रांची से बिपिन सिंह की रिपोर्ट
GI Tag : झारखंड की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बड़ी पहचान मिली है. पहले केवल सोहराय पेंटिंग को जीआई टैग मिला था, लेकिन अब राज्य के 11 उत्पादों को यह सम्मान प्राप्त हुआ है. इनमें चार उत्पादों को जीआई टैग दिलाने में नाबार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिससे स्थानीय कारीगरों और शिल्पियों को नई पहचान और आर्थिक अवसर मिलेंगे.
जीआई टैग प्राप्त उत्पाद:
भगैया साड़ी और फैब्रिक
कुचाई सिल्क साड़ी
केसरिया कलाकंद, कोडरमा
डोकरा क्राफ्ट
दुमका चादर और बडोनी पपेट्स
मुंडा ज्वेलरी
झारखंड बांस शिल्प (बैंबू क्राफ्ट)
तसर सिल्क और साड़ियां
जादोपटिया पेंटिंग
पांची साड़ी और फैब्रिक
झारखंड बेनाम हस्तशिल्प
कुचाई सिल्क को मिली जीआई टैग की मंजूरी
गोड्डा संताल के बगहिया ब्लॉक और सरायकेला के खास आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार की जाने वाली कुचाई सिल्क को झारक्राफ्ट द्वारा साल 2023 में जीआई टैगिंग के लिए भेजा गया था, जिसके बाद इसके ऊपर अंतिम मंजूरी मिल गई है. नाबार्ड ने भी इसकी पुष्टि की है. इसके लिए चेन्नई से आई टीम ने खासतौर पर झारखंड का दौरा कर रांची में प्रजेंटेशन भी लिया गया था.
कई महीने अर्ली स्टेज में मूल्यांकन के लिए के बाद किसी के द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई तो इसके बाद यह क्रमशः झारखंड का हो गया. रिपोर्ट पर जीआई जनरल कॉपी भी पब्लिश्ड हुई थी, जहां किसी का दावा स्वीकार्य नहीं किया गया. इन उत्पादों को मान्यता मिलने के बाद वर्षो – बरस से चली आ रही यह खास कला इतिहास की आदिवासी विरासत से हाते हुए वर्तमान में अपनी विशिष्ट कारीगरी के लिए जानी जाएगी. इससे इन उत्पादों की पुरानी विधि को न केवल पुर्नजीवित की जा सकेगी बल्कि यह आय का साधन भी बनेगी.
सोहराई को 2021 में मिला था जीआइ टैग
झारखंड राज्य में वर्तमान में केवल ‘सोहराई’ उत्पाद को ही जीआइ टैग प्राप्त है. इसे यह पहचान 14 सितंबर 2021 को मिला था. ट्राइफेड की ओर से इसे नोमिनेट किया गया था.
पांच अन्य विशिष्ट उत्पादों को जीआई टैगिंग दिलाने की भी हो रही तैयारी
राज्य के पांच अन्य विशिष्ट उत्पादों को झारक्राफ्ट द्वारा साल 2021 से 2023 में जीआई टैगिंग के लिए भेजा गया है. इन चार के अलावा सिमडेगा की मीठी ईमली, सरायकेला-कुचाई हल्दी, सिमडेगा का बिरू गमछा अंतिम चरण में है. इनमें से कई का जर्नल (एडवरटाइजिंग) जारी हो चकी है. अभी प्री एग्जामिनेशन और एग्जामिनेशन केटेगरी में है.
केंद्र प्रशासन से मिलेगी अंतिम मंजूरी
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इन उत्पादों की विशिष्टता और भौगोलिक संबंधों की गहन जांच और मंजूरी की प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लगाएगी. अगर राज्य के इन सभी पांचों उत्पादों को जीआइ टैग प्राप्त हो जाएगा, तो इससे स्थानीय कारीगरों के हैंडीक्राफ्ट्स को पहचान और आर्थिक लाभ दोनों प्राप्त होंगे. इन उत्पादों के पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के साथ इनकी उत्पत्ति और गुणवत्ता की पहचान सुरक्षित की जा सकेगी.
10 साल के लिए मिलेगा टैग
यह टैग 10 साल के लिए मिलेगा. सर्टिफिकेशन के बाद झारखंड अपने इन उत्पादों पर सिंबल के तौर पर अपने राज्य को विशिष्ट पहचान दे सकेगा. जीआइ टैग के लिए आवेदन देने वालों को यह भी बताना होगा कि उन्हें टैग क्यों दिया जाए. उन्हें साक्ष्यों और सबंधित तर्कों के आधार पर उत्पाद की विशिष्टता और उसकी ऐतिहासिक विरासत के बारे में ठोस प्रमाण भी देना होता है. मानकों पर खरा उतरने पर ही झारखंड को इसका जीआइ टैग मिलेगा.
किसानों और शिल्पियों को मिलेगी मदद
जीआइ टैग का दर्जा किसानों और कारीगरों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर कीमत प्राप्त करने की क्षमता प्रदान करेगा. उदाहरण के तौर पर खास आदिवासी आभूषण जैसे उत्पाद को जीआइ टैग अन्य प्रतिस्पर्धियों से अलग करने के साथ ही इसकी ब्रांड इक्विटी बनाने में मदद करेगा. प्रशासन इसे प्रमोट करेगी, जिससे राज्य को भी एक विशिष्ट पहचान मिलेगी.
देश में इन उत्पादों को मिल चुका है जीआइ टैग
जीआइ टैग की अवधारणा वश्वि व्यापार संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा 1994 में शुरू की गई थी. ओडिशा की काई चटनी हिंदुस्तान में जीआई टैग पाने वाले नवीनतम खाद्य पदार्थों में से एक है. हिंदुस्तान में जीआई टैग पाने वाला पहला उत्पाद दार्जिलिंग चाय है. खाद्य पदार्थों में मिथिला मखाना, पश्चिम बंगाल का रसोगुल्ला, मध्य प्रदेश का कड़कनाथ मुर्गा, बनारसी साड़ी, चंदेरी साड़ी, महाराष्ट्र सोलापुर की चद्दर, कर्नाटक का मैसूर सिल्क, तमिलनाडु का कांचीपुरम सिल्क, आंध्र प्रदेश के तिरुपति का लड्डू जैसे करीब देश के 650 से ज्यादा उत्पादों को जीआइ टैग मिल चुका है.
आखिर क्या है जीआइ टैग?
जीआइ (भौगोलिक संकेत) टैग एक विशेष चह्नि है, जो किसी उत्पाद को मिलता है. यह टैग किसी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति के लिए होता है और उसके कारण उत्पाद में अद्वितीय गुण या प्रतिष्ठा होती है. यह एक तरह का बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो कृषि, प्राकृतिक या निर्मित वस्तुओं के लिए दिया जाता है. जीआइ टैग उत्पादकों को कानूनी सुरक्षा देता है और किसी भी व्यक्ति को उस उत्पाद के नाम का गलत इस्तेमाल करने से रोकता है.
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