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August 8, 2026

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रांची में प्रदर्शन कर रहे अनशनकारियों की बिगड़ने लगी तबीयत, सदर अस्पताल में एक और छात्र भर्ती

Jharkhand Students Protest, रांची : रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में अब अभ्यर्थियों की सेहत बिगड़ने लगी है. आमरण अनशन पर बैठे पलामू निवासी छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. शनिवार सुबह 10 बजे डॉक्टरों की टीम ने राहुल का मेडिकल चेकअप किया, जिसमें उन्हें वायरल फीवर (Viral Fever) होने की पुष्टि हुई है. सदर अस्पताल प्रशासन का बयान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश सिंह ने भर्ती अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल में एक ही मरीज (राहुल क्रांति) एडमिट हैं, जिनका इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है. इससे पहले अचानक बेहोश (फेंट) होने के कारण एक अन्य छात्र को अस्पताल लाया गया था. सामान्य इलाज और ड्रिप (फ्ल्यूड) चढ़ाने के बाद उसकी स्थिति सामान्य हो गई थी. जब उन्होंने डॉक्टरों से डिस्चार्ज करने का आग्रह किया तो उसके स्वास्थ्य की जांच-पड़ताल के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी. ये भी पढ़ें: ओपेन सफारी को CM ने दिखाई हरी झंडी, कहा- हम हाथियों के घरों में चले गए, देखें तस्वीरें धरना स्थल पर संक्रामक बीमारियों का खतरा रांची में लगातार हो रही बारिश और उमस भरे मौसम के बीच जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों की भारी भीड़ उमड़ रही है. खुले आसमान के नीचे अनशन और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है. भीड़भाड़ और गीले-उमस भरे माहौल के कारण धरना स्थल पर मौजूद कई छात्रों में सिरदर्द, गले में खराश/दर्द और डिहाइड्रेशन की शिकायतें सामने आ रही हैं. आइसा (AISA) के झारखंड सचिव त्रिलोकीनाथ ने दावा किया है कि अनशन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और लगातार खुले में रहने के कारण प्रतियोगी छात्र वायरल फीवर, डिहाइड्रेशन और मौसमी बीमारियों से जूझ रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से तत्काल चिकित्सा व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है. ये भी पढ़ें: हेमंत प्रशासन के साथ अभ्यर्थियों की डेढ़ घंटे चली वार्ता, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर सस्पेंस The post रांची में प्रदर्शन कर रहे अनशनकारियों की बिगड़ने लगी तबीयत, सदर अस्पताल में एक और छात्र भर्ती appeared first on Naya Vichar.

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Photos: बाढ़ से बेहाल असम, अब तक 98 लोगों की मौत, हजारों परिवारों पर संकट

असम में बाढ़ ने एक बार फिर जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. राज्य के कई जिलों में पानी भरने से हजारों परिवार संकट में हैं और अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है. कछार, शिवसागर और करीमगंज सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं. राहत और बचाव कार्य जारी है, बेघर परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है. The post Photos: बाढ़ से बेहाल असम, अब तक 98 लोगों की मौत, हजारों परिवारों पर संकट appeared first on Naya Vichar.

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भारत छोड़ो आंदोलन -2: जब Cripps Mission नहीं सुलझा सका गतिरोध, बना भारत छोड़ो आंदोलन का कारण

हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन – 1: . इसलिए क्रिप्स मिशन, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौते का रास्ता नहीं बना सका. Read more: Pakistan में सोशल मीडिया की क्रांति, लेकिन Gen Z की बगावत क्यों नहीं? दूसरी आवाजें भी प्रस्ताव के खिलाफ थीं क्रिप्स प्रस्ताव की आलोचना केवल कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने नहीं की. हिंदू महासभा ने भी प्रांतों को अलग होने का विकल्प देने का विरोध किया. सिख नेताओं को आशंका थी कि पंजाब के भविष्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है. कुछ उदारवादी नेताओं ने भी हिंदुस्तान को एक से अधिक संघों में बांटने की संभावना को खतरनाक माना. दलित समुदायों की ओर से भी यह चिंता सामने आई कि उनके हितों की पर्याप्त सुरक्षा का स्पष्ट प्रावधान नहीं था. इस तरह प्रस्ताव के सामने नेतृत्वक असहमति का दायरा बहुत व्यापक था. असली समस्या थी भरोसे की कमी क्रिप्स मिशन की असफलता को केवल प्रस्ताव की कुछ शर्तों से समझना पर्याप्त नहीं है. इसके पीछे एक बड़ा सवाल विश्वास का था. हिंदुस्तानीय नेताओं को संदेह था कि ब्रिटिश प्रशासन वास्तव में सत्ता हस्तांतरण के लिए तैयार है या युद्ध के समय हिंदुस्तानीय समर्थन हासिल करने के लिए नेतृत्वक आश्वासन दे रही है. क्रिप्स मिशन ऐसे समय हिंदुस्तान आया था जब ब्रिटेन को तत्काल हिंदुस्तानीय सहयोग चाहिए था. इसलिए हिंदुस्तानीय नेताओं के एक हिस्से को लगा कि आजादी का वादा भविष्य के लिए टाल दिया गया है, जबकि युद्ध में सहयोग की मांग तत्काल की जा रही है. यही वजह थी कि मिशन की बातचीत करीब दो सप्ताह चली, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका. क्रिप्स मिशन की विफलता और हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन क्रिप्स मिशन मार्च-अप्रैल 1942 में आया और बिना किसी समझौते के वापस चला गया. लेकिन इसकी विफलता का असर बहुत दूर तक गया. कांग्रेस के भीतर यह भावना मजबूत हुई कि ब्रिटिश प्रशासन से केवल बातचीत और प्रस्तावों के जरिए तत्काल सत्ता हस्तांतरण की उम्मीद करना कठिन है. दूसरी तरफ युद्ध की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी. जापानी सेना हिंदुस्तान के पूर्वी हिस्से के करीब पहुंच रही थी. ऐसे माहौल में हिंदुस्तानीय नेतृत्व भी निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही थी. कुछ ही महीनों बाद, अगस्त 1942 में कांग्रेस ने हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया. महात्मा गांधी ने देश के सामने स्पष्ट संदेश रखा- करो या मरो. इस तरह क्रिप्स मिशन केवल एक असफल संवैधानिक बातचीत नहीं था. यह उस नेतृत्वक यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बना, जिसने हिंदुस्तान को हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन तक पहुंचाया. इतिहास में इसकी विडंबना यही रही कि जिस ब्रिटिश प्रशासन को युद्ध जीतने के लिए हिंदुस्तान का सहयोग चाहिए था, वह हिंदुस्तान के नेतृत्वक नेतृत्व को ऐसा भरोसा नहीं दे सकी कि युद्ध के बाद सत्ता वास्तव में हिंदुस्तानीयों के हाथ में होगी. और जब भरोसे की वह आखिरी कोशिश भी विफल हुई, तो कुछ महीनों बाद हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय आंदोलन ने बातचीत की मेज से उठकर सड़क का रास्ता पकड़ लिया. Read more: Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 1 Read more: Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 2 The post हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन -2: जब Cripps Mission नहीं सुलझा सका गतिरोध, बना हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन का कारण appeared first on Naya Vichar.

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“मुझे मरने दो, गेट क्वालिफाई हूं”, JPSC प्रोटेस्ट में भूख हड़ताल पर बैठे युवक ने सुनाई आपबीती

