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February 4, 2026

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DU: डीयू में एप्लीकेशन ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ साइंसेज कोर्स हुआ शुरू

DU: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. कृषि, स्वास्थ्य से लेकर रक्षा क्षेत्र में एआई तकनीक के कारण व्यापक बदलाव आ रहा है. स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय(डीयू) द्वारा ‘एप्लीकेशन ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ साइंसेज’ नाम से ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स चलाने का फैसला लिया है. इस कोर्स का शुभारंभ डीयू कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने बुधवार को किया. कुलपति ने कोर्स का शुभारंभ करते हुए कहा कि भविष्य में हमें टेक्नोलोजी ओरिएंटेड़ डॉक्टरों की जरूरत है, इसलिए ऐसे कोर्स की बहुत आवश्यकता है. ऑनलाइन के साथ-साथ ऐसे वीकेंड ऑफ लाइन कोर्स भी शुरू करने की तैयारी है.  कुलपति ने कहा कि जब कंप्यूटर का दौर आया तो ऐसी आशंका थी कि लोगों के रोजगार के अवसर कम होंगे. वैसे ही एआई को लेकर भी इसी तरह की आशंका व्यक्त की जा रही है. लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि एआई के कारण रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे. इस मौके पर डीन ऑफ कॉलेज प्रोफेसर बलराम पाणी, डीन अकादमिक प्रोफेसर के रत्नावली, डीयू की रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के चेयरपर्सन प्रोफेसर दिनाबंधु साहू, कोर्स डायरेक्टर प्रोफेसर दमन सलूजा और अन्य अधिकारी मौजूद रहे.  क्या है कोर्स की खासियत डीयू की रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के तहत कोर्स का संचालन करेगा. इस कोर्स में आठ मॉड्यूल होगा और यह पूरी तरह 100 फीसदी ऑनलाइन मोड में होगा. कोर्स की अवधि 15 हफ्ते होगी. कोर्स में प्रति बैच 50 सीट आवंटित होगी. कोर्स के लिए सीएस, आईटी, इंजीनियरिंग, गणित, सांख्यिकी, लाइफ साइंसेज, हेल्थकेयर (एमबीबीएस, नर्सिंग, फार्मेसी) में बैचलर होना आवश्यक होगा. इस कोर्स का मकसद हेल्थ साइंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग को आगे बढ़ाना है. ताकि मेडिकल एआई सिस्टम को डिजाइन करने, मूल्यांकन करने और व्याख्या करने में सक्षम बनाया जा सके. इसके साथ ही इंटरडिसिप्लिनरी समस्या-समाधान, नैतिक जागरूकता और अनुवाद संबंधी प्रभाव को बढ़ाना देना है. आने वाले समय में डीयू में एआई को लेकर ग्रेजुएट स्तर पर भी कोर्स संचालित करने की योजना है ताकि देश में एआई का बड़ा टैलेंट पूल तैयार किया जा सके.  The post DU: डीयू में एप्लीकेशन ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ साइंसेज कोर्स हुआ शुरू appeared first on Naya Vichar.

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Tribal Education: एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल के संचालन में झारखंड, ओडिशा जैसे राज्य पीछे

