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एमपी में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर बोले सुखदेव भगत – यह लोकतंत्र की निर्मम हत्या

लोहरदगा से गोपी कृष्ण की रिपोर्ट

Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्र खारिज किए जाने का मामला अब नेतृत्वक तूल पकड़ता जा रहा है. इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया है. उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के साथ जो हुआ है, वह केवल लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा नहीं, बल्कि उसकी निर्मम हत्या के समान है.

चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

सुखदेव भगत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया पर निर्भर करती है. ऐसे में किसी प्रत्याशी को पर्याप्त अवसर दिए बिना उसका नामांकन निरस्त कर देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है.

झारखंड का उदाहरण देते हुए कही यह बात

कांग्रेस सांसद ने कहा कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को आपत्तियों और तकनीकी त्रुटियों पर अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का पूरा अवसर दिया गया था. लेकिन मीनाक्षी नटराजन के मामले में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी प्राथमिकी या आपराधिक मामले के बावजूद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है.

समान मानदंड लागू नहीं हुए तो घटेगा भरोसा

सुखदेव भगत ने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया में सभी प्रत्याशियों के लिए समान मानदंड लागू नहीं किए जाएंगे, तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता कमजोर होगी. उन्होंने कहा कि निष्पक्षता लोकतंत्र की आत्मा है और यदि इसमें भेदभाव की गुंजाइश पैदा होती है, तो आम जनता का भरोसा भी प्रभावित होगा.

नेतृत्वक दबाव और पक्षपात का लगाया आरोप

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने का फैसला नेतृत्वक दबाव और पक्षपातपूर्ण रवैये का परिणाम है. पार्टी नेताओं का कहना है कि इस मामले में निष्पक्ष समीक्षा की जरूरत है और चुनाव आयोग को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके.

चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पूरे मामले की समीक्षा करने की मांग की है. साथ ही पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि आवश्यक हुआ तो न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और चुनावी अधिकारों की रक्षा के लिए सभी संवैधानिक और कानूनी विकल्पों का उपयोग किया जाएगा.

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश

इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है. विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं. सुखदेव भगत ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, समान अवसर और न्याय सर्वोपरि हैं तथा किसी भी नेतृत्वक दल या नेता के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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