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December 14, 2025

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How to Clean Atta Chalni: आटा की चलनी को कैसे करें साफ? जानिए आसान और असरदार तरीके 

How to Clean Atta Chalni: रसोई में आटा छानने वाली चलनी का इस्तेमाल रोज़ाना किया जाता है. आटे की बारीक परत और नमी के कारण चलनी की जाली में आटा फंस जाता है, जिससे बदबू, फंगस या कीड़े लगने की समस्या हो सकती है. अगर चलनी को सही तरीके से और समय-समय पर साफ न किया जाए, तो यह सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है. इसलिए आटा चलने वाली चलनी की नियमित सफाई बहुत जरूरी है. थोड़े से घरेलू तरीकों और सही देखभाल से चलनी को लंबे समय तक साफ, सुरक्षित और इस्तेमाल लायक रखा जा सकता है. सही सफाई न सिर्फ चलनी की उम्र बढ़ाती है, बल्कि आपके खाने की स्वच्छता भी बनाए रखती है. इस लेख में हम आसान और असरदार तरीकों से आटा चलनी साफ करने के बारे में बताएंगे, जिन्हें आप घर पर आसानी से अपना सकती हैं. क्या आटा चलनी को रोज साफ करना चाहिए? हां, आटा चलनी को रोज़ाना इस्तेमाल के बाद साफ करना बहुत ज़रूरी होता है. चलनी में फंसा आटा नमी पाकर खराब हो सकता है और कीड़े भी लग सकते हैं. आटा चलनी में सूखा फंसा हुआ आटा कैसे निकालते हैं? आटा चलनी को उल्टा करके हल्के हाथ से थपथपाएं. इसके बाद सूखे ब्रश या पुराने टूथब्रश से जाली पर जमी आटे की परत साफ करें. क्या आटा चलनी को पानी से धोना चाहिए? हां, लेकिन रोज़ नहीं. हफ्ते में 1–2 बार गुनगुने पानी से धो सकते हैं. धोने के बाद तुरंत कपड़े से पोंछकर धूप में सुखाना ज़रूरी है. चलनी में चिपका हुआ आटा कैसे निकाल सकते हैं? आटा चलनी को गुनगुने पानी में थोड़ी देर चलनी भिगो दें. फिर ब्रश से धीरे-धीरे रगड़ें. इससे जाली पूरी तरह साफ हो जाती है. अगर चलनी में से बदबू आने लगे तो क्या करना चाहिए? बदबू को दूर करने के लिए चलनी को नींबू के रस या सिरके मिले पानी से धोएं. इससे बदबू भी दूर होगी और बैक्टीरिया भी खत्म होंगे. जंग लगी चलनी को कैसे साफ किया जा सकता है? आटा चलनी में अगर जंग लग जाए तो नींबू और नमक मिलाकर जंग वाली जगह पर रगड़ें. 10 मिनट बाद धोकर अच्छी तरह सुखा लें. आटा चलनी को घर में कैसे स्टोर कर सकते हैं? चलनी के पूरी तरह सूखने के बाद ही चलनी को ढककर या सूखी जगह पर रखें, ताकि उसमें नमी न आए. यह भी पढ़ें: Perfect Chilla Tips: हर बार परफेक्ट चीला बनाने का ये है सीक्रेट, जानें कौन-सा तवा है बेस्ट यह भी पढ़ें: Tawa Cleaning Hack: क्या आप जानते हैं? तवे को साफ करते समय क्यों डालते हैं शैंपू  The post How to Clean Atta Chalni: आटा की चलनी को कैसे करें साफ? जानिए आसान और असरदार तरीके  appeared first on Naya Vichar.

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गडग में अखिल भारतीय पंचायत परिषद का 18वां राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, 14 सूत्रीय मांगें पीएम मोदी को सौंपी जाएंगी