Tribal Education: आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के लिए केंद्र प्रशासन की ओर से एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल योजना शुरू की गयी है. मौजूदा समय में देश में 723 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों को मंजूरी मिल चुकी है, जिसमें 499 आवासीय स्कूल काम कर रहे हैं. इस स्कूल में 12वीं कक्षा तक की कक्षाओं वाले 480 छात्रों के पढ़ाने की सुविधा है और इसके लिए 31 शिक्षण पद और 21 गैर-शिक्षण पद स्वीकृत किए गए है. प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक इन स्कूलों में 6605 नियमित शिक्षक और 1832 गैर-शिक्षण कर्मचारी काम करे रहे थे. प्रत्यक्ष भर्ती के अलावा राष्ट्रीय आदिवासी छात्र समिति(एनईएसटीएस) ने राज्य प्रशासनों को प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारियों को नियुक्त करने की सलाह भी दी है.  इसके अलावा राज्य एकलव्य स्कूलों में रिक्त पदों के लिए अतिथि शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग, स्थानीय नियुक्ति के आधार पर नियुक्त कर रही हैं, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां बाधित नहीं हो. राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय आदिवासी मामलों के राज्य मंत्री ने यह जानकारी दी. अगर आवंटन की बात करें तो इस योजना के लिए वर्ष 2020-21 में 1200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जिसमें से 936.28 करोड़ रुपये खर्च हुआ. वर्ष 2021-22 में 1153 करोड़ आवंटित राशि में से 1322.78 करोड़ रुपये, वर्ष 2022-23 में 1999.90 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, जबकि खर्च 2014.95 करोड़ रुपये, वर्ष 2023-24 में 2471.81 करोड़ रुपये में से 2446.24 करोड़ रुपये और वर्ष 2024-25 में 4748.92 करोड़ रुपये में से 4713.91 करोड़ रुपये खर्च हुआ. आंकड़ों से पता चलता है कि समय के साथ आवंटन बढ़ने के साथ ही खर्च होने वाली राशि में भी इजाफा हुआ है.  किस राज्य की क्या है स्थिति अगर राज्यों की बात करें तो आंध्र प्रदेश के लिए 28 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल 28 स्कूल खोलने को मंजूरी मिली और सभी स्कूल काम कर रहे हैं. इसी तरह अरुणाचल प्रदेश में 10 में से पांच स्कूल, असम में 17 में से 6, बिहार में 3 में से 2, छत्तीसगढ़ में 75 में से 75, गुजरात में 47 में से 44, झारखंड में 91 में से 51 एकलव्य मॉडल स्कूल संचालित हो रहे हैं. पश्चिम बंगाल में 9 में से 8, मध्य प्रदेश में 71 में से 63, ओडिशा में 111 में से 47, राजस्थान में 31 में से 31, महाराष्ट्र में 39 में से 37 एकलव्य मॉडल स्कूल संचालित हो रहे हैं.इस योजना के मकसद आदिवासी बहुल क्षेत्र के कक्षा 6 से 12 वीं के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराना है.  नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट द्वारा इन स्कूलों का संचालन किया जाता है. यह संस्था केंद्रीय जनजाति मंत्रालय के तहत काम करती है. इस योजना का मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और शिक्षा के जरिये जनजातीय जीवन में बदलाव लाने के लिए सतत और प्रभावी शिक्षण वातावरण मुहैया कराना है. The post Tribal Education: एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल के संचालन में झारखंड, ओडिशा जैसे राज्य पीछे appeared first on Naya Vichar.

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29 साल पहले काला गाउन पहने कोर्ट पहुंची थी ममता बनर्जी, इस मामले में की थी पैरवी

