अगर आप 90 के दशक या 2000 की शुरुआत में बड़े हुए हैं, तो आपने अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को किसी भी बाइक को सिर्फ ‘हीरो होंडा’ कहते जरूर सुना होगा. चाहे चाबी किसी भी मोटरसाइकिल की हो, जुबान पर नाम हीरो होंडा ही आता था.
उस दौर का एक टीवी विज्ञापन आज भी कई लोगों के जेहन में ताजा है- “फिल इट, शट इट, फॉरगेट इट” (टंकी भरो, ढक्कन बंद करो और भूल जाओ). यह सिर्फ विज्ञापन नहीं था, बल्कि हिंदुस्तानीय मध्यम वर्ग का अपनी मोटरसाइकिल पर अटूट भरोसा था.
लेकिन आज जब आप सड़क पर निकलते हैं, तो नई बाइकों पर ‘Honda’ लिखा नहीं मिलता. उसकी जगह लाल-काले रंग में Hero MotoCorp लिखा मिलता है.
लेकिन इसकी वजह क्या रही? आखिर 26 साल तक हिंदुस्तानीय सड़कों पर एकछत्र राज करने वाली Hero और Honda की जोड़ी क्यों टूटी? जापानी कंपनी के अलग होने के बाद बिना उसकी विश्वस्तरीय तकनीक के Hero कैसे जिंदा रही? और आज इलेक्ट्रिक और प्रीमियम दौर में यह कंपनी खुद को कैसे रिलिवेंट बनाए हुए है?
इन कुछ बड़े सवालों का जवाब हम देने वाले हैं हमारे नया विचार के इस स्पेशल सेग्मेंट ‘ऑटोकथा’ में..जिसमें.आज हम Hero Motocorp के बारे में जानेंगे. आइए जानते हैं साइकिल के पैडल से शुरू होकर हिंदुस्तान की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी बनने की पूरी इनसाइड स्टोरी.
1984 में Hero और Honda पहली बार एक हुए
इसी दौर में जापान की ऑटोमोबाइल दिग्गज कंपनी Honda Motor Company हिंदुस्तान के तेजी से बढ़ते बाजार में कदम रखना चाहती थी. लेकिन तत्कालीन हिंदुस्तानीय औद्योगिक नीति के तहत किसी भी विदेशी कंपनी को हिंदुस्तान में सीधे तौर पर 100% हिस्सेदारी के साथ कारोबार करने की अनुमति नहीं थी. उन्हें किसी हिंदुस्तानीय पार्टनर के साथ Joint Venture (JV) करना अनिवार्य था. यहां दोनों ने एक-दूसरे की जरूरतें पूरी कीं:
- Honda के पास क्या था: 4-स्ट्रोक इंजन की आधुनिक जापानी तकनीक, जो ईंधन की खपत में बेजोड़ थी और बेहद कम धुआं छोड़ती थी.
- Hero के पास क्या था: हिंदुस्तान के छोटे-छोटे कस्बों और देहातों तक फैला डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, स्थानीय वेंडर्स का आधार और हिंदुस्तानीय ग्राहक की नब्ज की गहरी समझ.
1984 में दोनों कंपनियों ने हाथ मिलाया और जन्म हुआ Hero Honda Motors Limited का. दोनों की हिस्सेदारी लगभग बराबर (करीब 26-26%) रखी गई.
2010: क्यों अलग हुए Hero और Honda?
जब सब कुछ इतना अच्छा चल रहा था, तो फिर दोनों अलग क्यों हुए? दिसंबर 2010 में जब हीरो और होंडा के अलग होने की आधिकारिक घोषणा हुई, तो ऑटो सेक्टर हैरान रह गया.
इसके पीछे कोई मनमुटाव या अचानक हुआ फैसला नहीं था, बल्कि 3 ठोस रणनीतिक और व्यावसायिक कारण थे:
- विदेशी बाजारों में जाने पर पाबंदी: जॉइंट वेंचर के समझौते के अनुसार, Hero Honda अपनी बाइक्स को हिंदुस्तान के बाहर उन देशों में एक्सपोर्ट नहीं कर सकती थी, जहां Honda पहले से मौजूद थी. हीरो अब ग्लोबल प्लेयर बनना चाहती थी.