All India Panchayat Parishad National Conference: अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद की कार्य समिति गडग (कर्नाटक) में दिनांक 12 दिसम्बर से 13 दिसम्बर 2025 को राष्ट्रीय सम्मेलन पूर्व केंद्रीय मंत्री और अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय की अध्यक्षता में आयोजित किया गया. जिसमें देश भर के पंचायती राज प्रतिनिधि और अखिल हिंदुस्तानीय पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए . कर्नाटक में अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद का यह दूसरा सम्मलेन हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री एस. निजलिंगप्पा के अनुरोध पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 1964 में अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष और अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद के संस्थापक बलवंत राय मेहता जी की अध्यक्षता में कर्नाटक का पहला राष्ट्रीय सम्मलेन आयोजित हुआ था. इस सम्मलेन में हर राज्यों से सुझाव और प्रस्ताव आये अंततः 14 प्रस्ताव पास हुए इन प्रस्तावों को आने वाले समय में अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद का प्रतिनिधि मंडल प्रधानमंत्री को पेश करेगा. आपको बता दें कि यह आयोजन कर्नाटक पंचायत परिषद के प्रदेश अध्यक्ष और कर्नाटक प्रशासन के पंचायती राज मंत्री प्रेयांक खरगे के विशेष निवेदन और अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद के कार्यसमिति के अनुमोदन से संपन्न हुआ. हमारा उद्देश्य गांधी जी का ‘ग्राम स्वराज’ – बद्री नाथ अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद की स्थापना बलवंत राय मेहता और लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी के अथक प्रयासों से हुई . परिषद श्री बलवन्त राय मेहता, लोकनायक जय प्रकाश नारायण और लाल सिंह त्यागी जैसे महापुरुषों की विरासत है. परिषद के राष्ट्रीय सलाहकार बद्री नाथ ने बताया कि आजादी के 78 वर्षों के बाद, हमारा लक्ष्य वही है—गांधी जी का ‘ग्राम स्वराज’, लेकिन नए अवतार में. आज का ग्राम स्वराज केवल खादी तक सीमित नहीं है, यह ‘डिजिटल स्वराज’ भी है. हमें ऐसा गाँव बनाना है जो तकनीक में आधुनिक हो, लेकिन आत्मा से हिंदुस्तानीय हो. इस मौके पर अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद के अध्यक्ष श्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि वैश्वीकरण (Globalization) का दौर अब पुराना हो चुका है, आज दौर है ‘स्थानीयकरण’ और ‘आत्मनिर्भरता’ का. वैश्विक बाजार ने हमारे गाँवों को केवल एक ‘बाजार’ बनाकर छोड़ दिया है. हमारे स्थानीय संसाधनों—जल, जंगल और जमीन—पर बाहरी दबाव बढ़ा है. इसका समाधान दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई या मुंबई में नहीं, बल्कि हमारी ग्राम पंचायतों में है. ‘स्मार्ट विलेज’ पर करना होगा फोकस – कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ अशोक चौहान परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ अशोक चौहान ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने से हिंदुस्तान स्मार्ट नहीं बनेगा, जब तक हम ‘स्मार्ट विलेज’ नहीं बनाते. स्थानीय संसाधनों पर ग्राम समुदाय का नियंत्रण होना ही चाहिए, अन्यथा ग्रामीण समाज पलायन और बेरोजगारी की आग में झुलस जाएगा. महामंत्री मुख्यालय अनिल शर्मा ने परिषद का रिपोर्ट पेश करते हुआ कहा कि परिषद की परम्परा संघर्ष की रही है संसाधनों के अभाव में परिषद की व्यवस्था थोड़ी कमजोर है लेकिन परिषद् के जुड़े लोगों के हौशले बुलंद हैं अपनी जिम्मेदारी को निभानें में सबका बड़ा ही योगदान रहा है. देश की सबसे बड़ी धरोहर अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद को संभाले रखना हमारी जिम्मेदारी है इसमें प्रशासनों से सहयोग की काफी उम्मीद है. इस सम्मलेन में परिषद के दिल्ली प्रदेश पंचायत परिषद् के अध्यक्ष ध्यान पाल सिंह जादौन नें पंचायत से चुने हुए प्रतिनिधियों को वेतन, पेंशन और भत्ते देनें की मांग पर जोर दिया इस पर लगभग सभी राज्यों से यह प्रस्ताव रखा गया . पूरे हिंदुस्तान के लोग इस प्रस्ताव के पक्ष में रहे . अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद के 18 वें सम्मलेन में प्रस्तुत मांगें इस प्रकार हैं – पंचायतों का आर्थिक ससशक्तिकरण,पंचायती राज व्यवस्था का सशक्तिकरण एवं सुदृढ़ीकरण मिड टर्म सर्वे,न्याय पंचायत का गठन , पंचायतों में डिजिटल क्रांति की दरकार, हर पंचायत में डेडीकेटेड स्टाफ की नियुक्ति, सोशल ऑडिट को मजबूत करना, विलेज मास्टर प्लान , विधायक निधि और सांसद निधि के तर्ज पर सरपंच निधि का हो इन्तेजाम, पंचायती राज व्यवस्था में चुने हुए प्रतिनिधियों को वेतन एवं पेंशन , ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट, माइक्रो फाइनेंसिग के माध्यम से पंचायतों विकास के लिए विशेष फण्ड आदि पर एक रूपता दिखी. ग्राम स्वराज से डिजिटल स्वराज तक! गडग में अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद का 18वां राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न—14 सूत्रीय मांगें पीएम मोदी के समक्ष होंगी पेश. #PanchayatRaj #DigitalSwaraj #SmartVillage #prabhatkhabar pic.twitter.com/UM2rknsNII — Naya Vichar (@prabhatkhabar) December 14, 2025 कार्यक्रम में शामिल हुए कई बड़े लोग इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश से बीजेपी के नगर पालिका के चेयर मैंन प्रतिनधि राणा दिनेश सिंह की टीम के लोग, पूर्वांचल से डॉ अलका राय की टीम, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ठाकुर गवेन्द्र सिंह की टीम, बिहार से गोवा से फर्नांडिस की टीम, विहार से परिमल राय की टीम, उत्तराखंड से अनिल बिष्ट, मध्य प्रदेश से राजेन्द्र सिंह तोमर, झारखण्ड से अजय सिंह सुन्दरी तिर्की की टीम, राजस्थान से मोहन लाल शर्मा, आंध्रा से चिदम्बर रेड्डी, तेलंगाना से जलील और विजय वर्मा, केरल से पी विजयन, त्रिपुरा से ब्राजीत सिन्हा, पश्चिम बंगाल से डी पी राय, आसाम से जे पी सिंह, मणिपुर से बी एन सिंह आदि अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे . इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल हिंदुस्तानीय पंचायत परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष बी वाई घोरपडे की छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष- लीलू राम केवट, हिमांचल प्रदेश से बलदेव सिंह और कुल राकेश पंत, राष्ट्रीय सचिव वीरेंद्र चौधरी, राजवीर सिंह राठी,हरियाणा से प्रदेश अध्यक्ष उमेश शर्मा की टीम, जम्मू से मिन्हास की टीम, तमिल नाडू से साउथ इन्डियन पंचायत परिषद के अध्यक्ष पूर्व विधायक के ए मनोहरन, गण मान्य लोगों में कर्नाटक के कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच. के पाटिल, पूर्व विधायक और कर्नाटक राज्य के decentralised प्लानिंग एंड डेवलपमेंट कमिटी के उपाध्यक्ष-डी आर पाटिल, एस वी. संकनूर (एम् एल सी), पूर्व सांसद और कर्नाटक राज्य के 5 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री नारायण स्वामी, पूर्व निर्देशक ग्रामीण व पंचायती राज के निदेशक श्री केम्पे गौड़ा, सुरेश नाडा गौड़ा- महात्मा गाँधी रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायत राज यूनिवर्सिटी के कुलपति , कर्नाटक राज्य पंचायत परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष वेंकट राव घोरपड़े आदि उपस्थित रहे . 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Parenting Tips: इन टिप्स को आजमाकर अच्छे नंबरों से पास होगा आपका बच्चा