मुख्य बातें 1997 में ममता ने गाउन पहन कर की थी बहस क्या था मामला Mamata Banerjee: कोलकाता: बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी 29 साल बाद किसी अदालत में बहस करती दिखी. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते वक्त बेशक वो वकील के यूनिफार्म में नहीं थी, लेकिन 29 साल पहले हुगली जज की अदालत में वो गाउन पहने कोर्ट में दिखी थी. कानून की डिग्री लेने के बाद ममता बनर्जी कई बार अदालत में बहस कर चुकी हैं. बुधवार को भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि याचिकाकर्ता के तौर पर बहस करती नजर आईं. उन्होंने सफेद साड़ी और काली चादर पहनी हुई थी, लेकिन उन्हें वकील का काला गाउन पहने हुए भी दलीलें देते देखा जा चुका है. ममता बनर्जी के पास इतिहास में स्नातकोत्तर डिग्री के अलावा कानून की डिग्री भी है। उन्होंने योगेश चंद्र विधि महाविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की है. 1997 में ममता ने गाउन पहन कर की थी बहस वर्ष 1997 की बात है. हुगली के लोगों ने ममता बनर्जी को एक वकील के रूप में अदालत में बहस करते देखा था. ममता बनर्जी ने चुंचुरा के जिला न्यायाधीश न्यायालय में पैरवी की थी. तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा नेताओं को भी वह घटना याद है. लगभग तीन दशकों बाद आज ममता बनर्जी एक बार फिर अदालत में बहस करती नजर आईं. वह अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं. ममता ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. ममता ने आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस मामले में बहस की. 1997 में हुई उस अदालती सुनवाई के 14 साल बाद ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ममता बनर्जी ने कई मौकों पर कहा है कि अगर वह चाहें तो अदालत में वकालत कर सकती हैं, क्योंकि वह वास्तव में एक वकील हैं. क्या था मामला 6 जुलाई की तरीख थी और रथ यात्रा का दिन था. गुप्तपारा में रथ यात्रा के दौरान पुलिस और स्थानीय व्यापारियों के बीच झड़प हो गयी. पुलिस की ओर से फायरिंग की गयी. गुप्तीपारा के लालपुकुर इलाके के रहने वाले हलधर मंडल और बुरो बाग को गोली मार दी गई. हलधर मंडल की मृत्यु हो गयी. अगले दिन ममता बनर्जी गुप्तपारा पहुंची और मृतक के परिवार से मुलाकात की. परिजनों का आरोप था कि पुलिस मृतक हलधर मंडल के शव का अंतिम संस्कार करना चाहती है. यह जानकारी मिलते ही ममता सीधे चुंचुरा कोर्ट पहुंचीं. उस समय बुद्धदेव भट्टाचार्य पुलिस मंत्री और गृह मंत्री थे. ममता बनर्जी मृतक के परिवार के साथ खड़ी रहीं और चुंचुरा जिला न्यायाधीश न्यायालय में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दलीलें दीं. Also Read: चुनाव आयोग ने खारिज की बंगाल प्रशासन की अपील, केंद्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में पश्चिम बंगाल के 25 वरिष्ठ अधिकारियों की लिस्ट जारी The post 29 साल पहले काला गाउन पहने कोर्ट पहुंची थी ममता बनर्जी, इस मामले में की थी पैरवी appeared first on Naya Vichar.

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पटना हॉस्टल कांड: ‘FIR दर्ज न हो, इसकी कोशिश हुई…’, NEET छात्रा मौत केस में SSP का बड़ा खुलासा

Patna NEET Student Death Case: NEET छात्रा की मौत के मामले पर बुधवार को पटना पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों ने अब तक की जांच की जानकारी दी. करीब 15 मिनट तक चली इस PC में पुलिस ने अपना पक्ष रखा, लेकिन सवालों से बचते नजर आई. जैसे ही पत्रकारों ने सवाल पूछने शुरू किए, SSP कार्तिकेय शर्मा ने “नो कमेंट्स” कहा और सभी अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए. बाहर भी सवाल पूछे जाने पर अधिकारी तेजी से अपनी-अपनी गाड़ियों में बैठकर निकल गए. 6 जनवरी को डॉक्टर सहजानंद के अस्पताल में भर्ती कराया गया SSP कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि पीड़िता 6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली थी. हॉस्टल स्टाफ ने दरवाजा खोला, जिसके बाद छात्रा को डॉक्टर सहजानंद के अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां से बेहतर इलाज के लिए परिजन उसे प्रभात मेमोरियल अस्पताल लेकर गए. SSP बोले- केस दर्ज न हो, इसकी कोशिश की गई थी पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि शुरुआत में इस मामले में केस दर्ज न हो, इसकी कोशिश की गई थी. हालांकि प्रभात मेमोरियल अस्पताल ने 6 जनवरी को ही थाने को सूचना दे दी थी. इसके बाद एक स्त्री सब-इंस्पेक्टर अस्पताल पहुंचीं और परिजनों से मुलाकात की. उस समय यह फैसला लिया गया कि छात्रा होश में आने के बाद ही बयान लिया जाएगा. SSP ने बताया कि स्त्री सब-इंस्पेक्टर ने परिजनों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया था, ताकि किसी भी जानकारी के लिए संपर्क किया जा सके. इसके बाद 9 जनवरी को स्त्री सब-इंस्पेक्टर को फोन किया गया. वे फिर अस्पताल पहुंचीं और परिजनों का फर्द बयान दर्ज किया गया. SSP ने माना कि चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी से लापरवाही हुई है और इस पर कार्रवाई की जा रही है. ‘छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं’ पुलिस के मुताबिक, घटना की जानकारी सबसे पहले पीड़िता के परिवार को दी गई थी. SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. परिवार ने पुलिस को छात्रा के पांच कपड़े सौंपे थे. इनमें से एक कपड़े से स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई है. Also Read: पटना NEET छात्रा मौत केस: पत्रकारों के सवाल पर SSP बोले- नो कमेंट्स, 15 मिनट में PC खत्म, IG ने क्या कहा? The post पटना हॉस्टल कांड: ‘FIR दर्ज न हो, इसकी कोशिश हुई…’, NEET छात्रा मौत केस में SSP का बड़ा खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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धनबाद का ‘दंगल’: निकाय चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन समर्थकों का उमड़ा जनसैलाब, 15 दिग्गजों ने भरे पर्चे

