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July 7, 2025

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बिहार में चल रही बिजली की एक-एक परियोजनाओं की होगी जांच, ऐसा काम करने वाली एजेंसी हो जाएगी ब्लैक लिस्टेड…

Bihar News: बिहार में कार्यरत बिजली की सभी परियोजनाओं को लेकर बड़ी समाचार आ गई है. बिजली देने को लेकर खराब उपकरण मिलने की शिकायत के बाद बड़ा फैसला लिया गया है कि, एक-एक परियोजनाओं की जांच की जाएगी. जानकारी के मुताबिक, लोगों को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली देने की योजना में खराब बिजली के उपकरण लगा दिए जा रहे हैं. इसमें स्थानीय इंजीनियरों की लापरवाही की बात भी सामने आई है. कहा जा रहा है कि, इंजीनियरों की लापरवाही के कारण मोतिहारी में पुनरोत्थान वितरण क्षेत्र योजना के अंतर्गत जो काम किए जा रहे हैं, उसमें गुणवत्ता खराब होने का मामला सामने आया है. स्थानीय इंजीनियरों की लापरवाही आई सामने इस लापरवाही के सामने आने के कारण ही बिजली कंपनी की ओर से तमाम परियोजनाओं की विशेष रूप से जांच करने को लेकर आदेश जारी कर दिया है. इधर सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अप्रैल महीने में आरडीएसएस के अंतर्गत किए जा रहे कामों की गुणवत्ता की जांच के लिए त्रि-स्तरीय कमेटी गठित की गई थी. समाचार की माने तो, 11 से 13 अप्रैल तक जांच हुई. जिसके बाद मोतिहारी अंचल में ट्रांसफॉर्मर और एरियल बंच केबल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए. इसके बाद ही नॉर्थ बिहार कंपनी के तत्कालीन एमडी निलेश रामचंद्र देवरे ने ट्रांसफॉर्मर और केबल की जांच सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल से जांच कराने का निर्णय लिया. उन्होंने सभी अंचलों को आदेश दिया. साथ ही सभी अंचलों में सीलिंग कमेटी भी गठित की गई थी. इस तरह की एजेंसियों को दिया अल्टीमेटम इधर, उत्तर बिहार में गड़बड़ी मिलने के बाद होल्डिंग कंपनी ने पूरे बिहार में बिजली की जितनी भी परियोजनाएं जो चल रही है, उसकी जांच का आदेश दिया गया. इसके साथ ही जांच को लेकर एक मानक तय किया गया, जिसके तहत सभी उपकरणों की जांच की जाएगी. कहा गया है कि, सभी तरह के पोल, पावर ट्रांसफॉर्मर, मीटर, वितरण ट्रांसफॉर्मर, सर्किट ब्रेकर्स, एबी केबल, ओवरहेड कंडक्टर, इंसुलेटर की जांच की जाए. दूसरा फेल होने पर उपकरण को बदल दिया जाए. इसके साथ ही जो उपकरण पहले से लगे हुए हैं, उसे लेकर अगर आशंका है कि गुणवत्ता अच्छी नहीं है तो, उसे बदल दें. इतना ही नहीं, एजेंसियों को अल्टीमेटम भी दिया गया है कि, जांच रिपोर्ट के बाद खराब उपकरण लगाने वाली एजेंसी को पांच साल तक ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा. इसके अलावा उपकरणों के लाने और ले जाने में जो भी पैसे खर्च होंगे, उसे एजेंसी से ही लिया जाएगा. इस तरह से देखा जा सकता है कि, बड़ा आदेश जारी कर दिया गया है. Also Read: Bihar Election: पटना में SIR के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा महागठबंधन, 9 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में होगा चक्का जाम The post बिहार में चल रही बिजली की एक-एक परियोजनाओं की होगी जांच, ऐसा काम करने वाली एजेंसी हो जाएगी ब्लैक लिस्टेड… appeared first on Naya Vichar.

