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दिल्ली टीम में नहीं मिला मौका, पिता के एक फैसले ने रातोंरात बदली संजू सैमसन की किस्मत

Sanju Samson Father Decision: दिल्ली की गलियों से निकलकर हिंदुस्तानीय क्रिकेट के बड़े सितारों में शामिल हुए संजू सैमसन ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों और पिता के बड़े फैसले को जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में याद किया है. टी20 विश्व कप 2026 में हिंदुस्तान की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज ने बताया कि दिल्ली की राज्य टीम में जगह नहीं मिलने के बाद उनके पिता विश्वनाथन ने पूरा परिवार केरल शिफ्ट करने का फैसला लिया था. सैमसन के मुताबिक, यही फैसला उनके क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

जियोस्टार से बात करते हुए सैमसन ने क्या कहा?

जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में बातचीत के दौरान सैमसन ने कहा कि स्कूल के दिनों में वह अपने दोस्तों को डीडीसीए की जैकेट पहनकर दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते देखते थे, जिससे उन्हें भी राज्य टीम के लिए स्पोर्ट्सने की प्रेरणा मिलती थी. उन्होंने कई बार ट्रायल और स्टेट कैंप में हिस्सा लिया तथा रन भी बनाए, लेकिन दिल्ली की टीम में जगह नहीं बना सके.

सैमसन ने बताया, “एक दिन ट्रायल खत्म होने के बाद टीम की सूची जारी हुई और उसमें मेरा नाम नहीं था. हम चुपचाप घर लौट आए. घर पहुंचते ही मेरे पापा ने मां से कहा कि हमें केरल जाना होगा और शिफ्ट होना होगा.”

पिता अपने फैसले पर अड़े रहे

सैमसन ने कहा कि उनकी मां ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए कुछ साल इंतजार करने की बात कही, लेकिन उनके पिता अपने फैसले पर अड़े रहे. सैमसन के अनुसार, “पापा ने कहा कि हमें अभी जाना है. सामान पैक करो, मैं तीन दिन में टिकट बुक कर रहा हूं.” इसके बाद पूरा परिवार केरल चला गया और वहीं से उनके पेशेवर क्रिकेट सफर की शुरुआत हुई.

सैमसन ने बचपन की यादें शेयर की

सैमसन ने दिल्ली में अपने बचपन की यादें भी साझा कीं. उन्होंने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस की फुटबॉल टीम का हिस्सा थे और स्पोर्ट्स का माहौल बचपन से ही उनके आसपास था. जीटीबी नगर स्थित पुलिस कॉलोनी में दोस्तों के साथ टेनिस बॉल से क्रिकेट स्पोर्ट्सते-स्पोर्ट्सते उनका स्पोर्ट्स के प्रति लगाव बढ़ा.

फुटबॉल स्पोर्ट्सने के लिए कभी मजबूर नहीं किया

हिंदुस्तानीय बल्लेबाज ने कहा कि उनके पिता ने कभी उन्हें फुटबॉल स्पोर्ट्सने के लिए मजबूर नहीं किया, जबकि वह खुद फुटबॉल से जुड़े थे. सैमसन के मुताबिक, उनके पिता को उनकी बल्लेबाजी में प्रतिभा नजर आई और उन्होंने उन्हें तथा उनके भाई को क्रिकेट पर ध्यान देने की सलाह दी.

अरुण जेटली स्टेडियम से जुड़े यादों को लेकर सैमसन ने क्या कहा?

सैमसन ने दिल्ली के फिरोज शाह कोटला (अब अरुण जेटली स्टेडियम) के नाम से जाना जाता है. संजू से वहां की एक खास याद को भी शेयर किया. उन्होंने बताया कि उनके पिता की वहां ड्यूटी थी और उन्होंने विशेष अनुमति लेकर उन्हें नेट्स में अभ्यास करने का मौका दिलाया. सैमसन ने कहा कि वह, उनके भाई और उनके पिता करीब एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास करते रहे, जो उनके बचपन की सबसे यादगार क्रिकेट की यादों में से एक है.

आज हिंदुस्तानीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना चुके संजू सैमसन का मानना है कि उनके पिता का दिल्ली छोड़कर केरल जाने का फैसला ही उनके करियर की नींव बना, जिसने उन्हें घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता दिखाया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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