रांची से प्रणव/ सुनील चौधरी की रिपोर्ट
Arghya Sen Gupta Scam:115.40 करोड़ रुपये की अवैध निकासी करनेवाले नटवरलाल अर्घ्य सेन गुप्ता उर्फ अर्णव गांगुली के कारनामे चौंकानेवाले हैं. फर्जी हस्ताक्षर करने में माहिर आरोपी ने बैंक मैनेजरों, ऊर्जा विभाग के अधिकारियों, टूरिज्म विभाग के कैशियर और हवाला कारोबारियों के साथ मिलकर घोटाला किया. झारखंड में जेएसइइएमटी (झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट), ऊर्जा निगम और टूरिज्म विभाग के नाम पर फर्जी खाते खोलकर पैसे निकाले. यह जानकारी आरोपी अर्घ्य सेन गुप्ता ने सीआइडी को दी है. इसका खुलासा सीआइडी द्वारा कोर्ट में दाखिल की गयी चार्जशीट में हुआ है. बताया गया कि ठगी के मास्टरमाइंड अर्घ्य सेन गुप्ता ने ठगी से कमाये पैसों से खूब मौज की. उसने दो करोड़ रुपये के सोने के जेवरात खरीदे. 12 लाख की 11 कीमती घड़ियां खरीदी. लगभग 30 लाख रुपये में एक जीप और 20 लाख रुपये में एक क्रेटा गाड़ी पत्नी के नाम पर खरीदी. मालदीव में हनीमून मनाने में 10 लाख उड़ाये. हिंदुस्तान टीवी न्यूज चैनल खोलने में 25-26 लाख रुपये खर्च किये. वहीं फटाफट डॉट कॉम नामक गेमिंग स्पोर्ट्सने पर 12 लाख खर्च किया. वहीं शेष रुपये खाने-पीने और दैनिक कार्यों में खर्च कर दिये. इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी होने पर वह पंजाब के मोहाली में छिपकर रह रहा था. वह घटना के एक आरोपी कुशल बनर्जी के साथ फर्जीवाड़ा करने त्रिपुरा भी गया था. वहां से आने पर उसे मोहाली में किराये के घर से सीआइडी की टीम ने 14 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था.
25% कमीशन का स्पोर्ट्स और लग्जरी गाड़ियों की खरीद
सीआइडी की गिरफ्त में आये गिरोह के सदस्य कुशल बनर्जी उर्फ अमित बनर्जी ने बताया कि पूरे कांड की मुख्य रूप रेखा समीर कुमार उर्फ रुद्र ने ही बनायी थी. प्रशासनी फंड की अवैध निकासी के एवज में समीर उर्फ रुद्र पूरे सिंडिकेट से 25% का फिक्स कमीशन वसूलता था. अभियुक्त रौशन कुमार चतुर्वेदी ने इसी कमीशन के पैसे से सैमसंग का एस-23 अल्ट्रा मोबाइल फोन खरीदा. वहीं, हजारीबाग के नेक्सजेन शोरूम में चार लाख नगद जमा कर काले रंग की स्कॉर्पियो खरीदी.
झारखंड टूरिज्म के नाम से फर्जी खाता खोला
आरोपियों ने पहले केनरा बैंक की निफ्ट शाखा के मैनेजर अमरजीत कुमार को सेट किया. कुशल बनर्जी को रांची में छोड़कर बाकी आरोपी वापस कोलकाता चले गये. सबसे पहले निफ्ट शाखा में झारखंड टूरिज्म के नाम से फर्जी खाता संख्या 120023985910 खोला गया. इसके बाद त्रिदीप दास उर्फ बाबू कोलकाता से रांची के कचहरी चौक स्थित राज रेसीडेंसी होटल पहुंचा. उसे इंद्रजीत चटर्जी के कहने पर विवेक ने टूरिज्म विभाग में ले जाकर कैशियर गिरिजा प्रसाद सिंह से मिलवाया. वह भी कमीशन पर विभाग का पैसा फर्जी खाते में जमा कराने को तैयार हो गया.