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बिजली गिरेगी… बादल गरजेंगे… यूपी के इन जिलों में अगले 48 घंटे में होगी भारी बारिश

UP Rain Alert: उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी रफ्तार पकड़ चुका है. खासतौर पर पश्चिमी यूपी के जिलों में अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश देखने को मिलेगी. मौसम विभाग ने सोमवार के लिए सहारनपुर, शामली, बरेली, पीलीभीत समेत उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर से सटे कई जिलों में भीषण बारिश का पूर्वानुमान लगाया है. इन इलाकों में IMD ने यलो अलर्ट भी जारी किया है. 30 से ज्यादा जिलों में बारिश का पूर्वानुमान मौसम विभाग ने प्रदेश के 30 से ज्यादा जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है. मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले इलाकों में जाने से बचें और सावधानी बरतें. बता दें कि मानसून के सक्रिय होने से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को उमस से काफी राहत मिली है. अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में ऐसा ही मौसम बना रहेगा. IBF DATED 06.07.2025 pic.twitter.com/HzZvkTnicp — मौसम केंद्र, लखनऊ – IMD Uttar-Pradesh (@CentreLucknow) July 6, 2025 भारी वर्षा होने की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के कुछ जिलों में भयंकर बारिश की संभावना है, जिसमें सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, पीलीभीत, झांसी, ललितपुर और उसके आसपास के इलाकों में शामिल हैं. वज्रपात होने का अनुमान IMD के मुताबिक, बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फ़तेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलन्दशहर, अलीगढ़, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत शाहजहांपुर, संभल, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर , मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा और उसके आसपास के इलाकों में वज्रपात और बादल गरजने का अनुमान है. #WATCH मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश: भारी बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव देखा गया। pic.twitter.com/1tDzu631oq — ANI_HindiNews (@AHindinews) July 6, 2025 The post बिजली गिरेगी… बादल गरजेंगे… यूपी के इन जिलों में अगले 48 घंटे में होगी भारी बारिश appeared first on Naya Vichar.

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9 घंटे की नींद से मिले 9 लाख! पढ़ाई नहीं, इस वजह से चर्चा में आई UPSC स्टूडेंट

Sleep Champion of the Year: क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ सोने से लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं? यह कोई सपना नहीं बल्कि पुणे की UPSC उम्मीदवार पूजा माधव वाव्हल की सच्ची कहानी है. पूजा ने एक अनोखे कॉम्पिटिशन यानि Sleep Internship में हिस्सा लिया था और उन्होंने “Sleep Champion of the Year” का टाइटल जीता. आइए जानें इस बारे में विस्तार से. Sleep Champion of the Year: कैसे होती है ये नींद वाली इंटर्नशिप? रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अनोखी इंटर्नशिप का आयोजन हर साल एक वेलनेस स्टार्टअप द्वारा किया जाता है. प्रतियोगियों को Contactless Sleep Tracker और Wakefit Mattress दिए जाते हैं ताकि उनकी नींद की क्वालिटी को मॉनिटर किया जा सके. इसके साथ ही उन्हें कुछ खास वर्कशॉप्स और स्लीप-हैबिट सुधारने वाले चैलेंज भी दिए जाते हैं. स्लीप ट्रैकिंग: रोज 9 घंटे सोना फीडबैक रूटीन: घर से फॉर्म भरना और नींद के अनुभव शेयर करना फन टास्क्स: जैसे Blindfold Bed, Alarm Hunt और Sleep-Off. कैसे बनी पूजा ‘स्लीप चैंपियन’? पूजा वाव्हल ने इस सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए 91.36 स्कोर के साथ टॉप पोजिशन हासिल की. इस कॉम्पिटिशन के फाइनल राउंड में 15 फाइनलिस्ट्स पहुंचे, जिन्हें 1 लाख की राशि दी गई. लेकिन पूजा को बतौर टॉप परफॉर्मर 9 लाख से अधिक का कैश प्राइज मिला. 2019 में हुई थी शुरुआत, अब बन चुका है ट्रेंड इस अनोखे कॉन्सेप्ट की शुरुआत 2019 में हुई थी और अब तक इसके चार सीज़न पूरे हो चुके हैं. हर साल लाखों आवेदन आते हैं और यह इंटर्नशिप हिंदुस्तान के वेलनेस और स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक कल्चरल ट्रेंड बन चुकी है. हर सिलेक्टेड “Sleep Intern” को 60 दिनों तक रोज कम से कम 9 घंटे सोने की शर्त पूरी करनी होती है. वर्क फ्रॉम होम है ये इंटर्नशिप इस इंटर्नशिप की खास बात यह है कि इसे आप पूरी तरह घर बैठे (Work from Home) कर सकते हैं. 60 दिन पूरे करने के बाद टॉप स्लीपर को 10 लाख तक का रिवॉर्ड मिल सकता है. यह भी पढ़ें- DU Miranda House Cut Off 2025: कितने मार्क्स पर मिलेगा डीयू के बेस्ट कॉलेज में एडमिशन? मिरांडा हाउस की कटऑफ उड़ा देगी होश! The post 9 घंटे की नींद से मिले 9 लाख! पढ़ाई नहीं, इस वजह से चर्चा में आई UPSC स्टूडेंट appeared first on Naya Vichar.