Dhanbad Municipal Election, धनबाद: धनबाद उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन के निर्देश पर नगर निकाय चुनाव के नामांकन को लेकर समाहरणालय के मेन गेट व मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी. दोनों स्थानों पर दंडाधिकारी के साथ पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहे. बुधवार को नामांकन के अंतिम दिन प्रत्याशियों में खासा उत्साह देखने को मिला. सुबह 10 बजे से ही प्रत्याशी समाहरणालय पहुंचने लग थे. सभी उम्मीदवारों को कतारबद्ध तरीके से समाहरणालय में प्रवेश कराया गया. मुख्य प्रवेश द्वार से केवल महापौर और वार्ड पार्षद प्रत्याशी के साथ चार व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गयी थी. अंतिम दिन 15 प्रत्याशियों ने दाखिल किया नामांकन अंतिम दिन नगर निकाय चुनाव में महापौर पद के लिए दो स्त्री प्रत्याशियों सहित कुल 15 प्रत्याशियों ने निर्वाची पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता विनोद कुमार, सहायक निर्वाची पदाधिकारी बाल किशोर महतो और सहायक निर्वाची पदाधिकारी विशाल कुमार पांडेय के समक्ष नामांकन दाखिल किया. सभी अपने समर्थकों के साथ नामांकन करने पहुंचे थे. Also Read: मासूमों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट सख्त, दोषियों पर FIR दर्ज करने का आदेश समाहरणालय में प्रवेश से पहले प्रत्याशियों की जांच की गयी समाहरणालय के ग्राउंड फ्लोर पर प्रत्याशियों के लिए नामांकन पत्र भरने के लिए डेस्क की व्यवस्था की गई थी. इससे पहले सुरक्षा कर्मियों ने समाहरणालय में प्रवेश से पहले प्रत्याशियों की जांच की. इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई. नामांकन दाखिल करने के बाद कई प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ सेल्फी लेते नजर आए, वहीं समाहरणालय के मुख्य गेट के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे. Also Read: रांची में नगर निगम चुनाव की बिछी बिसात, रोशनी खलखो ने शक्ति प्रदर्शन के साथ भरा पर्चा! The post धनबाद का ‘दंगल’: निकाय चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन समर्थकों का उमड़ा जनसैलाब, 15 दिग्गजों ने भरे पर्चे appeared first on Naya Vichar.