- तकनीक की निर्भरता और रॉयल्टी: हीरो पूरी तरह से होंडा के R&D पर निर्भर थी और हर बिक्री पर भारी रॉयल्टी चुकाती थी. हीरो अपनी खुद की रिसर्च क्षमताएं खड़ी करना चाहता था.
- हितों का टकराव: 1999 में होंडा ने हिंदुस्तान में अपनी अलग कंपनी (HMSI) बना ली थी. Activa स्कूटर्स के बाद होंडा ने 150cc बाइक Unicorn और 100cc-110cc सेगमेंट Twister में भी एंट्री कर ली. यानी होंडा अब अपने ही पार्टनर हीरो के खिलाफ सीधे मैदान में उतर चुकी थी.
अलगाव का समझौता: मुंजाल परिवार ने होंडा की पूरी 26% हिस्सेदारी खरीद ली और तय हुआ कि होंडा 2014 तक अपनी तकनीक का सपोर्ट देती रहेगी, ताकि हीरो को तुरंत झटका न लगे.
Premium बाइक और Harley-Davidson का दांव
कंपनी ने समझ लिया कि सिर्फ 100cc कम्यूटर बाइक बेचकर भविष्य में टिके रहना मुमकिन नहीं है. इसलिए हीरो ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो (बाइक्स की रेंज) को 3 अलग-अलग हिस्सों में बांटकर काम करना शुरू किया:
| सेगमेंट | प्रमुख मॉडल्स/ब्रांड | मुख्य फोकस और खासियत |
| कम्यूटर बेस (रोजमर्रा की बाइक्स) | Splendor, Passion, HF Deluxe | ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की रीढ़. आज भी कंपनी की सबसे ज्यादा कमाई (रेवेन्यू) और बिक्री इसी हिस्से से होती है. |
| प्रीमियम सेगमेंट (पावरफुल बाइक्स) | Xpulse 200, Karizma XMR, Harley-Davidson X440, Mavrick 440 | युवाओं को आकर्षित करने के लिए एडवेंचर और लाइफस्टाइल बाइक्स. इसी को मजबूत करने के लिए अमेरिकी दिग्गज Harley-Davidson के साथ पार्टनरशिप की गई. |
| इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) | VIDA V1 स्कूटर, Ather Energy | पेट्रोल से आगे बढ़कर भविष्य की तैयारी. इन-हाउस EV ब्रांड ‘VIDA’ की लॉन्चिंग और हिंदुस्तान के प्रमुख EV स्टार्टअप Ather Energy में बड़ा निवेश. |
Hero की पूरी टाइमलाइन: 8 बड़े पड़ाव
- 1956: मुंजाल भाइयों ने लुधियाना में ‘Hero Cycles’ की नींव रखी.
- 1984: Hero और जापानी कंपनी Honda के बीच Joint Venture बना और ‘Hero Honda Motors’ का जन्म हुआ.
- 1985: हरियाणा के धारूहेड़ा प्लांट से पहली 4-स्ट्रोक बाइक CD 100 लॉन्च हुई.
- 1994: माइलेज का नया कीर्तिमान रचने वाली Splendor बाजार में उतरी.
- 2001: दुनिया की सबसे ज्यादा टू-व्हीलर बेचने वाली नंबर-1 कंपनी बनी.
- 2010: 26 साल बाद Hero और Honda का संयुक्त उद्यम खत्म हुआf मुंजाल परिवार ने होंडा की हिस्सेदारी खरीदी.
- 2011: नई पहचान के साथ ‘Hero MotoCorp’ नाम से रीब्रांडिंग.
- 2016: जयपुर में अत्याधुनिक आरएंडडी सेंटर (CIT) शुरू.
- 2020: अमेरिकी बाइक दिग्गज Harley-Davidson के साथ मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का समझौता.
- 2022: इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में VIDA ब्रांड का ग्लोबल लॉन्च.
साइकिल के पैडल से लेकर 440cc की प्रीमियम बाइक और इलेक्ट्रिक स्कूटर्स तक- Hero की यात्रा हिंदुस्तानीय कॉरपोरेट इतिहास की सबसे बड़ी केस स्टडी है. यह कहानी सिखाती है कि विदेशी पार्टनर पर निर्भर रहने के बजाय जब कोई देसी कंपनी समय रहते अपनी खुद की तकनीक और क्षमताएं खड़ी करती है, तो वह किसी भी बदलाव के बाद अपनी बादशाहत कायम रख सकती है.
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