Hot News

June 14, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

घर लौट रहे हैं बिहार के दो शहीद बेटे, अंतिम दर्शन को बिहटा एयरपोर्ट पर उमड़ा जनसैलाब, असम विमान हादसे में गई थी जान

IAF Plane Crash: (मोनू मिश्रा, बिहटा) असम के जोरहाट एयरबेस पर हुए एएन-32 विमान हादसे में बिहार के दो वीर सपूत शहीद हो गए हैं. जिनका पार्थिव शरीर रविवार को विशेष वायुसेना विमान से बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचने वाला है. शहीद अग्निवीर दानिश आलम और फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए बिहटा से लेकर उनके पैतृक गांवों तक लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. जोरहाट में हुआ सैन्य सम्मान समारोह हिंदुस्तानीय वायुसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जोरहाट एयरबेस पर शहीदों को सैन्य सम्मान के साथ पुष्पचक्र अर्पित किया गया. इसके बाद शहीदों के पार्थिव शरीर को उनके गृह राज्यों के लिए रवाना किया गया.रविवार को फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार और अग्निवीर दानिश आलम का पार्थिव शरीर बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेगा, जहां उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी. शहीद जवान शुभम और दानिश की तस्वीर कौन थे अग्निवीर दानिश आलम? भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड स्थित कमरियांव गांव निवासी दानिश आलम वर्ष 2025 में हिंदुस्तानीय वायुसेना में अग्निवीर के रूप में शामिल हुए थे. कम समय में ही उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और देशसेवा के जज्बे से अलग पहचान बनाई थी. उनकी शहादत की समाचार मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार पर पूरे बिहार को गर्व जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड के बनवरिया गांव निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार हिंदुस्तानीय वायुसेना के होनहार अधिकारी थे. उनकी शहादत की समाचार से परिवार, गांव और पूरे जिले में मातम पसरा है. वहीं लोगों को उनके सर्वोच्च बलिदान पर गर्व भी है. गांवों में सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद अग्निवीर दानिश आलम का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से भोजपुर के कमरियांव गांव ले जाया जाएगा. वहीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार का पार्थिव शरीर जहानाबाद के बनवरिया गांव पहुंचेगा. रास्ते भर लोग पुष्पवर्षा और श्रद्धांजलि अर्पित कर अपने वीर सपूतों को अंतिम विदाई देंगे. बनवरिया गांव स्थित उच्च विद्यालय परिसर में शुभम कुमार को अंतिम सलामी दी जाएगी. वहीं कमरियांव गांव में दानिश आलम का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान और राजकीय गरिमा के साथ किया जाएगा. तिरंगे के साथ अंतिम दर्शन का इंतजार बिहटा एयरफोर्स स्टेशन, कोईलवर, जहानाबाद और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे हैं. युवा, बुजुर्ग और स्त्रीएं हाथों में तिरंगा लेकर हिंदुस्तान माता की जय और अमर शहीद अमर रहें के नारे लगा रहे हैं. हर कोई अपने वीर सपूतों के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहा है. बचपन के दोस्त ने सुनाई दानिश की कहानी शहीद अग्निवीर दानिश आलम के बचपन के मित्र विश्वजीत तिवारी ने बताया कि दानिश शुरू से ही मिलनसार, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से भरे हुए थे. उन्होंने कहा कि दानिश का सपना देश की सेवा करना था. वायुसेना में चयन होने के बाद वे बेहद खुश रहते थे और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थे. विश्वजीत ने कहा कि दानिश ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है. उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन उनकी वीरता और देशभक्ति हमेशा युवाओं को प्रेरित करती रहेगी. Also Read: असम विमान हादसे में बिहार के दो लाल शहीद, वीडियो कॉल के दो घंटे बाद ही आ गई मौत की समाचार The post घर लौट रहे हैं बिहार के दो शहीद बेटे, अंतिम दर्शन को बिहटा एयरपोर्ट पर उमड़ा जनसैलाब, असम विमान हादसे में गई थी जान appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

वेस्टइंडीज-ऑस्ट्रेलिया का वो ऐतिहासिक मुकाबला, जिसने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया; क्या आपको याद है?