Jharkhand JPSC JSSC Protest: आज इस भ्रष्ट सिस्टम के कारण गेट क्वालिफाई करने के बाद और इतनी सारी भर्ती परीक्षा के लिए अप्लाई करने के बाद भी मेरे पास नौकरी नहीं है. मैं भूख हड़ताल पर हूं, मुझे मरने दो. मेरे मरने से अगर झारखंड के स्टूडेंट्स का भला होता है तो मुझे मरने दो. पानी तक नहीं पीऊंगा, ये कहना है JPSC-JSSC प्रोटेस्ट में भूखहड़ताल पर बैठे युवक महेंद्र प्रसाद का. महेंद्र सालों से झारखंड प्रशासनी वैकेंसी (Jharkhand Sarkari Vacancy) के लिए अप्लाई कर रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी अभी तक पक्की नहीं हुई. बेरोजगारी और बढ़ती उम्र, परिवार वालों ने 2017 में करा दी शादी महेंद्र प्रसाद ने 2015 से कई सारी प्रशासनी वैकेंसी के लिए अप्लाई किया है. कुछ वैकेंसी का एग्जाम ही नहीं आयोजित किया गया तो कुछ के लिए सेलेक्शन नहीं हुआ. महेंद्र एक बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता राजमिस्त्री और मां हाउस वाइफ हैं. महेंद्र के पास रोजगार नहीं था लेकिन उम्र बढ़ती जा रही थी. ऐसे में 2017 में उनकी शादी करा दी गई. अब महेंद्र की दो बेटियां हैं. महेंद्र प्रसाद द्वारा दिखाए जाने वाले डॉक्यूमेंट्स (PC-सोशल मीडिया) JPSC-JSSC से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर चल रहे आंदोलन में भूख हड़ताल पर बैठे महेंद्र प्रसाद की आवाज में सालों से बेरोजगार होने का दर्द छुपा है. उन्होंने तो सिर्फ अपनी डिग्री और अपने संघर्ष की बात बताई. सिर्फ सिस्टम से सवाल किया. लेकिन उन सब सवालों में एक सवाल ये छुपा था कि “नौकरी कब मिलेगी?” शायद यही सवाल झारखंड के दूसरे युवा भी कर रहे हैं जो प्रशासनी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. View on Instagram पहले प्रयास में GATE क्वालिफाई किया महेंद्र प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कई प्रशासनी भर्तियों के लिए आवेदन किया, GATE जैसी परीक्षा भी क्वालिफाई की. लेकिन अब तक उन्हें प्रशासनी नौकरी नहीं मिली. आंदोलन के दौरान महेंद्र ने व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की. यह भी पढ़ें- JPSC-JSSC प्रोटेस्ट वाले वायरल शिशु जैसी फर्राटेदार इंग्लिश कैसे बोलें, एक्सपर्ट ने दिए टिप्स 2014 में बीटेक की डिग्री पाई और प्रशासनी भर्तियों के लिए अप्लाई करना शुरू किया महेंद्र ने 2014 में BTech की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद प्रशासनी नौकरी पाने की उम्मीद में लगातार अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के लिए आवेदन करते रहे. उन्होंने अपने पहले प्रयास में GATE क्वालिफाई किया. इसके बावजूद वर्षों की तैयारी और कई परीक्षाओं में शामिल होने के बाद भी उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल सका. 2015 में JPSC असिस्टेंट इंजीनियर का भरा था फॉर्म 2015 में JPSC असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती के लिए आवेदन किया था. उनका दावा है कि इस भर्ती के लिए अब तक परीक्षा आयोजित नहीं की गई है. इसके अलावा उन्होंने 2014-15 में सब इंस्पेक्टर भर्ती के लिए भी आवेदन किया था. View on Instagram महेंद्र के मुताबिक, वर्ष 2015 में झारखंड कक्षपाल और फॉरेस्ट गार्ड समेत कई भर्तियों के लिए आवेदन किया. उनका कहना है कि इन भर्तियों में भी प्रक्रिया लंबे समय से पूरी नहीं हो सकी है. उन्होंने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की वर्ष 2017 की भर्ती और झारखंड ऊर्जा विभाग की JE भर्ती के लिए भी आवेदन किया था. कोचिंग में पढ़ाकर चलाया परिवार लंबे समय तक प्रशासनी नौकरी का इंतजार करने के दौरान महेंद्र ने कोचिंग में पढ़ाने का काम भी किया. उनका कहना है कि नौकरी की तलाश के बीच उम्र बढ़ती गई और आर्थिक स्थिति भी चुनौती बनी रही. फिर उनकी शादी भी हो गई थी तो परिवार की जिम्मेदारी भी थी. महेंद्र एक साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता राजमिस्त्री हैं, जबकि मां गृहिणी हैं. रोजगार नहीं मिलने के बीच वर्ष 2017 में उनकी शादी हुई. अब उनकी दो बेटियां हैं. ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके ऊपर हैं. यह भी पढ़ें- JPSC और JSSC में क्या अंतर है? आसान भाषा में समझें पोस्ट से लेकर सेलेक्शन तक की डिटेल The post “मुझे मरने दो, गेट क्वालिफाई हूं”, JPSC प्रोटेस्ट में भूख हड़ताल पर बैठे युवक ने सुनाई आपबीती appeared first on Naya Vichar.