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भारत बना दुनिया का चौथा सबसे समान समाज, गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज

India Poverty Rate 2025 Report: हिंदुस्तान अब दुनिया के सबसे अधिक समानता वाले समाजों में से एक बन गया है. वर्ल्ड बैंक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, हिंदुस्तान का Gini Index स्कोर 25.5 है, जो कि ग्लोबली चौथा सबसे अच्छा स्कोर है. इससे ऊपर केवल स्लोवाक रिपब्लिक, स्लोवेनिया और बेलारूस हैं. यह स्कोर चीन (35.7), अमेरिका (41.8) और सभी G7 और G20 देशों से बेहतर है. Gini Index किसी देश में आय वितरण को दर्शाता है. जहां 0 पूर्ण समानता और 100 अधिकतम असमानता को दर्शाता है.  हिंदुस्तान में समानता का यह स्तर कैसे आया हिंदुस्तान प्रशासन की नीतियों ने इस बदलाव को संभव बनाया है. सामाजिक कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार “हिंदुस्तान की आर्थिक तरक्की अब सभी वर्गों तक समान रूप से पहुँच रही है. इसके पीछे गरीबी उन्मूलन, वित्तीय समावेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं की अहम भूमिका है.”  2011 से अब तक हुआ बड़ा बदलाव वर्ष 2011 में हिंदुस्तान का Gini स्कोर 28.8 था, जो अब घटकर 25.5 हो गया है. यह विकास में समानता का स्पष्ट संकेत है. 2011 से 2023 के बीच 17.1 करोड़ हिंदुस्तानीयों ने चरम गरीबी से बाहर निकलने में सफलता पाई. इस दौरान गरीबी दर 16.2% से घटकर सिर्फ 2.3% हो गई है (विश्व बैंक द्वारा निर्धारित $2.15 प्रतिदिन की वैश्विक गरीबी रेखा के अनुसार). ये प्रशासनी योजनाएं बनीं गेमचेंजर हिंदुस्तान प्रशासन की विभिन्न योजनाओं ने आर्थिक समानता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत अब तक 55 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिससे गरीब और ग्रामीण वर्ग को वित्तीय प्रणाली से जोड़ा गया. इसके साथ ही, आधार कार्ड प्रणाली ने 142 करोड़ से अधिक नागरिकों को कवर किया है, जिसके माध्यम से प्रशासनी लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर हो रहे हैं और इससे 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान हिंदुस्तान योजना ने बड़ी भूमिका निभाई है, जिसके तहत 5 लाख रुपये तक की हेल्थ कवर योजना दी गई है और 41 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकी हैं. वहीं, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन प्रदान किया गया, जिसने महामारी और महंगाई के समय में बड़ी राहत पहुंचाई. स्टैंड अप इंडिया योजना के अंतर्गत SC/ST और स्त्रीओं को स्वरोजगार के लिए कम ब्याज पर लोन और ट्रेनिंग दी गई, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला. साथ ही, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पकारों को ट्रेनिंग और ऋण मुहैया कराकर ‘आत्मनिर्भर हिंदुस्तान’ के लक्ष्य को मजबूत किया है. ये सभी योजनाएं मिलकर हिंदुस्तान को एक अधिक समान, समावेशी और सशक्त समाज की ओर ले जा रही हैं. Also Read : प्राइवेट जेट, लक्जरी कारों के मालिक एमएस धोनी की कितनी है संपत्ति, रिटायरमेंट के बाद कहां से करते हैं करोड़ों की कमाई The post हिंदुस्तान बना दुनिया का चौथा सबसे समान समाज, गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज appeared first on Naya Vichar.

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जीत के बाद भी खुश नहीं हैं कैप्टन गिल, इस बात पर भड़के, कहा- ऐसी परिस्थितियों में…