WI vs AUS ODI: 25 अप्रैल 1999 को बारबाडोस के केनसिंगटन ओवल मैदान पर वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्पोर्ट्सा गया सातवां वनडे मैच आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है. यह मुकाबला सिर्फ चौके-छक्कों के लिए नहीं, बल्कि उस अभूतपूर्व घटना के लिए याद किया जाता है जिसने क्रिकेट के इतिहास में एक अनोखा अध्याय जोड़ दिया. उस दिन मैदान पर जो कुछ भी हुआ, उसने न सिर्फ मैच का रुख बदला बल्कि पूरी दुनिया के सामने स्पोर्ट्स भावना की एक बेमिसाल मिसाल पेश की. View this post on Instagram A post shared by Vikas Das (@vikasastro123) स्थानीय खिलाड़ी के रन-आउट पर भड़के प्रशंसक मामला तब बिगड़ा जब वेस्टइंडीज की पारी के 29वें ओवर में टीम का स्कोर 2 विकेट पर 138 रन था. स्थानीय स्टार बल्लेबाज शेरविन कैंपबेल 52 रन बनाकर स्पोर्ट्स रहे थे. इसी दौरान पिच के बीच में गेंदबाज ब्रैंडन जूलियन से उनकी टक्कर हो गई और वह पीठ के बल मैदान पर गिर पड़े. इस बीच माइकल बेवन ने गिल्लियां बिखेर दीं और अंपायर निकोल्स ने कैंपबेल को आउट करार दे दिया. अंपायर के इस फैसले से स्थानीय प्रशंसक आगबबूला हो गए. जैसे ही कैंपबेल मैदान से बाहर जाने लगे, स्टैंड्स से मैदान के अंदर बोतलों की बारिश शुरू हो गई. इनमें से एक बोतल ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ के सिर के बेहद करीब से गुजरी. इस हंगामे के कारण स्पोर्ट्स को 45 मिनट तक रोकना पड़ा. कप्तान स्टीव वॉ का ऐतिहासिक फैसला बारबाडोस के केनसिंगटन ओवल मैदान पर हालात बेकाबू थे और हिंसा भड़कने का खतरा मंडरा रहा था. इमरजेंसी मीटिंग में भी जब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था, तब कंगारू कप्तान स्टीव वॉ ने कमाल की सूझबूझ दिखाई. उन्होंने जीत-हार से ऊपर सुरक्षा और स्पोर्ट्स भावना को रखा और आउट हो चुके शेरविन कैंपबेल को वापस बुलाने का ऐतिहासिक फैसला किया. स्टीव वॉ ने कहा कि “माहौल को शांत करने का यही एकमात्र जरिया है कि हम अपनी अपील वापस लें और कैंपबेल को दोबारा स्पोर्ट्सने दें.” हालांकि, इस एक फैसले ने मैदान का तनाव तुरंत खत्म कर दिया और मैच अधिकारियों ने इस सूझबूझ की सराहना करते हुए इसे तुरंत लागू किया. कैसे मैच हारकर भी जीत गई ऑस्ट्रेलिया जैसे ही शेरविन कैंपबेल दोबारा क्रीज पर लौटे, जो दर्शक कुछ देर पहले गुस्से में बोतलें फेंक रहे थे, वे अब तालियां बजाकर स्पोर्ट्स भावना का जश्न मना रहे थे. बाद में, खराब रोशनी के कारण मैच का फैसला डकवर्थ-लुईस नियम से हुआ, जिसमें वेस्टइंडीज विजेता बना. भले ही ऑस्ट्रेलिया मुकाबला हार गया, लेकिन स्टीव वॉ और उनकी टीम ने दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया. हालांकि, यह घटना हमेशा याद दिलाएगी कि जीत-हार से कहीं बढ़कर स्पोर्ट्स की गरिमा और सुरक्षा होती है. डकवर्थ-लुईस से मिला नया टारगेट मैदान पर हुए भारी हंगामे और 45 मिनट के बवाल के बाद जब मैच दोबारा शुरू हुआ, तो अंपायरों ने स्पोर्ट्स से 10 ओवर कम करने का फैसला किया. इसके बाद डकवर्थ-लुईस नियम के तहत वेस्टइंडीज के सामने 40 ओवरों में 196 रनों का नया लक्ष्य रखा गया. समीकरण साफ था कि कैरेबियाई टीम को आखिरी 11 ओवरों में जीत के लिए 58 रन और बनाने थे. एडम्स-चंद्रपॉल ने दिलाई जीत ऑस्ट्रेलिया द्वारा रन-आउट की अपील वापस लेने के बाद शेरविन कैंपबेल दोबारा क्रीज पर आए. उन्होंने अपनी पारी में 10 रन और जोड़े, जिसके साथ ही इस सीरीज में उनका कुल स्कोर 312 रनों पर पहुंच गया. कैंपबेल के पवेलियन लौटने के बाद जिमी एडम्स और शिवनारायण चंद्रपॉल ने मोर्चा संभाला. दोनों ने बेहद सूझबूझ से बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया और 3 ओवर पहले ही वेस्टइंडीज को एक यादगार जीत दिला दी. ऑस्ट्रेलिया की जोरदार वापसी टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही. एक समय टीम मात्र 119 रन पर अपने 6 महत्वपूर्ण विकेट खोकर गहरे संकट में नजर आ रही थी. ऐसा लग रहा था कि कंगारू टीम जल्द ही सिमट जाएगी, लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने पासा पलट दिया. टॉम मूडी की अगुवाई में निचले क्रम ने गजब का स्पोर्ट्स दिखाया और आखिरी के विकेटों के लिए बहुमूल्य 133 रन जोड़कर टीम को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा दिया. कार्ल हूपर का चौंकाने वाला फैसला इस मुकाबले की पहली गेंद फेंकने से पहले ही क्रिकेट जगत को एक बड़ा झटका लगा. वेस्टइंडीज के दिग्गज ऑलराउंडर कार्ल हूपर ने अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर सबको हैरान कर दिया, जिससे मैच शुरू होने से पहले ही कैरेबियाई खेमे में सनसनी फैल गई थी. इसे भी पढ़े- मानव कृष्णा का सपना हुआ साकार, हिंदुस्तान U-19 टेस्ट टीम में चयन, श्रीलंका सीरीज में दिखाएँगे दमखम The post वेस्टइंडीज-ऑस्ट्रेलिया का वो ऐतिहासिक मुकाबला, जिसने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया; क्या आपको याद है? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बेटी की पढ़ाई-शादी की चिंता खत्म! ₹250 से करें शुरुआत, लाखों तक पाएं रिटर्न