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हिमाचल के चंबा में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी बस, ड्राइवर-कंडक्टर समेत 7 की मौत

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार (8 अगस्त) की सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. बैरागढ़ से चंबा जा रही एक निजी बस चालुज मोड़ के पास सड़क से नीचे जा गिरी. बस में कुल 18 यात्री सवार थे. हादसे में ड्राइवर और कंडक्टर समेत सात लोगों की मौत हो गई है, जबकि 7 अन्य घायल हो गए. हादसे के बाद राहत बचाव घटना के बाद स्थानीय लोग और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे और बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू किया. घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है. हादसे के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है. पुलिस घटना की जांच कर रही है. The post हिमाचल के चंबा में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी बस, ड्राइवर-कंडक्टर समेत 7 की मौत appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में टीएमसी के पूर्व विधायक सनत डे गिरफ्तार, रंगदारी के जरिए जमीन हड़पने समेत लगे हैं कई आरोप

नैहाटी : तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सनत डे पुलिस के शिकंजे में हैं. तृणमूल के पूर्व विधायक को जबरन वसूली और धमकी देकर दूसरों की जमीन हड़पने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. उन्हें शनिवार को दोपहर बाद अदालत में पेश किया जाएगा. कई आरोपों के बाद हुई गिरफ्तारी नैहाटी के पूर्व विधायक सनत डे पर लंबे समय से जबरन वसूली के आरोप लगे हैं. उन पर जमीन हड़पने के भी आरोप हैं. इसके अलावा, 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद उन पर चुनाव के बाद हिंसा करने के आरोप भी लगे थे. इसी आरोप में नैहाटी पुलिस स्टेशन ने पूर्व विधायक सनत डे को गिरफ्तार किया है. उन्हें शनिवार दोपहर बाद को बैरकपुर अदालत में पेश किया जाएगा. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें गुस्साये लोगों ने फेंके थे अंडे सनत डे ने 2024 के उपचुनाव में नैहाटी विधानसभा सीट जीतकर विधायक का पद हासिल किया. उन पर कई आरोप लगे. राज्य में आने के बाद उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा. जून में, जब वे नैहाटी स्थित पार्टी कार्यालय जा रहे थे, तब उन पर अंडे फेंके गए. चोर चोर के नारे लगाए गए. स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि सनत डे ने नैहाटी में आतंकवाद का रूप धारण कर लिया है. चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही उन्होंने लोगों को धमकी दी थी. Also Read: बंगाल में होगी जाति प्रमाणपत्रों की जांच, अब तक 45,000 लोग संदिग्ध सूची में The post बंगाल में टीएमसी के पूर्व विधायक सनत डे गिरफ्तार, रंगदारी के जरिए जमीन हड़पने समेत लगे हैं कई आरोप appeared first on Naya Vichar.

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सलमान खान के घर के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी की मौत, ड्यूटी के दौरान अचानक आया हार्ट अटैक

Cop Died Salman Khan: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी गणेश रायते की अचानक मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार ड्यूटी में अचानक तबियत बिगड़ने से उनकी मौत हुई हैं. What is the Incident: क्या है मामला मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 41 वर्षीय कॉन्स्टेबल गणेश रायते सलमान खान के घर के बाहर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे. ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़े. साथ मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई. गणेश उन पुलिसकर्मियों में शामिल थे जो अभिनेता सलमान खान की सुरक्षा में तैनात थे. सलमान खान को लगातार मिल रही धमकियों के चलते उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. Salman Khan’s Security Tightened Due to Laurence Bishnoi: लॉरेंस  बिश्नोई के कारन बढ़ी सुरक्षा  सलमान खान की सुरक्षा पिछले कुछ समय से बढ़ा दी गई है. इसकी वजह जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से मिली धमकियां हैं. बिश्नोई का दावा है कि वह 1990 के दशक में काले हिरण शिकार मामले को लेकर सलमान से बदला लेना चाहता है. पिछले साल सलमान खान ने मुंबई के बांद्रा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कड़ी सुरक्षा के साथ हर जगह जाना कभी-कभी उनके लिए मुश्किल हो जाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें धमकियों से डर नहीं लगता और उन्होंने अपनी सुरक्षा भगवान पर छोड़ दी है. सलमान ने कहा था, “भगवान, अल्लाह सब उन्हीं पर है. जितनी उम्र लिखी है, उतनी ही मिलेगी. बस कभी-कभी इतनी सुरक्षा के बीच घूमना मुश्किल हो जाता है.” About Laurence Bishnoi: लॉरेंस बिश्नोई के बारे में  लॉरेंस बिश्नोई 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद चर्चा में आया था. उसने कई बार सार्वजनिक रूप से सलमान खान को धमकी दी है और उन पर ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान कथित काले हिरण शिकार मामले में शामिल होने का आरोप लगाया है. साल 2024 में मुंबई के बांद्रा स्थित सलमान खान के घर ‘गैलेक्सी अपार्टमेंट’ के बाहर बाइक सवार दो लोगों ने कई राउंड फायरिंग की थी. बाद में जांच में सामने आया कि इस घटना का मकसद अभिनेता को डराना था. पुलिस के अनुसार, इस फायरिंग की साजिश लॉरेंस बिश्नोई के कहने पर रची गई थी. Salman Khan Work Front: सलमान खान वर्कफ्रंट वर्कफ्रंट की बात करे तो सलमान खान इन फिल्मों में  मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ में नजर आएंगे. अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म बॉलीवुड एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह लीड रोल में हैं. यह भी पढ़ें: असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए मसीहा बने सलमान खान: ‘Global Sikhs’ संग शुरू की ‘आशियाना’ पहल, बेघरों को मिलेंगे शेल्टर The post सलमान खान के घर के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी की मौत, ड्यूटी के दौरान अचानक आया हार्ट अटैक appeared first on Naya Vichar.

