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इनकम टैक्स रिटर्न भरने जा रहे हैं? फाइलिंग से पहले जान लें ये बड़े बदलाव 

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए e-filing पोर्टल पर ITR-1, ITR-2 और ITR-4 के ऑनलाइन फॉर्म और एक्सेल यूटिलिटी जारी कर दिए हैं. इसका मतलब है कि आप फाइनेंशियल ईयर (FY) 2025-26 के लिए अपना टैक्स रिटर्न भर सकते हैं. इस बार प्रशासन ने टैक्सपेयर्स को कुछ राहत दी है, तो वहीं कुछ मामलों में कड़ाई भी की है.

अगर आप सैलरीड एम्प्लॉई हैं, मकान मालिक हैं या छोटा बिजनेस चलाते हैं, तो रिटर्न दाखिल करने से पहले ये बड़े बदलाव जरूर समझ लें:

दो घर वालों को क्या राहत मिली?

अब जिन लोगों के पास दो रिपेयर्ड या रेजिडेंशियल (आवासीय) प्रॉपर्टी हैं, वे भी आसानी से अपना रिटर्न फाइल कर सकेंगे. पहले दो घर होने पर मुश्किल और लंबे फॉर्म भरने पड़ते थे. अब ऐसे टैक्सपेयर्स आसान फॉर्म यानी ITR-1 और ITR-4 का इस्तेमाल कर सकते हैं, बशर्ते वे इसकी बाकी शर्तों को पूरा करते हों.

मकान मालिकों और इन्वेस्टर्स के लिए क्या बदला?

  • डूब गया किराया (Unrealised Rent): अगर आपको किसी किरायेदार से किराया नहीं मिला है, तो अब ITR-1 और ITR-4 में इसके लिए अलग से बॉक्स (“The amount of rent which cannot be realized”) दिया गया है. इससे आप अपनी सही किराये की कमाई और उस पर मिलने वाली छूट को साफ-साफ दिखा सकेंगे.
  • कैपिटल गेन्स का झंझट खत्म: पिछले साल (AY 2025-26) बजट में बदलाव के कारण इन्वेस्टर्स को 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के कैपिटल गेन्स की अलग-अलग रिपोर्टिंग करनी पड़ती थी. लिस्टेड शेयर्स पर पुराने वाले रेट्स (15% STCG और 10% LTCG) अब लागू नहीं हैं. इसलिए इस साल फॉर्म से वो एक्स्ट्रा कॉलम हटा दिए गए हैं, जिससे इन्वेस्टर्स के लिए काम आसान हो गया है.

डोनेशन और विदेशी कमाई पर क्या है नया नियम?

  • संस्थाओं को दान (Section 80G): अगर आप किसी चैरिटी को दान देकर टैक्स छूट का दावा कर रहे हैं, तो अब आपको ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर (TRN) और बैंक का IFSC कोड भी देना होगा.
  • पॉलिटिकल पार्टियों को चंदा: नेतृत्वक दलों को दिए गए चंदे पर छूट चाहिए, तो अब उस पार्टी का नाम और उनका पैन (PAN) नंबर फॉर्म में डालना अनिवार्य है.
  • विदेशी रिटायरमेंट अकाउंट (Section 89A): अगर आपका विदेश में कोई रिटायरमेंट खाता है और आप डबल टैक्स से राहत चाहते हैं, तो अब आप ITR-1 और ITR-4 के जरिए यह क्लेम नहीं कर पाएंगे. इसके लिए अब सिर्फ ITR-2 और ITR-3 फॉर्म का ही इस्तेमाल करना होगा.

बिजनेस करने वालों और दूसरों पर क्या सख्ती हुई?

  • ITR-4 भरने वालों के लिए: जो लोग प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (अनुमानित टैक्स स्कीम) के तहत ITR-4 भरते हैं, उन्हें अब अपने बैंक बैलेंस और सालभर में किए गए इन्वेस्टमेंट्स की पूरी जानकारी देनी होगी.
  • रिप्रेजेंटेटिव एसेसरी (Representative Assessee): अगर कोई व्यक्ति किसी माइनर (नाबालिग), दिवंगत व्यक्ति या एनआरआई (NRI) की तरफ से रिटर्न दाखिल कर रहा है, तो फॉर्म में अब इसके लिए एक नया कॉलम जोड़ दिया गया है ताकि टैक्स विभाग को इसकी सीधी जानकारी रहे.

ये भी पढ़ें: ITR भरने से पहले चेक कर लें AIS, बैंकों की ये गलती भेजवा सकती है नोटिस 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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