IND vs ENG Shubman Gill on Duke Balls and Flat Pitches: इंग्लैंड के खिलाफ दूसरा टेस्ट जीतकर इतिहास रचने के बाद हिंदुस्तानीय कप्तान शुभमन गिल ने रविवार को ‘ड्यूक्स’ गेंद की तेजी से बिगड़ती प्रकृति की आलोचना की. अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के बावजूद श्रृंखला के पहले दो टेस्ट मैच में मिली सपाट पिचों के चलन को भी नकार दिया. गिल ने अब तक स्पोर्ट्सी गई चार पारियों में करीब 600 रन बनाए हैं. लेकिन उनका मानना ​​है कि पिचों में गेंदबाजों के लिए कुछ होना चाहिए. ड्यूक्स की गुणवत्ता भी मदद नहीं कर रही है और 30 ओवर के बाद ‘सॉफ्ट’ गेंदें टीमों को आक्रामक होने के लिए मजबूर कर रही हैं. मैच के बाद एक सवाल के जवाब में गिल ने कहा, ‘‘गेंदबाजों के लिए यह बहुत मुश्किल है. मुझे लगता है कि विकेट से अधिक, गेंद शायद बहुत जल्दी खराब हो जाती है. यह बहुत जल्दी नरम हो जाती है. मुझे नहीं पता कि यह क्या है, यह विकेट हो या कुछ और. पर गेंदबाजों के लिए यह मुश्किल है. ऐसी परिस्थितियों में विकेट लेना बहुत मुश्किल है, जहां उनके लिए कुछ भी नहीं है.’’ गिल ने आगे कहा, ‘‘एक टीम के रूप में जब आप जानते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में विकेट लेना मुश्किल है तो बहुत सी चीजें आपके नियंत्रण से बाहर होती हैं. गेंदबाजों के लिए थोड़ी मदद होनी चाहिए. अगर गेंद कुछ मूवमेंट कर रही है तो आप किसी तरह से कुछ योजना बना सकते हैं और तभी स्पोर्ट्सना मजेदार होता है. ’’ ‘पूरे दिन रक्षात्मक रहते हैं’ हिंदुस्तानीय कप्तान ने कहा, ‘‘अगर आपको पता है कि केवल पहले 20 ओवर में ही कुछ ही होगा तो उसके बाद आप पूरे दिन रक्षात्मक रहते हैं. आप पूरे दिन यह सोचते रहते हैं कि रन कैसे रोकें. तब स्पोर्ट्स का सार इसमें नहीं दिखता.’’ कप्तान के तौर पर अपना पहला टेस्ट जीतने के बाद गिल ने इंग्लैंड की पिचों की प्रकृति पर टिप्पणी करते हुए मजाकिया पक्ष भी देखा. उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘‘हां, जैसे हम हिंदुस्तान में स्पोर्ट्सते हैं, उनमें से अधिकांश बल्लेबाजी के अनुकूल हैं. यहां आकर और कुछ समय के लिए अच्छी पिचें पाकर अच्छा लगता है. ’’ तीसरे टेस्ट में लौटेंगे बुमराह हालांकि उन्हें उम्मीद नहीं है कि 10 जुलाई से लॉर्ड्स में शुरू होने वाले तीसरे टेस्ट में पिच लीड्स या एजबेस्टन की तरह सपाट होगी. उन्होंने कहा, ‘‘हम देखेंगे कि वे लॉर्ड्स को किस तरह का विकेट दे रहे हैं. मुझे नहीं लगता कि वे इतना सपाट विकेट देंगे. हम वहां जाएंगे और देखेंगे कि यह किस तरह का विकेट है और तय करेंगे कि सबसे अच्छा संभव संयोजन क्या है.’’ गिल ने यह भी पुष्टि की कि जसप्रीत बुमराह कार्यभार प्रबंधन के अंतर्गत एजबेस्टन में आराम दिए जाने के बाद लॉर्ड्स में स्पोर्ट्सेंगे. प्राइवेट जेट, लक्जरी कार के मालिक एमएस धोनी की कितनी है संपत्ति, रिटायरमेंट के बाद कहां से करते हैं करोड़ों की कमाई MS Dhoni: गोलकीपर और टीटी से कैप्टन कूल तक, एमएस धोनी के 7 फैक्ट्स, जिन्होंने क्रिकेट के साथ बदलीं जिंदगियां कोहली ने जीत के लिए इन 2 खिलाड़ियों का ‘विशेष रूप’ से लिया नाम, गिल एंड कंपनी को बताया ‘निडर’ The post जीत के बाद भी खुश नहीं हैं कैप्टन गिल, इस बात पर भड़के, कहा- ऐसी परिस्थितियों में… appeared first on Naya Vichar.

