गई. यहीं से एक पुराने entertainment report ने एक नए narrative का रूप लेना शुरू किया.
लेकिन सवाल वही था – क्या 2017 की घटना वास्तव में हुई थी?
सुशांत की मौत के बाद सूरज ने फिर दी सफाई
2020 में जब सुशांत की मौत के बाद उनका नाम इस पूरे मामले में घसीटा जाने लगा, तब सूरज पंचोली ने एक बार फिर इस कहानी पर बात की. Aaj Tak के साथ बातचीत में सूरज ने कहा कि वह और सुशांत मुश्किल से एक-दो बार मिले थे, दोनों के बीच सामान्य रिश्ता था और कोई दुश्मनी नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि वे एक-दूसरे को भाई कहते थे. India Today को दिए इंटरव्यू में सूरज से सीधे 2017 की उस समाचार के बारे में सवाल किया गया. वहां भी उन्होंने कहा कि सुशांत के साथ उनका कोई झगड़ा नहीं हुआ था. उन्होंने बताया कि सुशांत ने उन्हें अपनी फिल्म ‘Raabta’ की screening पर भी बुलाया था और उनके बीच cordial relationship था.
अब जरा कहानी को जोड़िए.
2017 में समाचार चली – झगड़ा हुआ.
समाचार चली – सलमान नाराज हुए.
समाचार चली – सलमान ने सुशांत को फोन किया.
लेकिन उसी दौर में सूरज ने कहा – झगड़ा हुआ ही नहीं.
और 2020 में उन्होंने फिर कहा – दोनों के बीच दुश्मनी नहीं थी.
तो क्या Salman ने Sushant को फोन किया था?
यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल है. और यहां ईमानदार जवाब है – इस फोन कॉल की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आती. एक 2017 की रिपोर्ट में फोन कॉल और सलमान की नाराजगी का दावा किया गया था. लेकिन उसी समय सूरज पंचोली ने कथित झगड़े को ही खारिज कर दिया था. बाद में भी उन्होंने यही रुख दोहराया. इसलिए आज उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर यह कहना कि – “सलमान ने निश्चित तौर पर सुशांत को फोन करके धमकाया था” तथ्यात्मक रूप से बहुत आगे निकल जाना होगा.
सही भाषा होगी – “2017 में ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी, लेकिन सूरज पंचोली ने कथित झगड़े और उससे जुड़े दावों को खारिज कर दिया था.” यही फर्क investigative journalism और social-media narrative के बीच है. फिर Salman का नाम इतना बड़ा क्यों हो गया? क्योंकि यहां सिर्फ एक फोन कॉल की कहानी नहीं थी. इसके पीछे बॉलीवुड की पूरी power structure वाली बहस खड़ी थी. सलमान उस समय इंडस्ट्री के सबसे प्रभावशाली सितारों में से एक थे.
सूरज पंचोली उनके mentor थे. सुशांत एक outsider थे, जिन्होंने television से Bollywood तक अपना रास्ता बनाया था. इसलिए 2017 की वह पुरानी कहानी 2020 में एक नए अर्थ के साथ circulate होने लगी. एक तरफ था Bollywood का established power centre. दूसरी तरफ था outsider star.
और बीच में थी एक पुरानी, लेकिन कभी पूरी तरह साबित न हुई कहानी. यही combination सोशल मीडिया पर बेहद explosive था. लेकिन कहानी का सबसे बड़ा twist यहीं है. अगर 2017 की समाचार को अकेले पढ़ें तो ऐसा लगता है कि मामला बहुत साफ था.
पार्टी हुई- सुशांत और सूरज में झगड़ा हुआ. सलमान को पता चला. सलमान नाराज हुए.
फोन गया. सुशांत ने माफी मांगी.
लेकिन जब उसी घटना के दूसरे पक्ष से पूछा गया, तो कहानी बदल गई.
सूरज ने कहा – झगड़ा हुआ ही नहीं.
और बाद में भी उन्होंने सुशांत के बारे में बेहद सकारात्मक बातें कहीं. उन्होंने कहा कि सुशांत उनके लिए अच्छे थे, वह उनका सम्मान करते थे और दोनों एक-दूसरे को भाई कहते थे. यानी इस कहानी में सबसे महत्वपूर्ण चीज कोई सनसनीखेज दावा नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण चीज है contradiction.
CLAIM vs RECORD
CLAIM:
सुशांत ने सूरज पंचोली के साथ पार्टी में बदसलूकी की.