Sukanya Samriddhi Yojana: बेटी की पढ़ाई और शादी के खर्च को लेकर अगर आप अभी से प्लानिंग करना चाहते हैं, तो सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) एक मजबूत और अच्छा ऑप्शन हो सकता है. यह केंद्र प्रशासन की बचत योजना है, जिसमें 10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर अकाउंट खोला जा सकता है. फिलहाल इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है, जो कई अन्य सुरक्षित इनवेस्टमेंट ऑप्शंस से ज्यादा है.  बेटी के लिए यह प्लान क्यों खास है? सुकन्या समृद्धि योजना खास तौर पर बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए शुरू की गई है. इसमें सालाना सिर्फ 250 रुपये से इनवेस्टमेंट शुरू किया जा सकता है, जबकि एक फाइनेंशियल ईयर में अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं. प्लान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमा राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स फ्री हैं. साथ ही, इंकम टैक्स ऐक्ट की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट भी मिलती है.  प्लान की प्रमुख बातें ब्याज दर: 8.2% सालाना मिनिमम इनवेस्टमेंट: 250 रुपये प्रति वर्ष मैक्सिमम इनवेस्टमेंट: 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष डिपॉजिट टेन्योर: 15 साल मैच्योरिटी: अकाउंट खुलने के 21 साल बाद केवल 10 साल से कम उम्र की बेटी के लिए उपलब्ध 1.5 लाख रुपये सालाना जमा करने पर कितना मिलेगा? अगर कोई गार्डियन 15 साल तक हर साल 1.5 लाख रुपये जमा करता है और ब्याज दर 8.2% बनी रहती है, तो 21 साल पूरे होने पर अनुमानित मैच्योरिटी राशि करीब 71.82 लाख रुपये हो सकती है. इसी तरह अलग-अलग इनवेस्टमेंट पर अनुमानित राशि इस प्रकार है: 250 रुपये सालाना इनवेस्टमेंट पर: लगभग 11,970 रुपये 12,500 रुपये सालाना इनवेस्टमेंट पर: लगभग 5.98 लाख रुपये 50,000 रुपये सालाना इनवेस्टमेंट पर: लगभग 23.94 लाख रुपये 1 लाख रुपये सालाना इनवेस्टमेंट पर: लगभग 47.88 लाख रुपये 1.5 लाख रुपये सालाना इनवेस्टमेंट पर: लगभग 71.82 लाख रुपये अकाउंट कौन खोल सकता है? सुकन्या समृद्धि अकाउंट माता-पिता या लीगल गार्डियन खोल सकते हैं. एक परिवार अधिकतम दो बेटियों के नाम पर दो अकाउंट खोल सकता है. जुड़वां या तीन बेटियों के विशेष मामलों में नियम अलग हो सकते हैं. अडॉप्टेड बेटी के लिए भी यह अकाउंट खोला जा सकता है. हालांकि एनआरआई इस योजना का लाभ नहीं ले सकते. यदि बेटी बाद में एनआरआई बन जाती है, तो अकाउंट बंद करना पड़ता है.  पढ़ाई या शादी के लिए पैसे कब निकाल सकते हैं? बेटी के 18 साल पूरे होने या 10वीं कक्षा पास करने के बाद शिक्षा या शादी के खर्च के लिए अकाउंट में मौजूद राशि का 50% तक निकाला जा सकता है.  इसके लिए संबंधित डॉक्यूमेंट्स और आवेदन देना जरूरी होता है. निकासी एकमुश्त या किस्तों में भी की जा सकती है.  अकाउंट समय से पहले कब बंद किया जा सकता है? कुछ विशेष परिस्थितियों में अकाउंट मैच्योरिटी से पहले बंद किया जा सकता है, जैसे: बेटी की शादी बेटी की मृत्यु गंभीर बीमारी गार्डियन की मृत्यु अन्य कारणों से अकाउंट बंद करने पर सामान्य सेविंग्स अकाउंट्स की दर से ब्याज मिल सकता है, जो SSY की ब्याज दर से कम होता है. अकाउंट कैसे खोलें? सुकन्या समृद्धि अकाउंट किसी भी ऑथोराइज्ड बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोला जा सकता है.  जरूरी डॉक्यूमेंट्स  बेटी का बर्थ सर्टिफिकेट  गार्डियन का पहचान पत्र प्रूफ ऑफ एड्रेस आधार कार्ड या अन्य KYC डॉक्यूमेंट  विशेष मामलों में मेडिकल प्रमाण पत्र पहली जमा राशि 250 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक हो सकती है. आवेदन स्वीकार होने के बाद पासबुक जारी की जाती है.  SSY, PPF और FD में कौन बेहतर? रिटर्न के लिहाज से सुकन्या समृद्धि योजना फिलहाल 8.2% ब्याज दे रही है, जबकि PPF पर 7.1% और अधिकांश बैंक FD पर करीब 6% से 8% तक ब्याज मिलता है. जो लोग बेटी की पढ़ाई और शादी के लिए सुरक्षित और गारंटीड फंड बनाना चाहते हैं, उनके लिए SSY एक मजबूत ऑप्शन माना जाता है. वहीं ज्यादा रिटर्न के लिए जोखिम लेने वाले इन्वेस्टर्स म्यूचुअल फंड जैसे ऑप्शंस पर भी विचार कर सकते हैं.  क्या यह योजना आपके लिए सही है? अगर आपका लक्ष्य बेटी की उच्च शिक्षा या शादी के लिए लंबी अवधि में सुरक्षित फंड तैयार करना है, तो सुकन्या समृद्धि योजना एक भरोसेमंद ऑप्शन हो सकती है. कम जोखिम, टैक्स छूट और 8.2% ब्याज दर इसे देश की सबसे लोकप्रिय छोटी बचत योजनाओं में शामिल करती है.  ये भी पढ़ें: ITR भरने से पहले कर लें हिसाब! Old Tax Regime या New, किसमें बचेगा ज्यादा पैसा?  The post बेटी की पढ़ाई-शादी की चिंता खत्म! ₹250 से करें शुरुआत, लाखों तक पाएं रिटर्न appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी पर हमला, बोलीं- सिर्फ आलोचना करना ही काम