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सार्वजनिक पोखर का जी राम जी योजना से जीर्णोद्धार करने की मांग

सरायगढ़. प्रखंड मुख्यालय स्थित बाबा बनेश्वर शिव मंदिर भपटियाही परिसर में बने सार्वजनिक पोखर जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण स्थानीय श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. शिव मंदिर परिसर में कोई न कोई शुभ कार्य और भजन कीर्तन व पूजा पाठ होता है. खासकर शिव रात्रि के अवसर पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने में कठिनाई होती है. जल भरने के लिए कोशी नदी सहित अन्य तालाब- पोखर या कुआं से जल भरकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं. जबकि काफी संख्या में प्रतिदिन श्रद्धालु पूजा पाठ करने पहुंचते हैं. लेकिन इस पोखर का जीर्णोद्धार नहीं होने से जल भरने में काफी परेशानी होती है. जीर्णोद्धार, रख रखाव नहीं होने से बड़े बड़े घास उग आए हैं. शिव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मोहन यादव सहित स्थानीय लोगों ने प्रखंड प्रशासन से मनरेगा योजना से पोखर जीर्णोद्धार करवाने की मांग की है. ताकि श्रद्धालुओं को जल भरने में परेशानी नहीं होगी. The post सार्वजनिक पोखर का जी राम जी योजना से जीर्णोद्धार करने की मांग appeared first on Naya Vichar.

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सीओ के अतिरिक्त प्रभार में बीडीओ, डोगल वेरीफाई के बाद होगा काम

– दो फरवरी से सीओ व आरओ हड़ताल पर, राजस्व संबंधित कार्य बाधित -बीडीओ को प्रभार दिये जाने के बाद डोंगल बनाने में होगी देरी -लोगों को आय आवासीय बनाने एवं राजस्व संबंधित कार्य संपन्न कराने के लिए करना पड़ सकता है इंतजार लखीसराय. अंचलाधिकारी व राजस्व पदाधिकारी के अनिश्चित हड़ताल पर जाने के बाद अब राजस्व कर्मचारी भी अधिकारियों की मांगों के समर्थन में अनिश्चित हड़ताल पर जा सकते है. बिहार राज्य राजस्व सेवा संघ के आह्वान पर सभी सीओ एवं आरओ हड़ताल पर दो फरवरी को चले गये. वहीं राजस्व कर्मचारी गोप गुट से संबद्ध है जिससे कि राजस्व कर्मचारी को गुट के आह्वान पर ही हड़ताल पर जा सकते हैं. इधर, सीओ एवं आरओ के हड़ताल पर जाने के बाद तत्काल प्रभाव से एडीएम नीरज कुमार ने सभी बीडीओ को सीओ एवं आरओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है, लेकिन जब तक बीडीओ का डोंगल वेरीफाई पटना से नहीं हो जाता तब तक एक आवासीय, आय या अन्य कोई प्रमाण पत्र भी नहीं बनना है. जबकि राजस्व संबंधित कई कार्य अभी भी सदर अंचल समेत अन्य अंचल में लंबित है. जिसे लेकर लोग अंचल का चक्कर काट रहे है. एक तरफ किसान सम्मान निधि योजना के तहत जिन किसानों के पूर्वज के नाम से जमीन है उन्हें उनके हिस्से की जमीन किसान के नाम जमाबंदी करना है, लेकिन राजस्व अधिकारियों के हड़ताल पर जाने के बाद कई कार्य बाधित हो रहा है. राजस्व कर्मचारी के हड़ताल पर जाने के बाद प्रभार के अधिकारी भी राजस्व संबंधित कार्य करने में अक्षम साबित हो सकते हैं. बोले अधिकारी अपर समाहर्ता नीरज कुमार ने बताया कि सीओ का प्रभार सभी बीडीओ को दिया गया है. बीडीओ का डोंगल नहीं आने तक कार्य प्रभावित रह सकता है. उन्होंने कहा डोंगल पटना के अधिकारियों के द्वारा पास किया जायेगा. The post सीओ के अतिरिक्त प्रभार में बीडीओ, डोगल वेरीफाई के बाद होगा काम appeared first on Naya Vichar.