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पत्नी के नाम 6 बीघा जमीन, 40 लाख के जेवर, आलीशान घर, DPO अजीत अमर के ठिकाने पर EOU की रेड में क्या-क्या मिला?

DPO Ajit Amar: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सहरसा जिले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजीत अमर के चार ठिकानों पर शुक्रवार को छापेमारी की. उनके पास आय से 72.35 प्रतिशत अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है. ईयूओ की टीम ने छापेमारी के दौरान कई डॉक्युमेंट्स खंगाले. वेतन मद में मात्र 38 लाख रुपये डीपीओ ने सीवान जिले के दरौंदा थाना के रैनी में पैतृक जमीन पर 40 लाख से अधिक राशि खर्च कर आलीशान मकान बनवा रखा है. इसके अलावा 40 लाख के जेवर और पत्नी के नाम से 41.50 लाख रुपये की खरीदी गई 6 बीघा जमीन के डॉक्युमेंट्स मिले हैं. अजीत ने लगभग साढ़े चार साल के कार्यकाल में वेतन मद में मात्र 38 लाख रुपये प्राप्त किए. भव्य मकान से मिले 40 लाख के आभूषण दरौंदा में बने भव्य मकान की तलाशी में मकान निर्माण से संबंधित तीस बिल भी मिले हैं. उनके पैतृक गांव के निजी आवास से 40.05 लाख रुपये के जेवर मिले. अजीत और उनकी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर कुल चार बैंक खाते पाए गए हैं. इतना ही नहीं, निवेश के कागजात भी मिले हैं. पत्नी के नाम जमीन के मिले दस्तावेज जानकारी के मुताबिक, छपरा में प्रशासनी आवास से पत्नी के नाम पर सारण के परसागढ़ में 23 मई 2025 को खरीदी गई 6 बीघा 9 कट्टा 8 धूर जमीन के दस्तावेज मिले हैं. 24 अप्रैल 2023 को खरीदी गई 15,34,998 रुपये की महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक और बाइक भी पाए गए. इसके साथ ही 27 लाख के आभूषण क्रय की रसीद मिली. अवैध धन कमाने का लगा आरोप बताया जा रहा है कि अजीत चार फरवरी 2022 को सेवा में आए और सहरसा में योगदान किया. डीपीओ प्लानिंग एंड एकाउंट छपरा में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन पर अवैध धन कमाने का आरोप लगा. इसकी जिला प्रशासन ने जांच कराई. ऐसे में शुक्रवार को डीपीओ के सीवान के पैतृक आवास और निजी मकान, सहरसा नया बाजार में किराए का आवास, सहरसा में प्रशासनी कार्यालय कक्ष और छपरा गंडक कॉलोनी के प्रशासनी आवास पर ईओयू ने छापेमारी की. Also Read: 11 अगस्त के बाद क्या करेंगे प्रशांत किशोर? बांकीपुर उपचुनाव में BJP क्यों हारी और RJD के लिए कैसे बढ़ा खतरा The post पत्नी के नाम 6 बीघा जमीन, 40 लाख के जेवर, आलीशान घर, DPO अजीत अमर के ठिकाने पर EOU की रेड में क्या-क्या मिला? appeared first on Naya Vichar.