निर्मला सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में जब भी बोलते हैं, तो वह हर चीज की केवल आलोचना ही करते हैं. राहुल हिंदुस्तान की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं. सीतारमण ने आगे कहा कि तिमाही-दर-तिमाही और साल-दर-साल हिंदुस्तान सबसे तेजी से बढ़ती वित्तीय स्थिति बना हुआ है. पश्चिम एशिया (ईरान और अमेरिका युद्ध) में जारी जंग के बीच भी प्रधानमंत्री मोदी ने ईंधन की कमी नहीं होने दी.  News Alert ! Every time Rahul Gandhi speaks in Lok Sabha, it is only to decry everything: FM Nirmala Sitharaman. Rahul Gandhi undermines India’s achievements: FM Nirmala Sitharaman at ‘Viksit Bharat Sankalp Samavesha’ in Bengaluru. Quarter after quarter, year after year, India… pic.twitter.com/FYgsQw3ABL — Press Trust of India (@PTI_News) June 14, 2026 उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और आम परिवारों के कल्याण के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयास दिखाई नहीं देते. यह भी पढ़ें : राज्यसभा चुनाव : नामांकन रद्द किए जाने पर मीनाक्षी नटराजन ने EC से पूछे सवाल, राहुल गांधी ने कहा-अब हो रही है सीट चोरी The post निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी पर हमला, बोलीं- सिर्फ आलोचना करना ही काम appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

रौशन आनंद के भाई प्रिंस की नेपाल में कैसे हुई मौत? सामने आई मौत की पहली वजह

Raushan Anand Brother Death: (पटना/अररिया, मृगेंद्र मणि सिंह की रिपोर्ट) पटना के ज्ञान बिंदु कोचिंग संचालक रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में मौत हो गई है. प्रिंस नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल में ठहरे हुए थे. बताया जा रहा है कि शनिवार रात अत्यधिक शराब पीने से उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. दोस्तों के साथ होटल में रुके थे प्रिंस जानकारी के अनुसार प्रिंस यादव अपने कुछ दोस्तों के साथ विराटनगर के वार्ड नंबर-9 स्थित एक होटल में ठहरे हुए थे. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, देर रात शराब पीने के बाद उनकी तबीयत खराब हुई. हालांकि मौत की असली वजह क्या है, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है. आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. होटल में मौजूद साथियों से पूछताछ घटना की सूचना मिलते ही नेपाल पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने होटल में मौजूद प्रिंस के दोस्तों से पूछताछ शुरू कर दी है. साथ ही होटल के रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी. परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. FIR के बाद नेपाल चले गए थे प्रिंस खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग विवाद से जुड़े मामले में दर्ज FIR में प्रिंस यादव का नाम भी शामिल था. इसके बाद वे अपने साथियों के साथ नेपाल चले गए थे और वहीं रह रहे थे. बताया जाता है कि वर्ष 2021 में भी खान सर की कोचिंग पर हुए हमले के मामले में उनका नाम सामने आया था. खान सर की ओर से कराई गई FIR में क्या कहा गया है? खान ग्लोबल स्टडीज के मैनेजमेंट से जुड़े कन्हैया कुमार सिंह की ओर से दर्ज FIR में प्रिंस यादव का नाम शामिल किया गया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2 जून की रात ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद के कहने पर प्रिंस यादव समेत कई लोग खान सर की कोचिंग पहुंचे थे. वहां गार्ड के साथ मारपीट की गई और कोचिंग परिसर में तोड़फोड़ की गई. FIR में कोचिंग के बोर्ड, बैरिकेडिंग और खान सर की तस्वीर को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया था. खान सर की ओर से कराई गई fir की कॉपी रौशन आनंद जेल में, सोमवार को बेल पर सुनवाई इस मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. रौशन आनंद फिलहाल जेल में हैं. उनकी जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है. वहीं, खान सर के दो गार्ड भी जेल में बंद हैं. उनकी जमानत याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है. दूसरी ओर पटना सिविल कोर्ट ने खान सर की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा रखी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार नेपाल पुलिस फिलहाल परिजनों के आने का इंतजार कर रही है. परिजनों की लिखित सहमति के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा. रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रिंस यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई. Also Read: रौशन आनंद के भाई प्रिंस का नेपाल के होटल में मिला शव, खान सर की ओर से दर्ज FIR में था नाम The post रौशन आनंद के भाई प्रिंस की नेपाल में कैसे हुई मौत? सामने आई मौत की पहली वजह appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

अमेरिका के साथ पीस डील पर नाराज हुई ईरानी जनता, अपनों के खिलाफ सड़कों पर उतरी; अराघची-गालिबाफ का इस्तीफा मांगा