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Chaturmas 2025 शुरू, तप, व्रत और उपासना से मिलती है आध्यात्मिक शक्ति

सलिल पांडेय, मिर्जापुर Chaturmas 2025: हिंदू परंपरा में देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक की अवधि को चार्तुमास का शुभ काल माना जाता है. इन चार मास में विभिन्न वत-उपवास हरेक व्यक्ति को आत्मिक उत्थान का अवसर देता है. यह अवधि मानव जीवन में शक्ति और ऊर्जा के संचय करने का सुअवसर है… हिंदुस्तानीय परंपरा में एकादशी तिथि विष्णु, तो चतुर्दशी तिथि शिव को समर्पित है. धार्मिक मान्यतानुसार, देवशयनी एकादशी (आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी) की तिथि को भगवान विष्णु इस सृष्टि का संचालन छोड़ योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं. इसके बाद वह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवउठान एकादशी तक शयन में रहते हैं. इस चार माह को हिंदुस्तानीय जीवन में चार्तुमास कहा गया है. जब भगवान योगनिद्रा में सृष्टि के संचालन के लिए शक्ति, ऊर्जा और प्रेम का संचयन करते हैं, उस दौरान भगवान महादेव के जिम्मे इस सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी होती है. आषाढ़, सावन, भाद्र, कुंवार और कार्तिक मास में शिव की आराधना करनेवाले को भगवान विष्णु का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. श्रीविष्णु क्षीर सागर में करते हैं विश्राम पौराणिक मान्यता के अनुसार, इन चार माह के दौरान सृष्टि के पालनकर्ता भगवान श्रीविष्णु क्षीर सागर में विश्राम करते हैं, इसलिए सभी शुभ और मांगलिक कार्य को वर्जित रखा जाता है. पुराणों में कथा है कि राजा बलि के दान पुण्य से खुश होकर भगवान विष्णु ने वरदान मांगने को कहा, तो वलि ने भगवान विष्णु को साथ पाताल लोक चलने को कहा. भगवान के पाताल में रहने से चिंतित माता लक्ष्मी ने बलि को भाई बनाकर राखी बांधी और बदले में भगवान विष्णु को पाताल लोक से ले जाने का वचन ले लिया. पाताल से विदा लेते वक्त भगवान विष्णु ने राजा बलि को आशीर्वाद दिया कि वह आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक पाताल लोक में वास करेंगे. इस अवधि को योगनिद्रा माना गया. चार्तुमास के चार महीने आते हैं बृहदारण्यकोपनिषद् (1/5/21-23) में कहा गया है कि शरीर की विभिन्न इंद्रियों का एक ही व्रत है कि वह अपने लिए एक कार्य का चुनाव करे, व्रत शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है एक ही स्थान पर परिभ्रमण अथवा परिक्रमा करना. व्रत में सात्त्विक गुण की प्रधानता होती है. रज और तम गुण गौण होते हैं. पर्व में राजस प्रधान है. व्रत सरल होते हैं, परंतु पर्व में भव्यता और संपन्नता होती है. त्योहार सामान्यतः सामाजिकता के साथ तम प्रधान होता है. पर्व की एक निश्चित अवधि होती है. पर्व को उत्सव की तरह मनाया जाता है, जबकि व्रत को कठोरता से आत्मिक उत्थान का साधन माना जाता है. इस कारण पर्व और तीर्थ का काम देश और समाज को जगाने और क्रियाशील बनाने के लिए है. तीर्थ में देश का स्वरूप प्रकट होता है, तो पर्व में काल और समय का अर्थ उद्भाषित होता है. आषाढ़ में वर्षों के आगमन के साथ ही और साधना के प्रखर होने की शुरुआत हो जात देवशयनी एकादशी बस उसका एक प्रतीक है कि व्रतकाल शुरू हो रहा है. इस चार माह की अवधि में सबसे ज्यादा व्रत आते हैं- स्त्रियों के लिए भाद्रपद शुक्ल तृतीय को हरतालिका व्रत, श्रावण शुक्ल तृतीय को तीज, भाद्रपद की चतुर्थी को गणेश व्रत, श्रावण शुक्ल को नागपंचमी, भाद्रशुक्ल पंचमी को ऋषि पर्व, भाद्र कृष्ण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, भाद्रपद शुक्ल को राधाष्टमी, आश्विनी शुक्ल को विजयदशमी, आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा, सावन पूर्णिमा को रक्षाबंधन, आश्विन को शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा को गंगास्नान, आश्विन में अमावस्य को महालया और कार्तिक में दीपावली का अनुष्ठान. आश्विन के कृष्ण पक्ष में पितरों की श्रद्धा के साथ मन, शरीर और आत्मा को सात्विक किया जाता है. इसके बाद शरीर और मन से शक्ति का आह्वान किया जाता है. नौ दिन-रात की आराधना और साधना के बाद जीवन प्रखर और प्रबल हो जाता है. जगद्धात्री के प्रति विनम्रता और आदर समपिर्त कर नये उत्साह के साथ व्यक्ति अपने कर्म और धर्म की यात्रा में जब देवउठान एकादशी से चलता है, तो उसकी शक्ति में सार्थकता और सफलता का परिचय मिलता है. चातुर्मास में पानी की अधिकता के कारण जीवों की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है. भोजन और जल में बैक्टीरिया एवं वायरस की तादाद बढ़ जाती है. इस कारण इन चार महीनों के देवता भगवान शिव की साधना, आराधना एवं कथावाचन को श्रेष्ठ कर्म माना गया है. इस चार माह की शक्ति और ऊर्जा के संचयन से व्यक्ति अगले पूरे साल में पूरी जिजीविषा के साथ कर्मपथ पर गतिमान रहता है. यह घनघोर वर्षों का काल है, जिसमें साधु संत और ऋषि-मुनि एक स्थान पर रुक कर साधना, आराधना और उपासना करते हैं. इस समय वर्षा ऋतु के कारण नदी-नाले में पानी भरा रहता है. कीड़े मकोड़ों एवं जीव-जंतुओं के प्रजनन का यह काल होता है. इस समय परिभ्रमण या कर्म करने से उनको हानि होने की आशंका रहती है. अतएव जीव एवं प्रकृति के लिए चातुर्मास की अवधि को ठहराव का काल बताया गया है. वहीं याज्ञवल्क्य ने व्रत को मानसिक संकल्प की संज्ञा दी है. इसका पालन और संपादन एक अनुशासन के अधीन करना ही उचित है. व्रत सदैव आत्मिक होते हैं, जिससे व्यक्ति अपने तन और मन से दोष, दुर्गुण, अहंकार और कलुष को दूर कर परम लक्ष्य के लिए खुद को संस्कारित एवं विकसित करता है. नियम एवं धरम चातुर्मास आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति और ध्यान लगाने का काल माना जाता है. भगवान विष्णु की योगनिद्रा के दौरान उनके संरक्षण में अपने मन और आत्मा को समर्पित करने का समय होता है. इस दौरान श्रीहरि की भक्ति व पुण्य कार्यों के करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है. इस दौरान मिथ्या वचन बोलने से बचें. इससे जिह्वा पर बैठी मां सरस्वती को पीड़ा होती है और वे रुष्ट होती है, जिसका नतीजा यह होता है कि भावी पीढ़ी अज्ञानी होती है. साथ में पुण्य नष्ट होता है. साथ ही किसी के साथ छलछद्म न करें, यह महापाप बताया गया है. गोस्वामी तुलसीदास ने ‘निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल-छिद्र न भाया चौपाई में स्पष्ट कर दिया है. देवशयनी एकादशी की पूजा इस दिन रात्रि में विशेष विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें,