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हेमंत सरकार के साथ अभ्यर्थियों की डेढ़ घंटे चली वार्ता, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर सस्पेंस

Jharkhand Students Protest, रांची : जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में 14 दिन से चल रहे छात्र आंदोलन में प्रशासन के साथ बातचीत का रास्ता खुल गया. प्रशासन की आपत्ति के बाद बातचीत के लिए छात्रों द्वारा बनायी गयी 11 सदस्यीय कमेटी से तीन गैर छात्रों को हटा दिया गया. इसके बाद प्रशासन की ओर से भी कोई देरी नहीं हुई और करीब 7.50 बजे बातचीत शुरू हुई, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चली. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सौहाद्रपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई है. छात्रों ने अपनी मांगें रखी प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है. ठोस निर्णय नहीं हुआ तो विधानसभा घेराव तय वार्ता में शामिल छात्र प्रतिनिधि रविंद्र पासवान ने बताया कि हम लोगों ने अपना मांग पत्र प्रशासन को सौंप दिया है. मंत्रियों ने आश्वस्त किया है कि उनकी मांगों से सीएम को अवगत कराया जायेगा. मंत्रियों ने माना कि यह केवल वर्तमान छात्रों का नहीं, बल्कि आनेवाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा है. रविंद्र ने कहा कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो 10 अगस्त को निर्धारित विधानसभा घेराव का कार्यक्रम होगा. तब तक आंदोलन जारी रहेगा, स्टेट गेस्ट हाउस में छात्रों के साथ वातों के बाद चारों मंत्री सीधे कांके रोड स्थित सीएम आवास पहुंचे. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि वार्ता के बाद सीएम को पूरी जानकारी दे दी गयी है. मंत्री ने बताया कि छात्रों के साथ अच्छी बातचीत हुई है. छात्र जेपीएससी से संबंधित कुछ तकनीकी मामले उठा रहे थे. उन पर छात्रों से कहा गया है कि वे अगले दिन इसे लिखित दें. मंत्री ने कहा कि दूसरे दौर की वार्ता भी संभावित है. ये भी पढ़ें: स्थानांतरण आदेश पर झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल, प्रशासन से पुनर्विचार की मांग छात्र प्रशासन को अपना सुझाव दें : हेमंत सोरेन सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को छात्रों के मुद्दे पर कहा कि छात्र प्रशासन को अपना सुझाव दें. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सभी जरूरी मंच उपलब्ध कराये हैं. राज्य प्रशासन उनकी हर समस्या समझना चाहती है. प्रशासन का दरवाजा खुला है. सीएम ने यह बात विधानसभा में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कही. सीएम ने कहा कि प्रशासन छात्रों की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहती है और छात्रों को आगे ले जाने की दिशा में काम कर रही है. प्रशासन उनकी जरूरतों के हिसाब से चिंताओं और उम्मीदों को पूरा करने के लिए बड़े सुधार की दिशा में काम कर रही है. सीएम ने कहा है कि रांची में मेरे युवा साथियों के साथ-साथ, राज्य के विभिन्न जिलों में रहनेवाले युवाओं और छात्रों के सुझाव भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. इसलिए प्रशासन सभी जिलों के छात्र-छात्राओं की राय और सुझाव प्राप्त करेगी, ताकि समाधान व्यापक और समावेशी हो. शीघ्र ही राज्य और देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों तथा नीति-निर्माताओं के सुझाव एकत्रित कर, समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधारों और सकारात्मक बदलावों की दिशा में ठोस कदम उठाये जायेंगे. ये भी पढ़ें: RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर ब्रेक, 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र The post हेमंत प्रशासन के साथ अभ्यर्थियों की डेढ़ घंटे चली वार्ता, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर सस्पेंस appeared first on Naya Vichar.

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रूस से तेल-गैस खरीदा तो 100% तक टैरिफ! भारत समेत 5 देशों पर खतरा, अमेरिकी सीनेट से बिल पास

