Hot News

मिटने के कगार पर था 100 साल पुराना संताली इतिहास, डॉ. राही सोरेन ने तकनीक से ऐसे बचायी पूरी विरासत

जमशेदपुर: डिजिटल तकनीक के दौर में इतिहास और संस्कृति को बचाने का एक अहम काम डॉ. राही सोरेन कर रही हैं. पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय से जुड़ी डॉ. राही सोरेन ने संताली भाषा, साहित्य और इतिहास से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की पहल की है. उनका काम यह दिखाता है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल आधुनिक सुविधाओं के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और पहचान को बचाने के लिए भी किया जा सकता है.

संताल समाज का इतिहास समृद्ध रहा है. लेकिन समय के साथ पुराने दस्तावेज, पांडुलिपियां, पत्र-पत्रिकाएं और दूसरे ऐतिहासिक स्रोत खराब होने का खतरा बढ़ता गया. ऐसे में डॉ. राही सोरेन ने इन स्रोतों को खोजने, संरक्षित करने और डिजिटल रूप देने पर काम शुरू किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास को मूल दस्तावेजों के जरिए समझ सकें.

दुर्लभ संताली दस्तावेजों को डिजिटल रूप देने की पहल

इस दिशा में वर्ष 2021 में बड़ा कदम उठाया गया. डॉ. राही सोरेन के नेतृत्व में British Library Endangered Archives Programme (EAP1300) परियोजना शुरू हुई. इसमें उन्होंने Principal Investigator के रूप में काम किया. परियोजना के तहत पूर्वी हिंदुस्तान में वर्ष 1890 से 1975 के बीच प्रकाशित शुरुआती संताली पत्र-पत्रिकाओं और दुर्लभ साहित्य को खोजा और संरक्षित किया गया.

मार्च 2022 तक इस परियोजना में 131 दुर्लभ सामग्रियों की खोज की गयी. इसके बाद इन सामग्रियों की 1,793 उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल तस्वीरें तैयार की गयीं. इन दस्तावेजों में संताली समाज के सामाजिक जीवन, लोकगीतों, लोककथाओं, भाषा और उस दौर के बदलावों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज है.

यह काम केवल पुरानी किताबों को स्कैन करने तक सीमित नहीं है. इन दस्तावेजों के डिजिटल रूप में सुरक्षित होने से शोधकर्ताओं को संताली भाषा और समाज के इतिहास को मूल स्रोतों के आधार पर समझने का अवसर मिलेगा.

Read also: न कोच मिला, न कोचिंग… फोन से शतरंज सीखकर राष्ट्रीय मंच पर छाया जमशेदपुर का प्रतीक

संताल हूल और स्त्रीओं की भूमिका पर भी फोकस

डॉ. राही सोरेन के शोध का एक अहम हिस्सा 1855 के संताल हूल से भी जुड़ा है. वह इतिहास में कम चर्चा में आयी संताल स्त्रीओं की भूमिका को सामने लाने पर लगातार काम कर रही हैं. उनका मानना है कि संताल हूल में स्त्रीओं का योगदान, त्याग और उनकी भूमिका भी इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

उनका प्रयास शोध और दस्तावेजों तक सीमित नहीं है. वर्ष 2024 में कोलकाता में दुर्लभ संताली दस्तावेजों और संताल हूल से जुड़ी सामग्रियों की विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गयी. इसका उद्देश्य इन ऐतिहासिक स्रोतों को आम लोगों और संताल समाज तक पहुंचाना था.

इस प्रदर्शनी में युवाओं, छात्रों और समुदाय के लोगों ने पुराने संताली पत्र-पत्रिकाओं, ऐतिहासिक पत्रों और चित्रों को देखा. इससे नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला.

डॉ. राही सोरेन का काम इस सोच को मजबूत करता है कि आधुनिक बनने के साथ अपनी भाषा, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखना जरूरी है.

Read also: टाटा संस में चेयरमैन की कुर्सी पर फिर घमासान! चंद्रशेखरन की नियुक्ति को ट्रस्ट्स ने बताया गैरकानूनी

The post मिटने के कगार पर था 100 साल पुराना संताली इतिहास, डॉ. राही सोरेन ने तकनीक से ऐसे बचायी पूरी विरासत appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top