Parenting Tips: बहुत सारे शिशु ऐसे हैं जो पढ़ाई तो बहुत करते हैं लेकिन परीक्षा में उनके नंबर अच्छे नहीं आते हैं. इसके बाद माता-पिता की टेंशन बढ़ जाती है और वे शिशु को डांटना शुरू करते हैं. माता-पिता को यह समझ में नहीं आता कि आखिर नंबर कम क्यों आ रहा है. इतना ही नहीं नंबर कम आने से शिशु का मनोबल भी टूट जाता है. आपके शिशु के साथ भी अगर ऐसा है तो फिर पढ़ाई के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ाना जरूरी है. आइए बताते हैं शिशु को पढ़ाई में तेज बनाने कि टिप्स. खुद बनाएं नोट्स शिशु को बताएं कि क्लास में शिक्षक जो कुछ भी लिखवाते हैं या फिर जो महत्वपूर्ण पॉइंट्स पाठ पढ़ाते समय बताते हैं, उन्हें तुरंत नोट करें. बाद में किताब से पढ़ने से बेहतर है कि आपके अपने हैंडराइटेन नोट्स रहें. पढ़ाई का टाइम-टेबल बनाएं आप अगर चाहते हैं कि आपका बच्चा भी पढ़ाई में तेज बने और क्लास में अच्छे नंबर लाए तो उसकी पढ़ाई के लिए टाइम टेबल बनाना बहुत जरूरी है. इसकी वजह है कि बिना रूटीन के पढ़ाई बिखरी रहती है. डाउट्स को पेंडिंग मत छोड़ें पढ़ते वक्त अगर शिशु का कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं हुआ तो आगे पूरा चैप्टर मुश्किल लगने लगता है. शिक्षक से दोस्त से या फिर यूट्यूब से ही सही उसी वक्त बच्चा अपना डाउट क्लियर करें. हर रात को सोने से पहले उस दिन की पढ़ी चीजों को दोहराएं. हर विषय को रोजाना रिवाइज करें कई बच्चों को पेपर से एक दिन पहले रटते हुए देखा होगा. पढ़े हुए पाठ 1 दिन बाद, 1 हफ्ते बाद और 1 महीने बाद रिवीजन करने से पढ़ी हुई चीजें दिमाग में हमेशा के लिए याद रहती है. इसे भी पढ़ें: Parenting Tips: बच्चों की जिद से अब न हों परेशान, इन टिप्स की मदद से चुटकियों में मनवाएं अपनी बात The post Parenting Tips: इन टिप्स को आजमाकर अच्छे नंबरों से पास होगा आपका बच्चा appeared first on Naya Vichar.

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Hero Vida बच्चों के लिए लेकर आयी इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक Dirt.E K3, 2 घंटे चार्ज में 3 घंटे मस्ती

Hero Vida Dirt.E K3: हिंदुस्तान में बच्चों के लिए पहली बार ऐसी इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक लॉन्च हुई है, जो न सिर्फ मजेदार है बल्कि सुरक्षित भी है. Hero MotoCorp की इलेक्ट्रिक ब्रांड Vida ने पेश किया है Dirt.E K3, जो 4 से 10 साल के बच्चों के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है. कीमत और लॉन्च ऑफर Vida Dirt.E K3 की शुरुआती कीमत रखी गई है ₹69,990 (एक्स-शोरूम). पहले 300 यूनिट्स इसी कीमत पर उपलब्ध होंगे, जिससे यह बच्चों के लिए एक प्रीमियम लेकिन किफायती विकल्प बनता है. दिसंबर 12 से इसकी बिक्री शुरू हो चुकी है. बढ़ेंगे शिशु, बढ़ेगी बाइक इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत है एडजस्टेबल व्हीलबेस और सस्पेंशन. तीन लेवल- Small, Medium और High पर सेटिंग बदलकर इसे शिशु की उम्र और कद के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है. इससे माता-पिता को बार-बार नयी बाइक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बैटरी और परफॉर्मेंस इसमें 360 Wh की रिमूवेबल बैटरी और 500W मोटर दी गई है. टॉप स्पीड 25 kmph तक सीमित है, ताकि बच्चों के लिए सुरक्षित रहे. बैटरी 2 घंटे में 20% से 80% तक चार्ज हो जाती है और 2-3 घंटे तक लगातार चल सकती है. तीन मोड- Beginner (7-8 kmph), Amateur (16-17 kmph) और Pro (23-25 kmph) – बच्चों को धीरे-धीरे सीखने और आगे बढ़ने का मौका देते हैं. सेफ्टी और स्मार्ट कंट्रोल Magnetic kill switch, चेस्ट पैड, ब्रेक रोटर कवर और रियर ग्रैब्रेल जैसी सुरक्षा सुविधाएं दी गई हैं. मोबाइल ऐप से माता-पिता स्पीड लिमिट सेट कर सकते हैं, राइडिंग एक्टिविटी ट्रैक कर सकते हैं और पैरामीटर्स बदल सकते हैं. इस डिजाइन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और इसे Red Dot Award 2025 से सम्मानित किया गया है. TVS iQube vs Bajaj Chetak: सबसे भरोसेमंद ब्रांड्स के इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में बेहतर कौन? Honda SP 125 vs Hero Glamour: 125cc सेगमेंट की असली भिड़ंत में कौन पड़ा भारी? The post Hero Vida बच्चों के लिए लेकर आयी इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक Dirt.E K3, 2 घंटे चार्ज में 3 घंटे मस्ती appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SA 3rd T20: धर्मशाला में पिच से किसे मिलेगी मदद, कैसा है मौसम का मिजाज? जाने सबकुछ

