Hot News

महिला आरक्षण पर सरकार को झटका, अब आगे क्या करेगी मोदी सरकार?

मोदी प्रशासन का संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 (यह स्त्री आरक्षण कानून 2023 में बदलाव से जुड़ा था) शुक्रवार (17 अप्रैल) शाम लोकसभा में पास नहीं हो पाया. इस बिल को पास करने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका. खास बात यह है कि 2014 में मोदी प्रशासन के आने के बाद पहली बार कोई प्रशासनी बिल लोकसभा में फेल हुआ है. इस बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में वोट दिया. कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, लेकिन बिल पास होने के लिए 352 वोट यानी दो-तिहाई बहुमत जरूरी था. इस तरह यह बिल 54 वोट से पीछे रह गया और पास नहीं हो सका.

बाकी दो बिल वापस ले लिये मोदी प्रशासन ने

बिल के पास नहीं हो पाने के बाद प्रशासन ने उसके साथ पेश किए गए बाकी दो बिल भी वापस ले लिये. इनमें डिलिमिटेशन बिल 2026 शामिल था, जिसमें 2011 जनगणना के आधार पर सीटों की नई सीमाएं तय करने की बात थी. दूसरा यूनियन टेरिटरीज लॉ (संशोधन) बिल 2026 था, जो दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा था, जहां विधानसभा भी है. प्रशासन ने इन पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया.

131वें संशोधन में क्या कहा गया था?

131वें संशोधन बिल में लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था. साथ ही इसमें यह भी कहा गया था कि 2023 के स्त्री आरक्षण कानून, यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए अगली जनगणना का इंतजार जरूरी नहीं होगा, बल्कि इसे उससे अलग करके जल्दी लागू किया जा सके.

यह भी पढ़ें : गिर गया स्त्री आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा बिल, लोकसभा में प्रशासन को नहीं मिला दो तिहाई बहुमत

2023 के मूल कानून के मुताबिक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में स्त्रीओं को 33% आरक्षण तभी लागू होना था, जब अगली जनगणना पूरी हो जाए. इसका मतलब है कि यह व्यवस्था 2034 से पहले लागू होना मुश्किल है, क्योंकि अभी जनगणना चल रही है. इसे पूरा होने में समय लगेगा, जिसके बाद सीटों का नया बंटवारा यानी डिलिमिटेशन भी होगा.

नए बिलों का क्या था मकसद ?

नए बिलों का मकसद था कि स्त्री आरक्षण को 2029 तक लागू कर दिया जाए, इसके लिए 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का नया बंटवारा किया जाना था. लेकिन पुराने आंकड़ों पर डिलिमिटेशन करने से क्षेत्रीय असमानता और जातीय समीकरण जैसे मुद्दे फिर से उठ खड़े हुए, जिस पर संसद में काफी बहस भी देखने को मिली.

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने दिलाया भरोसा

संसद में स्पेशल सत्र के दौरान पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने दो दिन तक अपील की और भरोसा दिलाया कि दक्षिणी राज्यों की सीटों में कोई कमी नहीं होगी. शुक्रवार (17 अप्रैल) को शाह ने आखिरी वक्त पर कहा कि अगर विपक्ष समर्थन दे, तो वे एक घंटे में संशोधित बिल ला सकते हैं. इसमें सभी राज्यों के लिए 50% बढ़ोतरी की गारंटी होगी, लेकिन विपक्ष ने इसे ठुकरा दिया.

अब क्या करेगी मोदी प्रशासन?

2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभी कानून के रूप में लागू है और गजट में भी नोटिफाई हो चुका है, लेकिन इसे जमीन पर लागू करने के लिए पहले नई डिलिमिटेशन प्रक्रिया जरूरी होगी. इसके बिना यह लागू नहीं हो सकता. अगर प्रशासन इसे जल्दी लागू करना चाहती है, तो उसे नए विकल्पों के साथ फिर से संसद आना होगा. जैसे फिलहाल 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें स्त्रीओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव ला सकती है. इस मुद्दे पर शनिवार (18 अप्रैल) को कैबिनेट की बैठक भी तय है, जहां आगे की रणनीति पर फैसला लिया जा सकता है. 

The post स्त्री आरक्षण पर प्रशासन को झटका, अब आगे क्या करेगी मोदी प्रशासन? appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top