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वीवीआइटी में सर्वाइकल व स्तन कैंसर को लेकर किया जागरूक

विश्व कैंसर दिवस पूर्णिया. विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर जनमन पीपुल्स फ़ाउंडेशन ने मरंगा स्थित वीवीआइटी परिसर में छात्राओं के लिए सर्वाइकल कैंसर एवं स्तन कैंसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया. इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में आयी जीएमसीएच में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा झा ने सर्वाइकल और स्तन कैंसर के कारणों, शुरुआती लक्षणों, रोकथाम के उपायों तथा समय पर जांच और उपचार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी. कार्यक्रम के दौरान प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया. इसमें छात्राओं ने खुलकर अपने प्रश्न पूछे और अपनी शंकाओं का समाधान पाया. कार्यक्रम की शुरुआत में वीवीआइटी के चेयरमैन राजेश मिश्रा, पीआरओ विवेक राय तथा विविआएस के पीआरओ राहुल शांडिल्य ने डॉ. ऋचा झा का स्वागत किया और कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर जनमन पीपुल्स फ़ाउंडेशन के निदेशक शौर्य रॉय ने बताया कि हिंदुस्तान में स्त्रीओं में स्तन कैंसर सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है, जबकि सर्वाइकल कैंसर अभी भी बड़ी संख्या में स्त्रीओं को प्रभावित कर रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों की पहचान देर से होती है. शौर्य रॉय ने जानकारी दी कि गुरुवार को यह सत्र हाइब्रिड मोड में पूर्णिया ज़िले के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम के सफल आयोजन में नीतीश कुमार एवं अरबिंदम बोस ने समन्वय की भूमिका निभाई. फोटो- 4 पूर्णिया 5- कार्यक्रम में शामिल छात्राएं एवं अन्य The post वीवीआइटी में सर्वाइकल व स्तन कैंसर को लेकर किया जागरूक appeared first on Naya Vichar.

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एकल अभियान भगवान का है कार्य – भाग अध्यक्ष

– एकल अभियान का दस दिवसीय नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन सुपौल. एकल अभियान के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का सफलतापूर्वक समापन हुआ. प्रशिक्षण वर्ग में सुपौल, सहरसा व अररिया जिले से आए स्त्री एवं पुरुष आचार्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्राथमिक शिक्षा, आरोग्य शिक्षा, ग्राम विकास शिक्षा, जागरण शिक्षा एवं संस्कार शिक्षा से संबंधित विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई. साथ ही शारीरिक शिक्षा एवं हस्तशिल्प शिक्षा के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया गया. पंचमुखी शिक्षा पद्धति के अंतर्गत यह बताया गया कि किस प्रकार स्पोर्ट्स-स्पोर्ट्स में ग्रामीण बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जा सकता है. ताकि उनमें सीखने की रुचि और आत्मविश्वास का विकास हो सके. समापन सत्र को संबोधित करते हुए भाग अध्यक्ष डॉ प्रभु दयाल शाह ने कहा कि एकल अभियान भगवान का कार्य है. यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है. वहीं डॉ राजा सिंह ने कहा कि एकल अभियान को जन-जन का अभियान बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों को इससे जुड़ना चाहिए. इस अवसर पर प्रभाग गतिविधि प्रमुख मुंशी लाल यादव, भाग अभियान प्रमुख आकाश कुमार, भाग कार्यालय प्रमुख ललन कुमार, संच प्रशिक्षक प्रदीप कुमार, पूनम कुमारी सहित सभी आचार्य भाई-बहन उपस्थित रहे. कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ हुआ. The post एकल अभियान भगवान का है कार्य – भाग अध्यक्ष appeared first on Naya Vichar.