10.40 करोड़ फर्जी खाते में गये, फिर कंपनियों में
अक्टूबर 2023 में 10.40 करोड़ रुपये टूरिज्म विभाग के फर्जी खाते में कैशियर गिरिजा प्रसाद सिंह ने जमा कराये. इसके बाद इंद्रजीत चटर्जी और त्रिदीप दास उर्फ बाबू के कहने पर केनरा बैंक के खाते से पैसा अर्घ्य सेन गुप्ता ने कंपनियों में ट्रांसफर किये. फिर कोलकाता के हवाला कारोबारी श्रवण कुमार शर्मा (बिहार के सीवान का मूल निवासी) ने अपना कमीशन काटा. फिर श्रवण के दोस्त राकेश कुमार दास और शुभांकर मंडल ने आरोपियों को शेष राशि नकद में दी.
आपस में आरोपियों ने बांट ली हवाला से मिली करोड़ों की नकदी
हवाले से मिले नकद पैसों में से एक करोड़ रुपये केनरा बैंक के मैनेजर अमरजीत को और 20 लाख रुपये कैशियर गिरिजा प्रसाद सिंह को मिले. फिर 10 करोड़ का फर्जी एफडी त्रिदीप दास उर्फ बाबू ने बनाया . उस पर अर्घ्य सेन गुप्ता ने बैंक मैनेजर का फर्जी हस्ताक्षर किया. इसके बाद उक्त एफडी केनरा बैंक के मैनेजर अमरजीत कुमार को दिया गया कि वह टूरिज्म डिपार्टमेंट को पहुंचा दे. फर्जी एफडी को अमरजीत कुमार, समीर उर्फ रुद्रा और इसके ड्राइवर रौशन चतुर्वेदी के जरिये कैशियर गिरिजा प्रसाद के पास भेजा गया. इसके एवज में अर्घ्य सेन गुप्ता को 60 लाख रुपये नकद मिले. शेष पैसा समीर उर्फ रुद्रा, इंद्रजीत चटर्जी, कुशल बनर्जी, सीम, त्रिदीप दास ने आपस में बांट लिये. इंद्रजीत का दोस्त असीम आरोपियों के ठहरने की व्यवस्था करता था. लोकेश्वर साह को 90 लाख रुपये मिले थे.
मास्टर ट्रस्ट के 9 करोड़ में से बिजली विभाग के कर्मियों के नाम पर वसूले चार करोड़
ऊर्जा विभाग के मास्टर ट्रस्ट के नौ करोड़ लोकेश्वर साह ने बिजली विभाग के रंजीत सिंह से बात कर फर्जी खाता संख्या 120023985910 में डलवाया था. जिसे हवाला कारोबारी श्रवण कुमार शर्मा के जरिये कंपनियों को ट्रांसफर किये गये. कमीशन काटकर श्रवण के दोस्त राकेश दास और शुभांकर मंडल ने आरोपियों को पैसे दिये. इसके बाद बिजली विभाग के स्टाफ को देने के लिए लोकेश्वर को चार करोड़ मिले. वहीं अर्घ्य सेन गुप्ता को 80 लाख मिले. इसके बाद लोकेश्वर साह, इंद्रजीत चटर्जी, समीर उर्फ रूद्र, त्रिदीप दास, असीम, अरुण पांडेय, गोविंद पांडेय, महाशय पांडेय, कुशल बनर्जी और केनरा बैंक के मैनेजर अमरजीत कुमार को उनका हिस्सा मिला. केनरा बैंक कर्मी राकेश रंजन को 45 लाख रुपये नकद मिले. मास्टर ट्रस्ट से ट्रांसफर नौ करोड़ का फर्जी एफडी समीर उर्फ रुद्रा ने बनवाया था. उस पर मैनेजर का हस्ताक्षर अर्घ्य सेन गुप्ता ने किया था.
पहले भी जेल जा चुका है सरगना
अर्घ्य सेन गुप्ता को पहली बार कोलकाता लाल बाजार थाना पुलिस ने वर्ष 2021 में गिरफ्तार कर प्रेसीडेंसी जेल, कोलकाता भेजा था. उस पर सीबीआइ अधिकारी बनकर लूटपाट करने का आरोप था. इसके बाद वर्ष 2022 में चोरी की चांदी खरीदने के आरोप में भी अर्घ्य सेन गुप्ता को बड़ा बाजार थाना ने जेल भेजा था. वह इंद्रजीत चटर्जी नामक व्यक्ति के कोलकाता के पार्कस्ट्रीट कंपनी में एकाउंटेंट और मार्केटिंग का काम करता था.
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