Iran US Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चा तेज होते ही ईरान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. लोगों ने सड़कों पर उतरकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि प्रस्तावित समझौता ईरान के राष्ट्रीय हितों को कमजोर कर सकता है. यह विरोध ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं. हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने अभी किसी निश्चित समयसीमा की पुष्टि करने से परहेज किया है. मशहद में सबसे ज्यादा दिखा विरोध उत्तर-पूर्वी ईरान के शहर मशहद में विदेश मंत्रालय के एक कार्यालय के बाहर दर्जनों लोग जमा हुए. ईरानी समाचार एजेंसी फर्स द्वारा साझा किए गए वीडियो में काले चादर पहनी स्त्रीएं लाल और काले झंडे लहराती नजर आईं. प्रदर्शन के दौरान विदेश मंत्री के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए. रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ ने ‘अराघची मुर्दाबाद, समझौता करने वाले को शर्म आनी चाहिए’, ‘अराघची, झुकना बंद करो’ और ‘देश के साथ समझौता करने वाले अराघची मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए. यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब अब्बास अराघची ने प्रशासनी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में प्रस्तावित समझौते पर चर्चा की थी. A video released by IRGC-affiliated media appears to show a gathering outside the Foreign Ministry’s representative office in Mashhad on Saturday evening where protesters chant, “Death to Araghchi, the dishonorable compromiser and infiltrator.”The hardliners have been… pic.twitter.com/VlhvUiCFmA — Iran International English (@IranIntl_En) June 13, 2026 तेहरान समेत कई शहरों में प्रदर्शन रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान और अन्य कई इलाकों में भी समझौते के विरोध में प्रदर्शन हुए. वीडियो में प्रदर्शनकारी अमेरिका के साथ बातचीत के लिए सीधे तौर पर अब्बास अराघची को जिम्मेदार ठहराते दिखाई दिए. प्रदर्शनकारियों ने ‘समझौता करने वाले, इस्तीफा दो’ और ‘समझौतावादी मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगाए. Hardline Iranians have been protesting throughout the day against Foreign Minister Abbas Araghchi and Parliament Speaker Ghalibaf over the emerging U.S.-Iran deal. Demonstrators chanted “Death to Araghchi, the dishonorable compromiser,” “Araghchi, have shame, stop giving in,” and… pic.twitter.com/PRQrYfTxno — Open Source Intel (@Osint613) June 13, 2026 होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता लोगों का मानना है कि प्रस्तावित डील ईरान के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करती. उनका मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की रणनीतिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है. उनका आरोप है कि समझौता हासिल करने के लिए ईरानी वार्ताकार अमेरिका के सामने जरूरत से ज्यादा रियायतें दे रहे हैं. अराघची ने क्या कहा था? शुक्रवार को प्रशासनी टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि बातचीत के तहत तैयार हो रहा समझौता ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का रास्ता खोल सकता है. उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन अब पहले जैसा नहीं रहेगा. इसका अर्थ लोगों ने यह लगाया कि होर्मुज खुल जाएगा. हालांकि, अराघची ने यह भी कहा कि यह समुद्री मार्ग ईरान के लिए निरोधक क्षमता के प्रमुख साधनों में से एक रहा है. ट्रंप और शहबाज शरीफ ने दिए समझौते के संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ एक प्रारूप समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि दोनों पक्ष शांति समझौते के लिए एक ढांचे पर सहमत हो चुके हैं और 24 घंटे के अंदर हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है. हालांकि, तेहरान ने इस समयसीमा की पुष्टि नहीं की. ईरान ने कहा- अभी नहीं होगा हस्ताक्षर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रशासनी मीडिया से बातचीत में कहा कि समझौते पर तत्काल हस्ताक्षर नहीं होने जा रहे हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कल (रविवार को) नहीं होगा. हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले कुछ दिनों में समझौता संभव हो सकता है. ये भी पढ़ें:- FIFA WC में कनाडा का मैच छोड़ कैटी पेरी के शो में पहुंचे जस्टिन ट्रूडो, हुई आलोचना तो बोले- कभी-कभी बॉयफ्रेंड… ये भी पढ़ें:- बंजी जंपिंग के लिए बिना रस्सी बांधे फेंक दिया, 21 साल की लड़की की हुई मौत; Video में कैद हुआ दिल दहलाने वाला हादसा समझौते में क्या हो सकता है शामिल? प्रस्तावित पीस डील का अहम मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलना और ईरान पर लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अलग चरण में बातचीत की जाएगी. मसौदे में ईरान की अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने और ईरानी तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में छूट देने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं. बदले में ईरान को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को पूरी तरह खोलना होगा. हालांकि, अराघची ने मीडिया से इस डील के पॉइंट्स पर मीडिया को अटकलें लगाने से मना किया था. The post अमेरिका के साथ पीस डील पर नाराज हुई ईरानी जनता, अपनों के खिलाफ सड़कों पर उतरी; अराघची-गालिबाफ का इस्तीफा मांगा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

भवानी भवन पहुंचे अभिषेक बनर्जी, फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID करेगी पूछताछ

कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट Abhishek Banerjee : तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी रविवार को भवानी भवन स्थित सीआइडी मुख्यालय पहुंच गये. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को तृणमूल विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में दोपहर 12 बजे तलब किया गया था. हालांकि निर्धारित समय से पहले ही वह सीआइडी मुख्यालय पहुंच गये. वहां पत्रकारों से किसी भी सवालों का उन्होंने जवाब नहीं दिया है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनर्जी के पहुंचने से पहले भवानी भवन और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी थी. बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. सीआइडी सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी फर्जी हस्ताक्षर प्रकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर सकती है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पूछताछ के दौरान क्या नये तथ्य सामने आते हैं और अभिषेक बनर्जी की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है. Also Read: ममता बनर्जी के सामने ही भिड़ गये कुणाल घोष और अभिषेक बनर्जी, सड़क तक पहुंचा शोर The post भवानी भवन पहुंचे अभिषेक बनर्जी, फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID करेगी पूछताछ appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ब्रेकअप के दर्द को बनाया अपनी ताकत, बिना कोचिंग के AIR 48 लाकर IAS बने आदित्य पांडे

UPSC Success Story: फिल्मी पर्दे पर हमने कई बार देखा है कि जब किसी का दिल टूटता है, तो वह अपनी जिंदगी बदलने के लिए जी-जान लगा देता है. लेकिन असल जिंदगी में ऐसी कहानियां बहुत कम सुनने को मिलती हैं. बिहार के रहने वाले आदित्य पांडे की कहानी (UPSC Success Story) भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने न सिर्फ प्यार में मिले दर्द को बर्दाश्त किया, बल्कि उसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. एक समय था जब लोग उनके भविष्य पर हंसते थे, लेकिन आज वह देश के सबसे कठिन एग्जाम में से एक UPSC को पास करके एक IAS अफसर बन चुके हैं. UPSC Success Story: शरारती बचपन और टीचर का वो ताना आदित्य पांडे बिहार के पटना के रहने वाले हैं. वह अपने तीन बहनों और एक भाई के परिवार में सबसे छोटे हैं. बचपन में वह पढ़ाई से ज्यादा अपनी शरारतों के लिए जाने जाते थे. उनकी लापरवाही को देखकर एक बार उनके स्कूल के टीचर ने उनके पिता से मजाक में कह दिया था कि अगर यह लड़का पढ़ाई में कुछ बन गया, तो वह अपनी मूंछें मुंडवा लेंगे. शुरुआती पढ़ाई पटना में पूरी करने के बाद आदित्य अपनी बहन के पास गुजरात के जामनगर चले गए. UPSC Success Story: 10वीं क्लास का भटकाव और पटना वापसी जामनगर जाने के बाद आदित्य की पढ़ाई में सुधार हुआ. उन्होंने 8वीं और 9वीं क्लास में बेहतरीन परफॉर्मेंस दी और अपनी क्लास में टॉप किया. लेकिन 10वीं क्लास में आने के बाद उनकी लाइफ में एक गर्लफ्रेंड की एंट्री हुई. इस वजह से उनका ध्यान पढ़ाई से पूरी तरह भटक गया. जब हाईस्कूल का रिजल्ट आया, तो वह उनकी उम्मीद के मुताबिक बहुत कम था. बेटे को रास्ते से भटकता देख उनके पिता ने उन्हें तुरंत वापस पटना बुला लिया ताकि वह दोबारा अपनी पढ़ाई पर फोकस कर सकें. अप्लाई करने के लिए ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करें दिल टूटा तो गर्लफ्रेंड से कहा- एक दिन IAS बनूंगा 12वीं पास करने के बाद आदित्य इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन अपने पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया. कॉलेज के शुरुआती दिन अच्छे चल रहे थे, लेकिन इसी बीच उनकी गर्लफ्रेंड से उनका ब्रेकअप हो गया. प्यार में मिले इस धोखे ने उन्हें अंदर से पूरी तरह हिला कर रख दिया. यह उनके लिए सबसे मुश्किल दौर था. इसी दुख और गुस्से के बीच उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड से कहा था कि वह एक दिन IAS अधिकारी बनकर दिखाएंगे. IAS आदित्य पांडे (Instagram) लगातार दो बार फेल होने पर भी नहीं मानी हार UPSC की डगर इतनी आसान नहीं होती और आदित्य को भी शुरुआत में बड़े झटके लगे. साल 2021 और 2022 के प्रयासों में उन्हें लगातार असफलता हाथ लगी. नौकरी छोड़कर पूरी तरह तैयारी में डूबने के बाद भी जब सिलेक्शन नहीं हुआ, लेकिन आदित्य ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने तय कर लिया था कि जब तक सफलता नहीं मिलेगी, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे. बिना बड़ी कोचिंग, खुद के दम पर बनाई रणनीति आदित्य ने अपनी गलतियों से सीखा और अपनी स्ट्रेटेजी को बदला. उन्होंने किसी नामी या महंगी टेस्ट सीरीज के पीछे भागने के बजाय इंटरनेट का सही यूज किया. वह घर पर ही ऑनलाइन मटीरियल जुटाकर खुद से पढ़ाई और प्रैक्टिस करते थे. मेन्स एग्जाम के लिए उन्होंने हर दिन आंसर राइटिंग की जमकर प्रैक्टिस की. वहीं इंटरव्यू के लिए उन्होंने बहुत ज्यादा लोगों की बातें सुनने के बजाय सिर्फ कुछ खास और सीमित मार्गदर्शकों से ही सलाह ली. अपने तनाव को दूर रखने के लिए वह हमेशा अपने परिवार और दोस्तों से बात करते थे. आदित्य पांडे AIR 48 (Instagram) UPSC Success Story: यूपीएससी 2023 में 48वीं रैंक और पूरा हुआ सपना कड़ी मेहनत, अनुशासन और कभी न टूटने वाले हौसले की बदौलत आदित्य पांडे ने आखिरकार UPSC 2023 की परीक्षा में ऑल इंडिया 48वीं रैंक हासिल की. जिस लड़के को कभी नाकाबिल समझा गया था, उसने अपनी मेहनत से सफलता का एक नया इतिहास लिख दिया. यह भी पढ़ें: बीमारी को दी मात, मोबाइल से पढ़कर MP के आयुष ने निकाला UPSC The post ब्रेकअप के दर्द को बनाया अपनी ताकत, बिना कोचिंग के AIR 48 लाकर IAS बने आदित्य पांडे appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