IND vs SA 3rd T20: धर्मशाला का खूबसूरत मैदान एक बार फिर बड़े मुकाबले के लिए तैयार है. हिंदुस्तान और दक्षिण अफ्रीका (India vs South Africa) के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा मुकाबला यहां स्पोर्ट्सा जाएगा. सीरीज अभी 1-1 की बराबरी पर है और ऐसे में यह मैच दोनों टीमों के लिए बेहद अहम बन गया है. दिसंबर की ठंड, तेज हवा और नई गेंद की स्विंग बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों की परीक्षा लेगी. हालांकि ऊंचाई और तेज आउटफील्ड की वजह से रन भी तेजी से बन सकते हैं. मौसम और पिच मिलकर इस मुकाबले को रोमांचक बना सकते हैं. (IND vs SA 3rd T20 Pitch Report Weather Forecast). IND vs SA 3rd T20: धर्मशाला का मौसम क्या कहता है? मौसम की बात करें तो मैच के दौरान बारिश की कोई संभावना नहीं है. शाम सात बजे के बाद तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. दिन में अधिकतम तापमान 13 डिग्री तक जा सकता है. ठंडी हवा के कारण खिलाड़ियों को अतिरिक्त कपड़ों के साथ मैदान पर उतरना पड़ सकता है. तेज ठंड का असर खासतौर पर फील्डिंग करने वाली टीम पर पड़ सकता है. गेंदबाजों को ठंडे मौसम में स्विंग और सीम मूवमेंट मिलने की उम्मीद रहेगी. IND vs SA 3rd T20: पिच का मिजाज हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम की पिच को आमतौर पर बल्लेबाजी के लिए अच्छी माना जाता है. यहां गेंद अच्छे से बल्ले पर आती है और उछाल भरोसेमंद रहता है. पिछले कुछ सालों में यहां स्पोर्ट्से गए टी20 मुकाबलों में बड़े स्कोर देखने को मिले हैं. ऊंचाई की वजह से गेंद तेजी से बाउंड्री तक पहुंचती है. बल्लेबाज अगर शुरुआती ओवर संभाल लें तो बड़े शॉट स्पोर्ट्सने में उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होगी. IND vs SA 3rd T20: तेज गेंदबाजों के लिए सुनहरा मौका हालांकि यह मैदान सिर्फ बल्लेबाजों के लिए नहीं है. नई गेंद से तेज गेंदबाजों को खास मदद मिलती है. ठंडे मौसम में गेंद हवा में स्विंग कर सकती है और पिच से सीम मूवमेंट भी मिल सकता है. पहले छह ओवर में अगर गेंदबाज सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करें तो बल्लेबाजों से गलती निकलवा सकते हैं. गलत जगह गेंद डालने पर यही पिच गेंदबाजों को भारी नुकसान भी पहुंचा सकती है. IND vs SA 3rd T20: स्पिनरों की भूमिका, ओस का असर स्पिन गेंदबाजों के लिए हालात थोड़े चुनौती भरे हो सकते हैं. अगर शाम के समय ओस गिरती है तो गेंद पकड़ने में परेशानी हो सकती है. अब तक इस दौरे पर स्पोर्ट्से गए सफेद गेंद के मैचों में ओस अहम फैक्टर रही है. स्पिनरों को सूखी गेंद मिलने पर ही ज्यादा असर दिखाने का मौका मिलेगा. ऐसे में कप्तान स्पिनरों का इस्तेमाल सोच समझकर कर सकते हैं. IND vs SA 3rd T20: मैच की रणनीति धर्मशाला में इस मैच में टॉस भी अहम भूमिका निभा सकता है. अगर ओस रहती है तो लक्ष्य का पीछा करना आसान हो सकता है. फिर भी पहली पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को 200 से 210 रन का स्कोर बनाने का लक्ष्य रखना होगा. इससे गेंदबाजों को बचाव करने का मौका मिलेगा. हिंदुस्तान की कोशिश रहेगी कि वह इस मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहली टी20 जीत दर्ज करे. वहीं दक्षिण अफ्रीका दूसरी जीत के बाद सीरीज में बढ़त लेने के इरादे से उतरेगा. हिंदुस्तान बनाम दक्षिण अफ्रीका तीसरा टी20 कहां स्पोर्ट्सा जाएगा? यह मुकाबला हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम धर्मशाला में स्पोर्ट्सा जाएगा. धर्मशाला में मैच के दौरान मौसम कैसा रहेगा? मैच के समय मौसम ठंडा रहेगा. तापमान 10 से 13 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है और बारिश की संभावना नहीं है. धर्मशाला की पिच बल्लेबाजों के लिए कैसी मानी जाती है? यह पिच आमतौर पर बल्लेबाजी के लिए अच्छी मानी जाती है. गेंद अच्छे से बल्ले पर आती है और बड़े स्कोर बन सकते हैं. क्या तेज गेंदबाजों को इस मैच में मदद मिलेगी? हां, नई गेंद से तेज गेंदबाजों को स्विंग और सीम मूवमेंट मिल सकती है खासकर शुरुआती ओवरों में. IND vs SA 3rd T20 में औसत स्कोर कितना रह सकता है? इस मैदान पर पहली पारी में 200 से 210 रन का स्कोर सुरक्षित माना जा सकता है खासकर अगर ओस का असर दिखे. ये भी पढ़ें- IND vs SA: धर्मशाला टी20 में टीम इंडिया प्लेइंग XI में बदलाव करेगी! क्या शुभमन गिल होंगे बाहर? IND vs SA 3rd T20: फ्री में कब और कहां देख सकते हैं हिंदुस्तान बनाम दक्षिण अफ्रीका मैच, जानें सबकुछ The post IND vs SA 3rd T20: धर्मशाला में पिच से किसे मिलेगी मदद, कैसा है मौसम का मिजाज? जाने सबकुछ appeared first on Naya Vichar.