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मौत बनकर आई बारिश! हिमाचल समेत इन राज्यों में मानसून मचाएगा तांडव

Heavy Rain Alert: उत्तर हिंदुस्तान में मॉनसून सक्रिय हो चुका है और सोमवार की सुबह दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में झमाझम बारिश ने जहां लोगों को उमस से राहत दी, वहीं तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई. देर रात से छाए बादलों और तेज़ बिजली की गड़गड़ाहट के बीच मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बाद अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यूपी-बिहार में बिजली गिरने का खतरा, भारी बारिश का अलर्ट उत्तर प्रदेश और बिहार में आज और कल (7 और 8 जुलाई) गरज-चमक के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। यूपी के कई जिलों में बिजली गिरने की आशंका जताई गई है और लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है. वहीं बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर, पटना, बक्सर, भोजपुर और रोहतास जैसे जिलों में आकाशीय बिजली को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. इन राज्यों की नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है. उत्तराखंड में ऑरेंज अलर्ट, लैंडस्लाइड का खतरा उत्तराखंड के देहरादून, रुद्रप्रयाग समेत चार जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं. सोमवार सुबह रुद्रप्रयाग में बारिश दर्ज की गई, जिससे कई सड़कों पर यातायात बाधित हुआ है. हिमाचल में मानसून का प्रकोप जारी, अब तक 78 की मौत हिमाचल प्रदेश में मानसून ने तबाही मचा दी है। लैंडस्लाइड, बादल फटने और लगातार हो रही भारी बारिश से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 50 मौतें बारिश से संबंधित हैं. कई इलाकों में सार्वजनिक सेवाएं अब भी बाधित हैं. एमपी में बारिश का कहर, नदियां उफान पर मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी मूसलाधार बारिश जारी है. बालाघाट, जबलपुर, मंडला, सिवनी, राजगढ़, देवास, बैतूल, छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है. गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. The post मौत बनकर आई बारिश! हिमाचल समेत इन राज्यों में मानसून मचाएगा तांडव appeared first on Naya Vichar.