अमेरिकी सीनेट ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने से जुड़े एक प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को हिंदुस्तान और चीन समेत रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. यह विधेयक सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोट से पारित हुआ है. अब इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी लेनी होगी. इसके बाद ही यह राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा. यानी फिलहाल हिंदुस्तान या चीन पर नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है. खास बातें अमेरिकी सीनेट में विधेयक 86-11 वोट से पारित हुआ. हिंदुस्तान और चीन समेत रूस से सबसे ज्यादा ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लग सकता है. टैरिफ अपने आप लागू नहीं होगा, अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति और कानून में तय शर्तों पर निर्भर करेगा. विधेयक का मकसद रूसी तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है. बिल को अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित होना बाकी है. नए प्रस्ताव का हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या असर होगा, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. क्यों लाया गया यह विधेयक? अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूस को तेल और गैस की बिक्री से मिलने वाली आमदनी यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक ताकत को बनाए रखने में मदद कर रही है. इसी राजस्व को कम करने के मकसद से उन देशों पर दबाव बनाने का प्रस्ताव है, जो बड़ी मात्रा में रूसी ऊर्जा खरीदते हैं. रूस के पांच बड़े तेल खरीदारों पर अमेरिका की नजर रिपोर्ट के अनुसार हिंदुस्तान, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं. अमेरिकी विधेयक का निशाना इन्हीं बड़े खरीदारों पर है, ताकि रूस को ऊर्जा बेचने से हासिल आय को सीमित किया जा सके और यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाए. पहले 500% अब 100% तक टैरिफ का प्रस्ताव इस विधेयक के पुराने संस्करण में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों के खिलाफ 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. संशोधित मसौदे में इसे नरम करते हुए सबसे बड़े खरीदार देशों के लिए अधिकतम टैरिफ सीमा 100 प्रतिशत तक रखी गई है. इसका मतलब यह नहीं है कि विधेयक कानून बनते ही हिंदुस्तान या चीन पर सीधे 100 प्रतिशत शुल्क लग जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति को परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर इस अधिकार का इस्तेमाल करना होगा. रूस से सीधे आने वाले सामान पर भी सख्ती का प्रावधान प्रस्तावित कानून में अमेरिका में आयात होने वाले कुछ रूसी उत्पादों पर बहुत अधिक शुल्क लगाने के लिए राष्ट्रपति को अतिरिक्त अधिकार देने का भी प्रावधान बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे अधिकार एक तय अवधि तक लागू रह सकते हैं. इसका उद्देश्य रूस के निर्यात राजस्व को और सीमित करना है. ईरान से जुड़े प्रतिबंध भी विधेयक में शामिल विधेयक का दायरा केवल रूस तक सीमित नहीं है. इसमें ईरान से जुड़े मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंध कानूनों को आगे बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल है. इसके तहत ईरान के साथ कुछ प्रकार का कारोबार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या होगा असर? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह विधेयक कानून बनता है तो इसका हिंदुस्तान और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार बातचीत पर क्या असर पड़ेगा. व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया. यह वार्ताकारों पर निर्भर करता है- केविन हैसेट, निदेशक, व्हाइट हाउस राष्ट्रीय आर्थिक परिषद हैसेट के बयान से संकेत मिलता है कि रूसी तेल से जुड़े संभावित प्रतिबंधों और हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमें ही आगे तय करेंगी. हिंदुस्तान-अमेरिका के बीच पहले से चल रही टैरिफ पर बातचीत हिंदुस्तान और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर पहले से बातचीत चल रही है. दोनों देश बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाएं कम करने के साथ-साथ ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. ऐसे में रूसी तेल खरीद पर नया अमेरिकी प्रतिबंध कानून इस बातचीत में एक नया और संवेदनशील मुद्दा जोड़ सकता है. अभी हिंदुस्तान पर 100% टैरिफ नहीं यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी सीनेट से विधेयक पारित होने का मतलब हिंदुस्तान पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लगना नहीं है. सबसे पहले इसे प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलनी होगी. इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी होंगे. कानून बनने के बाद भी प्रस्तावित टैरिफ लागू करने के लिए अलग से कार्यकारी और कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है. आगे क्या होगा? अब सबकी नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पर है. अगर वहां भी विधेयक पारित हो जाता है और राष्ट्रपति इसे मंजूरी देते हैं, तो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अमेरिकी आर्थिक दबाव काफी बढ़ सकता है. हिंदुस्तान के लिहाज से इसका असर केवल रूसी तेल आयात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका के साथ चल रही ट्रेड डील वार्ता, हिंदुस्तानीय निर्यात और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी पड़ सकता है. Also Read: ट्रंप का दावा- ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा ईरान, घट रही तेहरान की ताकत इजराइली मीडिया का दावा: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत नाजुक, अस्पताल में हुए भर्ती The post रूस से तेल-गैस खरीदा तो 100% तक टैरिफ! हिंदुस्तान समेत 5 देशों पर खतरा, अमेरिकी सीनेट से बिल पास appeared first on Naya Vichar.

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