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इस मुस्लिम देश में गेहूं की बंपर पैदावार ने बना दिए 100 फीट चौड़े गड्ढे, 600 से ज्यादा सिंकहोल, किसानों पर छाया बड़ा संकट

Turkey Wheat Sinkholes: तुर्की का कोन्या इलाका देश की खेती की रीढ़ माना जाता है. यहां गेहूं की पैदावार पूरे देश का पेट भरती है. लेकिन अब इसी इलाके में जमीन के नीचे से खतरा पैदा हो गया है. खेत अचानक धंस रहे हैं, बड़ी-बड़ी दरारें पड़ रही हैं और देखते ही देखते जमीन में गहरे गड्ढे बन जा रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि जिस जमीन पर किसान सुबह हल चला रहे थे, उसी जमीन पर शाम तक 100 फीट चौड़ा गड्ढा नजर आ रहा है. तुर्की प्रशासन के नए आकलन के अनुसार, कोन्या क्लोज्ड बेसिन में अब तक 684 सिंकहोल की पहचान की जा चुकी है. ड्रोन से ली गई नई तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि ये गड्ढे बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. कई गड्ढे 30 मीटर से ज्यादा गहरे हैं और खेतों को पूरी तरह निगल चुके हैं. यह इलाका तुर्की के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इसलिए खतरा सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है. Turkey Wheat Sinkholes in Hindi: अचानक क्यों धंस रही है जमीन? वैज्ञानिकों और प्रशासनी अधिकारियों के अनुसार, जमीन धंसने की वजह कोई एक कारण नहीं है. इसके पीछे तीन बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं जमीन की बनावट, लंबे समय से पड़ रहा सूखा और जरूरत से ज्यादा भूजल निकालना. कोन्या बेसिन की जमीन के नीचे ऐसी चट्टानें हैं जो पानी में धीरे-धीरे घुल जाती हैं. इन चट्टानों के नीचे समय के साथ खाली जगह बन जाती है. पहले ये गड्ढे बहुत कम बनते थे, लेकिन अब हालात तेजी से बदल गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 2000 से पहले कोन्या इलाके में दस साल में गिनती के ही सिंकहोल सामने आते थे. लेकिन अब हर साल नए गड्ढे बन रहे हैं. जैसे-जैसे जमीन के नीचे पानी का स्तर गिरता है, वहां बनी खाली जगहों की छत कमजोर हो जाती है और अचानक जमीन बैठ जाती है. बाहर से देखने पर जमीन बिल्कुल ठीक लगती है, लेकिन अंदर ही अंदर सब खोखला हो चुका होता है. (Turkey Wheat Sinkholes Farmland Crisis in Hindi) जलवायु परिवर्तन और गहराता सूखे का है असर प्रशासनी आंकड़ों और सैटेलाइट से मिले डेटा के अनुसार, मध्य तुर्की पिछले कई सालों से गंभीर सूखे की चपेट में है. जलवायु परिवर्तन ने इस सूखे को और ज्यादा खतरनाक बना दिया है. 2021 तक आते-आते तुर्किये के कई जलाशयों और भूजल स्रोतों में कम से कम 15 साल का सबसे निचला जल स्तर दर्ज किया गया. बारिश कम हुई, तो जमीन के नीचे पानी भरना भी बंद हो गया. इसका सीधा असर जमीन की मजबूती पर पड़ा. विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या को और बढ़ाया है ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों ने, जैसे चुकंदर और मक्का. इन फसलों की सिंचाई के लिए दशकों से लगातार भूजल निकाला गया. नीचे आप वीडियो देख सकते हैं. 🚨 Massive Sinkholes Devour Turkey’s Most Important Wheat-Growing Region: Konya Plain There are 684 giant sinkholes, some hundreds of meters deep and about 30 meters in diameter, “wounding” the Konya Plain at an accelerating rate. The Konya Plain is one of Turkey’s most… pic.twitter.com/XTQTGoILfB — Shield of Truth (@ShieldOfTruth_) December 12, 2025 किसानों पर सबसे बड़ा संकट कई इलाकों में भूजल स्तर दर्जनों मीटर नीचे चला गया है. कुछ जगहों पर 1970 के दशक से अब तक 60 मीटर तक पानी नीचे चला गया. अधिकारियों के अनुसार, यहां हजारों कानूनी कुएं और बड़ी संख्या में अवैध कुएं लगातार जमीन से पानी खींच रहे हैं. तुर्की की आपदा प्रबंधन एजेंसी AFAD के मुताबिक, सबसे ज्यादा सिंकहोल करापिनार इलाके में मिले हैं. इसके अलावा करामान और अक्साराय जिलों में भी जमीन धंसने के मामले सामने आए हैं. कई गड्ढे इतने बड़े हैं कि उन्होंने पूरे खेत बर्बाद कर दिए, सड़कों को नुकसान पहुंचाया और कुछ जगहों पर इमारतों के पास तक खतरा पैदा कर दिया है. कई किसानों को अपने खेत छोड़ने पड़े हैं क्योंकि वहां खेती करना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है. जमीन बची तो खेती बचेगी कोन्या टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इन इलाकों की मैपिंग कर रहे हैं और साफ चेतावनी दे रहे हैं कि हालात अगर ऐसे ही रहे तो समस्या और बढ़ेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक भूजल निकालने पर सख्त नियंत्रण नहीं होगा और कम पानी वाली खेती को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, तब तक तुर्की के इस अनाज भंडार में जमीन धंसती ही जाएगी. कोन्या का संकट सिर्फ तुर्किये की समस्या नहीं है. यह उन सभी इलाकों के लिए चेतावनी है जहां खेती के नाम पर जमीन से जरूरत से ज्यादा पानी खींचा जा रहा है. अगर समय रहते पानी और जमीन का संतुलन नहीं संभाला गया, तो खेत ही नहीं, पूरी खेती खतरे में पड़ सकती है. ये भी पढ़ें: समुद्र के नीचे मिला 7 हजार साल पुराना ‘महाकिला’, यूरोप के इस देश में दिखी विशाल पत्थरों की दीवार, इतिहासकार भी देख रह गए दंग काश मैं फिर से पांच साल का होता… व्लॉगर ने दिखाया शिनचैन का स्कूल, देखकर 90s किड्स की आंखें भर जाएंगी The post इस मुस्लिम देश में गेहूं की बंपर पैदावार ने बना दिए 100 फीट चौड़े गड्ढे, 600 से ज्यादा सिंकहोल, किसानों पर छाया बड़ा संकट appeared first on Naya Vichar.