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अभाविप नगर इकाई ने कुलपति व कुलसचिव का फूंका पुतला

कहा – किसी प्रकार की विभाजनकारी या उग्र विचारधाराओं को बढ़ावा देने का प्रयास स्वीकार नहीं सहरसा. अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद नगर इकाई नगर मंत्री रोशन कामत के नेतृत्व में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव का पुतला फूंका गया. भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा में हिंदुस्तान प्रशासन की शिक्षा मंत्रालय के श्रेष्ठ स्कीम प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान पीएम उषा के तहत आवंटित राशि को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा जिहादी मानसिकता सोच को प्रचार-प्रसार में खर्च क्या जाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. अभाविप ऐसे जिहादी मानसिकता वाले वक्ता को कभी बिहार के पावन भूमि पर नहीं आने देगा. ज्ञान की पावन भूमि बिहार है. विश्वविद्यालय प्रशासन के लोग जिस कदर पीएम उषा के तहत आवंटित 44 लाख रुपये का बंदरबांट कर राष्ट्र विरोधी ताकतों के ऊपर खर्च करना चाहती है यह कभी अभाविप नहीं होने देगी. बांग्लादेश के वक्ताओं को बुलाना विवि प्रशासन के जिहादी मानसिकता को दर्शाता है : मोनू अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्य मोनू झा ने कहा कि एक तरफ जहां हिंदुओं का बांग्लादेश में खुलेआम कत्ल हो रहा है. वहीं बांग्लादेश के वक्ताओं को बुलाना विश्वविद्यालय प्रशासन के जिहादी मानसिकता को दर्शाता है. जिसे अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद स्वीकार नहीं करेगा एवं आज जब पूरा देश बांग्लादेश के विरोध में है. तब कोसी के पावन धरती पर ऐसे हिंदुस्तान विरोधी लोगों को बुलाना कहां तक उचित है, यह बात भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव को बताना चाहिए. साथ ही यह भी प्रश्न है कि क्या बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर अत्याचार के विषय में वहां के वक्ता खुलकर बांग्लादेश का विरोध करेंगे. विभाग सह संयोजक जयंत जोशी ने कहा कि ज्ञान की पावन भूमि मिथिला में किसी भी प्रकार की उग्र संकीर्ण या समाज को बांटने वाली मानसिकता को बढ़ावा देनेवाले लोगों को बुलाते हैं जो सिर्फ परिषद ही नहीं समाज को भी अस्वीकार है. बांग्लादेश जैसे विभाजनकारी नीति के वक्ताओं को बुलाना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिहादी मानसिकता को स्पष्ट दर्शाता है. निश्चित तौर पर विश्वविद्यालय के कुलपति जिहादी मानसिकता के हैं. नहीं तो ऐसी कौन सी परिस्थिति विश्वविद्यालय को आ गयी थी कि बांग्लादेश एवं फिलिस्तीन जैसे देश से वक्ताओं को बुलाना पड़ रहा है. पूरा देश आज बांग्लादेश एवं फिलिस्तीन के खिलाफ है. वहीं शिक्षा के मंदिर में ऐसे विभाजनकारी जिहादी मानसिकता के सोच वाले वक्ताओं को बुलाया जा रहा है. वहीं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा ने कहा कि अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद स्पष्ट शब्दों में मांग करती है कि ऐसे सभी व्यक्तियों व गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाय एवं विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रकरण पर सार्वजनिक व स्पष्ट स्पष्टीकरण दें. नगर मंत्री रोशन कामत ने कहा कि विद्यार्थी परिषद राजभवन व बिहार प्रशासन से मांग करती है की ऐसे जिहादी मानसिकता के कुलपति को अविलंब प्रभाव से निलंबित कर स्वतंत्र जांच एजेंसी से इनकी गतिविधि को जांच की जाए. मौके पर नगर सह मंत्री रोहन कुमार, सन्नी कुमार, दौलत कुमार, सत्यम कुमार, मौसम कुमार, आदर्श गुप्ता, आकाश कुमार, रितेश यादव, रोहित मंडल, माणिक पासवान, रजत शर्मा, मोहित शर्मा सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे. The post अभाविप नगर इकाई ने कुलपति व कुलसचिव का फूंका पुतला appeared first on Naya Vichar.

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