Petrol Diesel Price: विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का बोझ अब घरेलू तेल कंपनियों (OMCs) के लिए असहनीय होता जा रहा है. हालांकि वर्तमान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन यह कंपनियों के भारी घाटे की कीमत पर है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव खत्म होते ही कंपनियां कीमतों में बड़ा इजाफा कर सकती हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में 27 डॉलर का उछाल
बीते 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों ने जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा है. 27 फरवरी को जो क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह 19 मार्च को 120 डॉलर के पीक पर पहुंच गया और फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की वृद्धि से हिंदुस्तानीय कंपनियों का घाटा करीब ₹6 प्रति लीटर बढ़ जाता है.
कंपनियों का वित्तीय बोझ और प्रशासनी राजस्व
कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद कीमतें न बढ़ाने के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल पर ₹18 और डीजल पर ₹35 प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है. पिछले महीने यह घाटा ₹2,400 करोड़ प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के बाद अब ₹1,600 करोड़ प्रतिदिन पर है.
चिंताजनक बात यह है कि प्रशासनी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का हिस्सा, जो 2017 में 22% था, अब घटकर मात्र 8% रह गया है, जिससे प्रशासन के पास कीमतों को और कम करने की गुंजाइश सीमित हो गई है.
आयात पर निर्भरता और CAD का खतरा
हिंदुस्तान अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से 45% मध्य पूर्व और 35% रूस से आता है. तेल की बढ़ती कीमतें न केवल महंगाई बढ़ाती हैं, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं. अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वित्तीय स्थिति की मजबूती के लिए एक बड़ी चुनौती है.
अमेरिका और पड़ोसियों का हाल
यह समस्या केवल हिंदुस्तान तक सीमित नहीं है. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन के पार निकल गई हैं. हिंदुस्तान के पड़ोसी देश पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका पहले ही अपनी घरेलू कीमतों में भारी इजाफा कर चुके हैं. ऐसे में हिंदुस्तान में चुनाव बाद कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना काफी प्रबल नजर आ रही है.
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