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Til Gud Revdi Recipe: सर्दियों में घर पर बनाएं तिल और गुड़ की कुरकुरी रेवड़ी, सेहत और स्वाद से भरपूर

Til Gud Revdi Recipe: सर्दियों का मौसम आते ही कुछ ऐसा खाने का मन करता है, जो शरीर को अंदर से गर्म रखे और स्वाद में भी लाजवाब हो. ऐसे में तिल और गुड़ से बनी रेवड़ी न सिर्फ ठंड में एनर्जी देती है, बल्कि बचपन की मीठी यादों से भी जोड़ती है. बाजार की रेवड़ी में अक्सर शुद्धता की कमी होती है, ऐसे में घर पर बनी तिल-गुड़ रेवड़ी ज्यादा सेफ और हेल्दी ऑप्शन है. कुरकुरी और देसी मिठास के साथ यह रेसिपी हर उम्र के लोगों को पसंद आती है. अगर आप भी इस सर्दी कुछ खास और आसान बनाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर ट्राय करें. Til Gud Revdi Recipe तिल और गुड़ की रेवड़ी बनाने के लिए किन किन चीजों की जरूरत होती है ? तिल – 200 ग्रामगुड़ – 250 ग्रामघी – 1 बड़ा चम्मचबेकिंग सोडा – 1 चुटकी तिल और गुड़ की रेवड़ी कैसे बनाएं? 1. स्वादिष्ट रेवड़ी बनाने के लिए सबसे पहले तिल और कुटा हुआ गुड़ तैयार करें. इसके लिए एक कड़ाही में तिल को धीमी आंच पर हल्का सा सूखा भून लें और फिर गैस बंद करें और तिल को प्लेट में निकालकर पूरी तरह ठंडा होने दें. 2. अब उसी कड़ाही में घी डालकर गरम करें. जब घी गरम हो जाए तो धीमी आंच पर कुटा हुआ गुड़ और थोड़ा पानी डालें और लगातार चलाते हुए गुड़ को पिघलाएं. गुड़ पकने की जांच के लिए थोड़ा सा गुड़ का शीरा पानी में डालें, अगर वह टूट जाए तो शीरा तैयार है, नहीं तो थोड़ी देर और पकाएं. 3. अब तैयार गुड़ के शीरे में बेकिंग सोडा डालकर अच्छी तरह मिलाएं और गैस बंद कर दें, फिर इसमें भुना हुआ तिल डालें और थोड़ा तिल अलग रख लें. 4. अब इस गर्म मिश्रण को घी लगी प्लास्टिक शीट पर डालें और शीट की मदद से अच्छी तरह मसलें, फिर ऊपर से बचा हुआ तिल डालकर दोबारा मिलाएं. 5. अब मिश्रण से छोटे-छोटे टुकड़े लेकर रेवड़ी का आकार दें, सभी रेवड़ी तैयार करके उन्हें सेट होने दें और स्वादिष्ट रेवड़ी का आनंद लें. ये भी पढ़ें: Sukhdi Recipe: सिर्फ 3 चीजों से बनाएं हेल्दी और टेस्टी गुजराती मिठाई, सर्दियों के लिए परफेक्ट ये भी पढ़ें: Khajur Pak Recipe: सर्दियों में बनने वाली पौष्टिक और एनर्जी से भरपूर स्वादिष्ट खजूर पाक की आसान रेसिपी ये भी पढ़ें: Jaggery Rice Recipe: ठंड के मौसम में ट्राय करें गुड़ वाले चावल, मीठा स्वाद और देसी फ्लेवर बनाए इसे सबसे खास The post Til Gud Revdi Recipe: सर्दियों में घर पर बनाएं तिल और गुड़ की कुरकुरी रेवड़ी, सेहत और स्वाद से भरपूर appeared first on Naya Vichar.