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Ganesh Chaturthi 2025: इस साल कब है गणेश चतुर्थी , जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व

Ganesh Chaturthi 2025: हर साल की तरह 2025 में भी गणेश चतुर्थी का पर्व देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और खासतौर पर महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसकी भव्यता देखने लायक होती है। दस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव भक्तों के लिए सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और शुभ ऊर्जा का प्रतीक भी होता है. इस बार गणेश चतुर्थी से जुड़ी तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्र दर्शन की सावधानियां और पूजा विधि को लेकर आपके लिए प्रस्तुत है संपूर्ण जानकारी: गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त 2025 को दोपहर 1:54 बजे शुरू होकर 27 अगस्त 2025 को दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी.उदयकालीन तिथि के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त 2025 (बुधवार) को मनाया जाएगा. Sawan 2025 में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें ये नियम गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त (Madhyahna Muhurat) गणपति की स्थापना और पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक (27 अगस्त 2025) इस अवधि में पूजा करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है. गणेश विसर्जन 2025 कब है? गणेश चतुर्थी का समापन अनंत चतुर्दशी को होता है, जब बप्पा का विधिवत विसर्जन किया जाता है. इस बार गणेश विसर्जन 6 सितंबर 2025 (शनिवार) को किया जाएगा. इस दिन भक्त बप्पा से अगले वर्ष शीघ्र आगमन की प्रार्थना करते हैं: “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!” गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से क्यों बचें? धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से झूठे आरोप या अपकीर्ति का खतरा होता है.इसलिए इन समयों में चंद्र दर्शन करने से बचना चाहिए: 26 अगस्त 2025: दोपहर 1:54 बजे से रात 8:29 बजे तक 27 अगस्त 2025: सुबह 9:28 बजे से रात 8:57 बजे तक कैसे करें गणेश जी की विधिवत पूजा? घर में साफ-सफाई कर एक पवित्र स्थान चुनें पीले या लाल कपड़े पर गणपति की मूर्ति स्थापित करें उन्हें दूर्वा, मोदक, लड्डू और सिंदूर अर्पित करें “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र, गणेश चालीसा या अथर्वशीर्ष का पाठ करें आरती करें और प्रसाद पूरे परिवार में बांटें गणेश चतुर्थी का महत्व गणेश चतुर्थी न केवल भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है, बल्कि यह नया आरंभ, बुद्धि, सौभाग्य और विघ्नों से मुक्ति का संदेश भी देता है। सही विधि से पूजा करने पर बप्पा की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. The post Ganesh Chaturthi 2025: इस साल कब है गणेश चतुर्थी , जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में मातृ-शिशु मृत्यु दर में सुधार, संस्थागत प्रसव ने बनाए नए रिकॉर्ड