₹50,000 के बजट में कौन-सा Robot Vacuum है सही? पैसे खर्च करने से पहले पढ़ें यह गाइड

घर की सफाई को आसान बनाने वाले रोबोट वैक्यूम क्लीनर (Robot Vacuum Cleaner) अब हिंदुस्तानीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. खासकर ऐसे मॉडल्स जो वैक्यूमिंग के साथ-साथ पोछा भी लगा सकते हैं, वे व्यस्त परिवारों और कामकाजी लोगों के बीच तेजी से जगह बना रहे हैं. लेकिन बाजार में मौजूद दर्जनों विकल्पों के बीच सही मशीन चुनना आसान नहीं है. कई कंपनियां बड़े-बड़े फीचर्स का दावा करती हैं, जबकि असली फर्क उन तकनीकों में छिपा होता है जो रोजमर्रा के इस्तेमाल में काम आती हैं. अगर आपका बजट ₹50,000 तक है, तो खरीदारी से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना जरूरी है. सिर्फ सफाई नहीं, ऑटोमेशन का स्तर भी देखें रोबोट वैक्यूम खरीदने का मुख्य उद्देश्य मेहनत कम करना होता है. इसलिए सबसे पहले यह तय करें कि आप कितनी ऑटोमेशन चाहते हैं. कुछ मॉडल ऐसे आते हैं जो खुद ही धूल को बेस स्टेशन में खाली कर देते हैं और कई दिनों तक आपको मशीन को छूने की जरूरत नहीं पड़ती. प्रीमियम मॉडल्स में मॉप पैड की ऑटोमैटिक सफाई और सुखाने की सुविधा भी मिलती है. हालांकि ऐसी सुविधाओं के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. अगर आपको रोजाना थोड़ी बहुत देखभाल से परेशानी नहीं है, तो कम कीमत में भी अच्छे विकल्प मिल सकते हैं. सक्शन पावर और बैटरी तय करेगी असली परफॉर्मेंस रोबोट वैक्यूम की सफाई क्षमता काफी हद तक उसकी सक्शन पावर पर निर्भर करती है. ज्यादा सक्शन का मतलब है कि मशीन धूल, बाल और छोटे कचरे को बेहतर तरीके से उठा पाएगी. हालांकि अधिक सक्शन के साथ बैटरी की खपत भी बढ़ती है. इसलिए बैटरी बैकअप पर भी ध्यान देना जरूरी है. आज अधिकांश रोबोट वैक्यूम ऐसे आते हैं जो बैटरी कम होने पर खुद चार्जिंग स्टेशन तक लौट जाते हैं और चार्ज होने के बाद वहीं से सफाई दोबारा शुरू कर देते हैं जहां काम रुका था. मॉपिंग सिस्टम में छिपा है बड़ा अंतर सभी रोबोट वैक्यूम का पोछा लगाने का तरीका एक जैसा नहीं होता. शुरुआती मॉडल्स में साधारण माइक्रोफाइबर पैड मिलते हैं, जो हल्की सफाई के लिए पर्याप्त होते हैं. वहीं बेहतर मॉडल्स में घूमने वाले डिस्क मॉप्स या रोलर सिस्टम दिए जाते हैं, जो फर्श पर दबाव बनाकर अधिक प्रभावी सफाई कर सकते हैं. कुछ मशीनें कालीन पहचानकर मॉप को ऊपर उठा लेती हैं, जिससे कार्पेट गीला नहीं होता. यह फीचर उन घरों के लिए काफी उपयोगी है जहां टाइल्स और कार्पेट दोनों मौजूद हैं. LIDAR या Gyro? नेविगेशन तकनीक समझना जरूरी रोबोट वैक्यूम की स्मार्टनेस उसकी नेविगेशन तकनीक से तय होती है. कम कीमत वाले मॉडल्स अक्सर Gyro सिस्टम पर काम करते हैं, जबकि उन्नत मशीनों में LIDAR सेंसर मिलता है. LIDAR तकनीक घर का अधिक सटीक मैप तैयार करती है और फर्नीचर या बाधाओं से बेहतर तरीके से बच सकती है. कुछ प्रीमियम मॉडल्स कैमरा और LIDAR दोनों का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी नेविगेशन क्षमता और बेहतर हो जाती है. अगर घर में ज्यादा फर्नीचर है या कई कमरे हैं, तो बेहतर मैपिंग सिस्टम वाला मॉडल ज्यादा सुविधाजनक रहेगा. सर्विस और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी है अहम कई खरीदार मशीन के फीचर्स पर ध्यान देते हैं लेकिन सर्विस नेटवर्क और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि लंबे समय में यही सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. ब्रश, मॉप पैड, फिल्टर और बैटरी जैसे हिस्सों को समय-समय पर बदलना पड़ सकता है. इसलिए खरीदारी से पहले यह जांच लेना समझदारी होगी कि कंपनी की सर्विस सुविधा आपके शहर में उपलब्ध है या नहीं और रिप्लेसमेंट पार्ट्स आसानी से मिलते हैं या नहीं. खरीदने से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान रोबोट वैक्यूम क्लीनर चुनते समय सिर्फ ब्रांड या विज्ञापन पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है. सक्शन पावर, बैटरी, मॉपिंग सिस्टम, नेविगेशन तकनीक, ऑटोमेशन फीचर्स और सर्विस सपोर्ट जैसे पहलुओं का संतुलन ही सही खरीदारी तय करता है. अगर सही मॉडल चुना जाए तो यह डिवाइस रोजाना की सफाई का बड़ा हिस्सा अपने आप संभाल सकता है और घर की सफाई को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना सकता है. यह भी पढ़ें: बारिश में घर पर बिजली गिरने का डर? छत पर लगी यह चीज रोकेगी लाखों का नुकसान यह भी पढ़ें: 5 साल पुराना स्मार्टफोन चला रहे, तो अपने साथ बड़ा खतरा लेकर घूम रहे हैं आप The post ₹50,000 के बजट में कौन-सा Robot Vacuum है सही? पैसे खर्च करने से पहले पढ़ें यह गाइड appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