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Vegetable Tikki Recipe: कम मेहनत में बनाएं ये लजीज स्नैक्स, जानिए आसानी से तैयार करने का तरीका

Vegetable Tikki Recipe: आप भी अगर स्नैक्स की ऐसी रेसिपी ढूंढ रहे हैं जो कम तेल में और झटपट बन भी जाए तो ये आर्टिकल आपके काम की है. घर पर आप स्वादिष्ट वेजिटेबल टिक्की को बना सकते हैं. इस डिश को बनाना बहुत आसान है. अगर आपने घर पर छोटी सी पार्टी रखी है या बच्चों के लिए शाम में कुछ स्नैक्स तैयार करने की सोच रहे हैं तो वेजिटेबल टिक्की को जरूर बनाएं.  वेजिटेबल टिक्की बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए? आलू- 2 उबले हुए गाजर- 1 पत्तागोभी- आधा कप बारीक कटा हुआ शिमला मिर्च- आधा कप बारीक कटा हुआ मटर- आधा कप उबला हुआ कॉर्न- 3 बड़े चम्मच उबला हुआ हरी मिर्च- 1-2 बारीक कटी हुई अदरक- 1 चम्मच कद्दूकस किया हुआ लाल मिर्च पाउडर- आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर- आधा छोटा चम्मच धनिया पत्ती- 2 चम्मच बारीक कटी हुई नमक- स्वादानुसार गरम मसाला- आधा छोटा चम्मच चाट मसाला- आधा छोटा चम्मच बेसन- 2 बड़े चम्मच तेल- जरूरत के अनुसार वेजिटेबल टिक्की को कैसे तैयार करें? वेजिटेबल टिक्की बनाने के लिए सबसे पहले आप आलू को उबालकर मैश कर लें. अब आप कॉर्न और मटर को भी उबाल लें और दरदरा पीस लें. एक बर्तन में आलू, कॉर्न और मटर को डाल दें.  अब आप कद्दूकस किया हुआ गाजर और अदरक डाल दें. इसमें आप प्याज, शिमला मिर्च, हरी मिर्च और पत्तागोभी को बारीक काटकर डाल दें. इसके बाद आप धनिया पत्ती, नमक, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला, हल्दी और गरम मसाला डाल दें.  बेसन डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिला लें. अब मिश्रण से छोटा हिस्सा लें और गोल करके चिपटा कर लें. इसी तरीके से आप बाकी के मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से लेकर टिक्की का शेप तैयार कर लें. तवा को गर्म करें और इसमें एक चम्मच तेल डाल दें. इसके ऊपर आप टिक्की को डालें और पका लें. टिक्की जब अच्छे से पक जाए तब आप इसे तवे से हटा लें. वेजिटेबल टिक्की को आप चटनी या सॉस के साथ सर्व कर सकते हैं. इस तरीके से आप वेजिटेबल टिक्की बना सकते हैं. यह भी पढ़ें- Masala Moongfali: सफर और स्नैक टाइम के लिए बेस्ट, आसानी से बनाएं मसाला मूंगफली नमकीन यह भी पढ़ें- Besan Papdi Recipe: घर पर तैयार करें शानदार नमकीन, बनाएं कुरकुरी और मसालेदार बेसन पापड़ी  The post Vegetable Tikki Recipe: कम मेहनत में बनाएं ये लजीज स्नैक्स, जानिए आसानी से तैयार करने का तरीका appeared first on Naya Vichar.