Bihar News: पटना. बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है. एक समय मातृ और शिशु मृत्यु दर गंभीर चिंता का विषय था, वहीं अब राज्य संस्थागत प्रसव और सम्पूर्ण टीकाकरण जैसे क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है. यह बदलाव कोई एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि यह पिछले दो दशकों में लगातार किए गए सुधारों, नीतियों और ज़मीनी कार्यों का परिणाम है. अब बिहार के हर गांवों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंची है, जिसका नतीजा है आज गरीब से गरीब व्यक्ति इलाज के अधिकार का उपयोग कर पा रहा है. सुरक्षित प्रसव की ओर बढ़ी स्त्रीएं संस्थागत प्रसव में क्रांतिकारी वृद्धि बिहार में साल 2005 तक राज्य में मात्र 19.9 फीसद स्त्रीएं संस्थागत प्रसव (अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव) का विकल्प चुनती थीं. इसका मतलब था कि अधिकांश स्त्रीएं अब भी घर पर प्रसव कराती थीं. इससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहता था, लेकिन प्रशासन की ओर जागरुकता अभियानों, जननी सुरक्षा योजना, एम्बुलेंस सेवा, मुफ्त दवाओं और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता जैसी पहलों ने बिहार की नई तस्वीर गढ़ी है. वर्ष 2019-20 तक यह आंकड़ा बढ़कर 76.2 फीसद तक पहुंच गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि अब स्त्रीएं सुरक्षित प्रसव की ओर बढ़ रही हैं. टीकाकरण अभियान में रिकार्ड सफलता संपूर्ण टीकाकरण अभियान स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि रही है. साल 2002 में जहां केवल 18 फीसद बच्चों को सम्पूर्ण टीकाकरण मिला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 90 फीसद तक पहुंच गया है. यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के जीवन की सुरक्षा का प्रमाण है. मिशन इंद्रधनुष, नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर, आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सक्रियता इस कामयाबी की रीढ़ बनी. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बढ़ा विश्वास 90 फीसद हेल्थ सब-सेंटर और PHC की संख्या में वृद्धि स्त्री स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या में इज़ाफा मातृत्व सहायता योजनाओं का लाभ लाखों को बच्चों और स्त्रीओं को मिला जीवन का अधिकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह बदलाव न केवल आंकड़ों की कहानी है, बल्कि यह हर उस मां और शिशु की जीत है, जिनके जीवन में सुरक्षा और सम्मान अधिकार सुनिश्चित हुआ. बिहार आज सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ बचपन की दिशा में पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुका है. Also Read: छठ के बाद बिहार में विधानसभा चुनाव के आसार, 22 साल बाद आयोग जांच रहा वोटर लिस्ट The post बिहार में मातृ-शिशु मृत्यु दर में सुधार, संस्थागत प्रसव ने बनाए नए रिकॉर्ड appeared first on Naya Vichar.

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Sawan 2025 में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें ये नियम

Sawan 2025: सावन का महीना आते ही शिवभक्तों की आस्था चरम पर पहुंच जाती है. यह पावन मास संपूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है. वर्ष 2025 में सावन 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष (हलाहल) को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, तभी से उन्हें ‘नीलकंठ’ कहा जाता है. इसी घटना की स्मृति में सावन में विशेष रूप से शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है. हालांकि शिव पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन अनिवार्य होता है, वरना पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता. आइए जानते हैं शिवलिंग पर जल अर्पित करने से जुड़े 6 जरूरी नियम जिन्हें हर शिवभक्त को सावन में जरूर अपनाना चाहिए— किस दिशा में मुंह करके करें जल अर्पण? शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पूजा करें. यह दिशा भगवान शिव का प्रतीक मानी जाती है. पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करना अशुभ माना जाता है. किस धातु के बर्तन से चढ़ाएं जल? शिवलिंग पर जल अर्पण करते समय स्टील या लोहे के बर्तन का प्रयोग न करें. इन धातुओं को अशुभ माना गया है. इसके स्थान पर तांबे, पीतल या चांदी के बर्तन का उपयोग करें. शंख से जल चढ़ाना है वर्जित हालांकि शंख पूजा का प्रमुख अंग माना जाता है, लेकिन शिव पूजा में इसका उपयोग वर्जित है. शंख भगवान विष्णु का प्रतीक है और इसे शिवलिंग पर जल चढ़ाने में प्रयोग करना अनुचित माना गया है. खड़े होकर जल अर्पित करना नहीं है उचित जब भी शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, सीधे खड़े होकर ऐसा न करें. हमेशा बैठकर या झुककर जल अर्पण करें, क्योंकि खड़े होकर जल चढ़ाना असम्मानजनक माना जाता है. साफ और संपूर्ण बेलपत्र का ही करें उपयोग बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. लेकिन फटे, कटे या सूखे बेलपत्र अर्पित करना पूजा में दोष उत्पन्न करता है. ध्यान दें कि बेलपत्र ताजगीपूर्ण और पूर्ण आकार का हो. जल की धार निरंतर बनी रहनी चाहिए शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय यह सुनिश्चित करें कि जल की धार लगातार बनी रहे. धार के बीच में रुकावट आना पूजा संकल्प के भंग होने का संकेत माना जाता है. शिव कृपा पाने का पावन अवसर सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ समय होता है. अगर आप इन सरल लेकिन प्रभावशाली नियमों का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक पूजा करेंगे, तो भोलेनाथ की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होगा. यदि आप अपनी जन्मकुंडली, वास्तु दोष, व्रत-त्योहार, रत्न या किसी भी ज्योतिषीय समस्या का समाधान चाहते हैं, तो संपर्क करें: ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा(ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ)8080426594 / 9545290847 The post Sawan 2025 में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें ये नियम appeared first on Naya Vichar.

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