कब मनाई जाएगी जमाई षष्ठी? जानें तिथि और धार्मिक महत्व 

Jamai Sasthi 2026: पश्चिम बंगाल का लोकप्रिय लोकपर्व जमाई षष्ठी इस वर्ष 20 जून को मनाया जाएगा. दामाद के स्वागत, सम्मान और परिवार की खुशहाली के लिए समर्पित यह त्योहार बांग्ला संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. आमतौर पर ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला यह पर्व इस बार तिथियों के विशेष संयोग के चलते आषाढ़ माह में मनाया जाएगा. इस दिन मां षष्ठी की पूजा के साथ दामाद का विशेष सत्कार करने की परंपरा निभाई जाती है. जमाई षष्ठी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग और बंगाली कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष जमाई षष्ठी का पर्व 20 जून 2026, शनिवार को मनाया जाएगा. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व ज्येष्ठ (या इस बार आषाढ़) मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. षष्ठी तिथि प्रारंभ: 19 जून 2026, शाम 4:59 बजे षष्ठी तिथि समाप्त: 20 जून 2026, दोपहर 3:46 बजे उदयातिथि के अनुसार मुख्य पूजा और दामाद सत्कार से जुड़े सभी रीति-रिवाज 20 जून (शनिवार) को ही संपन्न किए जाएंगे. कैसे मनाया जाता है यह पर्व? दामाद के ससुराल पहुंचने पर सास उनका पारंपरिक रूप से स्वागत करती हैं. एक थाल में दही, धान, दूर्वा घास, पान का पत्ता और मौसमी फल रखे जाते हैं. दामाद के माथे पर दही का तिलक (फोटा) लगाया जाता है और दूर्वा से आशीर्वाद दिया जाता है. मां षष्ठी के आशीर्वाद स्वरूप सास अपने दामाद की कलाई पर एक पवित्र पीला धागा बांधती हैं, जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. इसके साथ ही हाथ के पंखे से दामाद को हवा करने की भी परंपरा है. इस दिन दामाद को नए वस्त्र उपहार स्वरूप दिए जाते हैं. दामाद भी अपनी सास और ससुर के लिए सम्मानस्वरूप उपहार लेकर आते हैं. इसके बाद सास अपने दामाद को बैठाकर तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान खिलाती हैं. इस अवसर पर शाकाहारी और मांसाहारी, दोनों प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं. व्यंजनों की थाली (जमाई भोज) बंगाली संस्कृति में भोजन के बिना कोई भी त्योहार अधूरा माना जाता है और जमाई षष्ठी पर तो दामाद के लिए विशेष दावत का आयोजन किया जाता है. चूंकि यह गर्मियों का मौसम होता है, इसलिए थाली में आम, जामुन, लीची और कटहल जैसे मौसमी फलों की भरमार रहती है. मुख्य भोजन में पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं, जैसे— लूची और छोलार दाल (चना दाल) इलिश (हिल्सा) और चिंगड़ी (झींगा) से बने विभिन्न बंगाली व्यंजन मटन करी मिष्टी दोई, रसगुल्ला और खीर जमाई षष्ठी का महत्व जमाई षष्ठी केवल दामाद को स्वादिष्ट भोजन कराने का अवसर नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और सामाजिक कारण भी जुड़े हुए हैं. मूल रूप से यह दिन संतान और सुखी परिवार की अधिष्ठात्री देवी मां षष्ठी को समर्पित है. इस दिन सास अपनी बेटी और दामाद की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य तथा सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पूजा-अर्चना करती हैं. साथ ही संतान प्राप्ति और उनकी सुरक्षा की कामना भी की जाती है. प्राचीन समय में जब बेटियां विवाह के बाद दूर-दराज क्षेत्रों में चली जाती थीं, तब आज की तरह यातायात के साधन उपलब्ध नहीं थे. ऐसे में बेटियों को मायके बुलाने और दामाद के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करने के उद्देश्य से इस सामाजिक उत्सव की शुरुआत हुई. इस अवसर पर बेटी को भी अपने माता-पिता और परिवार से मिलने का अवसर मिल जाता है, जिससे पारिवारिक रिश्ते और अधिक मजबूत होते हैं. यहां पढ़ें धर्म से जुड़ी समाचारें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Naya Vichar The post कब मनाई जाएगी जमाई षष्ठी? जानें तिथि और धार्मिक महत्व  appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top