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Lasooni Methi Naan Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा लाजवाब लसूनी मेथी नान

Lasooni Methi Naan Recipe: अगर आप आज कुछ खास, खुशबूदार और स्वाद से भरपूर ट्राय करना चाहते हैं, तो लसूनी मेथी नान आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन है. ताज़ी मेथी की हरियाली, लहसुन की तीखी खुशबू और मुलायम नान का कॉम्बिनेशन इसे नॉर्थ इंडियन खाने की शान बनाता है. यह नान न सिर्फ़ ढाबा स्टाइल खाने का मजा देता है, बल्कि इसे घर पर बनाना भी काफी आसान है. खास मौकों, वीकेंड डिनर या मेहमानों के लिए यह रेसिपी सबका दिल जीत लेगी. Lasooni Methi Naan Recipe Ingredients: लसूनी मेथी नान बनाने के लिए सामग्री मैदा – 2 कप ताज़ी मेथी (बारीक कटी) – 1 कप लहसुन (बारीक कटा) – 1½ टेबलस्पून दही – ½ कप बेकिंग पाउडर – 1 टीस्पून बेकिंग सोडा – ¼ टीस्पून नमक – स्वादानुसार चीनी – 1 टीस्पून तेल – 2 टेबलस्पून गुनगुना पानी – आवश्यकतानुसार मक्खन – लगाने के लिए Lasooni Methi Naan Recipe: लसूनी मेथी नान बनाने की विधि सबसे पहले एक बड़े बाउल में मैदा, नमक, चीनी, बेकिंग पाउडर और बेकिंग सोडा छान लें. अब इसमें दही और तेल डालकर हल्का-हल्का मिलाएं. इसके बाद बारीक कटी मेथी और लहसुन डालें. गुनगुने पानी की मदद से नरम आटा गूंथ लें. आटे को ढककर 1 से 1½ घंटे के लिए रख दें ताकि वह अच्छे से सेट हो जाए. अब आटे की मध्यम आकार की लोइयां बनाएं और बेलन से अंडाकार नान बेल लें. तवे को अच्छी तरह गर्म करें और नान को तवे पर डालें. एक तरफ से बुलबुले आने लगें तो पलट दें और दूसरी तरफ भी सुनहरा होने तक सेकें. चाहें तो गैस की सीधी आंच पर हल्का सेंक सकते हैं. आख़िर में ऊपर से मक्खन लगाएं और गरमागरम लसूनी मेथी नान को पनीर बटर मसाला, दाल मखनी या किसी भी ग्रेवी के साथ परोसें. यह नान स्वाद और खुशबू में होटल को भी मात दे देगा. Also Read: Palak Bajra Puri Recipe: पालक पुरी को दे बाजरे का असली स्वाद – आसानी से बनाएं फुली-फुली पूरियां Also Read: Mooli Dahi Kebab Recipe: मूली और दही से बनाएं ये देसी कबाब रेसिपी – खाने वाले तारीफ करते नहीं थकेंगे Also Read: Tandoori Aloo Recipe: आलू से बनें इस स्टार्टर के सामने पनीर भी फेल है – पढें मलाईदार और स्मोकी फ्लेवर वाले तंदूरी आलू बनाने की रेसिपी The post Lasooni Methi Naan Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा लाजवाब लसूनी मेथी नान appeared first on Naya Vichar.

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8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग से पहले रेलवे की बड़ी तैयारी, खर्च घटाकर मजबूत करेगा खजाना

8th Pay Commission: हिंदुस्तानीय रेलवे आने वाले आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों से पड़ने वाले अतिरिक्त वेतन बोझ को ध्यान में रखते हुए अभी से अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने में जुट गया है. रखरखाव, खरीद और ऊर्जा क्षेत्र में लक्षित लागत-कटौती उपायों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि परिचालन दक्षता बढ़ाई जा सके और भविष्य के खर्चों का दबाव कम हो. जनवरी 2024 में गठित आठवें वेतन आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, जबकि सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) का कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त होगा. सातवें वेतन आयोग के लागू होने से रेलवे कर्मचारियों के वेतन में 14 से 26 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी और इससे वेतन व पेंशन पर लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा था. इस बार अनुमान है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों से यह बोझ करीब 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आंतरिक संसाधनों, संभावित बचत और माल ढुलाई से बढ़ने वाली आय के जरिए इस अतिरिक्त खर्च की भरपाई की योजना पहले ही बना ली गई है. परिचालन अनुपात और आय बढ़ाने की रणनीति वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 98.90 प्रतिशत रहा, जिससे शुद्ध राजस्व 1,341 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वहीं 2025-26 के लिए ऑपरेटिंग रेशियो 98.43 प्रतिशत तक लाने और शुद्ध आय 3,041 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. नेटवर्क विद्युतीकरण पूरा होने के बाद हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये की ऊर्जा बचत की उम्मीद है. इसके अलावा, 2027-28 से IRFC को होने वाले भुगतान में कमी आएगी, क्योंकि हालिया पूंजीगत खर्च बजटीय सहायता से किया गया है. भविष्य की आय और कर्मचारियों पर खर्च रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जब 2027-28 में बढ़े हुए वेतन का भुगतान शुरू होगा, तब माल भाड़े से सालाना करीब 15 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है. सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम वेतन 7,000 से बढ़कर 17,990 रुपये हो गया था. अब ट्रेड यूनियन 2.86 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं, जिससे वेतन बिल में 22 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है. इसके बावजूद रेलवे ने भरोसा जताया है कि उसकी वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत रहेगी कि इस झटके को आसानी से संभाला जा सकेगा. 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन के लिए 1.28 लाख करोड़ और पेंशन फंड के लिए 68,602 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. Also Read : SHANTI Bill 2025: अब प्राइवेट कंपनियां भी करेंगी न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन, मोदी प्रशासन ने दी हरी झंडी The post 8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग से पहले रेलवे की बड़ी तैयारी, खर्च घटाकर मजबूत करेगा खजाना appeared first on Naya Vichar.

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