RECORD:
सूरज पंचोली ने इस दावे को खारिज किया और कहा कि दोनों के बीच ऐसा कोई झगड़ा नहीं हुआ था.
CLAIM:
सलमान खान ने नाराज होकर सुशांत को फोन किया.
RECORD:
2017 की मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था, लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में इस फोन कॉल की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिलती.
CLAIM:
इस विवाद के बाद सुशांत और सूरज के बीच दुश्मनी थी.
RECORD:
सूरज ने खुद कहा कि दोनों एक-दूसरे को भाई कहते थे और उनके बीच कोई दुश्मनी नहीं थी.
CLAIM:
इस घटना ने सुशांत के career को प्रभावित किया.
RECORD:
इस specific 2017 घटना से सुशांत के career पर असर पड़ने का कोई स्थापित आधिकारिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है.
और यहीं से 14 जून 2020 की कहानी और ज्यादा पेचीदा हो जाती है. सुशांत की मौत के बाद इस पुरानी कहानी को ऐसे पेश किया जाने लगा जैसे यह उनके और सलमान के बीच दुश्मनी की स्थापित कड़ी हो. लेकिन रिकॉर्ड कुछ और सावधानी मांगता है. यह कहानी 2017 में एक रिपोर्ट के रूप में सामने आई थी. फिर उसी समय संबंधित पक्ष ने इसे खारिज किया. फिर 2020 में सुशांत की मौत के बाद वही कहानी दोबारा viral हुई. और फिर उसी पुराने article को सुशांत की मौत के narrative से जोड़कर देखा जाने लगा.
यानी यहां एक अहम सवाल उठता है
क्या 2020 में किसी पुरानी entertainment report को एक नए narrative के सबूत की तरह इस्तेमाल किया गया? इस सवाल का जवाब पाठक को खुद तय करना चाहिए. क्योंकि उपलब्ध रिकॉर्ड में इतना जरूर है कि कहानी चली थी. लेकिन कहानी के सबसे अहम हिस्से की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है. Salman ने सुशांत की मौत के बाद क्या कहा? सुशांत की मौत के बाद सलमान खान ने सोशल मीडिया पर उनके परिवार और फैंस के साथ खड़े रहने की अपील की थी. लेकिन उस पोस्ट में उन्होंने अपने ऊपर चल रहे आरोपों की कोई विस्तृत point-by-point सफाई नहीं दी. यही वजह है कि उस समय चल रही बहस पूरी तरह खत्म नहीं हुई. लेकिन यहां भी दो चीजों को अलग रखना जरूरी है.
सलमान ने श्रद्धांजलि और समर्थन का संदेश दिया – यह रिकॉर्ड पर है.
उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे सभी आरोपों की विस्तृत सफाई दी – ऐसा उस पोस्ट में नहीं था.
इन दोनों बातों को मिलाकर कोई छिपा हुआ admission निकालना भी सही नहीं होगा.
आखिरी सवाल: क्या यह सिर्फ एक अफवाह थी?
शायद सबसे सटीक जवाब है. यह एक reported allegation था, जिसका दूसरा पक्ष खुद संबंधित व्यक्ति ने खारिज किया था. और यही इसे सुशांत केस की सबसे दिलचस्प लेकिन सबसे सावधानी से लिखे जाने वाली कड़ियों में शामिल करता है. क्योंकि सुशांत की मौत के बाद बहुत सी पुरानी कहानियां फिर सामने आईं. कुछ के पीछे दस्तावेज थे. कुछ के पीछे बयान. कुछ के पीछे अदालत की कार्रवाई. और कुछ के पीछे सिर्फ पुराने entertainment reports और सोशल मीडिया की amplification.
सलमान-सुशांत की कथित पार्टी वाली कहानी फिलहाल इसी आखिरी category के काफी करीब दिखाई देती है. कहानी थी. रिपोर्ट भी हुई. सलमान के फोन का दावा भी आया. लेकिन जिस झगड़े से पूरी कहानी शुरू हुई थी, उसी झगड़े को सूरज पंचोली ने नकार दिया. और शायद सुशांत केस की इस कड़ी का सबसे बड़ा सवाल यही है –
14 जून के बाद जब पुरानी समाचारें फिर से खुलीं, तो क्या हम सच खोज रहे थे… या उन कहानियों को सच मानने लगे थे, जिन्हें कभी पूरी तरह साबित ही नहीं किया गया?
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