नया विचार न्यूज़ मोहिउद्दीनगर। —मोहनपुर प्रखंड के एक दर्जन से ऊपर गांवों के अब सिर्फ नाम रह गये हैं.कभी घनी आबादी वाले इन गांवों को गंगा नदी ऐसे लील गयी कि बित्ते भर जमीन नहीं बची. सिर्फ पानी ही पानी,बालू ही बालू.ऐसे गांवों में धरनी पट्टी पश्चिमी पंचायत के बरुआ, जहींगरा, मकनपुर,सरसावा,धरनी पट्टी पूर्वी पंचायत के पचासा, हरिदासपुर,बघड़ा पंचायत के बरियारपुर, कुतुबपुर और डुमरी दक्षिणी पंचायत के शाह आलमपुर जैसे गांवों के नाम शामिल हैं.इन गांवों की आबादी उत्तरवर्ती क्षेत्रों की ओर बढ़ती गयी और नये क्षेत्र आबाद होते गये.पूर्णतः खेती-बाड़ी पर आश्रित रहे यहां के लोगों ने जीविका के लिए नये साधन तलाशे,तब भी अपनी जमीन से मोह बना रहा.गरमी में कुछ जमीन के रकबे गंगा नदी छोड़ कर सिमट जाती है,तब उसमें बालू पर उगनेवाली फसलें उपजा ली जाती हैं.कड़ी मेहनत और हर मौसम में स्वयं को उपयुक्त सिद्ध करने वाले किसानों के इस हौसले की सिर्फ इतनी कीमत मिल पाती है कि उनका जीवन चल जाता है. बरसात में उन जमीनों पर पानी का कब्ज़ा रहता है.बाढ़ और कटाव का दुःख झेलनेवाले यहां के हजारों परिवारों को दशकों बाद भी विस्थापन का दर्द साल रहा है.उनके पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी.इस बार की बाढ़ में गंगा नदी का इन जमीनों पर जबरदस्त कब्जा रहा. लोगों ने उत्तर की ओर जो घर बनाये थे, गंगा वहां तक पहुंच गयी. घरों से पानी तो निकल रहा है, लेकिन जमीन पर कई महीनों तक जल जमाव कायम रहेगा.ऐसे में कृषि भूमि पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. कड़ी मेहनत करने वाले ये भूमिपुत्र जब जब बाढ़ आती है तो विस्थापन का दर्द इन्हें सालता रहता है. दर्जनों परिवारों को सिर्फ पुनर्वास का आश्वासन दिया गया. लाचारी के सिवा इनके जीवन में कुछ बचा ही नहीं. अंतहीन पीड़ा का अपने सीने में छिपाये लोग आखिकार जिंदगी की जद्दोजहद झेलने को विवश हैं. दशकों से उद्धारक की तलाश में इनको आंखें पथरा गई हैं.